पिता-पुत्र के वाक्-व्यूह में घिरे नीतीश

0
245

– लालू ने कहा पीठ में घोंपा छुरा

– तेजस्वी ने लगाया बिहार को बर्बाद करने का आरोप

विशेष संवाददाता
पटना :
बिहार सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके पुत्र तेजस्वी यादव के वाक्-चक्रव्यूह में घिरते नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां लालू ने नीतीश कुमार को पीठ में छुरा भोंकने वाला बताया है, तो वहीं तेजस्वी ने अपने ‘पलटू चाचा’ पर बिहार को बर्बाद कर दिए जाने का आरोप लगाया है। अपने ट्वीट में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश पर हमला बोलते हुए तेजस्वी ने कहा कि चार सालों में चार सरकार की कलाबाजी, कुर्सीबाजी और पलटीबाजी से बिहार को अस्थिर करने वाले व्यक्ति से विकास की उम्मीद नहीं की जा सकती। इनका कोई ठौर-ठिकाना नहीं है। कब, कहां, कैसे, किसलिए और क्यों पलटी मार जाए, कहना कठिन है। वैसे भाजपा से भागने के बहाने ढूंढे जा रहे हैं।
इधर, चारा घोटाले में सजायाफ्ता राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा गया है कि पीठ में छुरा भोंकने वाले जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार को इस बार के चुनाव में जनता मजा चखाएगी। नीतीश भूल गए कि बाबू जगजीवन राम ने कहा था लोग पेट की मार तो सह सकते हैं, लेकिन पीठ की मार का जवाब देते हैं। तुमने जनता की पीठ में छुरा घोंपा है, उसके लिये जनता मजा चखायेगी। उल्लेखनीय है कि चारा घोटाला मामले में श्री यादव झारखंड के रांची जेल में बंद है। वह नीतीश कुमार पर वर्ष 2017 से उनके महागठबंधन से नाता तोड़कर राजग का दामन थामने को लेकर लगातार नीतीश पर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं। इस प्रकार पिता-पुत्र दोनों का रुख इन दिनों नीतीश कुमार को लेकर काफी सख्त होता दिख रहा है।

नीतीश का पलटवार- काम से मतलब नहीं, बस फैला रहे सामाजिक कटुता

आरोप-प्रत्यारोप हो और नीतीश कुमार चुप बैठें, ऐसा हो ही नहीं सकता। नीतीश कुमार ने लालू यादव और उनके पुत्र तेजस्वी यादव को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें समाज में कटुता फैलाने वाला बताया। पिछले दिनों मोतिहारी में भाजपा प्रत्याशी राधामोहन सिंह के पक्ष में चुनाव प्रचार के दौरान नीतीश ने तेजस्वी पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग संविधान पर खतरा होने की बातें करते हैं, जबकि ऐसी कोई बात नहीं है। उन्हें काम करने से कोई मतलब नहीं है। ये लोग समाज में बस कटुता फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमलोगों से पहले 15 साल जिन्होंने बिहार में शासन किया, वे आज समाज में टकराव पैदा करने की बातें कर रहे हैं। संविधान पर कोई भी संकट नहीं आया है। अगर आया है तो वे बतायें कि क्या संकट आया।

  • Varnanlive Report.
Previous articleGlance Tutorial के विद्यार्थियों ने फिर दिखायी प्रतिभा- 12वीं बोर्ड में शानदार प्रदर्शन
Next articleबोखड़ा में शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न, न प्राथमिकी, न कोई हिरासत में
मिथिला वर्णन (Mithila Varnan) : स्वच्छ पत्रकारिता, स्वस्थ पत्रकारिता'! DAVP मान्यता-प्राप्त झारखंड-बिहार का अतिलोकप्रिय हिन्दी साप्ताहिक अब न्यूज-पोर्टल के अवतार में भी नियमित अपडेट रहने के लिये जुड़े रहें हमारे साथ- facebook.com/mithilavarnan twitter.com/mithila_varnan ---------------------------------------------------- 'स्वच्छ पत्रकारिता, स्वस्थ पत्रकारिता', यही है हमारा लक्ष्य। इसी उद्देश्य को लेकर वर्ष 1985 में मिथिलांचल के गर्भ-गृह जगतजननी माँ जानकी की जन्मभूमि सीतामढ़ी की कोख से निकला था आपका यह लोकप्रिय हिन्दी साप्ताहिक 'मिथिला वर्णन'। उन दिनों अखण्ड बिहार में इस अख़बार ने साप्ताहिक के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनायी। कालान्तर में बिहार का विभाजन हुआ। रत्नगर्भा धरती झारखण्ड को अलग पहचान मिली। पर 'मिथिला वर्णन' न सिर्फ मिथिला और बिहार का, बल्कि झारखण्ड का भी प्रतिनिधित्व करता रहा। समय बदला, परिस्थितियां बदलीं। अन्तर सिर्फ यह हुआ कि हमारा मुख्यालय बदल गया। लेकिन एशिया महादेश में सबसे बड़े इस्पात कारखाने को अपनी गोद में समेटे झारखण्ड की धरती बोकारो इस्पात नगर से प्रकाशित यह साप्ताहिक शहर और गाँव के लोगों की आवाज बनकर आज भी 'स्वच्छ और स्वस्थ पत्रकारिता' के क्षेत्र में निरन्तर गतिशील है। संचार क्रांति के इस युग में आज यह अख़बार 'फेसबुक', 'ट्वीटर' और उसके बाद 'वेबसाइट' पर भी उपलब्ध है। हमें उम्मीद है कि अपने सुधी पाठकों और शुभेच्छुओं के सहयोग से यह अखबार आगे और भी प्रगतिशील होता रहेगा। एकबार हम अपने सहयोगियों के प्रति पुनः आभार प्रकट करते हैं, जिन्होंने हमें इस मुकाम तक पहुँचाने में अपना विशेष योगदान दिया है।

Leave a Reply