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  • #Loksabha Election 2019 : महामुकाबला – अब आर या पार

    #Loksabha Election 2019 : महामुकाबला – अब आर या पार

    बोकारो : लोकतंत्र के महापर्व चुनाव की घड़ी आखिरकार आ ही गयी। इसे लेकर लम्बे समय से चली आ रही सभी दलों के उम्मीदवारों ने अपनी तैयारियों के लिये हर पत्ते खोल दिये। जिस किसी तकनीक या जुगाड़ से मतदाताओं को अपने पक्ष में किया जाय, वह तमाम हथकंडे अंतिम घड़ी में प्रत्याशियों ने लगा दिये। सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। यहां धनबाद व गिरिडीह लोकसभा क्षेत्रों के लिये चुनाव को लेकर आर या पार की लड़ाई के लिये ऐंड़ी-चोटी एक कर दी गयी। स्टार प्रचारकों से लेकर बड़े नेतागण चुनावी अभियान का मोर्चा संभाल अपने-अपने प्रत्याशियों को जिताने का आह्वान कर चलते बने। लेकिन, फैसला तो जनता ही करेगी। 12 मई के मतदान के साथ ही ईवीएम में कैद उम्मीदवारों की तकदीर का फैसला अब 23 मई को होगा। उसी दिन यह स्पष्ट हो जायेगा कि किसे जनता ने अपना आशीर्वाद किया और किसे नकार दिया। वैसे सभी मुख्य राजनीतिक दलों के प्रत्याशी खुद की जीत पक्की होने के दावे तो कर रहे हैं। किसी को कान्फिडेन्स है तो किसी को ओवरकान्फिडेन्स, लेकिन होगा तो वही जो जनता चाहेगी, क्योंकि यह जनतंत्र है, जनता का, जनता के लिये, जनता के द्वारा।

    Rahul Gandhi during Road show in Dhanbad.

    मंच पर उतरे कई दिग्गज
    धनबाद व गिरिडीह लोकसभा क्षेत्रों में मुकाबला सीधे-सीधे यूपीए और एनडीए के बीच है और ‘मिथिला वर्णन’ के एक खास सर्वे में मोदी लहर की बात स्पष्ट तो हुई, परंतु जनादेश क्या होता है, वह तो ईवीएमरूपी किस्मत का पिटारा खुलने के बाद ही साफ हो सकेगा। वैसे अंतिम समय में भाजपा और विपक्ष के महागंठबंधन ने जमकर अपनी शक्ति लगा डाली। भाजपा ने जहां केन्द्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को उतारा तथा अंतिम दौर में एक बार फिर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने चुनावी सभाओं को संबोधित किया, वहीं दूसरी तरफ यूपीए ने नवजोत सिंह सिद्धू के बाद अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को भी मंच पर उतारा। यूपीए व एनडीए के इन शीर्ष नेताओं ने एक-दूसरे पर वार-पलटवार किया।

    • Varnan Live (12/05/19)

