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  • विकास का माध्यम है ध्यान : मोहनलाल जी बोथरा

    विकास का माध्यम है ध्यान : मोहनलाल जी बोथरा

    बोकारो। चास के कुलदीप टॉकीज कंपलेक्स में पर्यूषण पर्व के अवसर पर जैन तेरापंथ सभा, चास-बोकारो की ओर से आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में लगातार ज्ञान-गंगा प्रवाहित हो रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को ध्यान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर बाहर से पधारे जैन उपासक श्री मोहनलालजी बोथरा ने मानव जीवन में ध्यान और अध्यात्म की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ध्यान विकास का माध्यम है। ध्यान धर्म की एक एक श्रृंखला है। केवल इंद्रिय चेतना में धर्म को जाना नहीं जा सकता. अतिन्द्रिय चेतना के स्तर पर जाने के लिए ध्यान ही माध्यम है। बाह्यध्यान से अंतर-जगत में जाने से अंतरदृष्टि का विकास होता है। उन्होंने कहा कि चित्त को किसी एक लक्ष्य पर स्थिर करना है ही ध्यान कहलाता है। वैराग्य, तत्व-विज्ञान, समचित्तता तथा निग्रंथता आदि की प्राप्ति में उन्होंने ध्यान की भूमिका पर प्रकाश डाला और इन्हें ध्यान का उद्देश्य बताया। उन्होंने भगवान महावीर, बुद्ध, पैगम्बर, राजा जनक आदि के प्रसंगों की चर्चा करते हुए इनकी महत्ता बतायी। इसके बाद अब तीन सितंबर को संवत्सरी महापर्व मनाया जाएगा और चार सितंबर को क्षमापना दिवस के साथ इस नौदिवसीय पर्यूषण पर्व का समापन होगा। मौके पर अंजली छलानी, मनोज छलानी, निकिता चोपड़ा, सुनीता कोठारी, अनिल बैद, सज्जन जैन, सुरेश बोथरा, शांतिलाल लोढा, प्रकाश, विनोद चोपड़ा, संजय बांठिया, अरिहंत बांठिया, चन्दन बांठिया, कनक जैन, ललिता चोपड़ा, शशि बांठिया, अंकिता चोपड़ा, बजरंग, अभय, राजेश कोठारी, मदन, जयचंद, सुशील बैद आदि मौजूद थे।

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  • जयघोष से गूंजा काली मंदिर इलाका, मिथिला बोलबम समिति ने किया सवा लाख पार्थिव शिव-पूजन

    जयघोष से गूंजा काली मंदिर इलाका, मिथिला बोलबम समिति ने किया सवा लाख पार्थिव शिव-पूजन

    संवाददाता
    बोकारो। मिथिला बोल बम समिति द्वारा नगर के सेक्टर 2डी मिथिला चैक स्थित काली मंदिर परिसर में रविवार को सवा लाख पार्थिव शिवपूजन कार्यक्रम श्रद्धा व उल्लास के साथ किया गया। सुबह से ही मैथिलानी पूजा के निमित्त सवालाख पार्थिव शिवलिंग के निर्माण में जुटी थीं। दोपहर से पूजन कार्यक्रम प्रारंभ होकर देर शाम तक चला। इस क्रम में रुद्राभिषेक, आरती, पुष्पांजलि, कलशाभिषेक के बाद अंत में प्रसाद वितरण हुआ। मंत्रोच्चारण व हर-हर महादेव से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा। पूजा पर मिथिला बोल बम समिति के सरदार पं. उदय कुमार झा सहित एनके झा, कृपानंद झा, गौरी शंकर झा, प्रबोध मिश्र, बालशेखर झा, इंदु शेखर ठाकुर बैठे थे।
    विगत 10 वर्षों से इस पूजन कार्यक्रम का आयोजन समिति द्वारा किया जा रहा है। समिति के सरदार पं. झा ने बताया कि शिवपुराण के अनुसार सभी लिगों में पार्थिव शिवलिंग को उत्तम माना गया है। इनके पूजन से सभी कामना पूरी होती है। इस अवसर पर सुनील कुमार झा के संयोजन में भजन-कीर्तन का भी आयोजन हुआ जिसमें शैलेन्द्र मिश्र, विजय कुमार मिश्र, मिहिर कुमार झा, भृगुनंदन ठाकुर आदि शामिल हुए। पूजनोत्सव कार्यक्रम को सफल बनाने में मिथिला बोल बम समिति के बहुरन झा, गोविन्द चौधरी, शेषनाथ झा, एसएन मिश्र, महावीर झा, मीरा देवी, रंजू चौधरी, अरविन्द कुमार झा आदि का सक्रिय सहयोग रहा। इस मौके पर मैथिली कला मंच काली पूजा ट्रस्ट के अध्यक्ष केसी झा, महासचिव सुनील मोहन ठाकुर सहित सुभद्र चौधरी, विवेकानंद झा, अरुण पाठक, रामदेव झा, पी के झा चंदन, नीरज चौधरी, उषा झा, जय प्रकाश चैधरी, गोपाल झा आदि उपस्थित थे।

