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  • राष्ट्रीय प्रतियोगिता : बोकारो की अक्षिता ने दिल्ली में बजाया काव्य-प्रतिभा का डंका

    राष्ट्रीय प्रतियोगिता : बोकारो की अक्षिता ने दिल्ली में बजाया काव्य-प्रतिभा का डंका

    श्रीराम राष्ट्रीय काव्यपाठ प्रतियोगिता में DPS, बोकारो की होनहार छात्रा ने बांधा समां

    बोकारो: दिल्ली पब्लिक स्कूल, बोकारो की दसवीं कक्षा की छात्रा अक्षिता पाठक ने 14 नवंबर को दिल्ली में अखिल भारतीय साहित्यक संस्था राष्ट्रीय कवि संगम द्वारा आयोजित ‘श्रीराम राष्ट्रीय काव्यपाठ प्रतियोगिता 2021’ के राष्ट्रीय फाइनल में काव्यपाठ कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। अक्षिता सहित फाइनल के सभी प्रतिभागियों को सम्मान-पत्र व 5100 (पांच हजार एक सौ) रुपये नगद पुरस्कार भेंटकर सम्मानित किया गया। प्रथम तीन स्थान पर रहे विजेताओं को विशेष पुरस्कार दिए गए।

    उल्लेखनीय है कि अक्षिता पाठक झारखंड राज्य की एकमात्र प्रतिभागी थी, जिसका चयन राष्ट्रीय फाइनल प्रतियोगिता के लिए हुआ था। राष्ट्रीय कवि संगम द्वारा राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक श्रीराम के विराट व्यक्तित्व पर केंद्रित रचनाओं को जन-जन के बीच पहुंचाने के उदेश्य से अखिल भारतीय स्तर पर चार चरणों में आयोजित श्रीराम राष्ट्रीय काव्यपाठ प्रतियोगिता में कुल 22000 (बाइस हजार) प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें से मात्र 21 प्रतिभागियों का चयन राष्ट्रीय फाइनल प्रतियोगिता के लिए हुआ था। देशभर से इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के फाइनल में स्थान बनाने वाले प्रतिभागियों में अक्षिता पाठक (बोकारो, झारखंड), श्वेतांशु कुमार मिश्र (गोरक्ष, उत्तर प्रदेश), मुदिता वशिष्ठ (चंडीगढ़), प्रेरणा मुकुंद (बेंगलूर, कर्नाटक), दिव्यांश झा (रायपुर, छत्तीसगढ़), सोमी मजुमदार (कोलकाता, पश्चिम बंगाल), गुरशीत कौर खनुजा (छत्तीसगढ़), अभिष्यंत (सोनीपत, हरियाणा), ऊषा शीना (चम्बा, हिमाचल प्रदेश), विभूति गुप्ता (पूर्वी दिल्ली), राजनंदिनी तिवारी (हावड़ा, पं. बंगाल), प्रतीक व्यास (मुंबई, महाराष्ट्र), प्रिया सांगवा (अजमेर, राजस्थान), पार्थ शर्मा (कोटा, राजस्थान), आस्था दुबे (नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश), उद्यांश पांडेय (गोरखपुर), साक्षी सिंह (रायबरेली, उत्तर प्रदेश), आरव शर्मा (हिमाचल प्रदेश), मानसी दुबे (मुंबई, महाराष्ट्र), सचिन त्रिपाठी (रीवा, मध्य प्रदेश) व पंकज राणा (नोएडा, उत्तर प्रदेश) शामिल थे।

    महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट, रोहिणी के भव्य ऑडिटोरियम में आयोजित ‘श्रीराम राष्ट्रीय काव्यपाठ प्रतियोगिता’ का फाइनल गणमान्य अतिथियों व ख्यातिप्राप्त कवियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि स्वामी चिदानंद सरस्वती (परमाध्यक्ष, परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश), विशिष्ट अतिथि डॉ नंदकिशोर गर्ग (कुलाधिपति, महाराजा अग्रसेन विश्वविद्यालय, हिमाचल), विनीत गुप्ता (अध्यक्ष, महाराजा अग्रसेन टेक्निकल एजुकेशन सोसाइटी), जगदीश मित्तल (अध्यक्ष, राष्ट्रीय कवि संगम), बाबा सत्यनारायण मौर्य (संरक्षक, राष्ट्रीय कवि संगम) सहित ख्याति प्राप्त कवि डॉ अशोक बत्रा, प्रवीण शुक्ल, संदीप द्विवेदी, दिनेश देवघरिया, महेश शर्मा, योगेंद्र शर्मा, पी के आजाद आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही। बता दें कि अक्षिता बोकारो के वरीय पत्रकार और सुप्रसिद्ध कलाकर व साहित्यकार अरुण पाठक व जयंती पाठक की सुपुत्री है।

    -Varnan Live Report.

