Author: Mithila Varnan

  • खत्म होगा अब मां जानकी का वनवास!

    खत्म होगा अब मां जानकी का वनवास!

    • विजय कुमार झा –

    क्या आपने कभी सोचा है कि जिस देवी के त्याग और समर्पण की गाथाएं सदियों से भारत की आत्मा में गूंजती रही हैं, जिनकी पूजा हर घर में होती है, उनका अपना ही जन्मस्थान दशकों तक उपेक्षित रहा? यह एक ऐसी विडंबना थी, जो हर आस्थावान हृदय को कचोटती थी। जब अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर आकार ले रहा है, तो उनकी अर्धांगिनी माता सीता का उनके जन्मस्थान पर एक भव्य मंदिर न होना, एक प्रतीकात्मक ‘वनवास’ जैसा था। परंतु, शुक्रवार को यह ‘वनवास’ खत्म होने की उम्मीद की किरण लेकर आया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जब सीतामढ़ी के पुनौरा धाम की पावन मिट्टी पर माता जानकी के भव्य मंदिर की आधारशिला रखी, तो यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था। यह था एक युग का अंत और एक नए युग का आरंभ। यह था मिथिला की अस्मिता का पुनर्स्थापन, नारी शक्ति के गौरव की पुन: स्थापना।

    शिलान्यास के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए श्री शाह ने कहा भी, ‘आज का दिन सिर्फ एक मंदिर के निर्माण की शुरूआत नहीं है, बल्कि उस प्रतीकात्मक वनवास का भी अंत है, जो माता जानकी की जन्मस्थली ने वर्षों तक भोगा है। जब अयोध्या में प्रभु राम का भव्य मंदिर बन रहा है, तो स्वाभाविक रूप से हर राम भक्त के मन में यह सवाल उठता था कि माता सीता का क्या? आज हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि अब दोनों मंदिर एक साथ मिलकर भारत की सांस्कृतिक चेतना को और भी मजबूत करेंगे।’ यह एक ऐसा क्षण था, जब हर कोई भावुक था। आंखों में नमी थी और होठों पर जय सियाराम का उद्घोष। यह कोई साधारण मंदिर नहीं होगा, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों के उस विश्वास का प्रतीक होगा कि त्याग और तपस्या कभी व्यर्थ नहीं जाती। माता जानकी ने अपने जीवन में जो कष्ट सहे, जो बलिदान दिए, यह मंदिर उनके प्रति सच्ची श्रद्धा का एक स्थायी स्मारक होगा।

    मिथिला का खोया हुआ गौरव वापस
    यह मंदिर सिर्फ ईंटों और पत्थरों का ढांचा नहीं होगा, बल्कि यह मिथिला की समृद्ध संस्कृति, उसकी परंपराओं और उसके गौरव का जीवंत प्रतीक होगा। यह मंदिर मिथिला को फिर से उसी पहचान से जोड़ेगा, जो सदियों पहले सीता-जनक की भूमि के रूप में थी। यह एक ऐसा तीर्थस्थल बनेगा, जो न केवल श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा, बल्कि शोधकर्ताओं और कला प्रेमियों को भी मिथिला की समृद्ध विरासत को जानने का अवसर देगा।

    अयोध्या और पुनौरा धाम: एक ही कहानी के दो अध्याय
    अयोध्या का राम मंदिर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्शों का प्रतीक है, तो पुनौरा धाम का जानकी मंदिर आदर्श नारी, त्याग और सहनशीलता की देवी माता सीता के सम्मान का प्रतीक होगा। ये दोनों मंदिर मिलकर ‘सियाराम’ के उस अटूट रिश्ते को दर्शाएंगे, जो भारत की संस्कृति का आधार है। अयोध्या में राम की वापसी हुई, और अब पुनौरा धाम में सीता की गरिमा की पुनर्स्थापना होगी। यही भारत की संस्कृति है – जहां राम और सीता का स्थान समान है।

    प्रेरणास्रोत बनेगा मंदिर
    यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनेगा। यह उन्हें सिखाएगा कि जीवन में त्याग और समर्पण का क्या महत्व होता है। यह सिखाएगा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहना कितना जरूरी है। और सबसे बढ़कर, यह हमें यह याद दिलाएगा कि जहां-जहां आस्था है, वहां-वहां चमत्कार होते हैं। आज सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में जो कुछ हुआ है, वह एक ऐसा ही चमत्कार है, जो दशकों की प्रतीक्षा के बाद संभव हुआ है। यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि एक युग का गौरव है।

  • Smart Meter पर ‘महायुद्ध’ का बिगुल! 13 अगस्त को DVC मुख्यालय पर ‘हल्ला बोल’, गांव-गांव से उमड़ेगी जनता

