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  • बिना दूल्हे की बारात है महागठबंधन : विनोद नारायण झा

    बिना दूल्हे की बारात है महागठबंधन : विनोद नारायण झा

    बोकारो। बिहार सरकार के मंत्री सह बिहार विधान परिषद के सदस्य विनोद नारायण झा ने कहा कि यह चुनाव सांसद चुनने का नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री चुनने का है। देशभर की सभी संसदीय सीटों पर उम्मीदवार खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही हैं। इसके विपरीत विपक्ष की तरफ से महागठबंधन के पास प्रधानमंत्री का कोई भी एक सुनिश्चित उम्मीदवार ही नहीं है। कहा जाए तो महागठबंधन बिना दूल्हे की एक बारात है। अलग-अलग घटक दलों ने अपने-अपने प्रत्याशी घोषित किए हैं। आंध्र प्रदेश में अलग, तमिलनाडु में अलग और पश्चिम बंगाल में अलग, हर जगह अलग-अलग प्रधानमंत्री के दावेदार मिलेंगे और ऐसा अगर होता है सप्ताह के प्रत्येक दिन अलग-अलग प्रधानमंत्री बनेंगे और इतवार को राष्ट्र छुट्टी पर चला जाएगा। झा ने बोकारो में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उक्त बातें कही।


    उन्होंने कहा कि पहले जहां देश में आतंकवादी हमले होने के बाद सरकार दुश्मन देश का रोना रोती थी, वहीं अब मोदीजी की अगुवाई में हिंदुस्तान दुश्मन देश के घर में घुसकर मारता है। 40 का बदला 300 को मारकर लेता है। एक तरफ मोदी जी दुश्मन को आंख दिखाते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन के युवराज आंख मरने वाले मात्र एक लफुआ हैं। उन्होंने कहा कि देश में मजबूत सरकार बनाम मजबूर सरकार की लड़ाई चल रही है और जनता मोदी के साथ देशभर में गोलबंद। 2014 में गुजरात में किए गए कार्य के आधार पर जनता ने उन्हें प्रधानमंत्री चुना था। अब पिछले पांच सालों में वह एक सोने की तरह चमकता हुआ परखे गये हैं। जनता की उम्मीदों पर वह पूरी तरह से खरा उतरे हैं। एक तरफ दुनिया भर में भारत का डंका बज रहा है, वहीं दूसरी तरफ बिजली, पानी शौचालय आदि की चिंता को भी प्रधानमंत्री मोदी ने दूर किया है।

    वीडियो देखें- कैसे राहुल गांधी को बताया आंख मारने वाला लफुआ

    ‘भाजपा ही मैथिलों का हितैषी’


    मंत्री विनोद नारायण झा ने भारतीय जनता पार्टी को मिथिला और मैथिलों का सच्चा हितैषी बताया। उन्होंने कहा कि वाजपेयीजी की सरकार ने मैथिली भाषा को अष्टम अनुसूची में दर्जा दिलाया। वर्ष 1934 में भूकंप के बाद जो मिथिला दो भागों में बंट गया था, उसे वाजपेयीजी के प्रयास से जोड़ा जा सका। उन्होंने दावा किया कि धनबाद संसदीय क्षेत्र में निवास करने वाले समस्त में मैथिलों का एकमुश्त वोट भाजपा के पक्ष में ही जाएगा। मैथिलों ने हमेशा ही राष्ट्रहित को ख्याल में रखकर अपना मतदान किया है और इस बार भी यही होने जा रहा है।मिथिलांचल से कोयलांचल की राजनीति में अपनी किस्मत आजमाने आए महागठबंधन समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी कीर्ति झा आजाद पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई भी उम्मीदवार नहीं बचा है। कीर्ति आजाद तो दरभंगा से घोषित भगोड़ा है, जो गिरगिट की तरह अपना रंग बदलते हैं। कल तक जहां वह खुद को मिथिला वासी करते थे वहीं आज खुद को झारखंडी बता रहे हैं। प्रेसवार्ता में मंत्री श्री झा के साथ मुख्य रूप से रोहितलाल सिंह, राजीव कंठ, विद्यासागर सिंह आदि मौजूद थे।

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  • Dabangg3- अब ‘मुन्नी बदनाम…’ नहीं, ‘मुन्ना होगा बदनाम’!

    Dabangg3- अब ‘मुन्नी बदनाम…’ नहीं, ‘मुन्ना होगा बदनाम’!