  • जानकी नवमी सह मैथिली दिवस धूमधाम से मना

    जानकी नवमी सह मैथिली दिवस धूमधाम से मना

    सिंदरी। विद्यापति परिषद् सिंदरी द्वारा परिषद् प्रांगण में सोमवार को जानकी नवमी दिवस सह मैथिली दिवस धूमधाम से श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर माता जानकीजी के मंदिर में पं डॉ भास्कर झा एवं पं अमर झा द्वारा पूजन किया गया वहीं महिलाओं द्वारा भजन कीर्तन किया गया। जानकी नवमी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि यह पर्व मिथिला एवं मैथिलों के लिए महत्वपूर्ण पर्व है और यह पूरे विश्व में एवं मैथिलों के बीच में मनाया जाता है। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को जनकनंदिनी एवं प्रभु श्रीराम की प्राणप्रिया सर्वमंगल दायिनी, पतिवर्ताओं में शिरोमणी माता सीता का प्रकाटय हुआ उसी उपलक्ष्य में यह पर्व मनाया जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार इस पावन पर्व पर को भी भगवान राम सहित मां जानकी का व्रत पूजन करता है उसे पृथ्वी दान का फल स्वत: ही प्राप्त हो जाता है एवं समस्त प्रकार के दुःखों, रोगों व संतापों से मुक्ति मिलती है।
     इस मौके पर परिषद् के अध्यक्ष निर्मल कांत झा द्वारा परिषद् प्रांगण में मिथिला का पारम्परिक ध्वजारोहण किया गया। मैथिल संस्था के प्रबुद्ध जनों ने मिथिला राज्य के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई एवं मिथिला राज्य की स्थापना तक संघर्ष जारी रखने की बात कही। स्कूलों, कॉलेजों में मैथिली भाषा की पढ़ाई को सुनिश्चित करने की मांग सरकार से की गईं। कार्यक्रम के अंत में महाप्रसाद के रुप में पुड़ी सब्जी, खीर का वितरण किया गया। मौके पर सिंदरी थाना प्रभारी सह निरीक्षक राज कपूर, सरस्वती विद्या मंदिर सिंदरी के प्राचार्य संजीव कुमार, महेन्द्र पाण्डेय, अजय कुमार, राजेश सिंह, पूर्णेंदू सिंह आदि थे। समारोह के आयोजन में डॉ केके ठाकुर, महासचिव विनोद कुमार झा, एके मिश्रा, चन्द्र शेखर झा, शैलेन्द्र कुमार झा, अशोक झा हेमन्त ठाकुर, मदन मोहन झा, शिव कांत झा ,अमरनाथ झा, बनवाली झा, अश्विनी मिश्रा उर्फ मिंटू मिश्रा, विजय चौधरी, अरुण कुमार झा, राज गोविंद झा, महेन्द्र झा, दिलीप झा, वंशीधर मिश्रा, संतोष झा, लक्ष्मी राउत आदि शामिल थे।

    • Varnanlive. (13/05/19)
  • कड़ी सुरक्षा के बीच सील की गई ईवीएम, 23 को खुलेगा पिटारा

    धनबाद। धनबाद के छह विधानसभा, जिसमें झरिया, निरसा, धनबाद, बोकारो, चंदनकियारी, सिन्दरी के इवीएम को जिला निर्वाचन अधिकारी सह डीसी, धनबाद एसएसपी प्रत्याशियों के मौजूदगी में कड़ी सुरक्षा के बीच बरवाअड्डा के बाजार समिति में बनाये गये वज्रगृह में सील कर दिया गया। 23 मई को मतगणना के दिन सभी बज्रगृह खोले जायेंगे। सुरक्षा को लेकर काफी व्‍यापक इंतजाम किये गये हैं. साथ ही प्रत्याशियों के रहने के लिए भी अलग से व्यवस्था की गई है।

    सील किये जाने के बाद रखी ईवीएम।
    • Varnanlive (13/05/19)
  • Special Feature : राम को आस, पर सीता को वनवास!

    Special Feature : राम को आस, पर सीता को वनवास!

