केंद्रीय विद्यालय – 1 बोकारो में राज्यस्तरीय 50वीं बाल विज्ञान प्रदर्शनी आयोजित
बोकारो : नगर के सेक्टर-4 स्थित केंद्रीय विद्यालय-1 बोकारो के प्रांगण में सोमवार को संभाग स्तरीय विज्ञान, गणित, पर्यावरण प्रदर्शनी तथा 50 वी राष्ट्रीय बाल विज्ञान प्रदर्शनी 2023 का आयोजन किया गयाया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय विद्यालय संगठन, रांची संभाग के उपायुक्त डीपी पटेल थे। इस प्रदर्शनी में केंद्रीय विद्यालय संगठन रांची संभाग के 42 में से कुल 37 विद्यालयों के 183 छात्रों ने हिस्सा लिया और अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा का परिचय दिया। बच्चों ने अपनी मौलिक प्रतिभा का उपयोग करते हुए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, पर्यावरण अनुकूल सामग्री, स्वास्थ्य और स्वच्छता, परिवहन और नवाचार, पर्यावरण संबंधी चिंताएं, वर्तमान नवाचार के साथ ऐतिहासिक विकास तथा हमारे लिए गणित विषयों पर अपने प्रदर्श दिखाए।
इस बाल विज्ञान प्रदर्शनी में मौलिकता की परीक्षा हेतु अपने-अपने विषयों में निष्णात विद्वान विभिन्न संस्थाओं से आए थे। इनमें डॉ ललन कुमार, मुख्य वैज्ञानिक सीएसआईआर सिंफर धनबाद, डॉक्टर सुधीर कुमार कश्यप, वरीय मुख्य वैज्ञानिक सीएसआईआर सिंफर धनबाद, राम लोलार्क, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर सिंफर धनबाद, डॉ रामकृष्ण महतो, असिस्टेंट प्रोफेसर स्वामी सहजानंद कॉलेज चास, नवीन कुमार महतो बॉटनी विभाग स्वामी सहजानंद कॉलेज चास, गोविंद प्रसाद, प्रोफेसर बायो टेक्नोलॉजी सिटी कॉलेज बोकारो छात्रों द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट की मौलिकता एवं उपादेयता परीक्षण हेतु विद्यालय प्रांगण में उपस्थित थे। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन केवीएस के डीसी श्री पटेल ने किया। केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 1 बोकारो के छात्रों ने मनमोहक स्वागत गीत प्रस्तुत किया। विद्यालय के प्राचार्य ललित मोहन बिष्ट ने अपने सारगर्भित भाषण में कहा कि विज्ञान अनादि काल से मानव का और मानवता का सहायक रहा है। विज्ञान का मतलब प्रकृति को जीतना नहीं बल्कि प्रकृति को समझना होना चाहिए। इसी में हमारे ज्ञान और विज्ञान की सार्थकता है।
भारत को फिर विश्वगुरु बना सकते हैं युवा : पटेल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री पटेल ने कहा कि भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। में विश्व की सर्वाधिक युवा आबादी वाला देश भारत विश्व को नई राह दिखा सकता है। डॉ. एपीजे कलाम को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सफलता विश्रांति नहीं है, बल्कि नई सफलता के लिए अग्रसर होने का पहला कदम है। अगर देश के युवा अपनी मौलिक प्रतिभा को सकारात्मक रूप से देश के विकास में शामिल करें तो वह दिन दूर नहीं है जब भारत