    Smart Meter पर ‘महायुद्ध’ का बिगुल! 13 अगस्त को DVC मुख्यालय पर ‘हल्ला बोल’, गांव-गांव से उमड़ेगी जनता

    गैर राजनीतिक संगठन- नागरिक अधिकार मंच के बैनर तले दिग्गज नेताओं का हुआ जुटान, भरत बने संयोजक

    कुमार संजय
    बोकारो थर्मल।
    DVC द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों के विरोध में बोकारो थर्मल के लोगों ने अब कमर कस ली है। मंगलवार को गोविंदपुर डी पंचायत में प्रबुद्ध नागरिकों, पंचायत प्रतिनिधियों, यूनियन सदस्यों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि स्मार्ट मीटरों का विरोध और अन्य स्थानीय मांगों को लेकर अब एक गैर-राजनीतिक मंच, ‘नागरिक अधिकार मंच’ के बैनर तले जोरदार आंदोलन किया जाएगा।

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    बैठक की अध्यक्षता कर रहे भरत यादव को सर्वसम्मति से इस मंच का संयोजक चुना गया। आंदोलन की रणनीति और नेतृत्व के लिए एक कोर कमेटी का भी गठन किया गया है, जिसमें ज़िला परिषद सदस्य शहजादी बानो, मुखिया अंजू आलम, चंद्र देव घांसी, विकास सिंह, चंदना मिश्रा, विश्वनाथ महतो, कविता कुमारी, पंचायत समिति सदस्य (पंसस) अख्तर अंसारी, अमित घांसी, रंजू सिंह, अनीता देवी, बेबी रजक, जानकी महतो, रामेश्वर साव, मोती लाल महतो, रवि नंदन पंडित, मंजूर आलम, अनवर आलम, नरेश महतो, संजय सिंह, नागेश्वर महतो, मो. मनीरुद्दीन, जोगेंद्र गिरी, श्रवण सिंह, सुरेश प्रसाद, आर.एस. पांडेय, मो. शाहजहां, ब्रज किशोर सिंह, नवीन कुमार पाठक, राजदेव सिंह, कौशलेंद्र तिवारी, बृज किशोर सिंह, सदन सिंह, अनिल सिंह, सीमा देवी, सुषमा कुमारी, रिंकू सिंह, जोधन नायक, मो. हसीब, मंजर और सुनील महतो जैसे प्रमुख लोग शामिल हैं। ये इस आंदोलन को एक व्यापक जनाधार देंगे।

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    मंच ने 13 अगस्त को अपने आंदोलन की शुरुआत का ऐलान किया है। इस दिन डी पंचायत सचिवालय से सभी पंचायतों के ग्रामीण एक विशाल रैली के रूप में निकलेंगे। हाथों में बैनर और पोस्टर लिए यह रैली सीधे डीवीसी के पावर प्लांट के मुख्य गेट पर पहुंचेगी, जहां एक जोरदार प्रदर्शन और नुक्कड़ सभा आयोजित की जाएगी। इसके बाद, आंदोलनकारी अपनी मांगों का ज्ञापन डीवीसी प्रबंधन को सौंपेंगे।

    मंच ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इस लड़ाई को सांसद और विधायक के सहयोग से और भी धारदार बनाया जाएगा। आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार को ही नागरिक अधिकार मंच ने अपनी मांगों का ज्ञापन गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, बेरमो विधायक कुमार जयमंगल, बेरमो एसडीएम, थाना प्रभारी, डीवीसी के डीजीएम और सीआईएसएफ के डिप्टी कमांडेंट को भी सौंप दिया है। बैठक का समापन मुखिया चंदना मिश्रा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

    • Varnan Live Report.
  • 10 साल से फरार खूंखार नक्सली पांडेय मांझी गिरफ्तार, पेंक नारायणपुर पुलिस ने दबोचा

    10 साल से फरार खूंखार नक्सली पांडेय मांझी गिरफ्तार, पेंक नारायणपुर पुलिस ने दबोचा

    बोकारो थर्मल: पेंक नारायणपुर थाना क्षेत्र में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे कुख्यात नक्सली पांडेय मांझी को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया है। भाकपा माओवादी से जुड़े इस नक्सली की गिरफ्तारी से क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियान को और मजबूती मिली है।

    पुलिस के अनुसार, जमुनिया गांव का निवासी ढ़ेना मांझी का पुत्र पांडेय मांझी पिछले 10 सालों से फरार चल रहा था। उसके खिलाफ बेरमो सिविल कोर्ट तेनुघाट से नक्सली वारदातों और आर्म्स एक्ट के तहत स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी था। सोमवार को मिली गुप्त सूचना के आधार पर पेंक नारायणपुर पुलिस ने जाल बिछाकर उसे धर दबोचा।