  • Saffron Signifies Renunciation

    Saffron Signifies Renunciation

    I urge AIIA to avoid publishing any articles which are of such poor quality in content and credibility as this one titled “Saffron Terror and Hindutva Ideology” published on 20th October 21. The whole article reeks of prejudice, misinformation and wrong assertions or misquoted references from social media pages.

    I do not want to comment on the first paragraph which starts quoting Samuel Huntington. I consider this paragraph (which includes reference to Rohingya Muslims) as the one which is out-of-context to the topic title.

    The next paragraph starts with a conclusive statement amounting to sweeping generalization “In recent history, a genocide perpetrated against minorities in India has been overshadowed by crimes against humanity elsewhere in the world”. Where has the author got this conclusion from? Rest of the paragraph is only a rhetoric without any data. Did the author visit any place in India recently and experience anything of this sort?

    This paragraph is a genocide of the scientific research methodology.

    In the next paragraph the author mentions “The founding members of RSS were besotted with Benito Mussolini’s fascist ideology and aimed to implement his same approach to eliminate religious minorities in India”. Where did this conclusion come from? The referenced page does not have the word Benito or Mussolini? It appears the author has based the arguments on hearsay and; therefore, cites irrelevant references just for the sake of it?

    The author goes on to say , “RSS has abandoned the Indian national tricolour in favour of the saffron flag, known as bhagwa dhwaj”. This is false. This is the flag of the organization. RSS has their flag as much as every organization have their flag. The author is suggested to do some research and find out the flags of different political parties in India and in other democratic countries.

    The author should be questioned for her intellectual impropriety for making such un-informed conclusions.

    In the same paragraph the author mentions, “ According to RSS ideology, all religions in India other than Hinduism are considered foreign religions, and their adherents should either leave the country or convert to Hinduism in order to achieve the Hindu renaissance”. I challenge the author to provide the reference to this conclusion. The author should also suggest what is the process of “conversion to Hinduism” which she is referring to? This is a blatant falsehood that the author is promoting.

    The reference to Gujrat Pogrom in 2002 does not mention the point that Modi underwent a judicial and extra-judicial (through media) inquiry on the event for 15 years – and finally – all such inquiry exonerated him of any complicity. The Pogrom was an unfortunate event in Indian history as any of such events that have occurred in the country over centuries.

    The author cites a report from Assam and concludes that, “ When minorities, particularly Muslims, are assaulted by saffron terrorists, they are often forced to recite “Jai Shri Ram,” a slogan raised for the glorification of Hindu lord Rama, or else are offered a life-or-death choice: to accept Hinduism as their religion or be killed”  This conclusion at the start of the paragraph has no relationship with the reference cited at the end of the paragraph. The Assam event was an anti-encroachment drive by the local administration and reporting that as anti-religion event is a travesty of journalistic ethics.

    Citing such reports without understanding the context and portraying that as anti-religious is against any intellectual scholarship.

    The author says, “Even places of worship are not safe in today’s India”. She does not mention that Indian has more than 300,000 mosques[i]  and 10,000 churches[ii]. This is more than many Islamic and Christian countries in the world. Readers should also note that one of world’s oldest church and oldest mosques is in India because the Indian community has always been multi-faith.[iii] Babri Mosque was a temple which was converted to a mosque. This place been awarded to Hindu community through a legal process spanning 20 years.

     

    In summary, I would urge AIIA to protect its own credibility and credential by allowing such poorly researched and wrong articles to be published on their website.

    As for the author, I am happy to have a debate on all the points that she has mentioned.


    [i] List of mosques in India – Wikipedia

    [ii] number of churches in india – Google Search

    [iii] St. Thomas Syro-Malabar Church, Palayoor – Wikipedia, Cheraman Juma Mosque – Wikipedia

  • श्यामा माई मंदिर में काली पूजनोत्सव : भक्तिरस के साथ बही सुरसरिता

    श्यामा माई मंदिर में काली पूजनोत्सव : भक्तिरस के साथ बही सुरसरिता

    संवाददाता
    बोकारो : मैथिली कला मंच काली पूजा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित दोदिवसीय काली पूजनोत्सव का समापन शुक्रवार रात हो गया। नगर के सेक्टर- 2डी स्थित श्यामा माई मंदिर में आयोजित इस वार्षिक पूजनोत्सव के दौरान एक तरफ जहां मां काली की पूजा से आसपास का पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा, वहीं दूसरी ओर शहर के सुविख्यात कलाकारों की ओर से प्रस्तुत भक्तिपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम में गीत-संगीत की सुर सरिता बही। एक तरफ जहां ढाक ढोल और शहनाई की ध्वनि के साथ महाकाली के वैदिक मंत्र गुंजरित हो रहे थे, वहीं दूसरी ओर मैया की भक्ति के भजन गूंजते रहे। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कार्यक्रम का आनंद उठाया। पूजनोत्सव की शुरुआत पार्थिव शिवलिंग पूजन, हनुमत ध्वजदान व वेद पाठ से हुई। इसके साथ ही कुमारि-बटुक भोजन, हवन आरती सहित अन्य कार्यक्रम हुए। गुरुवार रात्रि शुरू हुआ मां काली का पूजन शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रहा।