दोबारा विश्वगुरु बनकर दुनिया को वह राह दिखाएगा। उन्होंने आज के बच्चों को मोबाइल की लत से बाहर निकालने और उनमें वैज्ञानिक चेतना जागृत करने की दिशा में शिक्षकों की भूमिका को अहम बताया। कार्यक्रम का संचालन यू जयकुमार ने किया। विद्यालय की ओर से विज्ञान विभाग के शिक्षक भवेश चंद्र सिंह, आरके झा, संजीव कुमार, एसके पाल, जितेंद्र कुमार, उमा शंकर प्रजापति एवं राजेश कुमार ने अनवरत छात्रों का उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन किया।
मिथिला सांस्कृतिक परिषद् का 56वां दो दिवसीय विद्यापति स्मृति पर्व समारोह संपन्न, मैथिली लोकगीतों पर झूमे श्रोता
मैथिली सामाजिक नाटक ‘बड़का साहेब’ रहा आकर्षण का केन्द्र
बोकारो : बोकारो की प्रतिष्ठित सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था मिथिला सांस्कृतिक परिषद् का मुख्य वार्षिक उत्सव 56वां दो दिवसीय विद्यापति स्मृति पर्व समारोह का भव्य आयोजन रविवार की देर रात संपन्न हुआ। परिषद् द्वारा संचालित सेक्टर 4 स्थित मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल परिसर में आयोजित इस भव्य आयोजन के दूसरे दिन के कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि बीएसएल के अधिशासी निदेशक (संकार्य) वीरेंद्र कुमार तिवारी, विशिष्ट अतिथि बीपीएससीएल के पूर्व सीईओ केके ठाकुर व डालमिया भारत सीमेंट के स्थानीय अधिशासी निदेशक प्रिय रंजन, परिषद् के अध्यक्ष अनिल कुमार, उपाध्यक्ष अनिमेष कुमार झा, राजेन्द्र कुमार, महासचिव अविनाश कुमार झा, मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष हरि मोहन झा, मिथिला महिला समिति की अध्यक्ष सीमा झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर व महाकवि विद्यापति की तस्वीर पर माल्यार्पण व पुष्पार्चन कर किया।
इस अवसर पर आगत अतिथियों का स्वागत उदीयमान प्रतिभावान गायिका अक्षिता पाठक ने प्रसिद्ध गीतकार डॉ चंद्रमणि झा द्वारा लिखित स्वागत गीत ‘मंगलमय दिन आजु हे पाहुन छथि आयल…’ की सुमधुर प्रस्तुति से की। स्वागत भाषण परिषद् के अध्यक्ष अनिल कुमार ने किया, जबकि महासचिव अविनाश कुमार झा ने परिषद् की गतिविधियों पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि श्री तिवारी ने कहा कि मिथिला संस्कृति को जीवंत बनाये रखने में परिषद का अतुलनीय योगदान है। राजा जनक एवं मां जानकी की जहां संस्कृति हो, वह अपने-आप में अद्वितीय है। विविध संस्कृति व सभ्यता हिंदुस्तान की खूबसूरती है। मिथिला संस्कृति में अप्रतिम माधुर्य ही इसकी विशेषता है। उन्होंने कहा कि विद्यापति जी के बारे में कुछ भी कहना सूरज को दीया दिखाने के समान है। वस्तुतः वह विश्व साहित्य के महाकवि हैं।
