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  • BSL में निदेशक पर प्रभारी ने दिलाई संविधान-रक्षा की शपथ

    BSL में निदेशक पर प्रभारी ने दिलाई संविधान-रक्षा की शपथ

    बोकारो। बोकारो स्टील प्लांट में गुरुवार को संविधान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर इस्पात भवन परिसर में आयोजित एक समारोह में बीएसएल के निदेशक प्रभारी अमरेन्दु प्रकाश ने उपस्थित समूह को भारत के संविधान के उद्देशिका की शपथ दिलाई। इस कार्यक्रम में अधिशासी निदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. एके सिंह, अधिशासी निदेशक (परियोजना) एवं अतिरिक्त प्रभार (कार्मिक एवं प्रशासन) आर. कुशवाहा, अधिशासी निदेशक (सामग्री प्रबंधन) वीके पाण्डेय, अधिशासी निदेशक (संकार्य) अतनु भौमिक, अधिशासी निदेशक (वित्त एवं लेखा) डीके साहा, विभिन्न विभागों के मुख्य महाप्रबंधकगण, अन्य वरीय अधिकारी व कर्मी उपस्थित थे। समारोह के दौरान उप महाप्रबंधक (संपर्क एवं प्रशासन) शान्ता एच. सिन्हा ने संविधान दिवस की पृष्ठभूमि की जानकारी भी दी। संविधान दिवस के अवसर पर बीएसएल में अपराह्न एक वेबिनार का आयोजन भी किया गया, जिसमें झारखण्ड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता इन्द्र्जीत सिन्हा ने भारतीय संविधान के मूल सिद्धांत और मूल्यों पर जानकारी दी।

    – Varnan Live Report.

  • अमोल पालेकर के जन्मदिन पर कलाकारों ने ऐसे सजाई सुरों की महफ़िल

    अमोल पालेकर के जन्मदिन पर कलाकारों ने ऐसे सजाई सुरों की महफ़िल

    बोकारो। फिल्म अभिनेता अमोल पालेकर के जन्मदिन के उपलक्ष्य में बीती शाम सेक्टर- 12 में संगीत संध्या का आयोजन हुआ। इस अवसर पर गायक अरुण पाठक, रमण कुमार व अमोद श्रीवास्तव ने अमोल पालेकर के फिल्मों के यादगार नग्मों को प्रस्तुत कर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। अरुण पाठक ने कहा कि 70 व 80 के दशक में अमोल पालेकर की कई फिल्में चर्चित हुईं उनमें चितचोर, घरौंदा, गोलमाल, छोटी सी बात, बातों बातों में आदि प्रमुख हैं। उनकी फिल्मों के संगीत काफी लोकप्रिय हुए। अरुण पाठक ने ‘जब दीप जले आना जब शाम ढले आना…’, ‘गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा…’, ‘दो दीवाने शहर में…’, ‘तू जो मेरे सुर में सुर मिला ले…’, रमण कुमार ने ‘आज से पहले आज से ज्यादा…’, ‘जीवन में हम सफारी…’, अमोद श्रीवास्तव ने ‘आनेवाला पल जानेवाला है…’, ‘सुनिए कहिए, कहिए सुनिए…’, ‘कहां तक ये मान को…’ आदि गीतों की सुमधुर प्रस्तुति की।

    – Varnan Live Report.

