हम्माम में सब …….

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मोदी सरकार ने इस बार जनता के सामने ईमानदार सरकार होने का दावा किया है और इस बात को एक बड़ी चुनावी मुद्दे के रूप में प्रस्तुत किया है |  वास्तविकता क्या है ये तो कोई नहीं जानता है पर ये सरकार ईमानदार नजर तो जरूर आती है | जनता को क्या इस बात से खुश होना चाहिए या ये भी सोचना चाहिए की क्या ये सरकार वाकई में ईमानदार है और आगे भी ईमानदार रहेगी?


ये तो सही  है की इन पांच सालों में सरकार और पार्टी के लोगों के खिलाफ कोई भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे हैं।  मोदी सरकार ईमानदार दिखती तो जरूर है। और ये जरूरी है की सरकार ईमानदार हो भी और ईमानदार दिखे भी।  कहीं ये पढ़ा था की ईमानदार परन्तु अप्रभावी शाशक से ज्यादा अच्छा है की शाशक थोड़ा भ्रष्ट हो पर प्रभावी हो | ईमानदार और प्रभावी शाशक तो आदर्श है।  तो मोदी सरकार अभी तक तो ईमानदार के साथ प्रभावी भी है। सो भारत की जनता खुशनसीब है।

सवाल ये है की क्या इस सरकार की शुचिता और स्वक्षता बरकरार रहेगी आने वाले दिनों में। 

महाभारत के अंत काल की एक कहानी याद आ रही है।  त्रेता युग का अंत हो चूका था और कलयुग का प्रारम्भ नहीं हो पाया था। काऱण ये था कि राजा परीक्षित बड़े ही सत्यवान और प्रतापी थे जिस की वजह से उनके राज में असत्य, अनाचार, अधर्म  की कोई जगह ही नहीं थी।  कलयुग को आने के लिए कोई स्थान ही नहीं मिल रहा था। तो एक एक दिन कलयुग ने  एक ब्राह्मण का भेष बनाया और राजा के पास पहुँच गया।  राजा ने पूछा तो उस ने सारी बात बता दी।  भला इतने न्याय पसंद राजा इस बात को कैसे अनदेखा कर सकते थे ? राजा का ये भी कर्त्तव्य था की वो यह सुनिश्चित करे की प्रकृति का नियम निर्विघ्न चलता रहे। सो राजा परीक्षित ने कलयुग से कहा की जब तक उनका शाशन है  तब तक कलयुग किसी भी तीन प्रकार के जगह में रह सकता है – सोने में, मदिरा में या, वो स्थान जहाँ वेश्यावृति हो। कलयुग को कोई ऐसा स्थान नही मिला जहाँ मदिरा सेवन हो रहा हो और न ही कोई ऐसा स्थान मिला जहां वेश्यावृत्ति हो रही हो – ऐसा था राजा परीक्षित का राज्य, सत्य  धर्म पर आधारित।  सो कलयुग को कोई और उपाय नहीं मिला और उस ने राजा के स्वर्ण मुकुट में अपना स्थान बना लिया।  अगले दिन राजा शिकार को गए और रह भटक गए।  प्यास से पीड़ित उन्होंने एक साधू को तप में लीन देखा और उन से पानी माँगा।  साधू को ध्यान में लीन थे सो कोई जवाब नहीं दिया।  राजा को क्रोध हुआ और उन्होंने में पास पड़े एक मृत साँप को तलवार से उठा कर साधू के गले में लपेट दिया और आगे चले गए।  कुछ देर बार साधू का पुत्र आया और उस ने अपने पिता के गले में लपेटा सर्प देखा तो गुस्से में श्राप पढ़ दिया की  जिस ने ऐसा कर्म किया है उसे सर्प राज तक्षक सात दिनों के अंदर मृत्यु लोक पहुंचा देगा।  श्राप सत्य हुआ और राजा परीक्षित की मृत्यु हुई और कलयुग का प्रारब्ध हो गया। 

स्वर्ण और स्वर्ण मुकुट धन और सत्ता शक्ति का परिचायक है और इन दोनों का संयम कलयुगी  शक्तियों को बढ़ावा देती है और उनको पोषती हैं। मुकुट सत्ता द्वारा दिए गए जिम्मेदारी का प्रतीक है 


