मैथिली कविता- इतिहास भूगोल हेराय रहल

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– रामचन्द्र मिश्र ‘मधुकर’

मिथिला केर इतिहासक सङ्गे, 
भूगोलो हेराय रहल
मैथिल केर मेधा प्रतिभा सङ्ग,
रक्तो तप्त सेराय रहल।

मिथिला मे मैथिल के के थिक
सेहो ने आब चिन्हाय रहल
मैथिल कहबै मे हेंठी अछि,
जातिक नाम धराय रहल।

भारत देशक नक्शा सं,
मिथिला केर नाम मेटाय रहल,
अपना-अपनी दावा सभ कें,
पूर्वज गौरव बिलटाय रहल।

राजनीति केर अवगति नहि,
गति-मति सं अछि भोतिआय रहल,
मैथिल के अलहनरैनी अछि,
किछु सूतल किछु ओगहाय रहल,
देश विदेशक कोन-कोन,
सभठां मैथिल सुठिआय रहल।

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