    बॉलीवुड के दबंग सलमान खान इन दिनों अपनी अगली फिल्म ‘दबंग 3’ की शूटिंग में व्यस्त हैं यानी बड़े परदे पर एक बार फिर से बालीवुड के दबंग अपनी दस्तक देंगे।

    फिल्म का पहला शेड्यूल मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में शूट किया गया, जो कि एक अप्रैल से शुरू हुआ था। खबरों के अनुसार अब दबंग 3 का सेकंड शेड्यूल मुंबई में शूट किया जाएगा। सेकंड शेट्यूल के तहत कुछ सीन शूट कर भी लिए हैं। यूं तो सलमान खान की हर फिल्म चर्चा में बनी रहती हैं, लेकिन दबंग सिरीज की बात ही कुछ खास है। ‘दंबग 3’ को लेकर आए दिन कुछ ना कुछ खबरें आती ही रहती हैं। ऐसे में अब सवाल ये उठ रहा है कि सलमान खान की इस फिल्म में आइटम नंबर कौन करेगा। जैसा कि हम सभी जानते हैं अरबाज खान से तलाक के बाद मलाइका अरोड़ा इस फिल्म का हिस्सा नहीं होंगी।

    बता दें कि, दबंग सीरीज के फर्स्ट पार्ट में मलाइका कैमियो रोल में नजर आईं थीं। इस फिल्म में मलाइका ने ‘मुन्नी बदनाम हुई’ गाने पर सलमान के साथ जबरदस्त आइटम डांस किया था, जो काफी हिट भी हुआ था। वहीं, दबंग सीरीज की दूसरी फिल्म में करीना कपूर ने ‘फेविकोल’ गाने पर आइटम डांस किया था। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ‘दबंग 3’ में भी एक आइटम नंबर होगा, लेकिन इस आइटम सॉन्ग में कोई एक्ट्रेस नहीं, बल्कि सलमान खान खुद ही डांस करने वाले हैं। इस जबरदस्त आइटम सॉन्ग के बोल होंगे ‘मुन्ना बदनाम हुआ’। सूत्रों की माने तो ‘मुन्नी बदनाम हुई’ गाने के लिरिक्स में बदलाव कर इस सलमान पर फिल्माया जाएगा।

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  • INS रंजीत- 36 वर्षों के गौरवशाली युग का सुखद अंत

    “INS Ranjeet”

    दिल्ली ब्यूरो
    नई दिल्ली :
    राजपूत श्रेणी का विध्वंसक आईएनएस रंजीत अपने गौरवशाली युग का समापन करते हुए बीते हफ्ते विशाखापत्तनम के नौसेना यार्ड में आयोजित एक भव्य समारोह में सेवामुक्त हो गया। इस समारोह में वे अधिकारी और चालक दल के सदस्य भी उपस्थित रहे, जो आईएनएस रंजीत के भारतीय नौसेना में शामिल होने के समारोह के समय भी मौजूद रहे थे। इनके अलावा पिछले 36 वर्षों में आईएनएस रंजीत की सामुद्रिक यात्राओं में शामिल होने वाले अधिकारी भी इस मौके पर मौजूद थे। अंडमान निकोबार द्वीप समूह के माननीय लेफ्टिनेन्ट गवर्नर (सेवानिवृत्त) देवेन्द्र कुमार जोशी पीवीएसएम एवीएसएम वाईएसएम एनएम वीएसएम एडीसी इस समारोह के मुख्य अतिथि थे। वे आईएनएस रंजीत के जलावतरण के समय चालक दल के भी सदस्य थे। जलावतरण समारोह के चालक दल के 16 अधिकारियों और 10 नाविकों तथा 23 पूर्व कमांडिंग आॅफिसर्स की मौजूदगी ने भी इस समारोह को चार चांद लगाए।

    1983 में हुआ था जलावतरण
    आईएनएस रंजीत का जलावतरण 15 सितंबर, 1983 को कैप्टन विष्णु भागवत द्वारा पूर्व सोवियत संघ में किया गया था। इसने 36 वर्षों तक राष्ट्र की उल्लेखनीय सेवा की। इस पोत की कमान 27 कमांडिंग आॅफिसर्स द्वारा संभाली गई है और इसके अंतिम कमांडिंग आॅफिसर कैप्टन विक्रम सी. मेहरा ने 6 जून, 2017 को इसकी कमान संभाली थी। अपने जलावतरण के बाद से इस पोत ने 2190 दिनों तक 7,43,000 समुद्री मील की यात्रा की, जो दुनिया का 35 चक्कर लगाने के बराबर है। यह दूरी धरती एवं चंद्रमा की दूरी का करीब साढ़े तीन गुणा है। अभियानों में अग्रणी भूमिका पीआईबी सूत्रों के अनुसार इस पोत ने कई प्रमुख नौसैनिक अभियानों के दौरान अग्रणी भूमिका निभाई है और यह पूर्वी तथा पश्चिमी समुद्री तट दोनों स्थानों पर विशिष्ट सेवाएं प्रदान कर चुका है। आॅपरेशन तलवार जैसे विविध नौसैनिक अभियानों और बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों में भाग लेने के अलावा यह पोत 2004 में सुनामी और 2014 में हुदहुद चक्रवात के बाद चलाए गए राहत अभियानों के दौरान भारतीय नौसेना की हितकारी भूमिका का ध्वजवाहक रहा है। नौसेना प्रमुख ने इस पोत द्वारा राष्ट्र को प्रदान की गई सेवाओं के सम्मान में 2003-2004 और 2009-2010 में इसे यूनिट साइटेशन प्रदान किया।