  • बैंकिंग सुधार के नाम पर जमापूंजी से खिलवाड़ की है साजिश : दास

    बैंकिंग सुधार के नाम पर जमापूंजी से खिलवाड़ की है साजिश : दास

    बोकारो। मजदूर अधिकारों औऱ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण के मुद्दे को लेकर गुरुवार को आहुत मजदूर संगठनों की हड़ताल का बोकारो में व्यापक असर देखा गया। एक तरफ जहां औद्योगिक संगठनों से जुड़े श्रमिक संगठनों की ओर से जगह-जगह प्रदर्शन किए गए, वहीं बैंक-बीमा के लोग भी आंदोलन में शामिल हुए। कई विस्थापित संगठनों ने भी इस हड़ताल को अपना समर्थन दिया। बोकारो जिले के बैंकों में भी पूर्ण हड़ताल रही। बैंकों में कार्यरत अन्य संगठनों द्वारा हड़ताल का नैतिक समर्थन किया गया था। फलस्वरूप पूर्णतया कामकाज बंद रहा एवं बैंकों में ताले लटके रहे। बैंक कर्मचारियों ने अपनी-अपनी शाखाओं के सामने खड़े होकर नारेबाजी की। उन्होंने सरकार से जनविरोधी श्रम सुधार कानूनों को वापस लेने, बैंकिंग सुधार कानूनों को वापस लेने, बैंकों का निजिकरण न करने, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को और सुदृढ़ करने, कारपोरेट घरानों द्वारा ऋण लेकर बैंको का पैसा नहीं चुकाने से हो रही आम जनता के जमा पूंजी पर हो रही लूट पर रोक लगाने के लिए कड़े कानून का प्रावधान किए जाने सहित अन्य मांगों पर प्रकाश डाला। नारेबाजी में महिला कर्मचारियों की भी अच्छी उपस्थिति देखी गई। इस अवसर पर आॅल इंडिया बैंक इम्पलाईज एसोसिएशन से संबद्ध झारखण्ड प्रदेश बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन के संयुक्त सचिव तथा बोकारो जिला संयोजक एसएन दास ने कहा कि जहां भारत सरकार द्वारा तथाकथित बैंकिंग सुधार के नाम पर आम जनता की जमापूंजी से खिलवाड़ करने की साजिश करते हुए बैंकों के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दुसरी तरफ काॅरपोरेट घरानों को बैंकों का लाइसेंस देकर उन्हें बैंकिंग व्यवसाय हस्तान्तरित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आम जनता के जमा पैसों का सही संरक्षक सरकार ही हो सकती है न कि कोई निजी पूंजीपति। अतः हम अंतिम दम तक सरकार के बैंकों के निजीकरण के मंसूबों को विफल करने हेतु प्रयासरत एवं संघर्षरत रहेंगे। हड़ताल की सफलता में एसएन दास सहित राजेश ओझा, राजेश श्रीवास्तव, एसपी सिंह, अजीत सिन्हा, विभाष झा, अरूण कुमार, प्रदीप झा, अनिल कुमार, पीके श्रीवास्तव, सुदीप पांडेय, राकेश मिश्रा, माणिक दास, अजय जरीका, सागर आचार्या, प्रेम कुमार, नीरज तिवारी, मनमीत कौर, सरिता कुमारी, रेखा कुमारी आदि मौजूद रहे।

    – Varnan Live Report.

  • संतोष सिंह की अगुवाई में किसान मोर्चा अध्यक्ष का जोरदार स्वागत

    संतोष सिंह की अगुवाई में किसान मोर्चा अध्यक्ष का जोरदार स्वागत

    बोकारो। भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पवन साहु के बोकारो आगमन पर उनका भव्य स्वागत प्रदेश भाजपा नेता सह समाजसेवी संतोष सिंह ने अपने समर्थकों के साथ जैनामोड़ बोकारो में किया। साथ ही श्री साहु ने गांगजोरी में सभा को संबोधित किया। उन्होंने केंद्र द्वारा पारित क़ृषि बिल को किसान हित में बताते हुए लोगों को उससे दिग्भ्रमित न होने की सलाह दी और राज्य की हेमन्त सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताया। संतोष सिंह के साथ उपस्थित लोगों में राजू रंजन साहनी, पंकज कुमार, आदित्य साहु, विनय अग्रवाल, संतोष शर्मा, नवीन सिंह आदि ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया।

  • वेदांता इलेक्ट्रोस्टील ने 250 कुष्ठ रोगियों के बीच किया सूखा राशन व सेफ्टी किट का वितरण