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  • निष्कलंकता व समृद्धि के लिये मनायी गयी चौठचन्द्र पूजा

    निष्कलंकता व समृद्धि के लिये मनायी गयी चौठचन्द्र पूजा

    संवाददाता
    बोकारो : बोकारो मे रहने वाले मिथिलांचलवासियों ने सोमवार शाम श्रद्धा व उल्लास के साथ चौठचन्द्र पूजा संपन्न की। कला-संस्कृति की विशिष्टता के लिये प्रसिद्ध मिथिलांचल में कई पर्व-त्यौहार अनूठे ढ़ंग से मनाये जाते हैं। गणेश चतुर्थी यूं तो देश भर में उत्साह व निष्ठा के साथ मनाई जाती है, लेकिन मिथिलांचल के लोग इसे चैठचन्द्र (चौरचनि) पूजा के नाम से मनाते हैं। भादव शुक्ल चतुर्थी को मिथिला के गांव-गांव के साथ-साथ जहां भी मैथिल रचते-बसते हैं, वहां चौठचन्द्र पावन श्रद्धा से मनाया जाता रहा है। मान्यता है कि जो यह पूजा संपन्न करते हैं, वे सदा धनवान, पुत्रवान व प्रसन्न रहते हैं। जानकार बताते हैं आज के दिन चन्द्रमा को कलंक लगा था, किन्तु मिथिला में चन्द्रमा पूजा की परम्परा है। कहा जाता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति चंद्रमा को खाली हाथ देखते हैं, उन्हें भी मिथ्या कलंक कलता है। जब भगवान श्रीकृष्ण पर स्यमन्त की मणि चोरी का मिथ्या कलंक लगा था तो हम और आप क्या हैं? भगवान कृष्ण ने नारदजी की प्रेरणा से इसी तिथि के गणेश व चन्द्रमा की पूजा की थी तो उन्हें कलंक से छुटकारा मिला था। इसलिये मिथिला में यह पूजा संपन्न कर फल, मिठाई लेकर चन्द्रदेव के दर्शन की परम्परा है। 

    सुबह से ही बनने लगते हैं नाना प्रकार के पकवान

    मैथिलानी दिन भर निराहार रह पवित्रता के साथ सुबह से ही अच्छे-अच्छे व नाना प्रकार के पूड़ी-पकवान, छनुआ सोहारी (रोटी), चीनी पूड़ी, रंग-बिरंग के पिरुकिया (गुजिया), टिकरी आदि बनाते हैं। इन पकवानों के अलावा भांति-भांति के फल मधुर-मिठाई, नारियल, दही आदि से सजे डालों को सजाया जाता है। घर के आंगन में पिठार (पिसे चावल के घोल) से अरिपन (एक विशेष प्रकार की पारंपरिक अल्पना कलाकृति) बनाये जाते हैं। फिर उन पर सिन्दूर लगाया जाता है और उन्हीं पर सजी डालियों को रखा जाता है, साथ ही कलश स्थापित किया जाता है। उसके बाद चंदनयुक्त सिन्दूर, यज्ञोपवीत, अक्षत, फूल, फूल-माला, दूब, बेलपत्र आदि से सुसज्जित पूजन-स्थल बनाने के बाद गणपत्यादि पंचदेवता भगवान विष्णु गौरी व चौठीचान की पूजा कर बारी-बारी से लोग पूड़ी, पकवान फल से सजी डालियां या फल लेकर विशिष्ट मंत्र के साथ चन्द्रदेव का दर्शन करते हैं। तत्पश्चात स्यमन्त की मणि, जाम्बवान पुत्र सुकुमार पर आधारित कथा ध्यानमग्न हो सुनने की परम्परा है। अंत में आरती कर विसर्जन के उपरांत मरर (केले के पत्ते) पर चढाये खीर-पूड़ी को घर के पुरुष सदस्य भांगते हैं और सभी सदस्य मिल-बांटकर प्रसाद खाते हैं।

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  • बोकारो में बिना सीट बेल्ट के कार चलाना पड़ेगा भारी, ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों से चार लाख की वसूली