    जीवित रहेगी भावना

    6 मई, 2019 को सांझ ढलने पर राष्ट्रीय ध्वज, नौसेना की पताका और कमीशनिंग ध्वज आखिरी बार इस पोत से नीचे उतारे गए। इसके साथ ही भारतीय नौसेना में इस पोत के गौरवशाली युग का समापन हो गया। भारतीय नौसेना में आईएनएस रंजीत का युग भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इसकी भावना, इस पर तैनात रह चुके प्रत्येक अधिकारी और नाविक के हृदय में सदैव जीवित रहेगी और उसके ध्येय वाक्य ‘सदा रणे जयते’ अथवा ‘युद्ध में सदैव विजयी’ समुद्री योद्धाओं की वर्तमान और भावी पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। 6 मई, 2019 को सांझ ढलने पर राष्ट्रीय ध्वज, नौसेना की पताका और कमीशनिंग ध्वज आखिरी बार इस पोत से नीचे उतारे गए। इसके साथ ही भारतीय नौसेना में इस पोत के गौरवशाली युग का समापन हो गया। भारतीय नौसेना में आईएनएस रंजीत का युग भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इसकी भावना, इस पर तैनात रह चुके प्रत्येक अधिकारी और नाविक के हृदय में सदैव जीवित रहेगी और उसके ध्येय वाक्य ‘सदा रणे जयते’ अथवा ‘युद्ध में सदैव विजयी’ समुद्री योद्धाओं की वर्तमान और भावी पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

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  • सेल सिक्योर टीएमटी से और मजबूत बनेंगे घर

    सेल सिक्योर टीएमटी से और मजबूत बनेंगे घर

    संवाददाता
    बोकारो :
    देश की सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी इस्पात उत्पादक कंपनी स्टील अथॉरिटी आॅफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने सेल एसईक्यूआर यानी सेल सिक्योर नाम से टीएमटी बार का एक नया ब्रांड लांच किया है। सेल का यह नया ब्रांड निर्माण की जरूरतों के लिहाज से जहां ज्यादा सुरक्षित है, वहीं इसमें उच्च गुणवत्ता के बेहतर लचीलेपन के साथ अत्यधिक मजबूती की दोहरी विशेषता है। इस तरह से सेल का यह नया ब्रांड निर्माण को और बेहतर सुरक्षा प्रदान करने के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। इस टीएमटी बार का उत्पादन, सेल के इस्को स्टील प्लांट की नई और अत्याधुनिक बार एंड रॉड मिल से 1 मई, 2019 को शुरू हो चुका है और 6 मई, 2019 को इसकी पहली खेप (कंसाइनमेंट) को रवाना किया गया।

    सर्वश्रेष्ठ उत्पादन के लिये हम प्रतिबद्ध : अध्यक्ष

    SAIL Chairman Anil Kumar Chaudhary.

    सेल के अध्यक्ष अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि, ‘कंपनी ऐसे उत्पादों के विकास और उत्पादन के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, जो अपनी श्रेणी में न केवल सर्वश्रेष्ठ हों, बल्कि गुणवत्ता में भी सर्वोत्तम हों, जिससे ग्राहक हमारे उत्पादों से सर्वश्रेष्ठ वैल्यू हासिल कर पाएं। किसी भी तरह के निर्माण से जुड़े उत्पाद के विकास के दौरान सेल की सर्वोच्च प्राथमिकता सुरक्षा मानक को लेकर होती है और हमारा नया टीएमटी बार सेल सिक्योर अपनी अत्यधिक मजबूती और बेहतर लचीलेपन के सर्वोत्तम गुणवत्ता के साथ सुरक्षित निर्माण का मजबूत भरोसा है।’