    वेदांता इलेक्ट्रोस्टील ने 250 कुष्ठ रोगियों के बीच किया सूखा राशन व सेफ्टी किट का वितरण

    संवाददाता

    बोकारो। कोरोना ने देश में एक बहुत ही बड़ी महामारी का रूप ले लिया है। इस महामारी से बचने के लिए पूरा देश साथ मिलकर आवश्यक कदम उठा रहा है। लोगों में महामारी को कम करने के लिए वेदांता इलेक्ट्रोस्टील लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में इलेक्ट्रोस्टील ने सोमवार को राहत और पुनर्वास के अन्तर्गत भारतीय उद्योग परिषद (सीआईआई) के साथ मिलकर बाबा आम्टे कुष्ठरोग केंद्र के 80 कुष्ठ रोगियों में 30 दिन का सूखा राशन और सैनिटाइजर किट तथा भोजुडीह स्थित कुष्ट रोग सेन्टर, चंदनकियारी में 170 कुष्ठ रोगियों में सूखा राशन, साबुन और मास्क  का वितरण किया।
    इसके साथ ही इलेक्ट्रोस्टील के सीएसआर विभाग ने कोविड-19 से बचने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया, जिसके तहत लोगों से सामाजिक दूरी बनाये रखने और घरों से बाहर न निकलने का आह्वान किया गया।
    – Varnan Live Report.
  • Is this end of United States

    New York April 2020 : More than two hundred thousand sick, thousands dying every day, sports fields and parks have been converted into make-shift hospital beds, more than half of city’s doctors and nurses are sick and other half exhausted, un-trained volunteers are asked to look after sick, trucks are used to carry dead bodies in body bags and buried in mass graves in the outskirts of the city. Rest of the country is no better. More than a million sick and more than hundred thousand dead with sick people lying on the streets looking for medicine. America, the greatest and mightiest country in the world begging for medicines from all over the world. All of us know that this is not from an apocalyptic movie but a reality unfolding.

    The big question – is this still the best place to be in the world? Has the mightiest country in the world which is kneeling on its knees and pleading for help from all across the world accepted defeat? This is the place which boasted of best brains in the world. This country was safe and secure from any possible threat from any possible direction in the universe. What happened – Just a Virus? History will remember that the might extracted from nucleus could not save the greatest nation from a tiny virus coming from far off China.

    Will United States be ever able to stand on its feet again or are we going to see an uni-polar world dictated by China? This crises has been created and curated to impact all of United State’s allies in Europe and all of them are on the brink of survival. Are we in the midst of third world war which is already won by China without firing a single missile?

    Every crises creates opportunities. This one also provides an opportunity for all freedom loving democratic peoples of the world to come together and oppose totalitarianism even if it means some more cost for stuff that they buy. It is an opportunity to realize that nations character is more important than nation’s money and nations of similar character should come together. The task is cut-out for the new President of the Unites States in year 2021. The person is going to inherit a devastated country, a decimated group of allies and infinite queues of un-employed people. The person has to figure out whether the country needs to be built on immediate commercial gains or on the basis of values which have shaped history. For the new president of United States, global re-alignment based on similarity of national ethos should be of one of the top agenda. How soon this can happen will define how quickly the new global world order takes shape.