    बोकारो में बिना सीट बेल्ट के कार चलाना पड़ेगा भारी, ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों से चार लाख की वसूली

    संवाददाता

    बोकारो। लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने की दिशा में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर देशभर में अब ट्रैफिक नियमों को लेकर सख्ती देखी जा रही है। इसी क्रम में बोकारो में भी यातायात पुलिस ने अपनी चुस्ती बढ़ा दी है।

    बिना हेलमेट के बाइक या स्कूटर तथा बिना सीट बेल्ट के चारपहिया वाहन चलाने वाले लोगों पर पुलिस की कार्रवाई की गाज लगातार गिर रही है। सूत्रों के अनुसार इस महीने बोकारो की ट्रैफिक पुलिस ने अब तक सभी तरह के ट्रैफिक नियमों की अवहेलना करने को लेकर लगभग चार लाख रुपये का जुर्माना वसूला है।

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    सोमवार तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 3,85,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया। लगभग डेढ़ सौ वैसे लोगों के चालान काटे गये जो बिना सीट बेल्ट पहने कार चला रहे थे। आम लोगों से लेकर वीआईपी तक की कारें भी रोक-रोककर ट्रैफिक पुलिस कार चलाते समय सीट लगाने को लेकर हर्जाना वसूली करने के साथ-साथ जन-जागरुकता फैलाने का भी कार्य कर रहे हैं। ट्रैफिक डीएसपी मदन मोहन प्रसाद सिन्हा के नेतृत्व में यातायात पुलिस के सभी कर्मी इस कार्य में पूरी तन्मयता के साथ लगे हैं। मंगलवार शाम मिली जानकारी के अनुसार सीट बेल्ट संबंधी जुर्माना 15 हजार रुपया वसूला गया।

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  • आजाद भारत की एक और आजादी

    आजाद भारत की एक और आजादी

    Vijay Kumar Jha (Photo)

    • विजय कुमार झा

    लम्बे संघर्ष और असंख्य हिन्दुस्तानियों के त्याग व बलिदान के बाद वर्ष 1947 में 15 अगस्त को हमारा देश अंग्रेजी हुकूमत की बेड़ियों से आजाद हुआ और आज हम भारतवासी अपने स्वतंत्रता की 73वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। लेकिन, सत्तालोलुप राजनेताओं की वोट-परस्ती ओछी सोच और उनके कारनामों की वजह से देश का मुकुट कहा जाने वाला जम्मू-कश्मीर गुलामी की जंजीरों में ही जकड़ा रहा। जम्मू-कश्मीर की वादियां आतंकवादियों की गोलियों से लहूलुहान होती रही। वहां भारत माता की जय-जयकार करने वाले लोग मौत के घाट उतारे जाते रहे। मजहब के नाम पर खूनी खेल चलता रहा। पाकिस्तान-परस्तों द्वारा भारतीय तिरंगा का अपमान करना उनके लिए रोजमर्रा की बात थी। लेकिन, केन्द्र सरकार द्वारा लिये गये ऐतिहासिक व साहसिक फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर भी आज परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त हो चुका है। सच कहा जाय तो 72 वर्षों के बाद भारत को दूसरी आजादी मिली है।

    इसके साथ ही देश की मुस्लिम मां-बहनों को भी इस सरकार ने वह अधिकार दिया है, जो आजादी के बाद से लेकर आज तक उनके नसीब में नहीं था। छोटी-छोटी बातों पर सिर्फ ‘तीन तलाक’ कहकर उनकी हंसती-खेलती जिन्दगी उजाड़ दी जाती थी और उन्हें दर-दर की ठोकरें खाने पर विवश किया जाता रहा। दुनिया के कई इस्लामिक देशों में तीन तलाक जैसी कोई प्रथा नहीं है, लेकिन भारत में मुस्लिम वोटों के सौदागर सत्ताधीशों ने आज तक इस अमानवीय कृत्य को रोकने की हिम्मत नहीं दिखायी। पर, मोदी सरकार ने इस काले अध्याय का भी अंत किया और मुस्लिम महिलाओं को समानता तथा सम्मान के साथ जीने का अधिकार प्रदान किया। इसलिए यह स्वतंत्रता दिवस भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

    क्या-क्या हुए बदलाव
    > इससे पहले जम्मू-कश्मीर में भारतीय संविधान लागू नहीं था। जबकि अब कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरे देश में एक ही संविधान होगा।

    > राज्य के लिए संसद अभी तक सिर्फ रक्षा, विदेश मामले और संचार से जुड़े कानून बना सकती थी। इससे अलग किसी कानून का जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में पारित होना जरूरी था। लेकिन, अब संसद से पारित कानून वहां सीधे लागू होंगे।

    > सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और कैग जैसे कानून जम्मू-कश्मीर में भी लागू होंगे।

    > पहले जम्मू-कश्मीर का अपना अलग झंडा था। सरकारी दफ्तरों पर तिरंगे के साथ-साथ राज्य का झंडा भी फहराता था। लेकिन, अब तिरंगा ही राष्ट्रीय ध्वज होगा। तिरंगे का अपमान भी अब अपराध होगा।

    > भारतीय संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है। पहले यह जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं था, लेकिन अब जम्मू-कश्मीर भी इसके दायरे में आयेगा।
    > सुप्रीम कोर्ट के आदेश पहले जम्मू-कश्मीर में सीधे लागू नहीं होते थे। इसके लिए वहां की विधानसभा से अलग से कानून पास कराना होता था, लेकिन अब इसमें
    कोई अवरोध नहीं होगा।

    > जम्मू-कश्मीर में संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती थी। राष्ट्रपति के पास राज्य सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं था। अभी तक वहां राष्ट्रपति शासन नहीं,
    बल्कि राज्यपाल शासन लगाना पड़ता था। अब वहां भी सभी राज्यों जैसी व्यवस्था होगी।

    विशेषाधिकार भी खत्म
    > जम्मू-कश्मीर के लोगों को कुछ विशेषाधिकार प्राप्त थे और इसकी मूल वजह थी अनुच्छेद 35, जो विवाद की जड़ थी। इसका आधार धारा 370 रहा है। अब चूंकि 370 खत्म कर दिया गया है, इसलिए अनुच्छेद 35 ए भी रद्द हो चुका है। > अभी तक किसी अन्य राज्य के लोग जम्मू-कश्मीर में स्थायी सम्पत्ति खरीदकर वहां नहीं बस सकते थे। बाहरी लोग न सरकारी नौकरी पा सकते थे, न व्यापार कर सकते थे। अब यह पाबंदी खत्म हो गयी है।

    > जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता थी। राज्य में वोट देने का अधिकार सिर्फ वहां के स्थायी नागरिकों को था। दूसरे राज्य के लोग वहां वोट नहीं दे सकते थे और न चुनाव ही लड़ सकते थे। अब देश का कोई भी नागरिक वहां का वोटर या उम्मीदवार बन सकेगा।

    > जम्मू-कश्मीर की महिलाएं अगर राज्य से बाहर के लोगों से शादी कर लेती थीं तो उनका सम्पत्ति का अधिकार खत्म हो जाता था। उनके बच्चों को भी वहां की नागरिकता नहीं मिलती थी। अब यह पाबंदी खत्म हो गयी है।

    > कश्मीरी महिला अगर किसी पाकिस्तानी से शादी करती थीं तो उसके पति को राज्य की नागरिकता मिल जाती थी, लेकिन धारा 35 ए खत्म होने के बाद यह नामुमकिन होगा।

    > जम्मू में बसे हिन्दू परिवार अब तक शरणार्थी थे। वे सरकारी नौकरी प्राप्त नहीं कर सकते थे, शिक्षण संस्थान में दाखिला नहीं ले सकते थे। लेकिन, उन्हें सभी अधिकार मिल गये हैं।

    पाकिस्तान के लिए हथियार था धारा 370 : मोदी
    जम्मू-कश्मीर पर जारी चर्चा के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 पर ‘एक देश- एक परिवार’ के तौर पर हमने ऐतिहासिक फैसला लिया है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पूरे देश की जनता को बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि एक नये युग की शुरुआत हुई है। जम्मू-कश्मीर के लोग अब तक कई अधिकारों से वंचित थे। अनुच्छेद 370 का इस्तेमाल पाकिस्तान हथियार के रूप में करता था। धारा 370 और 35 ए ने जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाओं को भड़काने के अलावा कुछ नहीं दिया। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का विकास उस गति से नहीं हो पाया, जो जरूरी थी। इस फैसले से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों का वर्तमान तो सुधरेगा ही, भविष्य भी सुरक्षित होगा। कोई कल्पना नहीं कर सकता कि संसद इतनी बड़ी संख्या में कानून बनाये और देश के एक हिस्से में वे कानून लागू नहीं हों। जम्मू-कश्मीर के बच्चे अब तक शिक्षा के अधिकार से वंचित थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जम्मू-कश्मीर के सफाई कर्मचारियों को वे अधिकार नहीं मिल रहे थे, जो देश के अन्य राज्यों में सफाईकर्मियों को मिल रहे हैं। जम्मू-कश्मीर की बेटियों को भी अब वही अधिकार मिलेंगे, जो पूरे देश की बेटियों को मिलते हैं। तीन दशक में 42 हजार निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। अल्पसंख्यकों के लिए बना कानून जम्मू-कश्मीर में प्रभावी नहीं था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इन दोनों इन दोनों अनुच्छेदों का नकारात्मक प्रभाव झेल रहा जम्मू-कश्मीर जल्द इससे बाहर निकलेगा।

