मुजफ्फरपुर में महामारी, अब तक 133 बच्चों की मौत

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अस्पताल में भर्ती चमकी बुखार से पीड़ित बच्चे। (फोटो साभार- गूगल इमेेज)

लीची बन रही काल, खतरे में नौनिहाल

विशेष संवाददाता
मुजफ्फरपुर :
बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार का कहर लगातार जारी है और भीषण महामारी ने अपना कहर बरपा रखा है। ऐसा कहर कि इस गरमी में भी संदिग्ध एईएस (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) और जेई (जापानी इंसेफलाइटिस) से बच्चों के असमय काल के गाल में समाने का सिलसिला जारी है। खबरों के अनुसार अब तक इन दोनों संदिग्ध महामारी की चपेट में आने से 133 बच्चों की मौत हो गई, जबकि लगभग दर्जनों बच्चों का इलाज यहां के दो अस्पतालों में खबर लिखे जाने तक जारी था। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बीमारी का कारण लीची बताया जा रहा है। लीची से होने वाली बीमारी इंसेफलाइटिस का ही कहर है कि इंसेफलाइटिस बुखार की वजह से बीते दो हफ्तों में मुजफ्फरपुर में 133 बच्चों की मौत हो गयी।
मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डा. एस़ पी़ सिंह के अनुसार अधिकांश बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी अचानक शुगर की कमी का पता चल रहा है। उन्होंने भी माना कई बच्चों को तेज बुखार में लाया जा रहा है। उन्होंने इसे चमकी और तेज बुखार बताया। इसके मद्देनजर जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए समुचित व्यवस्था की गई है, फिर भी लोगों को अपने बच्चों के प्रति खासा ख्याल रखने की जरूरत है। बच्चों को गर्मी से बचाने के साथ ही समय-समय पर तरल पदार्थों का सेवन करवाते रहना चाहिये।


लक्षण के आधार पर उपचार

जानकार बताते हैं कि अब तक बीमार बच्चों का उपचार बीमारी के लक्षण के आधार पर किया जा रहा है। एईएस से ग्रसित बच्चों को पहले तेज बुखार और शरीर में ऐंठन होती है। उसके बाद वे बेहोश हो जाते हैं। पिछले दो दशकों से यह बीमारी मुजफ्फरपुर सहित राज्य के कई इलाकों में होती है, जिसके कारण अब तक कई बच्चे असमय काल के गाल में समा चुके हैं, परंतु अब तक सरकार इस बीमारी से लड़ने के कारगर उपाय नहीं ढूढ़ पाई है।

अधपकी लीची हो सकती है कारण

Litchis (photo courtesy : google images)

पिछले दिनों जारी विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार अधपकी लीची को भी इसका कारण माना गया है। दरअसल, लीची में पाया जाने वाला एक विशेष प्रकार का तत्व इस बुखार का कारण हो सकता है। हर साल कई बच्चे इंसेफलाइटिस की भेंट चढ़ जाते हैं। गौरतलब है कि इस बीमारी के शिकार आमतौर पर गरीब परिवारों के बच्चे होते हैं। 15 वर्ष तक की उम्र के बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं और मृतकों में अधिकांश की आयु एक से सात वर्ष के बीच है।

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