    • मोद प्रकाश
      भगवान श्रीराम को फिर से आस है कि उनका मंदिर बनेगा, जहां उनका अवतरण हुआ था। पर माता सीता अभी भी वनवास ही झेल रही हैं। उनकी जन्मस्थली से लेकर बाल्यकाल और युवाकाल तक के सारे स्थल यूं ही अनदेखी और उपेक्षा के शिकार हैं। लोकतंत्र भी अजीब है, बस शोर का ही जोर है और शांतिपूर्ण मुद्दे विचार योग्य भी नहीं हैं। किसी ने खूब कहा है- जुबां के जोर पे हंगामा से क्या हासिल वतन में एक दिल होता और जो आशना होता। (आशना मतलब प्रेमी और यहां इसका तात्पर्य देशप्रेमी से है।) सीता माता आज के बिहार के सीतामढ़ी जिला में भूमि से जन्मी। भीषण अकाल से जूझ रहे मिथिला को राहत दिलाने के लिए राजा जनक ने यज्ञ किया और उसी क्रम में धरती पर हल चलाया। हल से धरती में बने निशान से एक मटकी में बालिका सीता मिलीं। सीता जन्मभूमि बिहार के सीतामढ़ी जिले में है। वहां कोई भव्य मंदिर नहीं है और वहां पर्यटक एवं श्रद्धालुओं को जाने और अपनी श्रद्धा अनुसार पूजा-अर्चना और भ्रमण करने में खासी कठिनाई होती है। पास में ही सीताकुंड है, जो सीता माता का स्नान-स्थल है। यहां से लगभग 40 किलोमीटर पर जनकपुर (नेपाल) है, जो राजा जनक की राजधानी थी और जहां सीता माता के बचपन के सभी जगह हैं। जानकी मंदिर, राम-जानकी मंदिर, जानकी विवाह मंडप, धनुष सागर इत्यादि कई स्थान हैं, जो पूरी दुनिया के 100 करोड़ हिन्दुओं के लिए मूल श्रद्धा के स्थान हैं। आप तुलना करें जेरुसलेम की प्रसिद्धि का और रामजन्म भूमि तथा सीताजन्म भूमि की प्रसिद्धि का।
      दु:खद बात है कि राम जन्मभूमि के बारे में लोग जानते हैं इसलिए नहीं कि यह राजा राम की जन्मस्थली है और करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसलिए कि वहां पर किसी मंदिर और मस्जिद का विवाद है और हिन्दू और मुस्लिम लड़ाई कर रहे हैं। सीता जन्मस्थली के बारे में तो शायद ही कोई जानता है। माता मैरी के बारे में दुनिया के लोगों की जागरुकता और माता सीता के बारे में लोगों की जागरुकता की तुलना करें, स्थिति और खराब है। जेरूसलेम की हर गली, हर नुक्कड़ और हर ईंट का एक इतिहास है, जो ईसाई और यहूदी समाज ने अथक परिश्रम, अनुसंधान तथा संसाधन लगाकर संरक्षित किया है। उन्होंने पौराणिक कथाओं को ऐतिहासिक तथ्यों से जिस तरह जोड़ा है, वह सराहनीय है। आप अमेजॉन प्राइम पर एक प्रोग्राम देखें – ‘दि एक्जोडल रिवील्ड’। इस प्रोग्राम ने मूसा के मिस्र से इजराइल जाने की जो कथा है, उसे इतने सटीक तरीके से पौराणिक कथा से ऐतिहासिक कथा भूमि पर लाया है कि इसके बाद कोई नहीं कह सकता है कि मूसा को समुद्र ने रास्ता नहीं दिया था। पौराणिक कथानक, वर्तमान के साक्ष्य और वैज्ञानिक अन्वेषण ने इस पौराणिक कथा को इतिहास बना दिया। हे हिन्दुओं! आज पूरी दुनिया में राम अभी भी मिथक हैं और हमारी आस्था के स्वरूप हैं और इसी वजह से हमारी आस्था पर भी पूरी दुनिया हंस लेती है।