    शुक्रवार प्रातः उषाकाल में महाआरती एवं महाभोग का वितरण किया गया। फिर मां काली का पूजन एवं अपराह्न बेला में कुमारि-बटुक भोजन के बाद संध्या में हवन व महाप्रसाद वितरण हुए। आयोजन की सफलता में केसी झा, सुनील मोहन ठाकुर, मिहिर कुमार झा, अविनाश झा, चंचल झा, शैलेंद्र मिश्र, सोनू, शिवशंकर झा, यूसी झा, विवेकानंद झा, कमलेश मिश्र, विजय कुमार मिश्र अंजू, मिहिर मोहन ठाकुर, गंगेश पाठक, राधेश्याम झा बाऊ, गोविंद झा, गौरीशंकर झा, बहुरन झा, चंदन झा, प्रदीप झा, सुनील चौधरी, राजनंदन ठाकुर, भृगुनंदन ठाकुर, सुदीप ठाकुर, कन्हैया, रवीन्द्र झा, सुभद्र चौधरी, मिंटू, ललित झा, हीरा आदि की अहम भूमिका रही।

    वर्ष 1984 में हुई थी पूजा की शुरुआत
    श्यामा माई मंदिर में वर्ष 1984 में काली पूजनोत्सव की शुरुआत हुई थी। इसकी  परिकल्पना बुद्धिनाथ झा व उनके मित्र दुर्गा चरण झा ‘दुर्धर्ष’ की थी। नेतृत्व बुद्धिनाथ झा ने किया। शुरुआत में स्व. अमरेन्द्र मिश्र पूजा करानेवाले और स्व. ब्रह्मानंद झा ( झपटू बाबू) पूजनकर्ता थे। बुद्धिनाथ झा के अनुसार आरंभ से लेकर उनदोनों के मृत्यु पर्यन्त यही क्रम रहा। इसके बाद राधेश्याम झा (बाऊ) पुजारी नियुक्त हुए अमरनाथ मिश्र, देवेन्द्र झा, अमरनाथ मिश्र, लक्ष्मऩ मिश्र, डॉ. जयानंद मिश्र, शंकर झा, महेशानंद झा, विनोद झा आदि का भी इसमें अहम योगदान रहा है। 

    आहे शरद सुहासिनी जय अम्बे…

    अरुण पाठक व अन्य कलाकारों ने रातभर बांधा समां
    श्यामा माई मंदिर में काली पूजनोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम में शहर के सुविख्यात कलाकार अरुण पाठक सहित अन्य कलाकारों ने रातभर अपने भजनों से समां बांधे रखा। शुरुआत अरुण ने गोसाउनिक गीत ‘जय-जय भैरवि…’ से की। इसके बाद उन्होंने ‘अपन मिथिला के गाथा हम सुनू एखने सुनाबै छी…’, ‘आहे शरद सुहासिनी जय अंबे..’, ‘माधव कते तोर करब बड़ाई…’, राम लखन सन पाहुन जिनकर…’, ‘ज्योत से ज्योत जगाते चलो…’ गीत गाए। अमर जी सिन्हा ने राग मालकोश में ‘जय जगदम्बिके…’, ‘अम्बे चरण कमल हैं तेरे…’, ‘ऐसा प्यार बहा दे मैया…’, प्रमोद कुमार ने ‘शंकर तेरी जटा से बहती है गंग धारा…’, ‘जेहने किशोरी मोरी तेहने किशोर हे…’ आदि, साधना चौधरी ने ‘सुनू मां जगजननी शरण हम आबि बैसल छी…’ भजनों की प्रस्तुति कर भरपूर सराहना बटोरी। वहीं वरिष्ठ संगीतज्ञ पं. बच्चन महाराज ने राग भैरवी में भवानी दयानी… की मनभावन प्रस्तुति से सबको मोहित कर दिया। कीबोर्ड पर राजेंद्र कुमार, ढोलक पर राकेश कुमार सिंह और आक्टोपैड पर मनोज कुमार ने संगत की। दूसरे दिन शुक्रवार को अरुण पाठक और रंजना राय ने भजन सुनाए। इस दौरान मंदिर परिसर में स्व. पं. अमरेंद्र मिश्र सभागार का अनावरण भी किया गया।

    – Varnan Live Report.