    भूकम्प-सुनामी जैसी परिस्थितियों में भी सुरक्षित

    सेल सिक्योर टीएमटी बार का बेहतर लचीलापन और अत्यधिक मजबूती का अनूठा मेल, इस श्रेणी के लिए बीआईएस द्वारा निर्धारित किए गए न्यूनतम स्तर से भी अधिक है। इस वर्ग में यूटीएसध्वाईएस (अल्टीमेट टेन्साइल स्ट्रेंथ/यील्ड स्ट्रेंथ) 1.18 सर्वश्रेष्ठ है, जो बार भूकंप या सुनामी इत्यादि जैसी आकस्मिक घटनाओं के दौरान येल्डिंग बिंदु से आगे दबाव के बढ़ने पर बिना किसी कैटास्ट्रोफिक असफलता के अधिक ऊर्जा अवशोषित कर सकते हैं। आधुनिक निर्माण प्रक्रियाओं के जरिये उत्पादित यह कांबिनेशन आॅटोमेटेड और सोफिस्टीकेटेड कुलिंग के जरिये प्राप्त किया जाता है और कड़ी नियंत्रण प्रक्रिया के माध्यम से फॉलो किया जाता है। इन टीएमटी बार्स के लिए अत्यधिक क्लीन स्टील का उपयोग होता है, जिसे प्राथमिक स्टील रूट से बनाया जाता है और सेकेन्डरी रिफाइनिंग प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिससे सल्फर और फॉस्फोरस साथ-साथ गैसीय कंटेन्ट भी न्यूनतम होती है, जो टीएमटी बार की गुणवत्ता की गुणवत्ता और बेहतर बनाता है। सेल सिक्योर टीएमटी बार का उभरा और समान रिब पैटर्न कंक्रीट के साथ जोड़ को मजबूत और सशक्त करने में बेहद मददगार होगा।

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  • Health- AC ऐसे है हमारी सेहत के लिये नुकसानदेह

    Health- AC ऐसे है हमारी सेहत के लिये नुकसानदेह

    एयर कंडीशनर (एसी) गर्म तापमान से राहत देकर आपको ठंडक और सुकून का एहसास कराता है, वह भी बगैर शोर-शराबे के। यही कारण है कि अब पंखे और कूलर से ज्यादा एसी का चलन तेजी से बढ़ रहा है। दफ्तर में तो पूरे आठ घंटे आप एसी में बैठते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लंबे समय तक एसी में बैठना आपके लिए बेहद हानिकारक हो सकता है? अगर नहीं जानते, तो अब जरूर जान लीजिये-

    1 बुखार या थकान – लंबे समय तक एसी में रहने से आपको लगातार हल्का बुखार और थकान बने रहने की समस्या हो सकती है। इतना ही नहीं इसका तापमान ज्यादा कम करने पर आपको सिरदर्द और चिड़चिड़ाहट महसूस हो सकती है। अगर आप एसी से निकलकर सामान्य तापमान या गर्म स्थान पर जाते हैं तो आप लंबे समय तक बुखार से पीड़ित हो सकते हैं।

    2 जोड़ों में दर्द – लगातार एसी के कम तापमान में बैठना सिर्फ घुटनों की समस्या ही नहीं देता, बल्कि आपके शरीर के सभी जोड़ों में दर्द के साथ-साथ अकड़न पैदा करता है और उनकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। आगे चलकर यह हड्डियों से जुड़ी बीमारियों को जन्म भी दे सकता है।

    3 ब्लडप्रेशर व अस्थमा – अगर आपके ब्लडप्रेशर संबंधित समस्याएं हैं तो आपको एसी से परहेज करना चाहिए। यह लो ब्लडप्रेशर के लिए जिम्मेदार हो सकता है और सांस संबंधी समस्याएं भी पैदा कर सकता है। अस्थमा के मरीजों को भी एसी के संपर्क में आने से बचना चाहिए।

    4 मोटापा – आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन यह पूरी तरह सच है कि एसी के इस्तेमाल से आपके शरीर में मोटापा बढ़ सकता है। तापमान कम होने के कारण हमारा शरीर अधिक सक्रिय नहीं हो पाता और शरीर की ऊर्जा का सही मात्रा में उपयोग नहीं हो पाता, जिससे मोटापा बढ़ता है।

    5 त्वचा की समस्याएं – एसी के दुष्प्रभाव आपकी त्वचा पर भी दिखाई देते हैं। यह आपकी त्वचा की प्राकृतिक नमी समाप्त कर सकता है, जिससे आपकी त्वचा में रूखापन महसूस होता है।

    6 रक्तसंचार – एसी में बैठने से शारीरिक तापमान कृत्रिम तरीके से ज्यादा कम हो जाता है जिससे कोशिकाओं में संकुचन होता है और सभी अंगों में रक्त का संचार बेहतर तरीके से नहीं हो पाता, जिससे शरीर के अंगों की क्षमता प्रभावित होती है।

    7 मस्तिष्क पर असर – एसी का तापमान बहुत कम होने पर मस्तिष्क की कोशिकाएं भी संकूचित होती है जिससे मस्तिष्क की क्षमता और क्रियाशीलता प्रभावित होती है। इतना ही नहीं आपको लगातार चक्कर आने की समस्या भी हो सकती है।

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  • WEEKLY HOROSCOPE – जानिये कैसा बीतेगा आपका यह सप्ताह