      हे मोदी जी! आप तो पूरी दुनिया के हिन्दुओं की आस्था का केन्द्र भारत को मानते हैं। इस आस्था के प्रमाण हैं, आस्था की किताबें हैं, आस्था के स्थल हैं, जरूरत है विज्ञान की, जो अन्वेषण करे और इन साक्ष्यों को कहानियों और किंवदन्तियों से जोड़कर एक इतिहास बनाये। जरूरत है इस आस्था को एक प्रामाणिक धरातल प्रदान करने की। हे नीतीश जी! आपने तो बिहार के गौरव को बढ़ाने की शपथ ली है और आपने नालंदा विश्वविद्यालय की फिर से स्थापना की है, जिससे पुराने नालंदा का गौरव और ज्ञान फिर से वापस आ सके। बिहार का गौरव मिथिला के गौरव से है और इस गौरव के लिए कुछ प्रशासनिक कदम भी उठाने की जरूरत है। क्या जरूरी है कि जब तक सीता जन्मभूमि से कोई विवाद नहीं खड़ा हो, वहां कुछ करने की जरूरत नहीं है? कम से कम एक भव्य मंदिर का निर्माण तो होना चाहिए, जहां पूरी दुनिया के लोग आ सकें और अपनी श्रद्धा को अर्पित कर सकें। हमारे जैसे रामभक्त, जिन्हें दुनियाभर में लोगों से सुनना पड़ता है कि 100 करोड़ लोगों की आस्था वाले इस स्थान पर मंदिर बहुत साधारण है। ऐसी धर्मस्थली या इससे भी बेहतर तो विदेशों में छोटे-छोटे पैमाने पर होते हैं। आपका यह मंदिर पर्यटन को बढ़ावा देगा, राजकीय कोष में पैसा आएगा और इन पिछड़े इलाकों का सीता मइया की कृपा से उद्धार होगा। इसके साथ ही आप पटना, मिथिला और नालंदा विश्वविद्यालय में रामायण अनुसंधान पीठ स्थापित करें। फैजाबाद, अयोध्या, प्रयाग विश्वविद्यालय में भी ऐसे पीठ स्थापित होने चाहिए और उनको इन कथाओं, स्थानों, ऐतिहासिक घटनाओं और पौराणिक मान्यताओं पर अनुसंधान करना चाहिए।
      बहरहाल, जब तक रामलला को सुप्रीम कोर्ट छोड़ते नहीं हैं, तब तक सीता माता की भव्यता को साकार करें हम। राजनीति तो आपकी इससे भी सफल हो जाएगी और भगवान राम इस बात से ज्यादा खुश होंगे कि सदियों के वनवास के बाद उनकी सीते को सही सम्मान इस देश के लोगों ने दिया। मोदीजी! सीता माता फिर से वनवास में किसी हनुमान की प्रतीक्षा कर रही हैं और आज के भारत में मुझे कोई ऐसा नहीं दिखता है, जिसमें हनुमान बनने, कठिन कार्य को ठानकर उसको करने की क्षमता रखता हो। नीतीश जी! आप भी सुग्रीव की तरह महावीर जी की आस्था में साथ हो जाएं और माता-सीता के वनवास को खत्म करने का कार्यक्रम शुरू कर डालें।
      जय सीताराम!
      (लेखक अप्रवासी भारतीय तथा ‘मिथिला वर्णन’ के विशेष प्रतिनिधि हैं।)
  • शुरू से रोमांचक रहा है धनबाद लोकसभा का चुनावी दंगल