  • Intellectual Prostitution (Intellectitution) is rampant among liberal and secular Hindus

    Recently Prof Mohan J Dutta of Massey University, NZ published a paper called “Cultural Hindutva and Islamophobia” (White Papers – CARE (carecca.nz)) wherein he suggested that cultural elements in Hindutva are part of militant Hindutva and they need to be closely monitored by the local police. As per his assertion Hindu nationalism is organized around anti-muslim and anti-christian ideologies. In addition he talks about state sponsored violence leading to disenfranchisement under CAA and NRC act.

    In the same article he has given an example of Swami Chinmayanand who, he alleges, was a key architect of Vishwa Hindu Parishad and who has used Hindu symbolism to promote Hindu supremacy.

    I have not seen any paper or research work that is full of only lies and falsehood. Every conclusion from each reference that has been cited are wrong conclusions and wrongly referred.

    Cultural Hindutva[1] is a mis-nomer. The author tries to articulate this with different examples and different mores and codes being followed in India. Indian society is not a monolithic society to be defined through standard cultural dimensions[2] and self invented dogmas.  I have not found one standard definition of culture which will fit Hindu culture.

    The second issue that Mr Dutta raises is about portrayal of Muslims and Christians as invaders to promote Hindutva. My question to the author is whether he has read Indian History? Both Muslims and Christians came to India in multiple streams over the last two thousand years. These were streams of traders, streams of refugees and streams of invaders and proselytisers. The fact is that the biggest stream was that of proselytisers. Does the author suggest that providing a true picture of history to the people constitutes promotion of Islamophobia – or may be Christianphobia (which he has not mentioned)?

    The biggest lie that the author, who is a learned professor of an esteemed university, says in his paper is about the National Registry of Citizens (NRC) and Citizenship Amendment Act (CAA). The author has the audacity to say. “ state sponsored disenfranchisement of Muslims”. I challenge Prof Dutta to cite the clause which disenfranchises Indian Muslims? If he cannot, he should send a public apology on all the platforms where he has published his paper.

    He further states, and I quote, “ the ideology of Hindutva thrives on telling the story of Hindu supremacy”. I challenge Mr Dutta to cite one example of such storytelling where there things are not factual and which has been supported by people. The fact is that Hindu civilization has remained and continued on the earth from the times when both the other religions did not even exist. If stating fact constitutes supremacy, then that is clear sign of Islam and Christian inferiority. It is Hindutva which has assimilated Christ as one of their Gods[3]. Millions of followers of Paramhansa Yogananda worship Christ[4]. Prof Dutta, I suggest you some wider reading and a road trip across corners of India.

    Prof Dutta says that the mechanism of cultivation of pride among Hindus is through creation of “other” – and in the same sequence he also cites an example of the International Chinmaya Mission which creates “narratives of Hindu supremacy reflected in teachings of Vedas”. Either you are confused Prof Dutta or you are illiterate and have just cited something somewhere. Every Hindu grows up learning the sloka

    “Ayam nijah paroveti ganana laghuchetasam, udaracharitanantu vasudhaiva kutumbakam”

    अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्
    उदार चरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्

    This was quoted by Barrak Obama while addressing Indian Parliament. [5] I will not tell you the meaning of this to test if you have the basis knowledge of Hinduism or not. But, I will give you a hint. This sloka ensures that Hindus never create “other”.

    In the end, I want the following

    1. Either Mr Dutta come up with an apology or prove me any thing that I have said is wrong
    2. Government of India should raise a formal protest with Government of NZ for the allowing its institution for spreading lies about India, especially the following
      1. Using the word “state sponsored disenfranchisement of Muslims under NRC and CAA
      2. Using the word “Terrorist Organization” for Vishwa Hindu Parishad ( VHP)

    [1] Berti, D. Jaou, N., Kanungo, P. Cultural Entrenchment of Hindutva: Local Mediation and forms of convergence

    [2] Hofstede’s cultural dimensions theory – Wikipedia

    [3] Babaji, Yogi-Christ of Modern India | Self-Realization Fellowship (yogananda.org)

    [4] Role of Babaji, Jesus & Yogananda – Inner Path Outreach

    [5] “Ayam nijah paroveti ganana laghuchetasam, udaracharitanantu vasudhaiva kutumbakam.” Obama mentions this Sanskrit shloka, of course as an English translation, in his address to Indian Parliament. – Times of India (indiatimes.com)