  • Perfect time to declare Emergency , Mr Modi

    तीन दिवस तक पंथ मंगाते रघुपति सिंधु किनारे 

    बैठे पढ़ते रहे चाँद अनुनय के प्यारे प्यारे 

    बैठे पढ़ते रहे चाँद अनुनय के प्यारे प्यारे 

    उत्तर में जब एक नाद भी उठा नहीं सागर से 

    उठी धधक पौरुष आग  राम के शर से 

    सिन्दु देह धार त्राहि त्राहि करता आ गिरा शरण में 

    चरण पूज दासता ग्रहण की बंधा मूढ़ बंधन में 

    क्षमा शोभती उस भुजंग को जिस के पास गरल हो 

    उस को क्या जो दंतहीन विष रहित विनीत सरल हो 

                                          रामधारी सिंह दिनकर 

    मोदी जी, जब राम के राम के अनुनय और विनय को अहंकारी सागर ने अनसुना कर दिया और अपनी अंगड़ाइयां बेशर्मी  लगता रहा, तो आप कौन हैं जो आप इस देश की जनता के मूढ़ व्यवहार को  देख कर भी उन से अनुनय और विनय कर रहे हैं | एक तरफ आप पुरे देश को कोरोना के कहर से बचाने के लिए दिन रात एक किये हुए हैं और दूसरी ओर कुछ जनता आपके देश की कह रही है की ये कोरोना उनके लिए उनके मालिक ने भेजा है | आप उनसे विनती कर रहे हैं जो ये मान कर चल रहे हैं की उनको इस देश का बुरा करना है चाहे उस में उनकी जान भी चली जाये | आपने तो वो बात सुनी ही होगी की एक मुर्ख और ईर्ष्यालु पडोसी अपने पडोसी का बुरा करने के लिए तपस्या करता है | जब वरदान देने का समय आता है तो भगवान् कहते हैं की वो जो भी मांगेगा उस के पडोसी को उस इस दुगुना मिलेगा | इस बात पर उस बन्दे ने अपनी एक आँख फोड़ लेने की मांग कर डाली | आपके देश में एक तबका वही है | और आप उस तबके से विनती कर रहे हैं की वो ऐसे वरदान नहीं मांगे | ये वो तबका  जिन्होंने ने डॉक्टरों पर हमला किया, उन पर थूका है | ऐसे जाहिलों से विनती कर के आप क्या हासिल करना चाहते हैं|  क्या हो गया है आपको, कहाँ है वो छप्पन इंच का सीना ?

    ये युद्ध है और समय कम है | अगर अभी जरा भी चूक हो गयी तो ये कोरोना पुरे देश में इस तरह से फैलेगा की आप पुरे देश में लाशों की टीलों पर अनाथ बच्चो और विधवा औरतों को रोते हुए पाएंगे | आपके पास सबको साथ लेकर चलने का समय नहीं है | इस देश में अभी भी तमाम राजनीती के लोगों को ये समझ नहीं आया है की ये कोरोना न जाति देखता है न धर्म, न पद न पहचान | अगर ये फैलेगा तो बवंडर की तरह फैलेगा और सब को लील जायेगा | ऐसे समय में राज्य सरकारों और केंद्र सरकार में सामंजस्य बैठने का समय नहीं है | लोगों को समझने का समय नहीं है | ये समझ लीजिये की ये युद्धः है और आप युद्ध धर्म का पालन जीजिए | 

    आपातकाल की घोषणा कीजिये, सारे देश में एक शाशन लगाइये और सेना को आपदा में सहयोग के लिए बुला लीजिये | मूर्खों से सख्ती से निपटिए | डॉक्टरों और नर्सों पर हमला करना इस स्थिति में देश द्रोह है | आज इस युद्ध में डॉक्टर और नर्स हमारे सैनिक हैं और इन पर हमला देश पर हमला है | ऐसे लोग देशद्रोही हैं और उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए | 

    आपकी विनती और मनुहारी आपकी कमज़ोरी समझी जा रही है | 

    फ़र्ज़ करें की कोरोना वाकई में फ़ैल गया और अगले छह महीने तक तांडव करता रहा | तो छह महीने के बाद देश की आहत जनता ये नहीं पूछेगी की मोदी जी ने सबको साथ लेकर फैसला लिया था या नहीं, अपितु जनता यही कहेगी की मोदी जी ने सही समय पर सही फैसला नहीं लिया और लाखों के संहार की जिम्मेदारी आप पर ही आएगी | 