    गिरफ्तारी के बाद पांडेय मांझी को तेनुघाट उपकारा भेज दिया गया है। नक्सली गतिविधियों में उसकी संलिप्तता को देखते हुए पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है। उसकी गिरफ्तारी को क्षेत्र में अमन-चैन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    • Varnan Live Report.
  • बिजली के Smart Meter के विरोध में दौड़ी ‘नई Current’ … दुकानदारों ने भी खोला मोर्चा, 13 को महाआंदोलन की तैयारी

    बिजली के Smart Meter के विरोध में दौड़ी ‘नई Current’ … दुकानदारों ने भी खोला मोर्चा, 13 को महाआंदोलन की तैयारी

    बिजली बिना पिघल गई हजारों की आइसक्रीम, सब-स्टेशन के इंचार्ज पर अनदेखी रवैये का आरोप

    कुमार संजय
    बोकारो थर्मल:
    बोकारो थर्मल में स्मार्ट मीटर के खिलाफ विरोध अब एक नई ‘करंट’ पकड़ चुका है। अब तक सिर्फ आम लोग ही परेशान थे, लेकिन अब डीवीसी केंद्रीय मार्केट के दुकानदारों ने भी इस लड़ाई में खुलकर मोर्चा खोल दिया है। इस बार इस चिंगारी को नाराज दुकानदारों ने हवा दी है, जिन्होंने सोमवार को एक बैठक कर 13 अगस्त को एक विशाल आंदोलन में शामिल होने का संकल्प लिया है। उनकी मांगें स्पष्ट हैं और तेवर बेहद कड़े।

    बैठक में मौजूद पूर्व बोकारो जिलाध्यक्ष भरत यादव के सामने दुकानदारों ने अपनी दर्दनाक कहानी बयां करते हुए डीवीसी प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए। एक दुकानदार ने रोते हुए बताया कि स्मार्ट मीटर की वजह से उसकी दुकान की बिजली दो दिनों तक कटी रही, जिससे उसके फ्रीजर में रखी लगभग दस हजार रुपये की आइसक्रीम पिघलकर बह गई। वहीं, एक अन्य दुकानदार का कहना था कि स्मार्ट मीटर का बिल दो दिनों में ही दो हजार रुपये आ गया, जो पूरी तरह से मनमाना है।

    दुकानदारों ने आरोप लगाया कि सबस्टेशन इंचार्ज राकेश कुमार उनकी समस्याओं को सुनने तक को तैयार नहीं हैं। इसके अलावा, बाजार की दुकानों की जर्जर हालत, बरसात में टपकती छतें और परिसर में फैली गंदगी भी उनके गुस्से का एक बड़ा कारण है।

    पूर्व जिलाध्यक्ष भरत यादव ने इस मौके पर एक जोरदार बयान देते हुए कहा, “बिजली सप्लाई भी आवश्यक सेवा के दायरे में आती है और डीवीसी प्रबंधन बिना किसी सूचना के बिजली नहीं काट सकता।” उन्होंने सभी दुकानदारों से 13 अगस्त को डी पंचायत सचिवालय से पावर प्लांट तक निकलने वाली विशाल रैली में सैकड़ों की संख्या में शामिल होने का आह्वान किया।

    इस रैली के माध्यम से डीवीसी प्रबंधन को एक मांग पत्र सौंपा जाएगा, जिसमें मुख्य रूप से स्मार्ट मीटर की नीति को वापस लेने की मांग होगी। यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। मांग पत्र में यह भी कहा गया है कि निजी कॉलोनियों और दुकानों से स्मार्ट मीटर हटाकर पुराने पोस्टपेड मीटर लगाए जाएं, झारखंड सरकार की तरह 200 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाए और निर्बाध बिजली की व्यवस्था की जाए।

    इस बैठक में मार्केट कमेटी के अध्यक्ष अनिल सिंह के साथ-साथ परमजीत सिंह, मो तौहिद, विकास प्रसाद और शकील अंसारी सहित कई अन्य दुकानदार मौजूद थे। अब देखना यह होगा कि दुकानदारों का यह कड़ा रुख डीवीसी प्रबंधन को क्या कदम उठाने पर मजबूर करता है।

    • Varnan Live Report.

