बस वोट का मुद्दा ही रह गयी चास की बिजली-समस्या

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संवाददाता

चास : बोकारो के उपशहर और प्रमुख व्यावसायिक केन्द्र चास में दशकों से जारी बिजली संकट की आज भी वही स्थिति है। सुधार के लिये बड़े-बड़े दावे तो होते रहे है, परंतु धरातल पर होता कुछ नहीं दिख रहा। हर बार चुनाव में यह हमेशा चुनावी मुद्दा और वोट का केन्द्र रहा है, परंतु नेताओं से लेकर अफसरों तक ने इस गंभीर संकट पर कभी भी गंभीर ध्यान नहीं दिया। लिहाजा आज भी स्थिति जस की तस ही है।  कई सांसद आये और गये, लेकिन चासवासियों की निर्बाध विद्युतापूर्ति का सपना बस सपना ही रह गया है। चास और पूरे चीरा चास में बिजली की किल्लत से लोग परेशान हैं। प्रचंड गर्मी शुरू हो चुकी है और लोग दिन-दिनभर कभी-कभी तो दो-दो दिन तक चासवासी बिना बिजली के बिताने को विवश हैं। बिजली संकट के कारण आम जन-जीवन तथा व्यवसायी पूरी तरह से चरमरा गया है। आमलोगों का कहना है कि बिजली दिनभर में मात्र तीन-चार घंटे ही बिजली रहती है। जीना मुहाल हो गया है। वहीं, नेता लोग अपना चेहरा चमकाने के लिये पुतला-दहन कर रहे हैं। अगर नेताओं, जनप्रतिनिधियों को इतना ही दर्द है तो सब एक हो क्यों नहीं आंदोलन करते, अलग-अलग क्यों? 


जरूरत से कम मिल रही बिजली

चास में बिजली संकट को लेकर विभागीय सूत्रों का कहना है कि चास में जरूरत से कम बिजली मिल रही है, जिसके कारण समस्या है। 70 मेगावाट की जरूरत है, जबकि 40-45 मेगावाट ही बिजली मिल पा रही है। फलस्वरूप अन्य जगहों पर लोड शेडिंग की जा रही है। इस समस्या को दूर करने के लिये दो-तीन काम किये जा रहे हैं। फुदनीडीह सब-स्टेशन के लिये सर्किट लाया जा रहा है, जिससे 30 मेगावाट बिजली बढ़ेगी। इसके साथ ही बियाडा से भी सर्किट आ रहा है। उससे भी 30-35 मेगावाट बिजली मिलेगी। इस प्रकार 25 मेगावाट की कमी को दूर करने के लिये 60-65 मेगावाट की उपलब्धता बढ़ जायेगी। उन्होंने डीवीसी से लोड शेडिंग बंद कराये जाने की भी बात कही।


क्या कहते हैं लोग

चीराचास निवासी एक सरकारी चिकित्सक ने कहा कि बोकारो जिले की बिजली से पड़ोसी राज्य बिहार और बंगाल रोशन तो होते हैं, लेकिन यहीं बिजली की किल्लत चिराग तले अंधेरा वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है। चीरा चास विकास समिति के अध्यक्ष संतोष सिंह कहते हैं कि अगर जनप्रतिनिधियों में विकास पुरुष बनने की चाहत हो तो बिहार की तरह झारखंड में भी विकास और बिजली की कमी नहीं होगी। यहां के जनप्रतिनिधियों को दृढ़ इच्छाशक्ति खुद में पैदा करनी होगी सारे संसाधनों से युक्त झारखंड में बिजली नहीं और बिहार में 24 घंटे बिजली यह यकीनन सोचने वाली बात है। चिन्मय विद्यालय बोकारो के उप प्राचार्य अशोक झा ने कहा कि चीरा चास में विद्युत आपूर्ति की स्थिति काफी नाजुक हो चुकी है खासकर बुजुर्गों और नवजात शिशुओं सहित छोटे-छोटे बच्चों को दिन रात भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह केवल इसलिए है, क्योंकि नेतागिरी केवल खुद तक ही केंद्रित रह गई है सब के हित की बात नहीं रह गई है।

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