  • … और ‘खुल’ गई ‘खिड़की’, डीआई ने किया शीला राय की पुस्तक का विमोचन

    … और ‘खुल’ गई ‘खिड़की’, डीआई ने किया शीला राय की पुस्तक का विमोचन

    कहा- हम जैसे इस्पात बनानेवालों के दिलों को छूती हैं ‘खिड़की’ की कहानियां

    बोकारो ः श्रीमती शीला राय शर्मा की पुस्तक “खिड़की” का विमोचन बोकारो इस्पात संयत्र के निदेशक प्रभारी अमरेन्दु प्रकाश ने रविवार को किया। 21 कहानियों का यह उनका पहला कहानी संग्रह दिल्ली के प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है। श्रीमती शीला राय शर्मा पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से बोकारो में शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं और नयी पीढ़ी के निर्माण में निरंतर जुटी हुई हैं। लगभग 80 वर्ष की उम्र में ऐसे संकलन का छपना बहुत ही विलक्षण उपलब्धि है। समारोह में श्रीमती रंजिता शरण सिंह, उप महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक ने पुस्तक के कुछ अंश पढ़े और कुछ कहानियों की विवेचना की, जबकि बोकारो की बेहतरीन गायिका श्रीमती नम्रता वर्मा ने ग़ज़ल प्रस्तुति की। हिन्दी साहित्य जगत की बहुचर्चित लेखिका श्रीमती मैत्रेयी पुष्पा ने लेखिका को भाषा के महीन रेशों से बुनी जाने वाली कहानी के लिए साधुवाद दिया। दूरदर्शन और आकाशवाणी के महानिदेशक रहे प्रसिद्ध कवि और लेखक लीलाधर मंडलोई ने पुस्तक को कहानीकार की अपनी संवेदना, कथ्य और कहन का संसार कहा। यह भी कि पुस्तक निजता का ऐसा हस्ताक्षर है, जो मौलिक है। रक्षा मंत्रालय के अवकाशप्राप्त निदेशक एवं चर्चित कवि उपेंद्र कुमार ने पुस्तक की भूमिका में लिखा है कि लेखिका के कहन में ऐसी किस्सागोई है, ऐसी मानवीय संवेदना है कि कहानी आगे बढ़ती जाती है। समारोह में पेन्टेकोस्टल असेंबली स्कूल की मुख्य शिक्षा अधिकारी श्रीमती रीता प्रसाद, निदेशक डी एन प्रसाद, प्रधानाध्यापिका श्रीमती करुणा प्रसाद, भारतीय स्टेट बैंक, बोकारो के क्षेत्रीय प्रबंधक सपन कुमार, धनबाद के क्षेत्रीय प्रबंधक नवीन कुमार, बोकारो इस्पात संयत्र के सीजीएम आलोक वर्मा, कृशन चंद के अलावा श्रीमती शीला के अनेक सहकर्मी, विद्यार्थी एवं परिवार के सदस्यगण उपस्थित थे। समारोह में कोविड मानकों का अनुपालन करते हुए सौ से कम लोग एकत्रित हुए।समारोह को संबोधित करते हुए बीएसएल के निदेशक प्रभारी अमरेन्दु प्रकाश ने कहा कि यह सभी बोकारोवासियों के लिए बहुत ही हर्ष और गर्व का विषय है। कहानियां इतनी बेहतरीन हैं कि हम इस्पात बनाने वालों के भी मन को छूती हैं। कार्यक्रम को श्रीमती रीता प्रसाद व श्रीमती रंजिता शरण सिंह ने भी संबोधित किया।

    अमेजन पर पहले ही दिन तीसरे स्थान पर

    इस अवसर बताया गया कि पुस्तक अमेजन, फ्लिपकार्ट और प्रभात पब्लिकेशन की साइट पर उपलब्ध है। अमेजन पर पहले ही दिन यह पुस्तक नयी रिलीज्ड पुस्तकों में तीसरे स्थान पर आ गई। शीघ्र ही यह पुस्तक बोकारो के मुख्य पुस्तक विक्रेताओं स्टूडेंट फ्रेंड, बुक फाइंड आदि के पास उपलब्ध होगी।

    – Varnan Live Report.

  • DPS में 33 स्कूलों के 65 शिक्षकों को मिला ‘गुरु वशिष्ठ शिक्षक सम्मान’

    DPS में 33 स्कूलों के 65 शिक्षकों को मिला ‘गुरु वशिष्ठ शिक्षक सम्मान’

    डीसी ने किया सम्मानित, कहा- विद्यार्थियों की रुचि व प्रतिभा के अनुरुप आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें शिक्षक

