खेलमंत्री के घर के बाहर धरने पर बैठेगी राष्ट्रीय खिलाड़ी मोनालिसा

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Monalisa Chakrabarty to Pressmen.

Deepak Kumar Jha

बोकारो : चिराग तले अंधेरा वाली कहावत आप सबने जरूर सुनी होगी। बोकारो के चंदनकियारी में, जहां खुद राज्य सरकार के मंत्री अमर कुमार बाउरी का बसेरा है और उनका विधायकी-क्षेत्र भी, वहीं की रहने वाली राष्ट्रीय स्तर की एक टेनिस खिलाड़ी मोनालिसा आज मदद के लिये दर की ठोकरें खा रही हैं। आलम यह है कि मदद की सारी उम्मीदें उनके लिये खोखली साबित हुई है और अब उसने अपने पूरे परिवार के साथ खेलमंत्री के घर के बाहर धरना देने का निर्णय ले लिया है। राष्ट्रीय लान टेनिस खिलाड़ी मोनालिसा चक्रवर्ती एवं उसके परिवार द्वारा झारखंड सरकार के खेल मंत्रालय के खेल सचिव व निदेशक की कथित लापरवाही व संवेदनहीनता के खिलाफ मोनालिसा 28 जून  से मंत्री श्री बाउरी के घर के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने जा रही है। बुधवार दोपहर डीसी की गौरमौजूदगी में डीडीसी को अपना ज्ञापन देकर लौटने के क्रम में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान मोनालिसा और उसकी मां मल्लिका चक्रवर्ती ने अपनी पीड़ा रखी।

13 सालों का कैरियर कैसे बर्बाद हो जाने दें?

मोनालिसा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उसे यूएस में लान टेनिस कीा इंटरनेशनल कोचिंग के लिये स्कालरशिप मिली है। उसमें शामिल होने के लिये दुर्भाग्यवश उसके पास पैसे नहीं हैं। उसने कहा कि मदद के लिये लगातार उसने सरकार के सभी सक्षम लोगों के पास हाथ पसारे हैं, परंतु लगातार टाल-मटोल किया जाता रहा है। खेलमंत्री खुद कह रहे हैं कि वह आर्थिक रूप से खिलाड़ियों की मदद नहीं कर सकते। उनके पास एेसा कोई प्रोटोकाल नहीं है। इसके बाद बाहर से मदद दिलाने की फरियाद की गयी, परंतु कुछ भी हासिल नहीं हुआ। मोनालिसा ने कहा कि अब एेसी हालत में मंत्रीजी के घर के बाहर धरना देने के अलावा उनके पास कोई आप्शन नहीं बचा है। उसने कहा कि मात्र सात साल की उम्र से वह लान टेनिस खेलती आ रही है। पिछले 13 वर्षों के कैरियर को वह कैसे बर्बाद हो जाने देगी। अपने खेल-कैरियर में उसने कई दफा बाहर के प्रदेशों में झारखंड का प्रतिनिधित्व किया और राज्य के लिये पुरस्कार प्राप्त किया। आज यही राज्य सरकार उसका साथ नहीं दे रहा है। उसकी इच्छा है कि अब वह नेशनल खेलकर देश को रिप्रेजेन्ट करे, परंतु मदद के बिना यह संभव नहीं। उसने कहा कि उसके सिर पर पिता का साया नहीं है। मां ही मदद कर रही है, लेकिन अब सरकारी मदद की नितांत आवश्यकता है, पंरतु समझ नहीं आ रहा कि आखिरकार सरकार क्यों नहीं उसकी मदद कर सकती?


टेनिस ही मेरी बेटी की जिंदगी : मल्लिका

बोकारो समाहरणालय में आवेदन देने पहुंची मोनालिसा की मां मल्लिका चक्रवर्ती ने कहा कि सरकार तो पहले आश्वासन भी देती थी, अब वो भी नहीं मिल पा रहा। अब तो साफ इनकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टेनिस ही उनकी बेटी की जिंदगी है। वे लोग जायें तो जायें कहां? खेलमंत्री कह रहे हैं कि फंड से मदद वह नहीं कर सकते। सारा वायदे झूठे ही साबित हुए हैं। कोई सहयोग करने वाला नहीं। उन्होंने इस विकट स्थिति में आत्महत्या तक करने की चेतावनी भी दी।

अपनी मां के साथ राष्ट्रीय लॉन टेनिस खिलाड़ी मोनालिसा।


…तो होगी राज्य की बदनामी

बता दें कि इसके पहले मोनालिसा ने प्रधानमंत्री से भी मदद की गुहार लगायी थी। अपने पत्र में लिखा है कि यूएस में उसका नामांकन को लेकर सारी कार्यवाही हो चुकी हैं। अगर अभी वह नामांकन से इनकार करती है तो वो उसे डिस्क्वालिफाई कर देंगे और किसी भी देश में उसे खेलने की अनुमति नहीं मिलेगी। जाहिर है एेसा अगर होता है तो यह केवल मोनालिसा की ही परेशानी नहीं होगी, बल्कि पूरे झारखंड और भारत की साख पर इसका बुरा असर पड़ेगा। उसने बताया कि अब मुझे अंतराष्ट्रीय ट्रेनिंग की ज़रूरत है, इसलिए पिछले साल सरकार ने उसे अंतराष्ट्रीय टेनिस ट्रेनिंग स्कॉलरशिप के कार्यवाही के लिए भी मदद की। उसे यूएस में टेनिस खेलने के लिए 80 प्रतिशत स्कॉलरशिप मिली। उसने सभी चयन टूर्नामेंट प्रतियोगिताओं में खेल सफलता पायी। इसके कारण उसे यूएस से 80 प्रतिशत स्कॉलरशिप दी। बाकी की 20 प्रतिशत राशि का खर्च सिर्फ़ रहने और खाने का है, जिसके लिए उसने झारखंड सरकार से मदद मांगी थी।

  • Varnan Live.

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