धनबाद : कांग्रेस व भाजपा में कांटे की टक्कर

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पशुपति को ‘ताज’ बचाने की चुनौती तो कीर्ति ‘पताका’ लहराने की जुगत में

विजय कुमार झाधनबाद/बोकारो : जिस तरह प्रकृति ने इस भीषण गर्मी में अपनी तपिश बढ़ा दी है, उसी तरह लोकसभा के आसन्न चुनाव को लेकर धनबाद संसदीय क्षेत्र में राजनीतिक तापमान अब उबाल लेने लगा है। आगामी 12 मई को इस लोकसभा सीट के लिए मतदान होना है। वैसे तो धनबाद संसदीय क्षेत्र से कुल 20 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन यहां मुख्य रूप से मुकाबला भाजपा उम्मीदवार और वर्तमान सांसद पशुपति नाथ सिंह तथा महागठबंधन की ओर से कांग्रेस के उम्मीदवार कीर्ति झा आजाद के बीच ही होना प्राय: तय माना जा रहा है। भाजपा के मौजूदा सांसद पशुपति नाथ सिंह के सामने अपना ‘ताज’ बचाने की चुनौती है तो दूसरी ओर धनबाद से पहली बार चुनाव लड़ रहे कांग्रेस के कीर्ति, ‘पताका’ लहराने की जुगत भिड़ा रहे हैं। अगले पांच वर्षों तक अपनी राजनीतिक फसल काटने की तैयारी में इन दोनों प्रत्याशियों ने रात-दिन एक कर रखा है। अहले सुबह से लेकर देर रात तक ये दोनों मतदाताओं को अपने पक्ष में गोलबंद करने के लिए जन-सम्पर्क अभियान में लगे रहते हैं। भाजपा प्रत्याशी श्री सिंह जहां पिछले पांच साल में केन्द्र की मोदी सरकार की उपलब्धियां गिना रहे हैं, वहीं श्री आजाद केन्द्र व राज्य सरकार की खामियां उजागर कर रहे हैं।

पशुपति के लिए सिरदर्द बने सिद्धार्थ

धनबाद से लगातार दो बार सांसद रहे पीएन सिंह इस बार हैट्रिक लगाने की तैयारी में लगे हैं, लेकिन ‘सिंह मेंशन’ के सिद्धार्थ उनके लिए सिरदर्द साबित हो रहे हैं। दरअसल, इस सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पहली बार चुनाव लड़ रहे सिद्धार्थ गौतम झरिया के पूर्व विधायक स्वर्गीय सूर्यदेव सिंह के पुत्र हैं। उनकी मां कुन्ती देवी भी झरिया से भाजपा विधायक रह चुकी हैं और हत्या के एक मामले में आरोपी तथा इसी मामले में धनबाद जेल में कैद उनके बड़े भाई संजीव सिंह भी झरिया से भाजपा विधायक हैं। कुन्ती देवी पहले ही कह चुकी हैं कि उनका आशीर्वाद अपने पुत्र सिद्धार्थ के साथ है, जबकि विधायक संजीव सिंह ने भाजपा प्रत्याशी पी एन सिंह के साथ होने की बात कही है। लेकिन जानकार यही मानते हैं कि पूरे परिवार की सहमति के बगैर सिद्धार्थ गौतम ने चुनाव मैदान में डटे रहने का निर्णय नहीं लिया होगा। अब तो चुनाव में महज एक हफ्ता बचा है और सिद्धार्थ बिल्कुल डटे हैं। ऐसे में वह जो भी वोट लाएंगे, वह भाजपा प्रत्याशी के लिए नुकसानदेह और कांग्रेस के लिए लाभप्रद साबित होगा।

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