    WEEKLY HOROSCOPE – जानिये कैसा बीतेगा आपका यह सप्ताह

    साप्ताहिक राशिफल

    • ज्योतिषाचार्य संतोष शास्त्री

    Senior Astrologer (Bokaro, Jharkhand), Mob.- 7808820251

    मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)

    स्वास्थ्य पर ध्यान दें। मित्रों एवं सम्बंधियों से रिश्ते बनाकर रखें। अकारण यात्रा का योग। धन की हानि। मन में अशांति। सप्ताहांत तक स्थितियों में सुधार।

    वृष (ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)

    स्वास्थ्य में सुधार। वाणी पर संयम रखें। अनावश्यक खर्च होंगे। कार्य एवं पद में हानि। मित्रों का शत्रुतापूर्ण व्यवहार। सामाजिक प्रतिष्ठा का ह्रास।

    मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)

    स्वास्थ्य में सुधार। क्रोध पर काबू रखें। बन्धुजनों से लाभ। भाग्य में वृद्धि। पदोन्नति के लिए समय ठीक है। पिता से लाभ। शत्रुओं पर विजय।

    कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)

    रोगमुक्त होंगे। गलत चरित्र के लोगों से दूरी बनाएं। कार्यों की सफलता में देरी। धनागम का योग बनेंगे। शत्रुओं पर विजय।

    सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)

    स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। स्त्री से सम्बन्ध सुधरेंगे। मन प्रसन्न रहेगा। शत्रुओं पर विजय। मन में चंचलता। उत्तम भोजन एवं वस्त्र-सुख प्राप्त होगा।थ भाइयों से रिश्ते बनाकर रखें, लाभ होगा।

    कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)

    बुरे कर्मों का फल मिलेगा। शरीर में पीड़ा- बवासीर या अपच की समस्या हो सकती है। धन का अधिक खर्च होगा। शत्रुओं से झगड़े होंगे। मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती है।

    तुला (रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते)

    स्वास्थ्य में सुधार। धन की प्राप्ति का योग। व्यापार में अच्छा लाभ। स्त्रीवर्ग से लाभ। तरल पदार्थों से लाभ। उत्तम भोजन, वस्त्र और शय्या सुख की प्राप्ति।

    वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)

    सुख-आनन्द का अनुभव। रोगमुक्त होंगे। स्वजनों से मनमुटाव। वाणी पर संयम रखें। शत्रुओं पर विजय। सप्ताहांत में थोड़ी मानसिक चिंता बढ़ेगी।

    धनु ( ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)

    स्वास्थ्य पर ध्यान दें। व्यवसाय में हानि हो सकती है। भाग्य साथ नही देंगे। सप्ताहांत तक अच्छे समाचार प्राप्त होंगे। राज्याधिकारियों से वाद-विवाद हो सकते हैं। स्त्री सुख मिलेगा।

    मकर ( भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)

    स्वास्थ्य अच्छा होगा। सभी कार्यों में सफलता। उच्चाधिकारी प्रसन्न होंगे। मित्रों से सहायता। पदोन्नति होगी। व्यय अधिक हो सकते हैं।

    कुम्भ (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)

    स्वास्थ्य पर ध्यान दें। पेट सम्बन्धी समस्या हो सकती है। शत्रु परेशान करेंगे। व्यवसाय में हानि। सप्ताह के मध्य में धन एवं सम्मान की प्राप्ति हो सकती है।

    मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)

    स्वास्थ्य-लाभ होगा। यश और आनन्द की प्राप्ति होगी। शत्रुओं की पराजय होगी। व्यय में अधिकता। वाणिज्य-व्यवसाय में लाभ हो सकता है। छोटी पर लाभदायक यात्रा हो सकती है।

    • Varnan Live.
  • जीवन का सबसे सुखद भाव है श्रद्धा – गुरुदेव श्री नंदकिशोर श्रीमाली