  • धर्म और सत्य की विजय का प्रतीक है होली : संतोष

    धर्म और सत्य की विजय का प्रतीक है होली : संतोष

    बोकारो। ‘होली न केवल रंग और उमंग का त्योहार है, बल्कि असत्य की सत्य और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है।’ यह कहना भाजपा नेता सह समाजसेवी संतोष सिंह का। प्रेस को जारी अपने एक बयान में सतोष ने चास, बोकारो के साथ-साथ समस्त झारखंडवासियों और पूरे देश के लोगों को होली की शुभकामनाएं और बधाई दी।
    उन्होंने कहा कि होली जीवन में खुशियों के सभी रंगों को बिखेरने वाला अद्वितीय पर्व है। यह सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करता है, जिसमें धर्म, संप्रदाय और समाज के सभी तबके के लोग पूरे उत्साह के साथ भाग लेते हैं। 
    भाजपा के वरिष्ठ नेता 15 सूत्री समिति सदस्य सह राष्ट्रीय जनमंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अरविंदर सिंह खुराना ने भी देशवासियों को होली की मुबारकबाद देते हुए सभी को सेफ होली मनाने का संदेश दिया। कहा कि यह पर्व ऊंच-नीच, जात-पात, हर तरह के भेदभाव को दूर करने की प्रेरणा देता है। इन नेताद्वय के अलावा रोहित शारदा और महिला नेता नेहा शर्मा ने भी सभी को होली की शुभकामनाएं दी हैं।

    – Varnan Live Report.

  • संघर्ष की जीवंत प्रेरणा हैं डॉ. अशोक सिंह : खेत-खलिहान से राष्ट्रपति पुरस्कार तक का सफर एेसे किया तय

    संघर्ष की जीवंत प्रेरणा हैं डॉ. अशोक सिंह : खेत-खलिहान से राष्ट्रपति पुरस्कार तक का सफर एेसे किया तय

    बोकारो नहीं नहीं, पूरे बिहार-झारखंड और देश में शिक्षा जगत मं डॉ. अशोक सिंह का नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। बोकारो स्थित चिन्मय विद्यालय को एक नए मुकाम पर पहुंचाने वाले, सीबीएसई स्कूलों में गणित की स्वलिखित पुस्तकों की तूती मनवाने डॉ. अशोक ने जो मुकाम पाया, वह यूं नहीं मिल जाता। जीवन का हरेक पल कैसे जिया जाता है और कैसे संघर्ष व आत्मविश्वास के बल पर एक सफल शख्सियत पाई जा सकती है, आइए जानते हैं खुद राष्ट्रपति पुरस्कार सरीखे कई विश्वप्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजे गए डॉ. अशोक सिंह की कलम से-

    पल पल जीना ही जिंदगी, जिस दिन थक गया, समझो थम गया

    अ सल जिंदगी वही है, जब हम इसके पल-पल का सदुपयोग करें। यानी पल-पल जीना ही असली जिंदगी है। जिस दिन हम थक गए और खुद को थका-हारा समझकर, लाचार और असहाय मानकर रुक गए तो समझिए हमारी जिंदगी, हमारे हौसले, हमारे इरादे वहीं रुक गए। मैं अगर अपनी बात करूं तो जिस हालात में मैं पला-बढ़ा, सीधे वहां से सफलता के उस मुकाम पर पहुंच पाना इतना सहज नहीं, जहां आज ईश्वर ने मुझे प्रतिष्ठापित किया है। मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के एक छोटे से गांव में हुआ। एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में जन्म लेने के बाद विश्वस्तरीय अच्छी शिक्षा-दीक्षा पाना अपने-आप में एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा। लेकिन, ईश्वर के आशीर्वाद, माता-पिता के पूर्ण सहयोग और विपरीत परिस्थितियों से हर पल आगे बढ़ने की सीख लेते हुए मैंने अपने लक्ष्य की ओर अपना कदम आरंभ से ही बढाना शुरू कर दिया था। खेत-खलिहान में पिता के साथ काम करते हुए मैंने सरकारी स्कूल से ही स्कूली शिक्षा पूरी की। स्कूल-कॉलेजों में मेधावी छात्र के रूप में अपनी शिक्षा पाई।