विशिष्ट अतिथि श्री ठाकुर ने महाकवि विद्यापति को मिथिला ही नहीं, पूरे देश की महान विभूति बताया और परिषद् के इस सांस्कृतिक अनुष्ठान की सराहना की। अतिथियों को मिथिला पेंटिंग व पाग-डोपटा भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अतिथियों ने वरिष्ठ साहित्यकार विजय शंकर मल्लिक की मैथिल कहानियों का संग्रह ‘कुल श्री’ व हिंदी पुस्तक ‘कैथी कोर्स बुक’ (कैथी लिपि) का विमोचन किया। उद्घाटन सत्र का संचालन परिषद् के सांस्कृतिक कार्यक्रम निर्देशक शंभु झा व धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष अनिमेष कुमार झा ने किया।
उद्घाटन सत्र के बाद संक्षिप्त सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर चला जिसमें परिषद् के प्रेस सचिव व प्रसिद्ध गायक अरुण पाठक ने श्रृंगार रस के गीत, मिथिला महिला समिति की किरण मिश्रा, अमिता झा, सीमा झा, नमिता झा, बीनू चौधरी, ममता झा, गुड़िया झा, मधु ठाकुर, शिखा चौधरी व पूनम झा ने विद्यापति के गीत, अविनाश कुमार झा, उमेश कुमार झा, शारदा झा, गौरी झा, रुपा झा आदि ने मैथिली भक्ति, श्रृंगार व विद्यापति रचित गीतों की सुंदर प्रस्तुति से सबको आनंदित किया। कार्यक्रम में कीबोर्ड पर राजेन्द्र, ढोलक पर राकेश कुमार सिंह, तबले पर हर्षित व ऑक्टोपैड पर घनश्याम ने अच्छी संगति की।
समारोह के दूसरे दिन का खास आकर्षण रहा सामाजिक व समसामयिक मैथिली नाटक ‘बड़का साहेब’ का सशक्त मंचन। इस नाटक में वर्तमान सामाजिक परिवेश, स्टेटस सिंबल आदि को लेकर लोगों की मनोदशा आदि का बहुत ही सुंदर चित्रण किया गया है। नाटक के कथानक के अनुसार गांव में अभावों के बीच रहकर पढ़ाई के बाद जब व्यक्ति बड़े पद पर पहुंच जाता है तो वह अपने पुराने संघर्ष के दिनों को भूल जाता है और उसकी मानसिक स्थिति भी शहर के बडे साहब की हो जाती है। सुप्रसिद्ध लेखक स्व. लल्लन प्रसाद ठाकुर द्वारा लिखित इस नाटक का मंचन वरिष्ठ रंगकर्मी बटोही कुमर व शंभु झा के निर्देशन में हुआ जिसमें विभिन्न भूमिकाओं में शंभु झा (बड़का साहेब-बी सी झा), सुनील मोहन ठाकुर (छेदी झा), नीरज चौधरी (वर्माजी), गिरजानंद झा (भोला), शशांक पाठक (चूड़ामणि), अदिति झा (मीना), मिक्की (ऋचा), तारणी ठाकुर (रानी) व बाल कलाकार अंश कुमार झा (विक्की) ने बहुत ही सुंदर अभिनय का प्रदर्शन कर नाटक को जीवंत बना दिया। नाटक का तकनीकी निर्देशन राजेन्द्र कुमार ने किया जबकि नाटक में प्राउंटर की भूमिका में रमण कुमार ठाकुर, पार्श्वध्वनि चंद्र कान्त मिश्र, प्रकाश व्यवस्था भृगुनंदन ठाकुर, मंच व्यवस्था गंगेश कुमार पाठक व सुनील कुमार चौधरी की थी। धन्यवाद ज्ञापन परिषद् के सांस्कृतिक कार्यक्रम निदेशक शंभु झा ने किया।
इस अवसर पर गणेश चन्द्र झा, अमरेन्द्र कुमार झा, उमेश मिश्र, अनिता तिवारी, सीमा ठाकुर, मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के उपाध्यक्ष जय प्रकाश चौधरी, सचिव पी के झा चंदन, संयुक्त सचिव नीरज चौधरी, परिषद् के संयुक्त सचिव समरेन्द्र झा, कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार झा, सहायक सचिव अविनाश अवि, मिहिर झा राजू, उषा झा, कंचन झा, प्रीति राय, विजय कुमार झा, संतोष मिश्र, बहुरन झा, दीपक झा सहित काफी संख्या में दर्शक उपस्थित थे।