    जीवन का सबसे सुखद भाव है श्रद्धा – गुरुदेव श्री नंदकिशोर श्रीमाली

    गुरुदेव श्री नंदकिशोर श्रीमाली

    निखिल मंत्र विज्ञान

    बोलने से अधिक मौन रहना सीखना कठिन है। जब हम बोलते हं तो हमारी सारी शक्तियां बहिर्मुखी हो जाती है और जब हम मौन रहते हैं अथवा श्रवण करते हैं, किसी बात को सुनते हैं तो निश्चित रूप से हमारे भीतर विचार-शक्ति तीव्र होती है। दो घंटे बोलते रहने की अपेक्षा दो घंटे मौन रहना ज्यादा कठिन है। इसे आप आजमा कर देखिये, मौन रहकर अपने अन्तर्मन को देखिये, अपने अन्तर्मन की आवाज सुनिये, दूसरों की बात सुनिये, लेकिन तत्काल प्रतिक्रिया व्यक्त मत कीजिये। यहां पर हमें दो शब्दों का सम्बन्ध और उनका प्रभाव जानना चाहिए, जिनमें से पहला शब्द है reaction (त्वरित, तत्काल प्रतिक्रिया अर्थात् बिना सोचे-समझे की गई प्रतिक्रिया) और दूसरा शब्द है response (सोच, विचार, समझ और दूर दृष्टि के द्वारा तर्कसंगत ढ़ंग से दिया गया उत्तर)। जब हम reaction अर्थात् प्रतिक्रिया करते हैं तो ज्यादा हम (असुर) पाशविक वृत्ति के वाहक बनकर प्रतिक्रिया करते हैं, जबकि response में हम सुरों (देवताओं, योद्धाओं) की भांति देववृत्ति को साधते हुए उत्तर देते हैं। responsible बनिये।

    हमारा मन तो विश्व का सबसे बड़ा फिल्टर हाउस है, जो अपने आप श्रेष्ठ बातों को ग्रहण कर लेता है और न्येष्ठ बातों को बाहर का बाहर ही रख देता है, लेकिन इस क्रिया के लिए मौन रहना आवश्यक है। जब आप मौन रहकर सुनते हैं तो आपका रोम-प्रतिरोम, नेत्रा, कर्ण, चर्म सब इन्द्रियां जाग्रत हो जाती हैं और किसी भी बात, मुद्दे पर उसके लाभ-हानि, उचित-अनुचित, भविष्य में उस बात के पड़ने वाले प्रभावों को सोच समझकर निर्णय करते हैं और इस प्रकार आप शक्ति तत्व को पूर्ण रूप से ग्रहण करते हैं।
    उतना ही बोलो, जितना आवश्यक है, अपने शब्दों का चयन बहुत सावधानी से करो। शब्द रूपी वाण का प्रहार बड़ा ही तीव्र होता है, इसलिए आप अपने वचनों के द्वारा किसी को आघात पहुंचाने का प्रयत्न कभी भी नहीं करें। आपको तो अपनी शक्ति का, अपने ही विकास (उन्नति) के लिए उपयोग करना है। आप क्या काम करते हैं? आपका लक्ष्य क्या है? यह बहुत अधिक महत्वपूर्ण नहीं है। उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आप जिस प्रक्रिया को अपनाते हैं, वह महत्वपूर्ण है। अतः साध्य नहीं, साधन का महत्व अधिक है। अर्थात् क्रिया (साधना) का महत्व ही सर्वसिद्ध है। आपके और लक्ष्य के बीच में दूरी तय करने के लिए प्रक्रिया ही साधन है। आपको प्रक्रिया में आनन्द आना चाहिए। ज्यादातर लोग जीवन में हताश, उदास, निराश क्यों दिखाई देते हैं? उसका एकमात्र कारण उनको अपने कार्य की प्रक्रिया में ही आनन्द नहीं आ रहा है। यदि आपको अपने (एक्शन) पर ही आनन्द नहीं आयेगा तो लक्ष्य की प्राप्ति हो भी जायेगी तो भी आनन्द कैसे आयेगा? मंजिल प्राप्त करनी है, लेकिन मंजिल तक पहुंचने के मार्ग का भी पल-पल आनन्द लेना है। यदि श्वास भी ले रहे हो तो श्वास लेने की प्रक्रिया में भी आनन्द आना चाहिए। यदि आपने अपनी जिन्दगी में अपने आप से जोर-जबर्दस्ती की तो आनन्द समाप्त हो जायेगा। आपको ही अपनी सारी क्रिया करनी है तो इस क्रिया की विधि है, उसमें आनन्द का तत्व डाल दीजिये। क्रिया में आनन्द आ गया तो काम अपने आप आनन्दपूर्वक सम्पन्न हो जायेगा।
    तुम्हारी श्रद्धा तुम्हारी अपनी निधि (सम्पत्ति) है, तुम्हारी सबसे मूल्यवान वस्तु है, तुमने उसे अपने मन में धारण किया है। यह श्रद्धा जन्म से तुम्हारे साथ नहीं आयी है, किसी ने श्रद्धा के लिए तुम्हें विवश नहीं किया है। श्रद्धा तो बड़ा ही प्यारा भाव है, जो हृदय और मन में बहुत-बहुत गहरे से आता है। श्रद्धा तो कर्तव्य से भी बड़ा मूल्यवान वस्तु है, सबसे अमूल्य भाव है। इसे हृदय में संभालकर रखना, इसका ध्यान रखना। यदि किसी के कहने से, कुछ सुनने से, कुछ देखने से तुम्हारी श्रद्धा टूटती है तो तुम्हारी श्रद्धा कच्ची है, फिर वह बड़ा ही भयावह हो सकता है। उस दिन तुम्हारा मन खण्ड-खण्ड हो सकता है, फिर कुछ नहीं बचेगा। जिस प्रकार अन्तर्मन की आवाज किसी दूसरे को सुनाई नहीं देती, ठीक उसी प्रकार श्रद्धा के टूटने की आवाज भी किसी को सुनाई नहीं देती और हो सकता है, तुम पूर्ण रूप से विचलित हो जाओ।
    जीवन खण्ड-खण्ड न हो जाय, इसलिए श्रद्धा को संभाले रखना एवं श्रद्धा बनाये रखना ही जीवन का अमृत है। श्रद्धा में बहुत गहरी शक्ति है, श्रद्धा में कोई भार नहीं होता, श्रद्धा से तो मन हल्का हो जाता है, मन का बोझ उतर जाता है। श्रद्धा तुम्हारा व्यक्तिगत भाव है, जहां-जहां तुम जाओगे, श्रद्धा तुम्हारे साथ चलेगी। तन थक सकता है, बाधाएं आ सकती हैं, लेकिन श्रद्धा कभी थकती नहीं है। वह तो तन और मन को सम्बल, सहारा देती रहती है। श्रद्धा तुम्हारा ही प्रतिरूप है, तुम्हारे ही मन का दर्पण है और यह दर्पण इतना मजबूत है कि इसे कोई तोड़ ही नहीं सकता है। तुम्हारी वास्तविक आनन्दानुभूति तो इस श्रद्धा के चारों ओर ही भ्रमण करती है। जीवन का सबसे सुखद भाव ही श्रद्धा है। श्रद्धावान लभते ज्ञानम- श्रद्धा में ही लाभ है, परमानन्द है।
    (साभार: निखिल मंत्र विज्ञान)