    बचपन से ही मेरे रुचि अध्यापन के क्षेत्र में रही और गणित मेरा पसंदीदा विषय रहा। एमएससी में कॉलेज टॉपर होने के बाद गणित में मेरा पीएचडी शोधपत्र भारत, कनाडा, ग्रेट ब्रिटेन, बेल्जियम, फ्रांस से निकलने वाले कई अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित किए गए। अध्यापन के क्षेत्र में विशेष रुचि के कारण मैंने बैंक की नौकरी तक छोड़ दी। बच्चों के साथ मेरा जुड़ाव हमेशा से ही बना रहा, क्योंकि बच्चे ही कल की जिंदगी है और उज्जवल भारत के भविष्य भी। उन्हें अगर सही दिशा दे दी तो समझिए देश को एक अच्छा मार्गदर्शन मिल गया। इसके साथ ही मैंने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। कभी कई कोस पैदल चलकर तो कभी मीलों साइकिलों पर चलकर बिना थके, बिना रुके अपने अध्यापन के दायित्व को पूरा किया। इसी कड़ी में कक्षा एक से 12वीं तक के लिए मैंने गणित की 13 पुस्तकें लिखीं, जिनमें से मैथ्स बूस्टर और सृजन मैथमेटिक्स देश के कई सीबीएसई सम्बद्ध स्कूलों में पढ़ाई जाती हैं। काफी वर्षों तक सीबीएसई तथा भारत सरकार के मानव संसाधन विकास विभाग की ओर से प्रदत्त कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन भी मैंने किया। पिछले 36 वर्षों से जारी मेरे अध्यापन-कार्य के परिणामस्वरूप आज कई छात्र दुनिया के कोने-कोने में उच्च पदों पर आसीन हैं और आज भी जुड़े हुए हैं। इसी क्रम में मुझे दर्जनों राष्ट्रीय पुरस्कार के लायक समझा गया और नवाजा भी गया। इनमें भारत सरकार के राष्ट्रपति पुरस्कार के साथ-साथ ब्रिटिश काउंसिल की ओर से ग्लोबल टीचर एक्रीडिटेशन अवार्ड, सीबीएसई टीचर अवार्ड आदि उल्लेखनीय हैं।

    तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से पुरस्कार प्राप्त करते डॉ. अशोक सिंह (फाइल फोटो)।


    आज अपनी 62 साल की आयु में भी मैं बच्चों से घिरा रहता हू। जिस दिन बच्चे आपको अपने माता-पिता से भी बढ़कर सम्मान देने लग जाएं, समझिए आप उसी दिन एक सफल शिक्षक हो गए।
    मेरा यह भी मानना है कि बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाना और उन्हें संस्कारित करना एक बड़ी उपलब्धि और चुनौती है। Spoon Feeding से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि उनके आचार-विचार और व्यवहार को प्रदूषित होने से बचाना। एक बार बच्चे जागृत और प्रेरित हो गए तो फिर उन्हें साधारण से असाधारण और असाधारण से महान बनने से कोई नहीं रोक सकता। परिवार, समाज और देश का भविष्य आज के बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा पर निर्भर करता है। बच्चों को भी चाहिए कि सफलता के लिए वे असफलताओं से घबराए नहीं, बल्कि असफलता की सीढ़ी उससे चारगुना सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। साथ ही, Short Cut का रास्ता न बनाएं, क्योंकि सच्ची कामयाबी के लिए कोई भी शॉर्टकट नहीं होता।
    चलते-चलते निदा फ़ाज़ली की चार पंक्तियों के साथ अपने विचारों को यहीं विराम देता हूं-
    अपना गम लेके कहीं और न जाया जाए,
    घर में बिखरीं हुई चीजों को सजाया जाए।
    घर से मस्जिद है बहुत दूर, चलो यूं कर ले
    किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए।
    हरिओम!

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    धन्यवाद।