मामला वनभूमि पर अवैध कब्जे का : हाउसिंग दखल बताकर चला रहे कारखाना, कर रहे व्यवसाय
‘वेदांता इलेक्ट्रो स्टील’ के काले कारनामों की कलई परत-दर-परत खुलती जा रही है. जमीन संबंधी इस धांधली की जांच के क्रम में ही बोकारो के उपायुक्त (डीसी) कुलदीप चौधरी ने एक ऐसी गड़बड़ी पकड़ी है, जो अपने-आप में चौंकाने वाली है. आश्चर्य की बात को यह है कि डीसी के अधीनस्थ मामले की जांच में लगे प्रशासन के ही एक वरिष्ठ अधिकारी ने कम्पनी की इस धोखाधड़ी को छुपाने की कोशिश की. जाहिर है, इसके पीछे कहीं न कहीं ‘सेटिंग’ होगी. खैैर…, डीसी ने जमीन मूल्यांकन के क्रम में उस ‘सेटिंग’ को तोड़ते हुए नया खुलासा कर दिया, आइए जानते हैं पूरा मामला
शशांक शेखर
बोकारो : जिले के सियालजोरी और भागाबांध सहित आसपास के इलाके में सैकड़ों एकड़ सरकारी वन भूमि को हड़पकर बाद में उसे येन-केन-प्रकारेण अपने नाम कराने की कोशिश में लगी ‘वेदांता इलेक्ट्रो स्टील’ के काले कारनामों की कलई परत-दर-परत खुलती जा रही है. जमीन संबंधी इस धांधली की जांच के क्रम में ही बोकारो के उपायुक्त (डीसी) कुलदीप चौधरी ने एक ऐसी गड़बड़ी पकड़ी है, जो अपने-आप में चौंकाने वाली है. आश्चर्य की बात को यह है कि डीसी के अधीनस्थ मामले की जांच में लगे प्रशासन के ही एक वरिष्ठ अधिकारी ने कम्पनी की इस धोखाधड़ी को छुपाने की कोशिश की. जाहिर है, इसके पीछे कहीं न कहीं ‘सेटिंग’ होगी. खैैर…, डीसी ने जमीन मूल्यांकन के क्रम में उस ‘सेटिंग’ को तोड़ते हुए नया खुलासा कर दिया.
दरअसल, कंपनी की ओर से अवैध रूप से दखल की गई वन भूमि को ‘आवासीय’ बताया गया था. जबकि, कम्पनी ने बिल्कुल ही नाजायज रूप से अतिक्रमण कर धारित उस जमीन पर इस्पात कारखाना स्थापित कर वहां व्यवसाय का संचालन शुरू किया और वह आज भी चल ही रहा है। सेटिंग देखिए, कंपनी ने ‘इंडस्ट्री’ को ‘हाउसिंग’ का मामला बताया और मामले की जांच कर रहे संबंधित अधिकारी ने इसे मान भी लिया. उन्होंने जुर्माना लगाने की औपचारिकता पूरी तो की, परंतु ‘हाउसिंग’ के हिसाब से ही. उन्होंने पहले कंपनी पर 20 करोड़ का जुर्माना लगाया. बाद में जब बात ‘इंडस्ट्री’ की समझ में आई, तो 20 करोड़ को बदलकर 35 करोड़ के जुर्माने का खाका तैयार किया. उन्होंने अपनी यह रिपोर्ट जब डीसी को सुपुर्द की, तो उन्होंने गहनता से इसकी जांच की. इसी क्रम में डीसी ने कंपनी की चालाकी पकड़ी. उन्होंने संबंधित अधिकारी को बताया कि इस जमीन के ‘आवासीय’ होने का तो सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि जमीन ‘इंडस्ट्री’ के नाम दखल है और उसका बाकायदा व्यावसायिक उपयोग भी किया जा रहा है. ऐसे में जुर्माना उसी हिसाब से लगेगा. इसके तहत डीसी ने कंपनी को 55 करोड़ रुपए के जुर्माने का नोटिस भेज दिया है.
