ये पानी कहीं ले न ले जान!

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– नल तो है, पर पानी नहीं
– एक साल से त्रस्त लोग दे रहे खुदकुशी की धमकी

दीपक कुमार झा
बोकारो :
‘बिन पानी सब सून’। यह कहावत आप सबों ने जरूर सुनी होगी। सच भी है। बिना पानी के कुछ भी नहीं। जीवन की कल्पना भी पानी के बिना नहीं की जा सकती। जल-संरक्षण के विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं की कड़ी में इन दिनों सरकार ने जलशक्ति अभियान चला रखा है, जिसके तहत बारिश की एक-एक बूंद संचित कर भूमिगत जलस्तर को बढाने की कवायदें चल रही है। यह सब तो ठीक है, होना भी चाहिये। लेकिन, महज पाइप-लाइन की गड़बड़ी, ढुलमुल सरकारी क्रियाकलापों और अधिकारियों की लापरवाही के चलते अगर लोग बिना पानी के जीवन गुजारें तो उसे विडम्बना नहीं पूरे सिस्टम के लिये कलंक ही कहेंगे और ऐसे में सरकार की तमाम तरह की जनहितकारी योजनायें महज छलावा ही प्रतीत होने लगती है। कुछ ऐसे ही छलावे का शिकार हैं बोकारो के उपशहर चास के लोग। एक तो लम्बे कालखंड की प्रतीक्षा के बाद चास जलापूर्ति योजना बमुश्किल चालू हो सकी। लेकिन, इसे चालू करने में भी न तो विभागीय अधिकारियों ने खासी संजीदगी के साथ काम नहीं किया और न ही जनप्रतिनिधियों ने अच्छी तरह से ध्यान दिया। नतीजतन, एक-दो नहीं, दो दर्जन से भी अधिक वैसे घर हैं, जहां जलापूर्ति योजना चालू होने के बाद मात्र दो बार ही नल में निकलते पानी का दर्शन हो सका। उसके बाद पिछले लगभग एक साल से लोगों की आंखें अपने घर में पाइप से जलापूर्ति के इंतजार में पथरा सी गयीं है। मामला चास के शिवशक्ति नगर का है। आलम यह है कि लोग अब पानी की समस्या से तंग आकर आत्महत्या करने तक की धमकियां इसे एकमात्र रास्ता बताकर दे रहे हैं। यानी यह जल-संकट जानलेवा हो चला है। ऐसे में पानी कहीं लोगों की जान न ले लें, कहना कठिन हो गया है।

कॉलोनी में रहने वाले तारा लाल सिंह ने प्रधानमंत्री को इस मामले में प्रेषित चिट्ठी में कहा है कि पिछले एक साल से उनके घर समेत मुहल्ले में 25 से 30 घरों में पानी बिल्कुल ही नहीं मिल पा रहा है। हर अधिकारी, जनप्रतिनिधि तक के दरवाजे वे खटखटा चुके हैं, लेकिन आज तक कोई भी व्यक्ति उसे देखने तक नहीं आया और न ही कोई कार्यवाही हो सकी। स्थिति यह है कि वे लोग गड्ढा और नाली के पानी के साथ-साथ बारिश का पानी जमा कर उसे नहाने और अन्य दैनिक क्रियाकलापों में प्रयुक्त करने के लिए विवश हैं। सबसे ज्यादा परेशानी खाना बनाने के लिए पानी को लेकर होती है। 70 वर्षीय तारा लाल ने कहा कि वह बोकारो इस्पात संयंत्र से सेवानिवृत्त कर्मचारी और अस्वस्थता के कारण वह बाहर से पानी लाने में असमर्थ है। उन्होंने मीडियाकर्मियों से बातचीत में चास की अनुमंडलाधिकारी पर उन्हें मानसिक (मेन्टल) कहकर प्रताड़ित व अपमानित किए जाने का आरोप लगाया। कहा कि जब उन्होंने एसडीओ को पानी की समस्या से निजात दिलाने की मांग की और सुबह एक बार फोन किया था तो उन्हें एसडीओ ने मेंटल कहकर अपमानित करने का काम किया था।

श्री सिंह ने कहा कि अब वह पानी की समस्या झेल-झेलकर परेशान हो चुके हैं। अब यह उनके लिए असहनीय हो गया है और उनके पास अब सिवाय आत्महत्या के कोई चारा नहीं है। वहीं तारा लाल के अधिवक्ता पुत्र पंकज कुमार सिंह ने कहा कि पानी की समस्या को लेकर उन्होंने नगर निगम के पदाधिकारियों, उपायुक्त तथा मुख्य सचिव से लेकर मुख्यमंत्री जनसंवाद और प्रधानमंत्री तक से शिकायत की है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति तो यह है कि आज तक उनकी मांग को लेकर कोई भी कार्रवाई नहीं की जा सकी है। अब वह इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखने वाले हैं। पंकज ने कहा कि बिना पानी के लोग खाना कैसे खाएगा और अपनी प्यास कैसे मिटाएगा? कैसे अपने दिन की शुरूआत करेगा? सबसे बड़ा तनाव का कारण उनके पूरे परिवार के लिए यही बना हुआ है। पंकज ने कहा कि पिता द्वारा सुसाइड करने की बात से घबराकर ही वह अपना कामकाज छोड़कर बाहर से यहां भागा-भागा आया।
मोहल्ले की रहने वाल वाली एक महिला शीलवंती देवी ने बताया कि पानी के लिए उनके इलाके के लोग तड़प कर रह जाते हैं। सप्लाई का पानी आता है तो कभी किसी पर में आया तो किसी घर में नहीं आया। एक घर में पानी चलता है, मगर वाले में बंद रहता है। पिछले एक साल में मात्र दो बार पानी उनलोगों को नसीब हो सका है अब भला वो कैसे रह सकेंगे?

क्या कहते हैं अधिकारी

इस बारे में जब चास नगर निगम के अपर नगर आयुक्त शशि प्रकाश झा से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अभी वैसी व्यवस्था नहीं बन सकी है, जिससे कि हर घर की पानी की जरूरत पूरी हो सके। फोर लेन बनने के कार्य में बहुत जगह पाइप लाइन डैमेज हो गया है, जिसकी मरम्मत करायी जायेगी। आशा है उससे जल्द ही समस्या दूर हो जायेगी। इससे नहीं हुआ तो जलापूर्ति योजना के अगले चरण का कार्य पूरा होने पर ही समाधान संभव हो सकेगा, जिसके लिये लोगों को वर्ष 2022 तक का इंतजार करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर कहा जाय तो पानी की समस्या से शिवशक्ति नगर वासियों के जल्द निजात मिलने वाली नहीं दिख रही। भले ही मुहल्लावासियों ने डीसी, सीएस, सीएम से लेकर पीएम तक फरियाद लगा दी, लेकिन ढुलमुल सरकारी कामकाज की जो शैली है, जो लचर सिस्टम है, उसमें सुधार कैसे होगा, कहना कठिन है। अगर 2022 तक पानी की यह दिक्कत रहेगी तो बिना पानी के लोग इतने दिन कैसे गुजारेंगे, इसका दर्द वो ही जानते हैं।

  • Varnan Live.

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