  • DVC के फैसले ने लगाई आग… ‘Smart Meter’ के खिलाफ विद्युत-युद्ध का शंखनाद; 13 को “Power Show”

    DVC के फैसले ने लगाई आग… ‘Smart Meter’ के खिलाफ विद्युत-युद्ध का शंखनाद; 13 को “Power Show”

    कुमार संजय

    बोकारो थर्मल : बोकारो थर्मल की विद्युतनगरी में DVC प्रबंधन के ‘स्मार्ट मीटर’ लगाने के फैसले ने आग लगा दी है। रविवार को गोविंदपुर ‘डी’ पंचायत के सचिवालय में बुलाई गई एक बैठक में, प्रबुद्ध लोगों, पंचायत प्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस ‘जनविरोधी’ कदम के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर दिया। यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि डीवीसी की कथित मनमानी के खिलाफ एक ‘विद्युत-युद्ध’ का शंखनाद है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। बैठक की अध्यक्षता मुखिया चंदना मिश्रा ने की, लेकिन मुख्य वक्ता के रूप में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष भरत यादव ने डीवीसी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पहले डीवीसी से बिना मीटर के बिजली मिलती थी, बाद में लोगों की सुविधा के लिए मीटर लगाए गए। लेकिन अब डीवीसी प्रबंधन ‘स्मार्ट मीटर’ के नाम पर लूट मचाने पर आमादा है। भरत यादव ने दावा किया कि इन मीटरों से ‘अनाप-शनाप बिल’ आ रहे हैं, जिससे आम आदमी, पेंशनर और मजदूर वर्ग त्रस्त है।

    यादव ने सबसे बड़ी विडंबना यह बताई कि इन मीटरों की शिकायत सुनने वाला स्थानीय स्तर पर कोई नहीं है। सुनवाई के लिए कोलकाता या बेंगलुरु के अधिकारियों से संपर्क करना पड़ता है, जो एक आम आदमी के लिए असंभव है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “यह बेहद शर्मनाक है कि जो कर्मचारी, मजदूर और अधिकारी दिन-रात मेहनत करके बिजली उत्पादन करते हैं, उनकी बिजली भी स्मार्ट मीटर के कारण कभी भी काट दी जाए। यह कामगारों के स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने सीधे-सीधे झारखंड सरकार की तर्ज पर डीवीसी प्रबंधन से 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने की मांग भी कर डाली।

    बैठक में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी एकजुट संघर्ष का आह्वान किया। जिप सदस्य शहजादी बानो ने गोविंदपुर के अन्य पंचायतों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह वे एकजुट होकर डीवीसी को जवाब देते आए हैं, उसी तरह गोविंदपुर डी के लोगों को भी एकजुट होना होगा। भाजपा नेता श्रवण सिंह और कांग्रेस नेता रिंकू सिंह ने भी स्मार्ट मीटर के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि 12 अगस्त को डीवीसी प्रबंधन एक बार फिर स्मार्ट मीटर कनेक्शन वालों की बिजली काटने की तैयारी में है। इस संभावित कार्रवाई को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। बैठक में सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि यदि 24 जुलाई की तरह दोबारा बिजली काटी गई, तो स्थानीय स्तर पर जोरदार विरोध होगा। सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया कि 13 अगस्त को गोविंदपुर डी पंचायत सचिवालय से एक विशाल रैली निकाली जाएगी, जो सीधे पावर प्लांट गेट तक जाएगी। वहां DVC की स्मार्ट मीटर नीति के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और प्रबंधन को एक मांग पत्र सौंपा जाएगा। इस आंदोलन को लेकर एक कमेटी का भी गठन होगा, जो बेरमो विधायक कुमार जयमंगल और सांसद सीपी चौधरी से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराएगी।

    भाजपा नेता श्रवण सिंह सहित रिंकू सिंह, सुषमा कुमारी, पेंशनर सुरेश प्रसाद आदि ने भी अपने विचार रखे। मौके पर उपमुखिया देवंती देवी, वार्ड सदस्य राजेश दुबे, कौशल सिंह, रजनी नैयर, राजकुमारी देवी, नागेश्वर प्रजापति, रामेश्वर साव, भैरव महतो, धरम सिंह, इंदरजीत सिंह, रवि नंदन पंडित, महेश कुमार, मुन्ना चौबे, सोनी मिश्रा, नीतू ठक्कर, केके तिवारी, राजलक्ष्मी, एके देव, सुशील सिंह, रणबिजय सिंह, पशुपति सिंह, अरुण गुप्ता, अनिल पासवान, विशाल सकूजा, प्रदीप मजुमदार, मकसूद, नागेश्वर साव सहित सैकड़ों पंचायतवासी मौजूद रहे।  धन्यवाद ज्ञापन मोतीलाल महतो ने किया।

    बहरहाल, इस आंदोलन ने बोकारो थर्मल में एक उबाल ला दिया है। क्या डीवीसी प्रबंधन इस जन आक्रोश के आगे झुकेगा या यह मामला एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष का रूप लेगा? फिलहाल, सबकी नजरें 13 अगस्त की रैली पर टिकी हैं।

    • Varnan Live Report.

