50 वर्षों के बाद दिखा झारखंड में दुर्लभ Balloon Frog, बिना भोजन के 13 माह तक रह सकता है जीवित

0
983
दीपक झा
बोकारो। इन दिनों बरसात का मौसम चल रहा है और इस मौसम में मेंढक को जहां-तहां हम उछलते- कूदते देख सकते हैं। ये सारे मेंढक दिखने में साधारण तौर पर एक समान ही प्रतीत होते हैं, लेकिन दो दिन पहले ही झारखंड के बोकारो में एक दुर्लभ और विचित्र आकृति का मेंढक देखा गया। बैलून फ्रॉग के सामान्य नाम से जाने जाने वाले इस मेंढक को पिछले दिनों चास स्थित जेल मोड़ के समीप दलदल वाली एक जगह में देखा गया था। वरिष्ठ जीव वैज्ञानिक डॉ. मिथिलेश दत्त द्विवेदी के अनुसार लगभग 50 वर्षों के बाद झारखंड में इस मेंढ़क को देखा गया है। आदर्श विद्या मंदिर, चास से अवकाश-प्राप्त जीव विज्ञान शिक्षक डॉ. द्विवेदी के छात्र अभिषेक कुमार मेहता ने पिछले दिनों इस विचित्र मेंढक को  देखकर पकड़ा था, जिसे बाद में फिर उसके स्थान पर छोड़ दिया गया।
 
क्या है खासियत
यूपेरोडॉन ग्लोबुलोसम वैज्ञानिक नाम वाला यह उभयचर प्राणी जमीन के अंदर छुपकर रहता है। मादा आकार में नर से बड़ी होती है। प्रजनन काल यानी वर्षा ऋतु में ये धरती से ऊपर दिखाई देते हैं। धरती के अंदर ही बिल खोदकर से गड्ढानुमा जगह में पाए जाते हैं। जूलॉजिकल सर्वे आॅफ इंडिया, कोलकाता के एके सरकार ने वर्ष 1969 में टुंडी, धनबाद में इसे देखा था। डॉ. द्विवेदी के अनुसार इसे देखे जाने की यह पहली रिपोर्ट थी। इस प्रजाति के मेंढक आसाम, बंगाल, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक तथा बांग्लादेश में पाए जाते हैं। यह मेंढक बिना भोजन के 13 माह तक जीवित रह सकता है।
IMG-20190717-WA0026
 
क्यों कहते हैं बैलून फ्रॉग
इसका मुंह छोटा और कोणाकार होता है। बैलून फ्रॉक इसे इसलिए कहते हैं कि इसका फेफड़ा बड़ा होता है और अपने शरीर को हवा भरकर यह बैलून की तरह फुला लेता है। चूंकि यह दलदल वाली जगह में कई दिनों तक गड्ढे में छुपा रह सकता है और इसके लिए इसे काफी मात्रा में आॅक्सीजन के भंडारण की जरूरत होती है, इसलिये यह अपने फैसले में हवा भरकर अपने शरीर को गुब्बारे की तरह फुलाकर बड़ा कर लेता है। इसलिए इसे साधारण तौर पर बैलून मेंढक के नाम से जाना जाता है। शरीर फुलाने का एक अन्य कारण इसे खुद की सुरक्षा से जोड़कर भी देखा जाता है। डा. द्विवेदी के अनुसार सांप एवं अन्य हमलावरों से बचने के समय यह मेंढक अपने शरीर को फुलाकर बड़े आकार में कर लेता है, जिससे इसके शत्रु डर जाते हैं। यानी यह एक प्रकार से इसके बचाव का भी माध्यम है।
– Varnan Live Report.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.