EDITORIAL : पश्चिम बंगाल में दीदी की ‘दादागिरी’

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Vijay Kr. Jha
Chief Editor.

पश्चिम बंगाल इन दिनों ‘दीदी’ की कथित ‘दादागिरी’ से त्रस्त है। खासकर, 17वीं लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में जो दृश्य सामने आये हैं, वे बेहद खतरनाक हैं। पिछले कुछ दिनों से वहां गुंडागर्दी का खुला खेल चल रहा है। ‘दीदी’ के नाम से प्रख्यात मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राज में आज जो कुछ देखने और सुनने में आ रहा है, इसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की होगी।

एक सशक्त व धारदार आंदोलन की बदौलत ममता ने जब पश्चिम बंगाल से 35 वर्षों तक राज करने वाली वामपंथी सत्ता को जड़ से उखाड़ फेंका तो उस समय यह लगने लगा था कि अब बंगाल से आतंक का सफाया होगा। पर, आज स्थिति उस समय से भी भयावह है। अर्थात पश्चिम बंगाल में गृह-युद्घ के हालात बनते जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में टीएमसी (सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस) के कार्यकर्ता विशुद्ध रूप से गुंडागर्दी पर उतर चुके हैं। राजनीतिक रूप से दीदी की सत्ता को कोई चुनौती दे, यह न तो दीदी और न उनके तथाकथित गुंडों को मंजूर है। लोकसभा चुनाव में हाल के दिनों तक छह चरणों में हुए मतदान के क्रम में जमकर हिंसा हुई। पहले तो भाजपा के दो नेताओं की हत्या की घटनाएं सामने आयीं। फिर अंतिम दौर के चुनाव से ठीक दो दिन पहले नदिया जिले के कृष्णानगर में हराधन मिर्जा नामक सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या कर दी गयी। चुनाव के दौरान आईपीएस अधिकारी का पद छोड़कर भाजपा टिकट पर घाटल से चुनाव लड़ रहीं भारती घोष पर उस समय हमला किया गया, जब वह मतदान केन्द्रों का दौरा कर रही थीं। इस घटना ने आहत प्रत्याशी भारती को सिसक-सिसककर रोने पर विवश कर दिया।

उसके बाद ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं और फेसबुक पर एक दीदी का मजाकिया पोस्ट शेयर करने वाली भाजयुमो नेता प्रियंका शर्मा को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को दखल देनी पड़ी और कोर्ट के आदेश के बावजूद प्रियंका शर्मा को जेल से रिहा करने में जान-बूझकर देरी की गई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी नाराजगी जतायी। फिर चुनाव प्रचार के अंतिम दिन टीएमसी के कथित गुंडों ने हाल के दिनों तक ममता के बेहद करीबी रहे और हाल ही में उनसे अलग होकर भाजपा में शामिल हुए पश्चिमि बंगाल के कद्दावर नेता मुकल रॉय के घर पर भी हमला किया और तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम दिया। जादवपुर, वसीरहाट, दमदम आदि क्षेत्रों में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले की खबरें भी सामने आयीं।

देखें वीडियो- कैसे जबरन हाथ पकड़कर डलवाये गये वोट

इसके पहले आसनसोल के सांसद बाबुल सुप्रियो के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। सबसे आश्चर्यजनक घटना तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के रोड-शो में हुई, जब टीएमसी के कथित गुंडों ने रैली में शामिल लोगों पर हमला कर दिया और स्थिति ऐसी भयावह हो गई कि अमित शाह को अपना रोड-शो बीच में ही स्थगित करना पड़ा। इसी क्रम में कुछ लोगों ने समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा को भी नुकसान पहुंचाया। ममता सरकार ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कुछ भाजपा कार्यकताओं के खिलाफ अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की। जबकि भाजपा ने मूर्ति तोड़ने का आरोप टीएमसी के कार्यकताओं पर लगाया। इसके अलावा अमित शाह और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को प्रशासन ने कुछ जगहों पर जनसभा करने की इजाजत नहीं दी। अमित शाह के रोड-शो में हुई हिंसा के बाद चुनाव आयोग को ऐतिहासिक फैसला देते हुए पश्चिम बंगाल की 9 लोकसभा सीटों पर तय समय सीमा से 19 घंटे पहले ही चुनाव प्रचार बंद करने का आदेश देना पड़ा। साथ ही चुनाव आयोग के आदेश पर वहां सीआईडी के एडीजी और गृह विभाग के प्रधान सचिव को उनके पदों से हटाया गया।

इसके अलावा चुनाव आयोग ने सातवें चरण की वोटिंग से पहले डायमंड हार्बर सीट से दो अफसरों को चुनाव ड्यूटी से हटा दिया, जहां से ममता बनर्जी के भतीते अभिषेक बनर्जी चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ममता बनर्जी के जंगलराज के खिलाफ जमकर दहाड़ लगायी तो जवाब में ममता ने भी मोदी को जेल भेजने तक की धमकी दे डाली। दरअसल, पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी न सिर्फ खुलकर बंगलादेशी शरणार्थियों का साथ दे रही हैं, बल्कि उनके बीच छुपे असामाजिक तत्वों को भी उनका और उनकी सरकार का संरक्षण प्राप्त है। पश्चिम बंगाल में एक खास समुदाय के वोट बैंक की खातिर दूसरे समुदाय की आस्था से खिलवाड़ किया जा रहा है। वहां राजनीति में आज सिद्धांतों की लड़ाई खत्म हो गई है और समाज में कटुता का माहौल बना दिया गया है। पिछले दिनों पंचायत चुनावों के बाद भी हालात भयावह थे। टीएमसी के विरोध में चुनाव जीतने वालों को खोज-खोजकर निशाना बनाया गया और ऐसे सैकड़ों परिवार अपनी जान बचाने की खातिर पड़ोसी राज्य में शरण लड़ने पर मजबूर हुए। मसलन, अब पश्चिम बंगाल में भी जम्मू-कश्मीर जैसे हालात बनते जा रहे हैं।

सवाल उठता है कि आखिर पूरे समाज को विध्वंस की राह पर ले जाने का यह खूनी खेल कब तक चलता रहेगा? पश्चिम बंगाल की सत्ता के सिंहासन पर बैठते समय भारतीय संविधान की रक्षा करने की शपथ लेने वाली दीदी आखिर अपना कर्तव्य और दायित्व क्यों भूल गयीं हैं? आश्चर्य की बात तो यह है कि इन परिस्थितियों में भी मोदी-विरोधी दलों के नेता ममता के बचाव में सामने आ गये हैं। इस प्रकरण में भी विपक्ष का मोदी-विरोध और ममतास मर्थन निश्चय ही वोट बैंक की राजनीति है। परन्तु सत्ता बचाने या सत्ता पाने के लिए इस तरह के खेल की इजाजत भारतीय संविधान कभी नहीं देता। पश्चिम बंगाल में जो कुछ हुआ या हो रहा है, वह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक माना जाएगा!

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