  • वाह रे DVC! खुद की विद्युतनगरी में ही बिजली का संकट… रक्षाबंधन पर भी छाया अंधेरा

    वाह रे DVC! खुद की विद्युतनगरी में ही बिजली का संकट… रक्षाबंधन पर भी छाया अंधेरा

    9 ट्रांसफार्मर खराब, 3 साल से लटका पड़ा काम, जनता में भारी आक्रोश

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    कुमार संजय
    बोकारो थर्मल:
    जिस शहर को “विद्युतनगरी” के नाम से जाना जाता है, आज उसी की अपनी बिजली व्यवस्था आईसीयू में पहुंच चुकी है। DVC (दामोदर वैली कॉरपोरेशन) की आवासीय कॉलोनियों में बिजली की लचर सप्लाई ने यहां के लोगों का जीना हराम कर दिया है। जहां एक तरफ पूरा देश शनिवार को रक्षाबंधन के पावन पर्व की खुशियां मना रहा था, वहीं बोकारो थर्मल की जनता बिजली कटौती के अंधेरे में बैठी थी।

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    यह कोई मामूली बात नहीं है। त्योहार के दिन दोपहर 1 बजे से बिजली कटी और देर शाम तक बहाल नहीं हुई। जब विभागीय अभियंता राकेश कुमार से सवाल किया गया, तो हमेशा की तरह “तकनीकी खराबी” का रटा-रटाया जवाब दे दिया गया। लेकिन, यह सिर्फ तकनीकी खराबी नहीं है, यह तो प्रबंधन की घोर लापरवाही और उदासीनता का जीता-जागता सबूत है।

    डीवीसी पावर प्लांट से कॉलोनियों को बिजली देने के लिए चार फीडर हैं, लेकिन जानकर हैरान हो जाएंगे कि इनमें से दो फीडर पिछले तीन साल से खराब पड़े हैं! जी हां, तीन साल से! यानी, आधे शहर का लोड सिर्फ दो फीडरों पर है। नतीजतन, लोड बढ़ते ही बिजली बार-बार कट जाती है। हद तो तब हो गई जब एक और ट्रांसफार्मर जल गया और उसका लोड भी बचे-खुचे दो फीडरों पर डाल दिया गया। आखिर यह कैसी व्यवस्था है? लोड बढ़ने से बिजली बार-बार कट रही है।

    कॉलोनी के सबस्टेशन में हालात और भी बदतर हैं। यहां पर एक-दो नहीं, बल्कि पूरे नौ ट्रांसफार्मर खराब पड़े हैं। इंचार्ज और विद्युत प्रबंधक राकेश कुमार को इसकी शायद कोई फिक्र नहीं है। स्थानीय लोगों और निजी कॉलोनियों के लोग उनके बेरुखे व्यवहार से बेहद परेशान हैं। जब दामोदर बचाओ आंदोलन के जिला संयुक्त संयोजक श्रवण सिंह ने जानकारी लेने की कोशिश की, तो प्रबंधक का वही गैर-जिम्मेदाराना रवैया देखने को मिला। इसके बाद श्रवण सिंह ने तुरंत डीवीसी के तकनीकी सदस्य को लिखित शिकायत भेजकर मांग की है कि ऐसे लापरवाह अधिकारी को उनके पद से हटाया जाए। उन्होंने साफ कहा कि ऐसे अधिकारियों के कारण डीवीसी की छवि धूमिल हो रही है।

    कुल मिलाकर, बोकारो थर्मल की जनता अब इस लचर व्यवस्था से तंग आ चुकी है। क्या विद्युतनगरी को उसके ही अधिकारी अंधेरे में रखने पर तुले हैं? क्या जनता को इस लापरवाही की कीमत त्योहारों पर भी चुकानी पड़ेगी? सवाल कई हैं, लेकिन जवाब किसी के पास नहीं। फिलहाल, देखना यह है कि यह खबर डीवीसी उच्च प्रबंधन के कानों तक पहुंचती है या नहीं या यूं ही बिजली की नगरी में बिजली संकट जारी रहेगा।

    • Varnan Live Report.

  • विद्युत नगरी में ‘विद्युत युद्ध’ की आहट! DVC के खिलाफ भड़के लोग, बोले- ‘Smart Meter नहीं, ‘Over Billing का मीटर’ है!

    विद्युत नगरी में ‘विद्युत युद्ध’ की आहट! DVC के खिलाफ भड़के लोग, बोले- ‘Smart Meter नहीं, ‘Over Billing का मीटर’ है!