    बोकारो। दिल्ली पब्लिक स्कूल, बोकारो में शुक्रवार को डॉ एस राधाकृष्णन सहोदया स्कूल कॉम्प्लेक्स बोकारो के तत्वावधान में पांचवां गुरु वशिष्ठ श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार समारोह 2021 का आयोजन किया गया, जिसमें बोकारो जिले के 33 स्कूलों के 65 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बोकारो के उपायुक्त कुलदीप चौधरी थे। अन्य गणमान्य व्यक्तियों में डॉ राधाकृष्णन सहोदया स्कूल कॉम्प्लेक्स के अध्यक्ष ए एस गंगवार, उपाध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता, सचिव बिश्वजीत पात्रा, कोषाध्यक्ष फादर रेजी सी. वर्गीज, सांस्कृतिक सचिव सिस्टर कमला पॉल उपस्थित थीं।
    समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के बाद स्वागत गीत और स्कूल गीत से हुई। इस समारोह में दो मंत्रमुग्ध कर देने वाले नृत्य और एक आर्केस्ट्रा का प्रदर्शन हुआ। बच्चों ने गुरु महिमा पर विशेष प्रस्तुति दी। मुख्य अतिथि द्वारा शिक्षक पुरस्कार विजेताओं को प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह और शॉल देकर सम्मानित किया गया।
    समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री चौधरी ने कहा कि वर्तमान शिक्षा परिदृश्य में एक गुरु की भूमिका बहुआयामी है। विद्यार्थियों को पढ़ाने का तरीका रोचक व आनंदमय हो। शिक्षक विद्यार्थियों की रुचि व प्रतिभा के अनुरुप उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए सांस्कृतिक व खेल-कूद की गतिविधियों को जरूरी बताया। उपायुक्त ने कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना की और कहा कि बोकारो सहित पूरे झारखंड में शिक्षा का बेहतर माहौल है। डॉ राधाकृष्णन सहोदया स्कूल कॉम्प्लेक्स के कार्यों की भी उपायुक्त ने प्रशंसा की।

    एक प्राचार्य को सम्मानित करते डीसी कुलदीप चौधरी, साथ मौजूद डीपीएस के प्राचार्य एएस गंगवार व अन्य।

    समाज को सकारात्मक आकार देते हैं शिक्षक : गंगवार

    अपने संबोधन में डॉ राधाकृष्णन सहोदया स्कूल कॉम्प्लेक्स के अध्यक्ष सह डीपीएस बोकारो के प्राचार्य ए एस गंगवार ने कहा कि इस तरह के शिक्षक सम्मान समारोह के आयोजन से शिक्षकों के उत्कृष्ट योगदान को मान्यता मिलती है। शिक्षक एक सकारात्मक समाज को आकार देने और राष्ट्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए शिक्षकों को अपने कौशल में सतत अपडेट करना चाहिए। डॉ. राधाकृष्णन सहोदया स्कूल कॉम्प्लेक्स के उपाध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता ने सहोदया की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। अंत में धन्यवाद ज्ञापन सचिव बिश्वजीत पात्रा ने किया। कार्यक्रम का संचालन 12वीं की छात्रा मिताली सिंह, शिखर शर्मा, उत्कर्ष वैभव, रितिका व समृद्धि दुबे ने किया।

    – Varnan Live Report.

  • बड़ों के आशीर्वाद से मिली संगठन को सींचने की स्फूर्ति : मयंक

    बड़ों के आशीर्वाद से मिली संगठन को सींचने की स्फूर्ति : मयंक

    संवाददाता
    बोकारो ः भाजपा युवा मोर्चा बोकारो जिला के पूर्व जिला अध्यक्ष मयंक सिंह ने भाजपा के नवनियुक्त क्षेत्रीय संगठन महामंत्री मंत्री नागेंद्र नाथ से मिलकर उनका आशीर्वाद लिया। साथ ही इस अवसर पर नागेंद्र जी को शॉल एवं बुके देकर उन्हें सम्मान किया गया। इस असवर पर केंद्रीय आदिवासी कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता गणेश मिश्र का भी मार्गदर्शन प्राप्त किया। मयंक सिंह ने कहा आज का दिन काफी शुभ रहा, क्योंकि आज भाजपा संगठन के तीन माननीयों से आशीर्वाद लेने का अवसर मिलना एक अच्छा अनुभव प्रतीत होता है। साथ ही हमारे जैसे कार्यकर्ताओ के लिए सौभाग्य की बात भी है। इन सभी माननीयों के आशीर्वाद से मिली ऊर्जा को संगठन सींचने की स्फूर्ति मिलती है। साथ ही संगठन की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का आत्मबल भी मिलता है। इस अवसर पर भाजपा नेता महावीर सिंह, भाजयुमो बोकारो जिला के पूर्व महामंत्री कुंज बिहारी पाठक, भाजयुमो बोकारो जिला के पूर्व उपाध्यक्ष सचिन सिंह, सौरव वत्स आदि उपस्थित रहे।

    – Varnan Live Report.

