हिन्दी कविता – अपने

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– नीरज त्यागी
गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश).

हर दर्द की दवा मिल जाएगी,
सबको अपना बनाते चलिए।
खुशियों से घर भर जाएगा,
अपनों से निभाते चलिए।

हर किसी पर ऐतबार जरूरी है,
मगर विश्वास अपनों का पाते चलिए।
हर एक को तेरे साथ आना ही पड़ेगा,
बस अपनों को साथ लेकर चलिए।

तेरा दुश्मन बस तेरे कत्ल की तलाश में है,
बस उनसे अपनी ऊंगली बचा के चलिए।
साथ तेरे खड़ा होगा हर वक्त तेरा अपना ही,
बस उनका साथ हर वक्त निभाते चलिए।


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