    शुरू से रोमांचक रहा है धनबाद लोकसभा का चुनावी दंगल

    दीपक कुमार झा

    Bokaro (Jharkhand)

    बोकारो। धनबाद लोकसभा क्षेत्र के लिये चुनावी मुकाबला शुरू से ही रोमांचक रहा है। शह-मात के चुनावी दंगल में किसी को तीन-तीन बार, किसी को चार-चार बार सांसद बनने का गौरव मिला, तो किसी को एक बार ही सांसद की कुर्सी पाकर संतोष करना पड़ा है। इस संसदीय क्षेत्र के चुनावी जंग में रीता वर्मा, एके राय के बाद पीएन सिंह अपना वर्चस्व जमाने की कोशिश में हैं। 1957 से लेकर 2014 तक के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों में भाजपा प्रत्याशी रहीं यहां की एकमात्र महिला सांसद रीता वर्मा के नाम सर्वाधिक चार-चार बार लगातार धनबाद का सांसद बनने का रिकार्ड दर्ज है। रीता ने तीन बार एके राय (एमसीओ) तथा एक बार समरेश सिंह को हराकर सांसदत्व हासिल किया। पहली बार वर्ष 1991 में 85,299 मतों के अंतर से अपने निकटतम प्रतिद्वंदी एके राय को हराकर गद्दी हासिल की। दूसरी बार समरेश सिंह (जेडी) को 22,196 वोट से हराकर वह सांसद बनीं थीं। तीसरी बार फिर एके राय को 178689 तथा चौथी बार फिर श्री राय को ही 14,224 वोट से 1999 में फिर सांसद बनीं। यानी एक राय ने उन्हें लगातार कड़ी टक्कर दी। रीता वर्मा के बाद एके राय को सर्वाधिक तीन बार धनबाद लोकसभा क्षेत्र का सांसद बनने का गौरव मिला है। 1977 में राम नारायण शर्मा (आईएनसी) को 141849, 1980 में योगेश्वर प्रसाद योगेश (आईएनसी- आई) को 15306 तथा 1989 में भाजपा प्रत्याशी समरेश सिंह को 13571 को वोट से हराकर वह सांसद बने थे। 1984 में अगर शंकर दयाल सिंह (आईएनसी) न जीतते तो एके राय भी हैट्रिक लगा लेते। उन्हें 62295 मतों से हराकर शंकर दयाल सिंह ने जीत दर्ज की थी। अब 2019 के चुनाव में भाजपा के पशुपतिनाथ सिंह हैट्रिक लगाने की कोशिश में जुटे हैं। वर्ष 2009 और 2014 से लगातार वह धनबाद सांसद रहे हैं। 2009 में अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे को 58047 तथा 2014 में कांग्रेस के ही अजय कुमार दुबे को 196188 वोट से पराजित कर सांसद बने थे। जबकि चंद्रशेखर दुबे को झारखंड अलग राज्य में प्रथम धनबाद सांसद बनने का गौरव मिला था। 2004 में उन्होंने रीता वर्मा को 119378 वोट से हराया था। पशुपतिनाथ सिंह के नाम सर्वाधिक वोट 543,491 प्राप्त करने का रिकार्ड भी अब तक के चुनावों में दर्ज है।

    अब तक के सांसद

    1957 में आईएनसी के प्रभात चन्द्र बोस (67095), 1959 के उपचुनाव में आईएनसी के डीसी मल्लिक (34844), 1962 में आईएनसी के पीआर चक्रवर्ती (75170), 1967 में जेकेडी एलआर लक्ष्मी (68034), 1971 में आईएनसी के राम नारायण शर्मा (107308), 1977 में निर्दलीय एके राय (205495), 1980 में फिर एके राय (136280), 1984 में आईएनसी के शंकर दयाल सिंह (203909),  1989 में एम. कार्डि. से एक राय (247013), 1991 में भाजपा की रीता वर्मा (257066), 1996 में रीता वर्मा (269942), 1998 में रीता वर्मा (442590), 1999 में पुन: रीता वर्मा (366065), 2004 में आईएनसी के चन्द्रशेखर दुबे (355499), 2009 में भाजपा के पशुपतिनाथ सिंह (260521), 2014 में पुन: पशुपति नाथ सिंह (543,491)।

    • Varnan Live.
  • ” चल बेटा, ले चल वोट दिलाने…!”

    ” चल बेटा, ले चल वोट दिलाने…!”