  • चास नगर परिषद की पहली अध्यक्ष गंगा भालोटिया ने मेयर चुनाव के लिए दावेदारी ठोकी, कहा- फिर संवारेंगे शहर की सूरत

    चास नगर परिषद की पहली अध्यक्ष गंगा भालोटिया ने मेयर चुनाव के लिए दावेदारी ठोकी, कहा- फिर संवारेंगे शहर की सूरत

    बोकारो। चास नगर निगम चुनाव के लिए अब राजनीतिक सरगर्मी तेज होती दिख रही है। नए-पुराने सभी नेता अब एक बार फिर चुनावी मैदान में ताल ठोंक कर लड़ने के लिए लिए तैयार दिखने लगे हैं। इसी कड़ी में चास नगर परिषद की पहली अध्यक्ष गंगा देवी भालोटिया ने भी निगम के मेयर पद पर अपनी दावेदारी ठोंक दी है। गुरुवार को एक कार्यक्रम के दौरान श्रीमती भालोटिया ने बाकायदा इसका ऐलान कर दिया। बतौर नगर परिषद अध्यक्ष अपने निर्विवाद कार्यकाल और अपनी कार्य संबंधी उपलब्धियों की बदौलत उन्होंने अपने नाम के अनुरूप ही चास में एक बार फिर विकास की गंगा बहाने की प्रतिबद्धता जताई है।
    पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने चास नगर निगम का महापौर पद आधी आबादी, यानी महिलाओं के लिए आरक्षित करने पर झारखंड सरकार के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि चास शहरी निकाय में वास्तविक लोकतांत्रिक प्रणाली वर्ष 2010 में शुरू हुई थी। इसके पहले प्रशासनिक पदाधिकारियों के जिम्मे नगर के विकास का दायित्व था। 2010 में चास नगर परिषद का प्रथम अध्यक्ष बनने का गौरव उन्हें शहरवासियों ने दिया, जिसके लिए वह उनके आभारी हैं।
    उन्होंने कहा कि 2010 से 2015 तक उनका कार्यकाल पूरी तरह अविवादित रहा। इस अवधि में उन्होंने चास में कई मूलभूत नागरिक सुविधा संबंधी योजनाओं को धरातल पर उतारा। चास जलापूर्ति योजना के प्रथम चरण का काम पूरा करना हो या स्ट्रीट लाइटों से चास को जगमग बनाना हो, चाहे न्यूनतम बजट में साफ- सफाई की व्यवस्था हो, ऐसे कई काम उन्होंने अपने कार्यकाल में पूरे किये। उन्होंने जातिवाद से अलग हटकर आजीवन लोगों के लिए समर्पित रहने की कटिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से सभी जाति, धर्म की महिलाओं के सम्मान के लिए लड़ाई लड़ती रही हैं।

    पिछला चुनाव महिला रिजर्व न होने पर नहीं लड़ा चुनाव

    श्रीमती भालोटिया ने कहा कि वर्ष 2015 में महापौर का प्रत्याशी बनने के लिए लोगों ने उनके ऊपर दबाव बनाया, लेकिन नगर निगम महापौर का पद महिलाओं को समर्पित न करने के कारण उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया। अब चूंकि इस बार यह पद महिलाओं के लिए आरक्षित हो गया है और समाज के हर तबके के लोगों ने उन्हें चुनाव में लड़ने का दबाव बनाया, इसलिए वह फिर आगे आईं। समर्थकों के इस अनुरोध के कारण उन्होंने स्वयं को महापौर पद का एक उम्मीदवार घोषित किया है।

    चास को व्यावसायिक शहर और ट्रांसपोर्ट नगर बनाना है Dream Project

    उन्होंने कहा कि चास नगर निगम को अविवादित कार्यस्थल बनाना और प्रजातांत्रिक तरीके से वार्ड पार्षद सहित समाज के सभी तबके के लोगों का सहयोग प्राप्त कर बगैर किसी दबाव में निष्पक्ष और स्वतंत्र निर्णय लेकर निगम के कार्य को सुचारु रूप से चलाना उनका लक्ष्य है। शहरी क्षेत्र में मूलभूत नागरिक सुविधा, जैसे- साफ-सफाई, पेयजलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट आदि सेवाओं को सुदृढ़ करना उनकी प्राथमिकता होगी। लोगों के सामर्थ्य के अनुसार टैक्स प्राप्त कर चास शहर को व्यावसायिक बनाना और ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना उनका ड्रीम प्रोजेक्ट होगा। उन्होंने इस चुनाव में समस्त चासवासियों से सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की है। इस दौरान श्रीमती भालोटिया के साथ मुख्य रूप से काजल भालोटिया, पुष्पा अग्रवाल, देवकी अग्रवाल, सुभाष केजरीवाल, ललित भालोटिया, नरेश लोधा, मनोज कुमार, प्रतीक भालोटिया सहित अन्य कई लोग मौजूद थे।

    Varnan Live Report.