    कुमार संजय
    बोकारो थर्मल: बोकारो थर्मल में बिजली विभाग और आम जनता के बीच एक बड़ा टकराव पैदा हो गया है। डीवीसी (DVC) प्रबंधन द्वारा निजी कॉलोनियों में स्मार्ट मीटर लगाने का फैसला लोगों को नागवार गुज़रा है, और इस फैसले के खिलाफ अब जोरदार विरोध शुरू हो गया है। गोविंदपुर डी पंचायत के वैशाखी कॉलोनी, जीएम कॉलोनी, और जनता नगर के लोगों ने एकजुट होकर इस ‘जबरदस्ती’ का कड़ा विरोध करने का ऐलान किया है।

    ‘ओवरबिलिंग का मीटर’ है स्मार्ट मीटर, नहीं लगने देंगे!
    शुक्रवार को आयोजित एक विशाल बैठक में, स्थानीय लोगों ने एक स्वर में डीवीसी प्रबंधन के फैसले की निंदा की। बैठक में मौजूद लोगों ने स्मार्ट मीटर को ‘ओवरबिलिंग का मीटर’ बताते हुए कहा कि देशभर में जहां-जहां ये मीटर लगे हैं, वहां-वहां ग्राहकों को भारी-भरकम बिलों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जब उनके घरों में पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगे हुए हैं, तो डीवीसी क्यों जियो कंपनी के दबाव में आकर ये नए मीटर थोप रही है?

    आंदोलन की चेतावनी: ‘हुक्का-पानी बंद’ और ‘पावर प्लांट जाम’!
    लोगों का गुस्सा इतना बढ़ गया है कि उन्होंने डीवीसी प्रबंधन को सीधी चेतावनी दे दी है। उन्होंने कहा है कि अगर डीवीसी अपनी इस नीति को वापस नहीं लेती है, तो हजारों की संख्या में जनता सड़कों पर उतरकर महा-आंदोलन करेगी। इस आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार कर ली गई है, जिसमें डीवीसी के ऐश पौंड और पावर प्लांट का मेन गेट अनिश्चितकाल के लिए जाम करने की बात कही गई है।

    कॉलोनी के लोगों ने कहा कि आंदोलन की रणनीति 10 अगस्त को गोविंदपुर डी पंचायत सचिवालय में आयोजित बैठक में तय होगी। उक्त बैठक में भाजपा के पूर्व बोकारो जिलाध्यक्ष भरत यादव, श्रवण सिंह सहित पंचायत की मुखिया चंदना मिश्रा भी मौजूद रहेंगी। आज की बैठक में दिनेश सिंह, मनोज पाठक महेश कुमार, विशाल सकूजा, नागेश्वर प्रजापति, धर्मेंद्र पासवान, सुमन पाठक, रजनी नैयर, पूनम सिंह, सोनू, दीपा सहित काफी संख्या में लोग मौजूद रहे। बैठक की अध्यक्षता समाजसेवी मोती लाल महतो ने की और कांग्रेस नेत्री सुषमा कुमारी ने इसका संचालन, तो रिंकू सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

    बहरहाल, यह विरोध सिर्फ स्मार्ट मीटर तक ही सीमित रहेगा, या यह एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि बोकारो थर्मल में बिजली को लेकर एक बड़ा विवाद शुरू हो चुका है।

    – Varnan Live Report.

  • चोरी बोकारो में, ठिकाना रांची में… चोरों का ‘Double Game’ पुलिस ने किया खत्म

    चोरी बोकारो में, ठिकाना रांची में… चोरों का ‘Double Game’ पुलिस ने किया खत्म

    बोकारो : बोकारो पुलिस ने आखिरकार शहर में चोरी की लगातार हो रही वारदातों का खुलासा कर ही दिया है। एक बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने दो शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने पिछले चार महीनों में आठ घरों को निशाना बनाया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन चोरों में से एक रांची में बैठकर बोकारो में चोरी की वारदातों को अंजाम देता था। पुलिस ने इनके पास से लाखों रुपए के जेवर, कीमती सामान और नकदी बरामद की है।

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    चोरी के ‘मास्टरमाइंड’ का रांची कनेक्शन
    चोरी का मास्टरमाइंड विनोद सोरेंग उर्फ रघु मुंडा रांची के बरियातू का रहने वाला है। वह चोरी के बाद वापस रांची भाग जाता था, जिससे पुलिस को उसे पकड़ने में बहुत मुश्किल हो रही थी। पुलिस ने गुप्त सूचना और सीसीटीवी फुटेज की मदद से उसे रांची से गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने बोकारो में की गई कई चोरियों का खुलासा किया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने उसके किराए के मकान से चोरी का अधिकतर सामान बरामद कर लिया।