  • Mithila Diary : नये सांसद के लिए चैलेंज होगी जयनगर-सीतामढ़ी रेल परियोजना

    संवाददाता

    सीतामढ़ी : मधुबनी, झंझारपुर और सीतामढ़ी क्षेत्रों से गुजरकर जयनगर-सीतामढ़ी रेल मार्ग की मांग लंबे समय से की जा रहा है। बुलेट ट्रेन के इस युग में बॉर्डर इलाकों को जोड़ने वाली जयनगर-सीतामढ़ी रेल परियोजना एक सपना बनकर ही रह गयी है, जिसे बनाने को लेकर करीब नौ साल पहले ही वर्ष 2009 में मंजूरी दी गई थी, मगर अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। यानी यह परियोजना खटाई में पड़ चुकी है। मालूम हो कि रेलवे बुक में इस रेल परियोजना का नाम दर्ज हैं, जिसे बनाने की स्वीकृति मिलने के बाद सर्वे भी किया गया, जहां सर्वे के बाद मार्ग को तय कर लगभग एक दर्जन स्टेशनों और हॉल्ट का चयन भी कर लिया गया। अधिग्रहण के लिए जमीन की मापी कर पिलर भी गाड़े गया, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। इसके कारण परियोजना का कहीं कोई नाम-वजूद भी नहीं बन सका है। जयनगर-सीतामढ़ी रेल परियोजना बनने से तीन जिलों मधुबनी, सुपौल एवं सीतामढ़ी के निर्मली, लौकही, जयनगर, बासोपट्टी, हरलाखी, बेनीपट्टी, चरौत, सुरसंड और सीतामढ़ी प्रखंडों के दर्जनों गांवों को जोड़ा जा सकेगा। इस परियोजना के पूरी होने से बेनीपट्टी और सुरसंड जैसा महत्वपूर्ण बाजार रेल से जुड़ जाएगा। चुनाव के बाद जो नये सांसद बनेंगे, उनके लिये निश्चित रूप से उक्त परियोजना एक चुनौती होगी तो स्थानीय जनता के लिये उनसे एक बड़ी उम्मीद भी।

    • Varnan Live Report.
  • बोखड़ा में शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न, न प्राथमिकी, न कोई हिरासत में