    123 वर्षीया ठकुरी देवी ने भी किया मतदान

    गोमिया (बोकारो)। बोकारो जिले में मतदान के प्रति रविवार को एेसा उत्साह दिखा कि क्या लाचार, क्या बीमार, क्या बुजुर्ग और क्या युवा, सब के सब ने अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग किया। इसी क्रम में बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड अंतर्गत जरकुंडी की रहने वाली 123 वर्षीय वृद्धा ठकुरी देवी ने अपना वोट डाला। उसने अपने पोते महावीर महतो को वोट दिलाने की जिद की और पोता श्रवण कुमार की तरह अपनी दादी को गोद में लेकर सीधे अपने मतदान केन्द्र पर ले आया। वोट डालने के बाद वह फिर पोते के साथ खुशी-खुशी लौट गयी। शारीरिक तौर पर बोलने में और चलने में ठकुरी थोड़ी लाचार तो जरूर दिखी, लेकिन वोट डालने के बाद उसकी आंखों में जो खुशी दिखी, उसका वर्णन नहीं किया जा सकता।

    • VarnanLive (12/05/19).
  • The Democratic Devotion : विवाह मंडप से उठकर मतदान देने पहुंची दुल्हन

    विदाई से पहले हो आयी मतदान केन्द्र, कहा- है हमारा संवैधानिक अधिकार

    Kumar Sanjay

    Correspondent, Bokaro Thermal.
    मतदान केंद्र के बाहर मत देने के बाद दुल्हन पुष्पा अपने दूल्हा के साथ.

    बोकारो थर्मल ः बोकारो जिले के बेरमो अनुमंडल के गांधीनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत जरीडीह पश्चिमी पंचायत के सरैयाटांड़ चैती दुर्गा मंदिर के समीप सामुदायिक भवन में बूथ संख्या 44 में सुबह मतदान शुरू होते ही एक दुल्हन शादी के जोड़े में वोट देने पहुंची.मतदान केंद्र पर आते ही देखने के लिए काफी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई। डिहवा गांव के चंद्रदेव महतो उर्फ सीडी सिंह की पुत्री पुष्पा कुमारी का विवाह बगोदर के राजकुमार के साथ रविवार की सुबह संपन्न हुआ। बारात शनिवार रात्रि को पहुंची थी। सुबह दुल्हन ने वोट देने की इच्छा जाहिर की तो सजी कार पर विदाई के पूर्व दुल्हन दूल्हे के साथ अपना वोट देने मतदान केंद्र पहुंची। दुल्हन पुष्पा ने शादी के जोड़े में अपने मताधिकार का प्रयोग किया। दुल्हन पुष्पा ने कहा कि मतदान हमारा संवैधानिक अधिकार है। चुनाव में एक-एक मत का महत्व होता है, इसलिए हमने अपने मत का प्रयोग करने की सोची। पुष्पा केवी कॉलेज से स्नातक की शिक्षा पूरी कर चुकी है। पुष्पा ने मतदाताओं से अपील किया कि हर व्यक्ति अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें.गांधीनगर थाना प्रभारी आरबी सिंह ने भी दुल्हन की इस पहल की प्रशंसा करते हुए दूल्हा दुल्हन को आशीर्वाद दिया।

    • Varnan Live Report. (12/05/2019)
  • Ballets beat Bullets : नक्सलियों के गढ़ में भारी रही लोकतांत्रिक धमक

    विशाल अग्रवाल, Correspondent.