    ऐतिहासिक भूल को सुधारा गया : अमित शाह
    गृह मंत्री अमित शाह ने धारा 370 की वजह से जम्मू-कश्मीर को हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए इसे आतंकवाद की जड़ करार दिया। उन्होंने धारा 370 को विकास विरोधी, महिला, दलित और आदिवासी विरोधी बताया और कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना एक ऐतिहासिक भूल थी, जिसे खत्म कर उनकी सरकार ने ऐतिहासिक फैसला किया है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जम्मू-कश्मीर के हालात जैसे ही सामान्य होंगे, उसे फिर से राज्य का दर्जा देने पर केन्द्र सरकार विचार कर सकती है। उन्होंने कहा कि पिछले 70 सालों की टीस खत्म होने का आनन्द शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा- हम कभी क्यों नहीं बोलते कि यूपी, पंजाब या तमिलनाडु भारत का अभिन्न अंग है? यह इसलिए था कि 370 को लेकर जनमानस में संशय की स्थिति थी। आज यह कलंक मिट गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इसके लिए कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है। जम्मू-कश्मीर में पीओके (पाक-अधिकृत कश्मीर) और अक्साई चिन भी है। संयुक्त राष्ट्र में जम्मू-कश्मीर का मामला ले जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे। अगर उन्होंने भारतीय सेनाओं को नहीं रोका होता तो आज पीओके भी भारत का हिस्सा होता।

    NSA अजीत डोवाल की भी बड़ी भूमिका
    मिशन जम्मू-कश्मीर और जम्मू-कश्मीर से धारा 370 के प्रावधानों को खत्म करने तथा इसके बाद इससे संभावित खतरों को भांपते हुए जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति बनाये रखने में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जेम्स बौंड कहे जाने वाले अजित डोवाल की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसे अमलीजामा पहनाने में एनएसए अजीत डोभाल समेत चार अफसर अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनकी कार्यकुशलता का ही नतीजा है कि घाटी में अभी तक कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। इनमें श्री डोवाल का साथ देने वालों में केन्द्रीय गृह सचिव राजीव गौबा, बीवीआर सुब्रमण्यम तथा के विजय कुमार के नाम उल्लेखनीय हैं।
    जानिये, कैसे बनी रणनीति

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने का राजनीतिक फैसला हुआ। इस अहम निर्णय को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी एक बार फिर एनएसए अजीत डोभाल को दी गई। अजीत डोभाल इससे पहले भी दो मौकों पर पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। इस दौरान फैसले के प्रभाव को लेकर व्यापक विचार विमर्श किया गया था। आईबी और रॉ से कश्मीर घाटी और पीओके में आतंकी ठिकानों को लेकर अपडेट रिपोर्ट ली गई। हर स्तर पर खुफिया इनपुट एकत्र करके डोभाल ने ही जमीन पर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती खाका तैयार किया। इसके साथ ही सीमापार प्रतिक्रिया से निपटने का इंतजाम भी किया।

