‘बलिदान’ पर ICC की दोहरी नीति क्यों?

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Dhoni and his Glove (Photo Courtesy : Google Images)
  • नीरज कुमार झा

इंग्लैंड में चल रहे क्रिकेट वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपने पहले मैच में टीम इंडिया के विकेट कीपर महेंद्र सिंह धोनी ने विकेट कीपिंग के दौरान जो दस्तानें पहने थे, उस पर भारतीय सेना की पैरा स्पेशल फोर्स का बलिदान बैज बना हुआ था और इसे एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दस्ताने पर बने इस बलिदान बैज को लेकर आईसीसी ने तुगलकी फरमान जारी करते हुए इसे गलत करार दिया और हटाने को कहा। इस बात को लेकर दुनिया भर के क्रिकेट-जगत में वाद-विवाद और सुर्खियों का सिलसिला तेज हो गया है। आईसीसी ने अपने प्रेस विज्ञप्ति में साफ किया कि महेंद्र सिंह धोनी विकेट कीपिंग दस्तानों पर बलिदान बैज के निशान के साथ खेलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। आईसीसी ने यह भी कहा कि किसी भी आईसीसी इवेंट्स में कपड़ों या खेल के किसी भी सामान पर धार्मिक, नस्लभेदी या राजनीतिक सन्देश वाले निशान का होना नियमों के विरुद्ध है। लेकिन अब यहां सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान के खिलाड़ियों को बीच क्रिकेट मैदान में नमाज पढ़ने की इजाजत दी सकती है, लेकिन उस बैज पर इतना बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया गया है, जो भारत और भारतीय सेना के सम्मान से जुड़ा है। बता दें कि धोनी भारतीय सेना में लेफ्टिनेन्ट कर्नल की मानद उपाधि से सम्मानित हैं। उन्हें यह रखने का पूरा हक है। क्रिकेट के कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह आईसीसी के नियमों को उल्लंघन हो ही नहीं सकता। महेंद्र सिंह धोनी को वर्र्ष 2011 में प्रादेशिक सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक से सम्मानित किया गया था, जिसके बाद वह 2015 में प्रशिक्षित पैराट्रूपेर बन गये। पैराट्रूपेर में प्रशिक्षित होने के बाद धोनी इस प्रतिष्ठित पैरा विंग्स के बलिदान बैज का इस्तेमाल कर सकते हैं।

देश भर से समर्थन

विकेट कीपिंग दस्तानों पर लगे बलिदान बैज को लेकर महेंद्र सिंह धोनी को देश भर से समर्थन मिला। इस मामले में देश भर के लोग ट्विटर पर धोनी का भरपूर समर्थन करते नजर आये। इस मामले में भारत के खेल मंत्री किरन रिजिजू ने धोनी का समर्थन करते हुए कहा – ‘मुझे उम्मीद है की बीसीसीआई इस मुद्दे को आईसीसी के पास ले जायेगी और मुद्दा सुलझा लिया जाएगा। धोनी की पहचान देश की पहचान है, सेना की पहचान है और यह राजनीति नहीं है।’ उन्होंने आगे यह भी कहा कि वर्ल्ड कप के दौरान जो मुद्दा उठा है, वो भारत के लिए सम्मान की बात है। उन्हें लगता है कि बीसीसीआई को अपने स्तर पर इस मामले को आईसीसी के समक्ष रखना चाहिए और साथ ही भारतीय नागरिकों की भावनाओं का भी ध्यान रखना चाहिये। खेल मंत्री के अलावा महेंद्र सिंह धोनी को झारखण्ड सरकार का भी साथ मिला। झारखण्ड सरकार का मानना है कि धोनी के दस्तानों पर सेना का बैज होने में कुछ भी गलत नहीं है। झारखण्ड की ओर से भी बीसीसीआई को धोनी का साथ देना देने की वकालत की गयी, परंतु अंतत: अंतरराष्ट्रीय दबाव कहें या साजिश, धोनी को इस ‘बलिदान’ का बलिदान करना पड़ गया।

  • Varnan Live.

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