    सतीश कुमार झा
    बोखड़ा :
    सीतामढ़ी जिले के बोखड़ा प्रखंड की सभी 11 पंचायतों को मिलाकर कुल 82 मतदान केंद्रों पर कुल 82 हजार 37 मतदाताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से मतदान किया। इनमें महिलाएं 31 हजार, 163 व पुरूष 43 हजार, 874 मतदाता शामिल रहे। प्रखंड के मध्य विद्यालय पतनुका, सोरिया बड़ी,पंचायत भवन सिंगाचोरी, सहित अन्य मतदान केंद्रों पर भीड़ बनी रही। दूसरी तरफ नये वोटरों में खासा उत्साह देखा गया। बूथ संख्या 282 से 288 तक के मतदान केंद्र पर पहली बार वोट डालने के बाद रंजू, पम्मी, नेहा सहित अन्य ने बताया कि देश को विकासशील बनाने के लिए शत-प्रतिशत मतदान जरूरी है। बीडीओ पंडित ने बताया कि पहली बार इस चुनाब में न एक भी हिरासत में लिया गया है नहीं कोई प्राथमिकी दर्ज की गयी। सभी जगहों पर शांति पूर्ण मतदान करा लिया गया। सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले नानपुर थानाध्यक्ष राम एकबाल प्रसाद, अवर निरीक्षक ओमप्रकाश श्रीवास्तव, शशिकांत कुमार, मो. इम्तियाज,कृष्ण कुमार पंडित, अनुज कुमार सहित जिला मुख्यालय से आये एसएसबी व पुलिस बलों जगह-जगह तैनात दिखे तो दर्जनों वाहनों से पेट्रोलिंग करने में वे व्यस्त भी दिखे। दंडाधिकारी के रूप में पीओ सन्तोष प्रसाद,अनुज कुमार, शिवशंकर पंडित, दिलीप कुमार, अर्धेन्दु शेखर प्रतिहस्त, शैलेंद्र कुमार सिंह, राम प्रकाश सिंह, अजय कुमार आदि पुलिस बलों के साथ तैनात दिखे। जबकि कंट्रोल रूम में कार्मिक कोषांग के पंकज किशोर पवन, शिब मंगल कुमार, विजय कुमार, आईटीकर्मी दीपक कुमार, नाजिर संतोष कुमार, किशोर कुमार आदि ने मोर्चा संभाले रखा।

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  • पिता-पुत्र के वाक्-व्यूह में घिरे नीतीश

    पिता-पुत्र के वाक्-व्यूह में घिरे नीतीश

    – लालू ने कहा पीठ में घोंपा छुरा

    – तेजस्वी ने लगाया बिहार को बर्बाद करने का आरोप

    विशेष संवाददाता
    पटना :
    बिहार सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके पुत्र तेजस्वी यादव के वाक्-चक्रव्यूह में घिरते नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां लालू ने नीतीश कुमार को पीठ में छुरा भोंकने वाला बताया है, तो वहीं तेजस्वी ने अपने ‘पलटू चाचा’ पर बिहार को बर्बाद कर दिए जाने का आरोप लगाया है। अपने ट्वीट में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश पर हमला बोलते हुए तेजस्वी ने कहा कि चार सालों में चार सरकार की कलाबाजी, कुर्सीबाजी और पलटीबाजी से बिहार को अस्थिर करने वाले व्यक्ति से विकास की उम्मीद नहीं की जा सकती। इनका कोई ठौर-ठिकाना नहीं है। कब, कहां, कैसे, किसलिए और क्यों पलटी मार जाए, कहना कठिन है। वैसे भाजपा से भागने के बहाने ढूंढे जा रहे हैं।
    इधर, चारा घोटाले में सजायाफ्ता राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा गया है कि पीठ में छुरा भोंकने वाले जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार को इस बार के चुनाव में जनता मजा चखाएगी। नीतीश भूल गए कि बाबू जगजीवन राम ने कहा था लोग पेट की मार तो सह सकते हैं, लेकिन पीठ की मार का जवाब देते हैं। तुमने जनता की पीठ में छुरा घोंपा है, उसके लिये जनता मजा चखायेगी। उल्लेखनीय है कि चारा घोटाला मामले में श्री यादव झारखंड के रांची जेल में बंद है। वह नीतीश कुमार पर वर्ष 2017 से उनके महागठबंधन से नाता तोड़कर राजग का दामन थामने को लेकर लगातार नीतीश पर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं। इस प्रकार पिता-पुत्र दोनों का रुख इन दिनों नीतीश कुमार को लेकर काफी सख्त होता दिख रहा है।

    नीतीश का पलटवार- काम से मतलब नहीं, बस फैला रहे सामाजिक कटुता

    आरोप-प्रत्यारोप हो और नीतीश कुमार चुप बैठें, ऐसा हो ही नहीं सकता। नीतीश कुमार ने लालू यादव और उनके पुत्र तेजस्वी यादव को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें समाज में कटुता फैलाने वाला बताया। पिछले दिनों मोतिहारी में भाजपा प्रत्याशी राधामोहन सिंह के पक्ष में चुनाव प्रचार के दौरान नीतीश ने तेजस्वी पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग संविधान पर खतरा होने की बातें करते हैं, जबकि ऐसी कोई बात नहीं है। उन्हें काम करने से कोई मतलब नहीं है। ये लोग समाज में बस कटुता फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमलोगों से पहले 15 साल जिन्होंने बिहार में शासन किया, वे आज समाज में टकराव पैदा करने की बातें कर रहे हैं। संविधान पर कोई भी संकट नहीं आया है। अगर आया है तो वे बतायें कि क्या संकट आया।

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