    गोमिया (बोकारो) : लोकतंत्र के महापर्व के लिए रविवार का दिन मंगलकारी साबित हुआ। कल तक जहां बदूकें लहरती थी, वहां अब लोकतंत्र की जय-जयकार हो रही है। गोमिया के नक्सल प्रभावित इलाके तुइयो, राजडेरवा, कुरकुटिया, चैयाटांड़, दनरा, अमन, चचुआबेड़ा, खराबेड़ा गांव के उत्क्रमित मध्य विद्यालय चुट्टे बूथ संख्या 36, 37, 38 एवं 39 सहित विभिन्न बूथों पर वोट बरसते रहे। सुबह से मौसम में गर्मी के बावजूद लोधी, कुर्कनालो, पेजुआ के विभिन्न बूथों पर वोटरों की लंबी लाइन लग गयी थी। वोट देने के लिये मतदाताओं का उत्साह व उमंग चरम पर नजर आया। बूथों पर पुरुष और महिला मतदाताओं से लंबी लाइन जागरूकता का संदेश दे रही थी। क्षेत्र के करीब 3-4 मतदान केंद्रों पर इवीएम सहित अन्य तकनीकी खराबी के कारण कुछ देर मतदान बाधित रहा। हालांकि प्रशासन की तत्परता के कारण जल्द ही आयी खराबी को दूर कर मतदान सुचारु रूप से शुरू करवा दिया गया। हाई प्रोफाइल चेहरों ने किया मतदाननये से लेकर बुजुर्ग मतदाताओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। यहां मतदान करने गोमिया प्रखंड प्रमुख गुलाब चन्द्र हांसदा, उप प्रमुख मिना देवी ने भी मतदान किया। मतदान केंद्रों पर स्काउट एंड गाइड मुस्तैदी से कर्तव्य निर्वहन में लगे रहे. वोटरों को लाइन में लगाने से लेकर दिव्यांग सहित बुजुर्ग मतदाताओं को मतदान में स्काउंट एंड गाइड की मदद ली गयी।

    चुनावी गतिविधि पर होती रही कड़ी निगरानी

    चुनाव के दौरान चुनावी गतिविधि को लेकर प्रखंड क्षेत्र में चुनाव कार्य में लगे 110 वाहनों से निगरानी की जा रही थी। खासकर नक्सल प्रभावित क्षेत्र झुमरा पहाड़ स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय मतदान केंद्र की संख्या 44 पर हेलीकॉप्टर द्वारा मतदान कर्मियों को वहां पहुंचाया गया। में हेलीकॉप्टर द्वारा झुमरा क्षेत्र कड़ी निगरानी रखी जा रही थी। तो दूसरी तरफ गोमिया बीडीओ मोनी कुमारी, सीओ ओम प्रकाश मंडल, गोमिया सीआई सुरेश बर्णवाल मतदान केंद्रों पर जाकर हालात का जायजा लिया। नक्सल गतिविधियों को देखते हुए तुइयो, राजडेरवा, कुरकुटिया, चैयाटांड़, दनरा, अमन, चचुआबेड़ा, खराबेड़ा आदि नक्सल प्रभावित इलाके में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अति उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र चतरोचट्टी थाना, महुआटांड़ थाना एवं जागेश्वर बिहार थाना क्षेत्र में सुरक्षा प्रबंध की व्यापक व्यवस्था की गई थी। वहां केंद्रीय अर्धसैनिक बल, सीआरपीएफ की कंपनी के अलावा जगुआर, जैप, जिला पुलिस, होमगार्ड के पांच कंपनियां क्षेत्र में तैनात किए गए तथाा सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया था।

    • Varnanlive Report 12/05/19.
  • #LoksabhaElection2019- नये वोटरों ने दिया सजग नागरिकता का परिचय

    New Voters in Bokaro, who casted their votes fist time in life.

    बोकारो ः 18 वर्ष की उम्र पर पहुंचे नये मतदाताओं में पहली बार वोट डालने का खासा उत्साह बोकारो में देखा गया। चास-बोकारो के विभिन्न बूथों पर बड़ी संख्या में युवक-युवतियां बतौर वोटर पहली बार पहुंचे और पूरी प्रसन्नता के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चास निवासी सोनल खंडेलवाल ने अपने भाई के साथ पहली बार मतदान दिया, तो बोकारो के सेक्टर-12सी में पूजा कुमारी, दुंदीबाद निवासी सरस्वती कुमारी और सेक्टर-2डी निवासी स्मृति सिंह ने पहली बार वोटिंग की। सबों ने कहा कि पहली बार उन्हें वोट कर काफी अच्छा लगा। सोनल ने कहा कि वह एक जागरुक नागरिक है और सबको हमेशा ही अपना वोट अवश्य देना चाहिये।

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  • तपिश को देकर मात उमड़ पड़ी जमात

    तपिश को देकर मात उमड़ पड़ी जमात

    लोकतांत्रिक आस्था के महापर्व पर उमड़ा जनसैलाब

    – Deepak Kumar Jha.