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    लोकल साथी भी गिरफ्तार, करोड़ों का माल जब्त!
    विनोद की जानकारी पर पुलिस ने उसके साथी महेश कुमार उर्फ लल्ला को भी माराफारी झोपड़ी कॉलोनी से गिरफ्तार किया। महेश भी स्थानीय स्तर पर चोरी की वारदातों में सक्रिय था। दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने बोकारो सिटी थाना क्षेत्र के आठ घरों में चोरी की थी। मई, जून, जुलाई और अगस्त के शुरुआती दिनों में उन्होंने इन वारदातों को अंजाम दिया था।

    पुलिस टीम ने किया कमाल
    एसपी हरविंदर सिंह ने बताया कि इन चोरियों का पर्दाफाश करने के लिए सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई थी। इस टीम ने दिन-रात मेहनत कर इस बड़े मामले को सुलझाया। बरामद किए गए सामान में सोने के मंगलसूत्र, चेन, झुमके, ब्रेसलेट, चांदी के बर्तन, पायल, एप्पल लैपटॉप, मोबाइल और 7,700 रुपए की नकदी शामिल है। इसके अलावा, चोरी के लिए इस्तेमाल होने वाले औजार भी जब्त किए गए हैं। यह खुलासा बोकारो पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता, तो शहर के लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिलेगी, जो लगातार चोरियों से परेशान थे।

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  • ‘अरिष्ट’ रोकेगा अनिष्ट… औद्योगिक हादसों को शून्य करने बोकारो में जुटे इस्पात जगत के दिग्गज

    ‘अरिष्ट’ रोकेगा अनिष्ट… औद्योगिक हादसों को शून्य करने बोकारो में जुटे इस्पात जगत के दिग्गज

    बोकारो स्टील की मेजबानी में दोदिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू, NSC महानिदेशक ने किया उद्घाटन

    बोकारो। औद्योगिक सुरक्षा को लेकर बोकारो स्टील प्लांट (BSL) में एक बड़ा राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ है, जिसका लक्ष्य दुर्घटनाओं को पूरी तरह खत्म करना है। दो दिवसीय इस सम्मेलन का नाम ‘अरिष्ट’ है, जिसका मतलब है ‘अनहोनी को दूर करना’। इसमें देश के विभिन्न इस्पात संयंत्रों और प्रतिष्ठित कंपनियों के विशेषज्ञ व प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

    सम्मेलन का उद्घाटन BSL के ज्ञानार्जन एवं विकास केंद्र में हुआ, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महानिदेशक ललित गभाने, बोकारो स्टील प्लांट के निदेशक प्रभारी बीरेंद्र कुमार तिवारी और सेल सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन के अधिशासी निदेशक अनूप कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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    उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए महानिदेशक ललित गभाने ने कहा कि किसी भी संगठन को अपनी संस्कृति, मानवीय व्यवहार और कार्यस्थल की स्थितियों में सुरक्षा को एक मूल सिद्धांत (Core Value) के रूप में अपनाना होगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि नियमों का पालन करने के साथ-साथ दूसरों को भी जागरूक करना बहुत ज़रूरी है।

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    संगठनात्मक संस्कृति में सुरक्षा को बनाएं आदत : निदेशक प्रभारी

    बोकारो स्टील प्लांट के निदेशक प्रभारी बीरेंद्र कुमार तिवारी ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस्पात उद्योग से जुड़े सभी लोगों को अपने अनुभव और ज्ञान को साझा करते हुए ‘शून्य दुर्घटना’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए काम करना होगा। उन्होंने कहा कि ‘Towards Zero Harm’ का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब हम अपनी संगठनात्मक संस्कृति में सुरक्षा को एक आदत बना लें।

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    AI और Robotics का होगा इस्तेमाल
    BSL के अधिशासी निदेशक अनीष सेनगुप्ता ने बताया कि बोकारो स्टील प्लांट सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई नई पहल कर रहा है, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), थर्मल इमेजिंग, डिजिटल सिमुलेशन, रोबोटिक संचालन और ठेकेदार सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली शामिल हैं। सेल सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन के अधिशासी निदेशक अनूप कुमार ने कहा कि ‘अरिष्ट’ जैसे सम्मेलन का उद्देश्य सुरक्षा संस्कृति के व्यावहारिक पहलुओं पर तेज़ी से काम करना है। सम्मेलन के पहले दिन आईआईटी गांधीनगर और रीजनल लेबर इंस्टिट्यूट, कोलकाता के विशेषज्ञों ने वीआर/एआर आधारित प्रशिक्षण और स्मार्ट पीपीई जैसे विषयों पर चर्चा की। दूसरे दिन भी सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन मंथन किया जाएगा।

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  • पिता की हत्या ने ऐसे बदल दी गुरुजी के जीवन की राह और लिख डालीं क्रांति की कई कहानियां- राजनीतिक सलाहकार पीएन पांडेय की कलम से