    स्वर्णाक्षरों में लिखा जाने वाला दिन
    5-6 अगस्त, 2019 का दिन स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। 4 अगस्त की आधी जम्मू-कश्मीर को अपनी पुश्तैनी जागीर समझकर वहां की सत्ता पर हुकूमत करने वाले तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों क्रमश: फारुक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुμती को नजरबंद करने के बाद धारा-144 लगा दी गयी और सोमवार की सुबह कैबिनेट की बैठक के बाद केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद में बदलाव की फैसलों की जानकारी दी। उसी दिन लम्बी चर्चा के बाद राज्यसभा ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 में बदलाव का संकल्प-पत्र पारित कर दिया। राज्यसभा में इसके पक्ष में 125, जबकि विरोध में सिर्फ 61 मत पड़े। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने इस विधेयक का विरोध किया, जबकि सपा, बसपा जैसे दलों ने इसे समर्थन दिया। अगले ही दिन लोकसभा ने भी जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने का प्रस्ताव 72 के मुकाबले 351 मतों से पारित कर दिया। इसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी केन्द्र सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले पर अपनी मुहर लगा दी और जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370 तथा जम्मू-कश्मीर की नागरिकता बताने वाला अनुच्छेद 35 ए भी समाप्त हो गया। इसके साथ ही 72 साल बाद अखंड भारत के निर्माण का सपना पूरा हुआ। साथ ही देश में एक संविधान और एक निशान की दशकों पुरानी मांग पूरी हुई। उक्त संशोधन के तहत जम्मू-कश्मीर दो हिस्सों में विभाजित हो गया और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख, दोनों ही केन्द्र शासित प्रदेश बनाये गये। जम्मू-कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश होगा, जबकि लद्दाख बिना विधानसभा का केन्द्र शासित प्रदेश होगा। अब इन दोनों प्रदेशों में राष्ट्रीय ध्वज केवल तिरंगा लहरायेगा। इस तरह केन्द्र सरकार ने 1954 के कानून में कई संशोधन किये हैं। केन्द्र के इस फैसले से कांग्रेस के कुछ नेता छाती पीट रहे हैं, जबकि पूरे देश में जश्न का माहौल है। केन्द्र सरकार ने जब ‘तीन तलाक’ जैसी कुप्रथा का अंत किया तो उस समय भी कांग्रेस सहित कई विरोधी दलों ने इसका विरोध किया। वे चाहते थे कि मुस्लिम महिलाओं का शोषण होता रहे और वे घुंट-घुंटकर जीने पर मजबूर रहें। लेकिन, उन्हें इसमें भी मुंहकी खानी पड़ी। देशवासियों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इन साहसिक फैसलों से निश्चय ही काफी हर्ष है। इसलिए वर्ष 2019 का यह स्वतंत्रता दिवस भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाने वाला दिन है।

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  • सोल्लास मनाया गया रक्षा बंधन

    सोल्लास मनाया गया रक्षा बंधन

    बोकारो : भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मजबूती प्रदान करने का महापर्व रक्षा बंधन इस्पातनगरी बोकारो तथा उपशहर चास समेत आसपास के वातावरण में धूमधाम के साथ मनाया गया। बहनों ने पूरी निष्ठा के साथ अपने भाइयों की कलाई पर राखियां बांधीं और भाइयों ने भी परम्परानुसार बहनों को रक्षा का वचन देते हुए उपहार दिए। बहनों ने इसके लिए कई दिनों से तैयारियां कर रखी थी। रंग-बिरंगी राखियां खरीदकर बहनों ने पहले से ही उन्हें संजो रखी थी। उपवासी व्रती बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया, बुरी नजरों से आरती उतारी और फिर कलाई में रक्षा-सूत्र बांधा। भाई बहन के प्रेम बंधन को प्रेमसूत्र में बांधने के इस पर्व की बोकारो में हर साल की भांति इस बार भी खासी रौनक छायी रही। राखी दुकानों, मिठाई दुकानों और बाजारों में रक्षा बंधन की तैयारी को लेकर काफी भीड़-भाड़ देखी गयी। दूर परदेस में रहने वाली बहनों ने अपने भाइयों को डाक व कुरियर से राखियां भेजीं। बहुत से भाई खास तौर से परदेस से अपनी बहनों के घर आये तो बहुत सी बहनें मायके पहुंची। नन्हें भाई-बहनों द्वारा इस पर्व को आनन्द से मनाने का नजारा अपने-आप में अनूठा रहा, तो बहुत से बुजुर्ग भाई भी अपनी बहन के घर राखी बंधाने पहुंचे। फेसबुक, व्हाट्सएप सहित अन्य सोशल मीडिया पर भी रक्षा बंधन की बधाई का सिलसिला भी काफी जोरों पर चलता रहा।

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  • बोकारो में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम जल्द, केन्द्रीय मंत्री ने दी सहमति

    बोकारो में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम जल्द, केन्द्रीय मंत्री ने दी सहमति

    – Our Correspondent.
    बोकारो : केन्द्रीय इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के बोकारो दौरे के क्रम में स्थानीय विधायक बिरंची नारायण ने बोकारो में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण को लेकर उनका ध्यान आकृष्ट कराया। इसके लिए सेल द्वारा सेजेएससीए को जमीन हस्तांतरित करने संबंधी सभी कार्रवाई शीघ्र करने की बात कही और जेएससीए के पक्ष से अवगत कराने के लिए दूरभाष पर मंत्री श्री प्रधान की बात बीसीसीआई के संयुक्त सचिव अमिताभ चौधरी से करायी।