    Bokaro Steel City (Jharkhand).

    बोकारो : विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का सबसे बड़े पर्व चुनाव का आनंद रविवार को बोकारो जिले के निवासियों ने भी लिया। राज्य में तीसरे तरण के निर्वाचन के तहत बोकारो जिले में धनबाद तथा गिरिडीह संसदीय क्षेत्र के लिये मतदाताओं ने अपने-अपने पसंदीदा प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद कर डाली। इस बार के चुनाव में लोगों की जागरुकता को लेकर प्रशासन की कवायदें काफी हद तक रंग दिखाने वाली रहीं। अपने मतदान के जरिये लोकतंत्र को सशक्त बनाने तथा देश की नयी तकदीर व तस्वीर गढ़ने की उम्मीदों के साथ जिले के वोटरों में वोटिंग के प्रति अपार उत्साह देखा गया। लोकतांत्रिक महोत्सव के इस उमंग में प्रातः बेला से ही लोग अपने-अपने मतदान केन्द्रों पर जुटने लगे। बूथों के समीप रहने वाले कई लोग मार्निंग वाक करते हुए पहुंचे तो कोई वाहनों से आये। कोई अकेला पहुंचा, तो कोई पूरे परिवार के साथ। कई महिलायें गोद में बच्चा तक साथ में लेकर उत्साह में बूथों तक जाती दिखीं, मानो वह किसी मेले में जा रही हों। मतदान शुरू होने के निर्धारित समय सात बजे से लगभग एक घंटा-डेढ़ पहले से ही लोगों की चहल-कदमी बूथों पर शुरू हो गयी, जो दिनभर जारी रही। 44 डिग्री सेल्सियस की झुलसाती गर्मी, आग उगलती सड़क और शोले बरसाते आसमान के बीच लू के थपेड़े भी लोकतंत्र के इन आस्थावीरों की आस्था को डगमगा न सके। दिनभर बम्पर वोटिंग चलती रही। अपना राष्ट्रीय नेतृत्व चुनने की खुशी में दिव्यांगता और अन्य सभी तरह की शारीरिक लाचारी को भी वोटरों ने ठेंगा दिखाते हुए जमकर मतदान किये। कोई ट्राइसाइकिल से आया, तो कोई अपनी तिपहिया स्कूटी से, तो कोई वैशाखी लेकर, सबमें गजब का उत्साह देखा गया। इधर, वोटिंग के बाद सोशल मीडिया पर मतदान की स्याही लगी उंगलियों के साथ फोटो शेयर करने का सिलसिला दिनभर चलता रहा। सबों ने फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर जैसी सोशल साइट्स के जरिये अपनी सजग नागरिकता होने का प्रमाण अपने इष्टमित्रों के साथ साझ किया।

    View Video Report.


    शहरी बाबुओं में फिर दिखी उदासीनता

    बोकारो जिले में इस बार भी शहरी इलाके के बजाय ग्रामीण वोटरों में अपेक्षाकृत अच्छी जागरुकता दिखी। चास-बोकारो के ज्यादा चंदनकियारी तथा नक्सल प्रभावित गोमिया एवं आसपास के इलाकों में ज्यादा भीड़ देखी गयी। अपराह्न तीन बजे तक प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक चंदनकियारी विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक 62.5 प्रतिशत वोटिंग हुई। 62.3 प्रतिशत मतदान के साथ गोमिया दूसरे, 57.23 प्रतिशत वोटिंग के साथ बेरमो तीसरे 46.86 प्रतिशत मतदान के साथ बोकारो विधानसभा क्षेत्र चौथे स्थान पर रहा। 

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