‘निर्मल बही-खाते’ का निर्धन प्रेम

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आजादी के बाद पहली बार दुनिया के सबसे प्रमुख लोकतांत्रिक देश भारत की संसद में इस बार एक महिला वित्त मंत्री ने बजट पेश किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन कोई आम जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि दुनिया की उभरती महिला शख्सियत है। देश के विभिन्न शासकीय पदों पर कार्य करते हुए हमने उन्हें अनेकों बार देखा पर केंद्रित वित्त मंत्री के रूप में हम उन्हें पहली बार देख रहे हैं। इस बार का बजट कई मायनों में खास रहा। एक ओर जहां इस साल के बजट को सरकार ने नया नाम ‘बही-खाता’ दिया है। वहीं दूसरी ओर इस बार वित मंत्री जब संसद में आई तो हाथ में ब्रीफकेस नहीं, बल्कि लाल रंग के फोल्डर से ढंका बही खाका था, जो दशार्ता है कि देश पश्चिम सभ्यता को त्यागकर परंपरागत रिवाजों को संजोने का प्रयास कर रही है। मोदी सरकार 2.0 का पहला बही खाता अभिभाषण लगभग दो घंटे चला। वैसे तो वित्त मंत्री सीतारमन ने अपने पहले वित्तीय अभिभाषण में प्रत्येक तबके पर धन वर्षा की पर ग्राम, गरीब और कृषक पर उनका निर्मल बही खाता कुछ ज्यादा की मेहरबानियां बरसा गया। सीता रमन के निर्मल प्रावधान अमीरों को भारयुक्त तथा गरीबों को भारमुक्त कर गए। इसलिए चालू वित्त वर्ष के दौरान देश के संपन्न जनों को कुछ खटास तथा निर्धनजनों को कुछ मिठास नसीब हो सकती हैं।

बही खाता 2019-20 को प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, असली भारत गांव में बसता है इसलिए हमारे प्रयास भी मुख्यत: इसी क्षेत्र पर केंद्रित है। हमारी सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग को समानता का स्तर दिलाना चाहती है। इसलिए हमारे प्रयास पीड़ितों, दलितों और वंचितों के मूल अधिकारों को संरक्षित करने के तथा उन्हें विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए हैं। वित्त मंत्री ने इस बार इस विशेष वर्ग को बही खाता प्रस्तुत करते हुए लगभग 1.95 करोड़ घरों के निर्माण की घोषणा की है। जिसके प्रभाव से निर्धन लोगों को लगभग 114 दिनों के अंदर नया घर मुहैया कराया जाएगा। इसी तरह सरकार वर्ष 2022 तक 10 हजार नए किसान उत्पादन संगठन निर्मित करेंगी, जिससे किसान भाइयों की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी तथा जो आगे उनकी आय को प्रोत्साहित करेगी। वित्त मंत्री ने आगे कहा,सरकार का ध्येय अन्दाताओं को ऊजार्दाता बनाना है। इसलिए हमारी सरकार शून्य लागत कृषि को बढ़ावा देने के लिए खेती की बुनियाद को परंपरागत विधियों की ओर अग्रसर करना है, जो आगे चलकर कृषकों की आय को दुगुनी कर सकता है। सरकार प्रधानमंत्री मत्सय संपदा योजना के तहत मत्यिकी ढांचे की स्थापना करेगी, जिससे इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को संपन्न बनाया जा सकता है। सरकार खाद्यान्नों, दलहनों, तिलहनों, फलों, सब्जियों आदि की स्वप्राप्यता व निर्यात पर विशेष बल देगी। सीतारमन ने कहा, ‘अगले पांच वर्ष में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत 80,250 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 1.25 लाख किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा तथा हर गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने का प्रयास किया आएगा। सरकार वर्ष 2024 तक जल शक्ति मंत्रालय के तहत हर घर को पेयजल सुनिश्चित कराएगी। जबकि स्वच्छता अभियानों के तहत हर गांवों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था करेगी। वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के तहत 02 करोड़ गाँवों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाने की घोषणा की। कहा, इससे दूरगामी क्षेत्रों में जीवन बसर करने वालों को लाभ होगा। इसी प्रकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार ने एक विशेष समिति गठित करने की घोषणा की है, जो देश के ग्रामीण विकास मे महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कार्य करेगी। इसके अलावा सरकार ने 45 लाख रुपये तक के गृह ऋण में 3.5 लाख रुपये की छूट तथा शहरी क्षेत्र के निर्धनों के लिए 47 लाख मकान निर्माण की घोषणा भी शहरी गरीबों के अच्छे दिन ला सकती है।
इस बार के बही खाते में बहुत सी ऐसी वस्तुएं महंगी हुई, जिससे आमजन का नाममात्र का वास्ता है, जिसमें मुख्यत: पेट्रोल, डीजल, सोना, चांदी, Auto Parts, सिंथेटिक व रबर, पीवीसी, एयर कंडीशनर, लाउडस्पीकर, वीडियो रिकॉर्डर, सीसीटीवी कैमरा,वाहन हार्न, सिगरेट इत्यादि शामिल हैं। जबकि बहुत सी वस्तुएं ऐसी है जिन पर चालू बही खाते का प्रभाव निर्धनों की दृष्टि से सकारात्मक रहेगा। सस्ती होने वाली इन वस्तुओं में मुख्य रूप से घरेलू बिजली के सामान, लैम्प, बोतल, कंटेनर, रसोईघर के बर्तन, धूपबत्ती, ऊन व ऊन से बनी चीजें इत्यादि शामिल हैं। इन वस्तुओं का उपभोग व इस्तेमाल जनमानस भले ही प्रति दिन करता हो, पर चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान इनकी कीमत का असर आम लोगों की जेबों पर पहले की बजाय कम पड़ेगा। अब सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार ने वर्तमान बही खाते में चालू वित्त वर्ष के लिए जो प्रावधान किए हैं, वह देशवासियों को व्यावहारिक रूप में किस करवट बैठते हैं। यदि शासन इन्हें व्यावहारिक रूप देने में सफल होता है तो यह देश के गरीबों के लिए एक सुखद एहसास होगा तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था को बल प्रदान करेगा, परंतु यदि सरकार उक्त घोषणाओं को धरातल पर मूर्त रूप देने में नाकामयाब रहती है तो यह देश के निर्धनों के साथ विश्वासघात होगा तथा जनतंत्र के लिए भी घातक सिद्ध होगा। देश की जनता ने प्रधानमंत्री मोदी को लगातार दूसरी बार प्रचंड बहुमत दिलाकर सत्ता सौंपी है। इसलिए अबकी बार मोदी सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह देश की आकांक्षाओं के अनुरूप अपने प्रावधानों को कड़ाई से लागू करे। बही खाते में आवंटित व्यय को इसे प्रकार खर्च करे कि उसका लाभ समाज के सबसे निम्न पायदान पर खड़े गरीब को अमीर बनने का भरपूर मौका दें। तभी वर्तमान सरकार का ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारा चरितार्थ हो सकता है।

  • सुरेन्द्र कुमार
    लेखक, विचार व शिक्षक (हि.प्र.)।
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