    जमीन हस्तांतरित करने का निर्देश
    विधायक प्रतिनिधि संजय त्यागी के अनुसार मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बोकारो में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण संबंधी मांग को स्वीकृति दी तथा बोकारो इस्पात संयंत्र के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पी.के. सिंह एवं अधिशासी निदेशक (सम्पर्क व प्रशासन) मुकुल प्रसाद को जेएससीए को जमीन हस्तांतरित करने संबंधी सभी कार्रवाई शीघ्र करने का निर्देश दिया। विधायक ने मंत्री श्री प्रधान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए शीघ्र ही क्रिकेट स्टेडियम के लिए जमीन हस्तांतरित होने तथा बोकारो में एक भव्य अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनने का रास्ता साफ होने की उम्मीद जतायी।

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    22 एकड़ जमीन चिन्हित
    ज्ञात हो झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन बोकारो में विश्वस्तरीय क्रिकेट स्टेडियम बनाने की तैयारी में है। बोकारो इस्पात संयत्र द्वारा स्टेडियम के लिए 22 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। लगभग 250 करोड़ की लागत से इसका निर्माण होना है। बोकारो में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनने से स्थानीय खिलाड़ियों को फायदा होगा। साथ ही उन्हें बेहतर कोच, मैदान व अन्य संसाधन मिलेंगे। राष्ट्रीय टीम में भी बोकारो के खिलाड़ियों को जगह मिल सकेगी।

     

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  • स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर MSU करेगा शंखनाद

    स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर MSU करेगा शंखनाद

    दरभंगा : मनीगाछी प्रखंड के बाजिदपुर पंचायत की जनसमस्याओं को लेकर मिथिला स्टूडेन्ट यूनियन (MSU) के सेनानियों ने शंखनाद का एलान कर दिया है। इस निमित्त आयोजित एक बैठक में वक्ताओं ने कहा कि बिहार सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरे राज्य में चरमरा गई है। खासकर, मनीगाछी के अंदर जितने भी स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं, उनमें वर्षों से भवन तो बनकर तैयार हैं, लेकिन आजतक जिस उद्देश्य से भवन बनाये गये, उसे कभी पूरा नहीं किया गया। बाजितपुर के स्वास्थ्य उपकेंद्र वर्ष 2016 में ही 53 लाख कुछ रुपयों की लागत से बनाया गया था, लेकिन आजतक उसका उद्घाटन नहीं हो पाया। परिणामस्वरूप बना बनाया मकान जर्जर हो चुका है।

    पूरे मनिगाछी में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चौपट और सांसद- विधायक कंबल ओढ़े सो रहे हैं। अन्य जन-प्रतिनिधियों के बारे में तो चर्चा ही बेमानी है। एमएसयू सेनानी घनश्याम झा ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि मिथिला स्टूडेंट यूनियन इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठने वाला। आगामी 15 सितम्बर को बाजितपुर में विशाल जनसभा के माध्यम से जनांदोलन का शंखनाद किया जाएगा। सेनानियों ने इसका खाका भी तैयार किया। मिथिला स्टूडेंट यूनियन बहुत जल्द मनीगाछी में बिगड़ी स्वास्थ्य-व्यवस्था को लेकर सरकार एवं प्रशासन के विरुद्ध सड़क पर उतरने जा रहा है।

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  • संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा ने लिया टूटे तटबंधों जायजा

    संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा ने लिया टूटे तटबंधों जायजा

