झारखंड के लिए वरदान साबित होगी ONGC की CBM परियोजना

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प्राकृतिक ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में बड़ा कदम

विजय कुमार झा
बोकारो :
आॅयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) की सीबीएम (कोल बेड मिथेन) परियोजना प्रगति के पथ पर निरन्तर अग्रसर है। ओएनजीसी ने अगले चार वर्षों में बोकारो, झरिया, नॉर्थ कर्णपुरा तथा रानीगंज परियोजना के तहत 349 कूपों के वेधन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इनमें से बोकारो में 141, झरिया में 60, नॉर्थ कर्णपुरा में 68 तथा रानीगंज में 80 कूपों के वेधन की योजना है। बोकारो में 12, झरिया में 15 तथा रानीगंज में 3 कूप कोल बेड मिथेन गैस उत्पादन की स्थिति में पूरी तरह तैयार हैं। इसी वर्ष इन कूपों से सीबीएम का उत्पादन प्रारम्भ किया जायेगा और इसकी उपलब्धता से झारखंड के उद्योगों को एक नई दिशा मिलेगी। साथ ही झारखंड सरकार को राजस्व की प्राप्ति होगी और परिचालन क्षेत्र में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सीबीएम की यह परियोजना झारखंड के लिए वरदान साबित होगी और प्राकृतिक ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में ओएनजीसी का यह बड़ा कदम साबित होने वाला है।

एक प्रदूषणरहित गैस
उक्त जानकारी देते हुए ओएनजीसी के समूह महाप्रबंधक सह- सीबीएम परिसम्पत्ति के प्रबंधक आर पी पाण्डेय ने ‘मिथिला वर्णन’ से खास बातचीत में बताया कि कोल बेड मिथेन गैस एक प्रदूषणरहित, स्वच्छ ऊर्जा का अपरंपरागत स्रोत है, जो कोयले की परतों में समाहित रहता है। इसकी उत्पत्ति कोयले के बनने की प्रक्रिया के दौरान ही होती है। सीबीएम को ग्रीन हाउस गैस भी कहा जाता है और यह सामान्य कार्बन डाईआक्साइड (सीओ 2) की तुलना मे 30 गुना अधिक हानिकारक है। इसी वजह से वैश्विक स्तर पर कोयले की खदानों से पहले सीबीएम गैस को बाहर निकाल लिया जाता है, ताकि यह कोयला खनन के दौरान यह वायुमंडल में उत्सर्जित न होने पाये। सीबीएम को कोयला खनन से पूर्व बाहर निकालने का एक कारण यह भी है कि इससे कोयले का उत्खनन सुरक्षित हो जाता है और खनन के दौरान विस्फोट की संभावना बिल्कुल ही कम हो जाती है।

चार ब्लॉकों में अन्वेषण पूर्ण
श्री पाण्डेय ने बताया कि इसी को ध्यान मे रखते हुए देश में ही यह प्रक्रिया शुरू की गयी और इसी के तहत भारत सरकार ने विभिन्न सरकारी और निजी कंपनियों को सीबीएम अन्वेषण एवं उत्पादन के लिये सीबीएम ब्लॉकों का आवंटन किया है। इस क्रम में केन्द्र सरकार द्वारा आवंटित चार ब्लॉकों में ओएनजीसी क्रियाशील है, जिसमें अन्वेषण का कार्य पूरा हो चुका है और अभी सीबीएम के उत्पादन की प्रकिया पर तेजी से कार्य हो रहे हैं। 

झारखंड में 269 कूप-वेधन का लक्ष्य 
सीबीएम परिसम्पत्ति प्रबंधक श्री पाण्डेय ने बताया कि इस परियोजना के तहत झारखंड राज्य मे कुल 269 कूपों का वेधन किया जाना है, जिसके लिए सभी जरूरी कार्यवाही, सरकारी अनुमति प्राप्त की जा चुकी है। झारखंड राज्य के पांच जिलों बोकारो, धनबाद, हजारीबाग, चतरा और रामगढ़ में इन कूपों का निर्माण किया जाना है। इसके आलावा सरफेस फैसिलिटी का भी निर्माण किया जाएगा, जहां पर सीबीएम कूपों से निकलने वाली गैस पाइपलाइन के माध्यम से एकत्रित होगी और फिर इनका विपणन किया जाएगा।

चार वर्षों में 319 कूपों का ड्रिलिंग प्लान
श्री पाण्डेय ने बताया कि अगले चार वर्षों के अन्दर 319 कूपों का ड्रिलिंग प्लान है। इनमें बोकारो में वर्ष 2019-20 में 20, 20-21 में 48 तथा 21-22 में 45, झरिया में 2019-20 में 4, 20-21 में 24 तथा 21-22 में 23, रानीगंज में 21-22 में 24, 22-23 में 24 तथा 23-24 में 19 कूपों के वेधन का लक्ष्य निर्धारित है।

ईंधन के रूप में भी इस्तेमाल
उन्होंने बताया कि बोकारो में 12, झरिया में 15 तथा रानीगंज में 3 कूपों से सीबीएम का वाणिज्यिक उपयोग करने की स्थिति में हम तैयार हैं। सीएनजी की आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है और इसका उपयोग भी लोग वाहनों में ईंधन के रूप में कर रहे हैं। जबकि पाइप लाइन से रसोई गैस के रूप में इसका उपयोग जल्द ही किया जाने लगेगा। इसके लिए ‘गेल’ द्वारा पाइप लाइन बिछाने का कार्य तेजी से चल रहा है। 

लघु ऊर्जा के रूप में होगा उपयोगी
श्री पाण्डेय ने बताया कि सीबीएम का उपयोग लघु ऊर्जा के रूप में भी होगा। औद्योगिक क्षेत्र में केमिकल, फर्टिलाइजर, धातु उद्योग, सेरामिक उद्योग, ग्लास उद्योग आदि कारखानों में ऊर्जा के रूप में इसका उपयोग किया जा सकेगा। इसके अलावा सीजीडी (सीटी गैस विपणन) के तौर पर भी यह उपयोग में लाया जा सकता है।

पेयजल पूणर्त: सुरक्षित
श्री पाण्डेय ने बताया कि लोगों के बीच यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि सीबीएम के दोहन से पेयजल पर संकट उत्पन्न होगा, जबकि यह पूरी तरह गलत है। उन्होंने बताया कि ओएनजीसी के वेधन कार्य में जमीन की सतह से लगभग 50 मीटर से 200 मीटर नीचे तक स्टील पाइप तथा विशेष तकनीक से पाइप के बाहरी हिस्से और जमीन के बीच सीमेन्ट डालकर बंद किया जाता है। ओएनजीसी 700 से 1200 मीटर की गहराई में मौजूद कोयले की सतह से पानी निकालकर सीबीएम गैस का उत्पादन करती है। यह सतह पेयजल की सबसे निचली सतह से कम से कम 500 मीटर नीचे है। इसलिए जमीन के नीचे मौजूद पेयजल पूरी तरह सुरक्षित रहता है। अर्थात सीबीएम के उत्पादन से पेयजल को कोई खतरा नहीं है।

सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग 
श्री पाण्डेय ने यह भी बताया कि ओएनजीसी अपने परिचालन क्षेत्रों में अपने निगमित सामाजिक दायित्वों (सीएसआर) के तहत कार्य करने हेतु सजग है। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, स्वच्छता और युवाओं के कौशल विकास हेतु प्रशिक्षण आदि के माध्यम से आम जनता के जीवन स्तर को भी ऊपर उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन हम कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।

  • Varnan Live Report.

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