मिथिलांचल की परंपरा को जीवंतता प्रदान कर रहा “झारखंड मिथिला मंच”

0
353

भारत विविधताओं का देश है। हर क्षेत्र की अपनी-अपनी खास सांस्कृतिक विशेषतायें और विविधतायें हैं। इन्हीं में से मिथिला-भूमि की सांस्कृतिक गरिमा और परंपरा अपने-आप में महत्वपूर्ण है। इन्हीं परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रहा है झारखंड मिथिला मंच।

लंबे समय से यह संगठन मिथिलांचल के पारंपरिक पर्व-त्योहारों के साथ-साथ कई सांस्कृतिक व सामाजिक आयोजनों के जरिए मिथिला परंपरा को जीवित बनाए रखने के साथ-साथ आज की नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जुड़े रहने की सीख दे रहा है। इसी कड़ी में बीते दिनों हरमू की हाईकोर्ट कॉलोनी स्थित दुर्गा मंदिर में जानकी नवमी महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कुंवारी कन्याएं पूजी गयीं। कुंवारी कन्याओं का यह भव्य समागम अपने-आप में आकर्षक बना रहा। ऐसा लग रहा था मानो छोटी-छोटी कन्याओं के रूप में मां भगवती स्वयं अवतरित हो गयी हों। कुंवारी कन्याओं को पैर-हाथ धुलाकर अलता, टिकुली, काजल आदि से वैष्णो रूप में उन्हें सजाया गया। फिर चुनरी और पुष्पा माला पहनाई गई। पूजन से पहले आदिशक्ति मां दुर्गा को मिथिला परंपरा के अनुसार पातरि दिया गया, जिसमें प्रसाद के रूप में पायस, पंच मिष्ठान, पांच तरह के फल कमल के पत्ते पर भोग लगाए गए।

इस अवसर पर मंच के पदाधिकारियों ने मां जानकी के प्राकट्य पर भी प्रकाश डाला। मंच के सुजीत झा ने बताया कि राजा जनक की पुत्री और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की सहधर्मिणी माता सीता का जन्म नवमी तिथि को था, इसलिए समस्त मिथिलावासी इस दिन को जानकी नवमी महोत्सव के रूप में धूमधाम से मनाते हैं। उक्त कार्यक्रम का आयोजन मिथिला मंच के जानकी प्रकोष्ठ की ओर से किया गया था। इसे सफल बनाने में महासचिव ममता झा, आशा झा, निशा झा, उषा पाठक, निर्मला झा, सुधा झा, अनुष्ठा झा, जीबो देवी, रूपा चौधरी, मीणा सिंह, मुन्नी यादव, अवंतिका झा, निधि झा, इंदु झा, अर्चना झा, प्रमिला मिश्रा, चंदन झा, रेणु झा, अनीता झा, रानी झा, बबीता झा आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

Varnan Live Report

Previous articleमिथिलांचल की परंपरा को जीवंतता प्रदान कर रहा “झारखंड मिथिला मंच”
Next articleबोकारो से बिहार ले जाया जा रहा था ‘जहर’, ग्रामीणों ने नाकाम की योजना
मिथिला वर्णन (Mithila Varnan) : स्वच्छ पत्रकारिता, स्वस्थ पत्रकारिता'! DAVP मान्यता-प्राप्त झारखंड-बिहार का अतिलोकप्रिय हिन्दी साप्ताहिक अब न्यूज-पोर्टल के अवतार में भी नियमित अपडेट रहने के लिये जुड़े रहें हमारे साथ- facebook.com/mithilavarnan twitter.com/mithila_varnan ---------------------------------------------------- 'स्वच्छ पत्रकारिता, स्वस्थ पत्रकारिता', यही है हमारा लक्ष्य। इसी उद्देश्य को लेकर वर्ष 1985 में मिथिलांचल के गर्भ-गृह जगतजननी माँ जानकी की जन्मभूमि सीतामढ़ी की कोख से निकला था आपका यह लोकप्रिय हिन्दी साप्ताहिक 'मिथिला वर्णन'। उन दिनों अखण्ड बिहार में इस अख़बार ने साप्ताहिक के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनायी। कालान्तर में बिहार का विभाजन हुआ। रत्नगर्भा धरती झारखण्ड को अलग पहचान मिली। पर 'मिथिला वर्णन' न सिर्फ मिथिला और बिहार का, बल्कि झारखण्ड का भी प्रतिनिधित्व करता रहा। समय बदला, परिस्थितियां बदलीं। अन्तर सिर्फ यह हुआ कि हमारा मुख्यालय बदल गया। लेकिन एशिया महादेश में सबसे बड़े इस्पात कारखाने को अपनी गोद में समेटे झारखण्ड की धरती बोकारो इस्पात नगर से प्रकाशित यह साप्ताहिक शहर और गाँव के लोगों की आवाज बनकर आज भी 'स्वच्छ और स्वस्थ पत्रकारिता' के क्षेत्र में निरन्तर गतिशील है। संचार क्रांति के इस युग में आज यह अख़बार 'फेसबुक', 'ट्वीटर' और उसके बाद 'वेबसाइट' पर भी उपलब्ध है। हमें उम्मीद है कि अपने सुधी पाठकों और शुभेच्छुओं के सहयोग से यह अखबार आगे और भी प्रगतिशील होता रहेगा। एकबार हम अपने सहयोगियों के प्रति पुनः आभार प्रकट करते हैं, जिन्होंने हमें इस मुकाम तक पहुँचाने में अपना विशेष योगदान दिया है।

Leave a Reply