    सीतामढ़ी : संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा सीतामढ़ी की टीम ने बागमती की बाढ़ से परसा में टूटे तथा पूर्व से चार जगहों मे टूटे तटबंधों व नेपाल से भारतीय सीमा तक पहुंचे बागमती के वाये तटबंध की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने जान-माल की तबाही का मुआयना इलाके में दौरे के क्रम में किया। टीम में मोर्चा के संयोजक डा. आनन्द किशोर, मोर्चा उपाध्यक्ष तथा मेजरगंज प्रखण्ड मुखिया संघ के अध्यक्ष चन्देश्वर नारायण सिंह मोर्चा नेता संजीव कुमार चौधरी, मेजरगंज प्रखण्ड जदयू के अध्यक्ष राघवेन्द्र कुमार, स्थानीय अशरफ अंसारी, रामबाबू प्रसाद, साबिर रहबर शामिल थे। टीम ने पाया परसा तथा बरियारपुर (हरपुर) के बीच करीब 300 मीटर में तटबंध टूटा हुआ है और दस एकड़ में जल-जमाव तथा पांच एकड़ खेत मे बालू भरा हुआ है। इसी तरह मेजरगंज प्रखण्ड के श्री नगर (बसबीट्टा) में दो जगह तथा मरपा सिरपाल मे एक जगह तीनों मिलाकर यहां भी करीब तीन सौ मीटर में तटबंध 1993 से ही टूटा हुआ है और उन सभी खुले तटबंध से जब जब बाढ आती है तो मेजरगंज, सुप्पी, रीगा, बथनाहा, सीतामढी शहर, बेलसण्ड, डुमरा तथा रून्नीसैदपुर प्रखण्डों के बडे इलाको में मानव जीवन, पशुधन, फसलों तथा सरकारी गैर-सरकारी संपत्ति की भारी बर्बादी होती है। मोर्चा की टीम ने नेपाल से भारतीय सीमा तक आये बागमती के वाये तटबंध का भी मुआयना किया, जो करीब 15 फुट उंची है तथा ग्रेवेल से सड़कें बनी हुई है। वह नेपाल के सेढवा तथा छनकी गाव के समीप तक है। नेपाल से आने वाली बाढ़ का पानी इसी जगह से रूसुलपुर, छनकी तथा दक्षिण परसा गांव तक होकर भारतीय क्षेत्र में तीव्र वेग से बढ़ता तथा तहस-नहस मचाता है।
    स्थानीय ग्रामीणों ने टीम को बताया कि नेपाल से आने वाले तटबंध को भारतीय क्षेत्र के जमला गांव के समीप चार किलोमीटर में जोड़ दिया जाए तो भारतीय क्षेत्र की तबाही दूर हो जायगी तथा तटबंध के बाहर के रूसुलपुर, छनकी, रघुनाथपुर, सिजुआ, विशंभरपुर, ननकार तथा अन्य छोटे गावों के विस्थापन की समस्या का भी समाधान हो जायगा तथा सभी गांव सुरक्षित हो जाएंगे। पुराने तटबंध को बांधने की भी जरूरत नहीं होगी। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि नेपाल में बने 15 फुट उंची तटबंध की ही तरह भारतीय तटबंध की उचाई कम कर देने से बाढ़ के समय उपजाऊ मिट्टी वाला पानी किसानों के खेत को मिलेगा तथा जानमाल का खतरा घटेगा। मोर्चा अपने स्थापना दिवस पर एक अप्रैल को किसान महापंचायत से निर्णय लेकर इन सवालों पर समाहर्ता से वार्ता करने का निर्णय लिया। मोर्चा सीएम से भी इस संबंंध में वार्ता के लिये समय मांगेगा।

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  • मैथिली देशभक्ति कविता- जय-जय-जय हे हिन्दुस्तान

    मैथिली देशभक्ति कविता- जय-जय-जय हे हिन्दुस्तान

    आब ने कत्तहु दू प्रधान अछि
    रहल ने कत्तहु अलग विधान,
    धुजा तिरंगा सभठां फहरय
    आइ भारतक नवल विहान।।

    भाल गर्व सं उच्च हमर अछि
    चकमक केशर सभक लिलार।
    अर्ध भाग जे भिन्न पड़ल अछि
    हृदय लगाब’क करी जोगाड़।।

    एक देश केर वासी हम सब
    हमरा मध्य किए छल आरि।
    दृढइच्छा कें सम्मुख अबितहि
    स्वार्थ नीति सब गेलै हारि।।

    धरती केर जे स्वर्ग कहाबय
    छल आतंक लोहू सं लाल।
    लुच्चा नेता मस्त भेल आ’
    जन-मानस केर हाल बेहाल।।

    नहि शिक्षा आ’ स्वास्थ्यक चिंता
    नहि बाटक अछि कतहु ठेकान
    धमकाबय रहि-रहि आतंकी
    जीवित रहब कि जायत प्राण।।

    अत्याचारक भेल पराभव
    अनाचार केर करब विनाश
    खुलल हवा मे सांस लेलक
    सब जन मनमे जगलै आस।।

    एतय शारदापीठ शंकरक
    भरि रहलै अछि जनमन जोश
    बाबा अमरनाथ केर महिमा
    वैष्णो माता केर जय घोष।।

    आकुल व्याकुल पाक भेल अछि
    मनसूबा पर फिरलै पाइन।
    बूझि लेलक काश्मीरक वासी
    भेटल की? आ की भेल हानि??

    जे अपना कें कहय नियंता
    उतरि गेलै बहुरूपक खाल।
    आदैत अपन सुधारि ली’अ
    नाचि रहल छै ओकरो काल।।

    आब ने हम काश्मीरक वासी
    लद्दाखक नहि क्यो अछि आन।
    आउ सकल एक संग ध्वजा ली
    जय जय जय हे हिन्दुस्तान ।।

    – शम्भुनाथ मिश्रा ‘आसी’