  • Pro-कबड्डी के लिए पुनेरी पलटन टीम में सौरभ के चयन से खिलाड़ियों में खुशी, ऐसे दी बधाई

    Pro-कबड्डी के लिए पुनेरी पलटन टीम में सौरभ के चयन से खिलाड़ियों में खुशी, ऐसे दी बधाई

    संवाददाता
    बोकारो ः प्रो- कबड्डी सीजन -8 के लिए पुनेरी पलटन टीम में शामिल होने वाले बोकारो जिला के कबड्डी खिलाड़ी सौरभ कुमार का चयन सम्पूर्ण झारखण्ड सहित बोकारो जिला के लिए गौरव की बात है। सौरभ के चयन से बोकारो के खेल जगत में हर्ष का माहौल व्याप्त हैl उक्त बातें बोकारो जिला कबड्डी संघ के अध्यक्ष गोपाल ठाकुर ने कही। श्री ठाकुर ने जिला कबड्डी संघ की ओर से सौरभ को बधाई देते हुए कहा कि यह उस खिलाड़ी की मेहनत का इनाम है। आने वाले दिनों में हम सभी सौरभ के खेल प्रदर्शन का आनंद प्रो कबड्डी में ले सकेंगे।

    विदित हो कि प्रो कबड्डी के अब तक संपन्न हुए किसी भी लीग में झारखण्ड से किसी खिलाड़ी का नहीं हुआ है। सौरभ एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनका चयन झारखण्ड से पहली बार हुआ है। सौरभ को बधाई देने वालों में जिला कबड्डी संघ के महासचिव बिपिन कुमार सिंह, तेजनारायण, संजय कुमार, शंकर, जियालाल पासवान, राज किशोर प्रसाद, प्रेम प्रकाश, सतेंद्र, सागर, बलराम, सीता, अमीषा, अदिति, आरती, स्नेहलता आदि के नाम शामिल हैं। इनलोगों ने सौरभ की तस्वीर को सांकेतिक रूप से मिठाई खिलाकर बधाई दी और खुशियां जताईं।

    – Varnan Live Report.

  • RSS कार्यकर्ताओं ने पूजन के साथ लिया प्रकृति-रक्षा का संकल्प

    RSS कार्यकर्ताओं ने पूजन के साथ लिया प्रकृति-रक्षा का संकल्प

    बोकारो ः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), बोकारो महानगर की ओर से प्रकृति वंदन कार्यक्रम के तहत प्रकृति पूजा की गई। संघ के झारखंड प्रांत प्रचारक दिलीप ने अपने मार्गदर्शन में कहा कि हमारा विश्वास है कि सभी मनुष्य, सभी जीव यहां तक की पेड़ पौधे भी हमारे लिए पूजनीय हैं। मगर प्रकृति के दोहन से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ गया है, पेड़ पौधे की पूजा-अर्चना कर उसकी रक्षा करने का संकल्प लें। उन्होंने बताया कि पर्यावरण तभी सुरक्षित रहेगा, जब जल संरक्षण, प्लास्टिक-थर्मोकोल मुक्त एवं पेड़ पौधे युक्त धरती को बनाये रखने का संकल्प हम सभी लेंगे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ झारखंड प्रांत कार्यवाह संजय कुमार, सह क्षेत्र प्रचारक राम कुमार, क्षेत्र शारीरिक प्रमुख मनोज, प्रांत बौद्धिक प्रमुख ज्वाला तिवारी, प्रांत मार्ग प्रमुख अरविंद त्रिपाठी, प्रांत शारीरिक प्रमुख मोहन, धनबाद विभाग प्रचारक राजीव कान्त, देवघर विभाग प्रचारक गोपाल शर्मा, हजारीबाग विभाग प्रचारक कुणाल कुमार, साहेबगंज विभाग प्रचारक बीगेन्द्र, पलामू विभाग प्रचारक सत्य प्रकाश, रांची विभाग प्रचारक व्यापक, सह प्रचारक मंटू, गुमला विभाग प्रचारक अजय, जमशेदपुर विभाग प्रचारक आशुतोष, बोकारो महानगर प्रचारक शम्मी कुमार के साथ नरेन्द्र कुमार, पंकज कुमार, राजकुमार सिंह, रंजीत वरणवाल, धीरेन्द गोप, संजय कुमार, रतन, हरिओम एवं महानगर कार्यकारिणी के अलावे अनेकों स्वयंसेवक कार्यकर्ता उपस्थित थे