इस अस्पताल को है ‘इलाज’ की जरूरत

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डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ एवं लैब तकनीशियनों की है घोर कमी

कुमार संजय
बोकारो थर्मल :
डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ एवं लैब तकनीशियनों की कमी को लेकर बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के अस्पताल की स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है। डीवीसी के अस्पताल को इन दिनों विशेषज्ञ डॉक्टरों, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, लैब तकनीशियनों आदि का अभाव झेलना पड़ रहा है। डाक्टरों की कमी के कारण जून माह में ही कई बार ओपीडी में डाक्टर उपलब्ध नहीं रहने के कारण मरीजों को वापस लौट जाना पड़ा या फिर उन्हें इनडोर के डॉक्टर से ही अपना इलाज करवाना पड़ा। कभी-कभी इनडोर के डॉक्टर ओपीडी के मरीजों को देखने में भी आना-कानी करते पाये गये हैं। स्थानीय अस्पताल आने वाले मरीजों के द्वारा जब भी बेहतर इलाज एवं सुविधा की मांग की जाती है तो उन्हें इलाज के लिए बाहर रेफर कर दिया जाता है।

बन्द पड़े डाक्टर के चेम्बर

बोकारो थर्मल के हॉस्पीटल में वर्तमान में विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित मेडिकल आॅफिसर के पदों की कुल संख्या 21 है, जिसमें से महज 10 ही पदस्थापित हैं और 11 पद रिक्त हैं। 11 पद अस्पताल में रिक्त रहने के कारण ओपीडी, तीन शिफ्टों में इंडोर में डॉक्टरों की डयूटी सहित डीवीसी सीएसआर के तहत गांवों में इलाज के लिए डॉक्टर को भेजने में अस्पताल प्रबंधन को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर भी नियमित रुप से अस्पताल नहीं आते हैं। डिप्टी सीएमओ डॉ आर भट्टाचार्य अस्पताल एवं आॅफिस के काम के अलावा स्त्रीरोग विशेषज्ञ का भी काम कर रहें हैं। अस्पताल में इसी प्रकार नर्सिंग स्टाफ के पदों की कुल संख्या 18 है, जबकि पदस्थापित मात्र 12 है। लैब तकनीशियनों के तीन पदों में से एक का पद रिक्त है। अस्पताल के ओपीडी एवं इंडोर में मरीजों को सुविधा नहीं मिलने के कारण अस्पताल के राजस्व में भी कमी देखने को मिल रही है। अस्पताल में मैन पावर की कमी को लेकर डिप्टी सीएमओ डॉ आर भट्टाचार्य के द्वारा विगत वर्ष 2017 मई से ही लगातार पत्राचार किया जा रहा है। बावजूद डीवीसी मुख्यालय के द्वारा उनकी मांगों को अनसुना कर दिया गया जा रहा है।

जल्द होगा समाधान

Kamlesh Kumar, Project Head cum Chief Engineer, BTPS, DVC.

इस संबंध में स्थानीय प्रोजेक्ट हेड कमलेश कुमार का कहना है कि स्थानीय अस्पताल में डॉक्टरों एवं मैन पावर की कमी को लेकर मुख्यालय कोलकाता लगातार पत्राचार किया जा रहा है। संविदा पर दो डॉक्टरों को नियुक्त भी किया गया परंतु वे काम छोडकर ही चले गये। कई बार डीवीसी के डीएचएस सहित मुख्यालय प्रबंधन को अवगत करवाया गया है। पदस्थापना को लेकर आश्वासन भी मिले हैं। उन्होंने माना कि डॉक्टरों के नहीं रहने के कारण लोगों एवं मरीजों को कठिनाई तो हो रही है। कहा कि इनडोर के डॉक्टरों को भी ओपीडी के मरीजों को देखने के लिए कहा गया है।

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