ब्रिक्स देशों में तालमेल का संदेश दे आये मोदी, कहा- मानवता का सबसे खतरा आतंकवाद

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दिल्ली ब्यूरो
नई दिल्ली :
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर से भारत का मान विश्वपटल पर पूरी धाक के साथ रखा। जापान के ओसाका में आयोजित ब्रिक्स देशों के जी 20 शिखर सम्मेलन में भारत का दबदबा शिखर पर रहा। प्रधानमंत्री ने अपनी कूटनीतिक सूझ-बूझ के जरिये ब्रिक्स देशों के बीच जहां आपसी तालमेल का संदेश दिया, वहीं अंतरराष्ट्रीय चुनौती आतंकवाद को भी पुरजोर तरीके से रखते हुए पड़ोसी देश पाकिस्तान और उसके सहयोगी देशों पर अप्रत्यक्ष रूप से जमकर निशाने साधे। ब्रिक्स देशों के सभी राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी में मोदी ने कहा कि आतंकवाद मानवता के लिये सबसे बड़ा खतरा है। यह न केवल मासूमों की जान लेता है, बल्कि यह आर्थिक विकास और सांप्रदायिक सद्भाव को बुरी तरह से प्रभावित करता है। हमें आतंकवाद और नस्लवाद के समर्थन के सभी माध्यमों को रोकना होगा। उन्होंने कहा, ‘हमने हाल ही में आतंकवाद पर एक ग्लोबल कांफ्रेन्स का आह्वान किया है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए जरूरी सहमति का अभाव हमें निष्क्रिय नहीं रख सकता। आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष को प्रमुख प्राथमिकताओं में जगह देने के लिए मैं ब्राजील की सराहना करता हूं।’ उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद निदोर्षों की जान तो लेता ही है, आर्थिक प्रगति और सामाजिक स्थिरता पर बहुत बुरा असर भी डालता है। हमें आतंकवाद और जातिवाद को समर्थन और सहायता के सभी रास्ते बंद करने होंगे।
इस सम्मेलन से इतर ओसाका में ब्रिक्स देशों के नेताओं के बीच की मुलाकात के दौरान ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पीएम नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफौसा मौजूद रहे। उन्होंने सबसे पहले राष्ट्रपति बोल्सनारो को ब्राजील का राष्ट्रपति चुने जाने के लिए बधाई दी और ब्रिक्स परिवार में उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति बोल्सनारो को इस बैठक के आयोजन के लिए धन्यवाद दिया और लगे हाथों उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामाफोसा को भी आकर्षित करते हुए उन्हें फिर से दक्षिण अफ्रीका का राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं।
मोदी ने कहा कि इस प्रकार के अनौपचारिक विचार-विमर्श से हमें जी-20 के प्रमुख विषयों पर एक-दूसरे के साथ समन्वय का मौका मिलता है। उन्होंने प्रमुख चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए विश्व की अर्थव्यवस्था में मंदी और अनिश्चितता को पहली चुनौती बतायी। कहा कि नियमों पर आधारित बहुपक्षीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था पर एक तरफा निर्णय और प्रतिद्वंद्विता हावी हो रहे हैं। दूसरी ओर, संसाधनों की कमी इस तथ्य में झलकती है कि इमर्जिंग मार्केट इकॉनामीज के इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के लिए अंदाजन 1.3 ट्रिलियन डालर की कमी है। दूसरी बड़ी चुनौती है विकास और प्रगति को समावेशी और सस्टेनेबल बनाना। तेजी से बदलती हुई टेक्नोलॉजी जैसे कि डिजिटलाइजेशन और क्लाइमेट चेंज सिर्फ हमारे लिए ही नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए भी चिंता के विषय हैं। विकास तभी सही मायने में विकास है जब वो असमानता घटाए और सशक्तिकरण में योगदान दे। इन समस्याओं के निराकरण को लेकर उन्होंने आतंकवाद पर लगाम लगाने के अलावा अन्य सुझाव भी दिये। कहा- ब्रिक्स देशों के बीच तालमेल से एकतरफा फैसलों के दुष्परिणामों का निदान कुछ हद तक हो सकता है। हमें रिफार्म्ड मल्टीलेटरलिज़्म के लिए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय और व्यापारिक संस्थाओं तथा संगठनों में आवश्यक सुधार पर जोर देते रहना होगा। निरंतर आर्थिक विकास के लिए आवश्यक ऊर्जा के संसाधन जैसे तेल और गैस कम कीमतों पर लगातार उपलब्ध रहने चाहिए। न्यू डेवलपमेन्ट बैंक द्वारा सदस्य देशों के भौतिक और सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर तथा रिन्युएबल एनजी कार्यक्रमों में निवेश को और प्राथमिकता मिलनी चाहिए। आपदा प्रतिरोधी संरचना के लिए उन्होंनो एकजुट होने का भी संदेश दिया। इसके अतिरिक्त मोदी ने विश्वभर में कुशल कारीगरों का आवागमन आसान सुनिश्चित किये जाने पर बल दिया और कहा कि इससे उन देशों को भी लाभ होगा जहां आबादी का एक बड़ा हिस्सा कामकाज की उम्र पार कर चुका है।

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