कलयुग में आएं तो हम देखते हैं की स्वतंत्रता के तुरंत बाद नेहरू जी की सरकार भी सत्ता और  धन लोलुप मंत्रियों और अधिकारियों के बेमानी से नहीं बच पायी।  उस  के बाद तो सत्तर सालों तक सरकारों ने मुकुट और स्वर्ण ( स्वर्ण मुकुट = सत्ता और धन ) का उपयोग एक दूसरे का हित साधने के लिए किया।  सो मोदी सरकार ने मुकुट ( सत्ता = जिम्मेदारी) तो धारण किया है पर अभी तक ,ऐसे कोई ऐसा प्रामाणिक वाकया सामने नहीं आया है जिस से ये कहा जा सके की इस सरकार में किसी ने स्वर्ण मुकुट का धारण किया है।  पर सवाल ये है की अगले पांच साल भी क्या मुकुट पर स्वर्ण नहीं चढ़ेगा ?  मोदी जी आप तो संत हैं और राजर्षि राजा जनक की तरह आप कीचड़  में कमल की तरह हैं पर क्या आप ये सुनिश्चित  कर सकते हैं की भारत के सजनीतिक  परिपेक्ष में कोई कमल अगले पांच सालों में मुर्झायेगा नहीं और कोई मुकुट स्वर्ण मुकुट बन जाने की कोशिश नहीं करेगा ?  
मोदी जी मैं आपके सरकार द्वारा किये कुछ निर्णयों पर आपका ध्यान दिलाना चाहता हूँ और आपको आगाह करना चाहता हूँ की ये निर्णय बहुत सारे मुकुटधारियों में स्वर्ण जटित मुकुट की लालसा पैदा कर देंगे।  

सब से पहले मैं आपका ध्यान वित्त विधेयक 2018 की ओर दिलाना चाहता हूँ जिस में आपकी सरकार ने विदेशी कंपनियों को राजनैतिक पार्टियों को फण्ड करने की छूट दे दी और इतना ही नहीं उस को किसी भी ऑडिट या पूछ ताछ से अलग रखा।  सोचिये की विदेशी शैल कंपनियों को आपने  क्या हथियार दे दिए हैं।  दुसरा आपने भारत में इलेक्टोरल फण्ड को वैध कर दिया है और उस के डोनर को अज्ञात  रखा है। मुझे ये अंदेशा हो रहा की  ये दोनों पालिसी आपको अगले पांच सालों में कहीं परेशानी न दें।  
ये सोचिये की एक N.R.I है और  उस ने कहीं विदेश में, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका या और कहीं जैसे मॉरिशस में एक कंपनी खोली और 49 % किसी विदेशी कंपनी या विदेशी व्यक्ति को दे दिया। ये कंपनी उस व्यक्ति के लिए ही खोली गयी क्योंकि वो  है एक आर्म्स डीलर। इस N.R.I ने भारत में एक ब्रांच खोला और किसी राजनैतिक पार्टी को दान दिया।  इस दान का कोई ऑडिट नहीं होगा।  तो फिर हमारे आर्म्स डीलर ने जाकर डील किया और किक बैक का पैसा इलेक्टोरल बांड में दे दिया। सभी कुछ गुमनाम और सभी कुछ कानूनी।  इन पैसों का कोई ऑडिट नहीं और इलेक्टोरल बांड का कोई नाम नहीं।  अब हो सकता है की कुछ लोग शुरू में इस का इस्तेमाल करें पर कुछ ही दिनों में  सब लोग इस विधा में माहिर हो जाएंगे। मोदीजी आप देखेंगे की कुछ ही दिनों में आपके हर मुकुट पर सोने की परत चढ़ जायेगी और जैसे कोयले के व्यापार में कालिख लग ही जाती है वैसे ही आप भी इस स्वर्ण मुकुट के प्रभाव से अछूते नहीं रहेंगे।  कोई न कोई आपके गले में सर्प फाँस डाल ही जाएगा।   मेरे ख़याल में सब से पहले तो आप ये विदेशी फंडिंग के ऑडिट वाले प्रावधान को ख़तम कीजिये और दूसरा इलेक्टोरल बांड में गुमनामी ख़तम कीजिये।  मुझे इस बात का आभास है की राजनीती राजधर्म से चलती है और सामान्य जिंदगी सामान्य धर्म से।  आप राजधर्म के हिसाब से भी सोचिये की इन निर्णयों से आपको कोई व्यक्तिगत लाभ हो या ना हो – और आपने व्यक्तिगत लाभ के लिए कभी कोई काम किया भी नहीं है – पर इस से राजनीतिक लाभ लोगों को जरूर मिलेगा और लोग इस का फायदा जरूर निकालेंगे|

मुझे लग रहा है की आपके इस कार्यकाल में कोई राफेल कांड नहीं हुआ, मगर यदि ये दोनों प्रावधान बदले नहीं गए तो अगले कार्यकाल में आप की सरकार पर बड़ी दाग लगने की सम्भावना बहुत ज्यादा है क्योंकि सत्ता बेमानी को जन्म देती है और पूर्ण सत्ता पूर्ण लम्पटता। 

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