    पिता की हत्या ने ऐसे बदल दी गुरुजी के जीवन की राह और लिख डालीं क्रांति की कई कहानियां- राजनीतिक सलाहकार पीएन पांडेय की कलम से

    लगभग 80 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कहने वाले शिबू सोरेन ने अपने जीवन में क्रांति की कई कहानियां लिखीं। उनके निधन पर उनके राजनीतिक सलाहकार रहे पी.एन. पांडेय ने गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उनकी जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डाला।

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    पी.एन. पांडेय के अनुसार, शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को नहीं, बल्कि फाल्गुन महाशिवरात्रि के दिन 1946 को हुआ था। आजादी के ठीक एक साल पहले। उनके बचपन का नाम शिवचरण मांझी था, जिसे बाद में शिबू सोरेन के नाम से जाना गया। उनके पिता सोबरन मांझी और माता सोना देवी थीं।


    पी.एन. पांडेय बताते हैं कि शिबू सोरेन के पिता सोबरन मांझी एक गांधीवादी शिक्षक थे और वे झारखंड में महाजनों के अत्याचारों का विरोध करते थे। महाजन आदिवासियों को कर्ज के जाल में फंसाकर उनकी जमीनें हड़प लेते थे, जिसका सोबरन मांझी हमेशा विरोध करते थे। इसी विरोध के कारण 27 नवंबर 1957 को उनकी हत्या कर दी गई, जब शिबू सोरेन मात्र दसवीं कक्षा के छात्र थे और चित्तरंजन सहाय शिक्षक की देखरेख में पढ़ाई कर रहे थे।
    इस घटना ने शिबू सोरेन को भीतर तक हिला दिया। वे पढ़ाई छोड़कर इस जुल्म का बदला लेने और महाजनी प्रथा को खत्म करने का प्रण ले चुके थे। उन्होंने आदिवासियों को संगठित करना शुरू किया और 1970 तक इस आंदोलन की कमान अपने हाथ में ले ली। इसी दौरान उन्हें दिशोम गुरु की उपाधि मिली।

    झामुमो की स्थापना: संघर्ष की एक नई कहानी
    महाजनी प्रथा के खिलाफ आंदोलन को और मजबूत करने के लिए शिबू सोरेन ने बोकारो के जैनामोड़ को अपना मुख्यालय बनाया। बाद में धनबाद के टुंडी क्षेत्र के पोखरिया पंचायत में आश्रम बनाया, जहां से वे आदिवासियों को एकजुट करते रहे। इसी दौरान उनके आंदोलन में विनोद बिहारी महतो और ए.के. राय जैसे बड़े नेता भी शामिल हुए। पी.एन. पांडेय के अनुसार, विनोद बिहारी महतो के शिवाजी समाज और शिबू सोरेन के सोनोत संथाल सुधार समिति के प्रयासों को मिलाकर 4 मार्च 1974 को दुमका में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का गठन किया गया। संथाल परगना में आदिवासियों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ लड़ने के लिए सबसे पुराने विधायक साइमन मरांडी उन्हें दुमका ले गए थे।

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    शिबू सोरेन का संघर्ष सिर्फ आदिवासियों तक सीमित नहीं था। उन्होंने अपनी मेहनत से गैर-आदिवासी समाजों में भी अपनी पैठ बनाई। धनबाद के तत्कालीन उपायुक्त क्रमशः लक्ष्मण शुक्ला, के.बी. सक्सेना, चंद्रमोहन झा और के.पी. सिन्हा के साथ-साथ उनके सहयोगी दुर्गा तिवारी, बसंत पाठक और स्टीफन मरांडी ने उनके आंदोलन को धारदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पी.एन. पांडेय स्वयं 1987 में शिबू सोरेन के साथ जुड़े। उनके नेतृत्व में 1989 में झामुमो ने पहली बार लोकसभा चुनाव में चार सीटों पर जीत हासिल की, जो झारखंड के लिए एक ऐतिहासिक पल था।

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    उत्तराधिकारियों से अपेक्षाएं

    शिबू सोरेन के निधन के बाद, पी.एन. पांडेय ने उनके उत्तराधिकारियों से एक भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन से जुड़े उन सभी लोगों और शिबू सोरेन के पुराने सिपहसालारों का सम्मान किया जाना चाहिए, जिन्होंने अभावों में भी उनका साथ नहीं छोड़ा। इन लोगों ने झारखंड राज्य के निर्माण के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया। दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जाना सिर्फ एक राजनीतिक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि झारखंड के सपने को सच करने वाले एक क्रांतिकारी का जाना है। उनकी विरासत और संघर्ष की कहानी हमेशा झारखंड के लोगों को प्रेरित करती रहेगी।

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