उल्टा चोर कोतवाल के डांटे… कंपनी के अधिकारी ने नोटिस पर जताया ऐतराज
कंपनी के अधिकारियों की हठधर्मिता और ‘ऊपरी पहुंच’ देखिए कि डीसी के नोटिस को भी उन्होंने गलत बताते हुए इस पर कड़ा ऐतराज कर दिया. उपायुक्त के स्तर से होने वाली उक्त कार्रवाई के बारे में पहले ही सूचना संभवत: लीक कर दी गई और कंपनी के एक वरीय अधिकारी ने साफ-साफ कह दिया कि कंपनी इस नोटिस को नहीं मानता. ऐसे में ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ वाली कहावत यहां चरितार्थ होती दिख रही है. उनकी ओर से मामले को झारखंड सरकार के राजस्व सचिव के पास रेफर किया गया. कहा गया कि उनके स्तर से समीक्षा और फैसला लिए जाने के बाद ही कंपनी कोई जुर्माना दे सकेगी.
कहीं फिर ठंडे बस्ते में चला न जाय मामला!
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार एक दूरदर्शी सोच के तहत नोटिस का मामला उपायुक्त से ऊपर राजस्व सचिव के स्तर पर पहुंचाया गया है. इधर, अंदरूनी सूत्रों से खबर है कि राजस्व सचिव बहुत जल्द केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले हैं. जाहिर है, अगर उनके प्रतिनियुक्ति पर जाने से पहले मामले की समीक्षा नहीं हुई, तो यकीनन यह मामला एक बार फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा. इसके साथ ही, धांधली पर नकेल कसने की उपायुक्त की कोशिश भी कहीं न कहीं व्यर्थ चली जाएगी.
डीसी बोले- कंपनी ने की है गड़बड़ी
उपायुक्त कुलदीप चौधरी।
इस मामले में डीसी कुलदीप चौधरी ने इस संवाददाता को बताया कि वेदांता-इलेक्ट्रोस्टील की ओर से वन भूमि हड़पने के साथ-साथ जमीन पर कारखाना चलाने और व्यावसायिक उपयोग की बात जमीन संबंधी रिकॉर्ड में छिपाई गई है. ‘हाउसिंग’ के नाम पर रिकॉर्ड बनवाया गया. संबंधित अधिकारी की जांच रिपोर्ट की समीक्षा में यह गड़बड़ी पकड़ी गई है. फिलहाल मामला राजस्व सचिव के पास है. उनके निर्देशानुसार अब आगे की कार्रवाई की जाएगी.
सरकारी निर्देश के आलोक में किया गया मूल्यांकन
उपायुक्त, बोकारो के पत्रांक-3206/रा0, दिनांक-21.12.2022 के प्रसंग में राज्य सरकार के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के पत्रांक-5/स0भू0 बोकारो (ईएसएल)-80/16 237 (5)/रा0/, दिनांक- 20 जनवरी, 2023 के द्वारा विभागीय पत्रांक-4321/रा0, दिनांक-07.12.2022 तथा वर्ष 2018 में विभागीय संकल्प सं0- 48/रा0, दिनांक- 03.01.2017 के आलोक में उपायुक्त, बोकारो को इलेक्ट्रोस्टील लिमिटेड द्वारा अवैध रूप से धारित भूमि की लीज बंदोबस्ती हेतु अद्यतन बाजार दर पर उक्त जमीन का मूल्यांकन करवाने का निर्देश दिया गया है. इसी आलोक में समीक्षा के दौरान ‘हाउसिंग’ और ‘इंडस्ट्री’ का गड़बड़झाला सामने आया.
‘वनभूमि की लीज बंदोबस्ती गैर-कानूनी’
इस संबंध में वन विभाग की ओर से जमीन के मालिकाना हक को लेकर स्थानीय न्यायालय में केस की पैरवी कर रहे एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने सरकार की ओर से उक्त जमीन की लीज बंदोबस्ती संबंधी आदेश पर आश्चर्य प्रकट किया. उन्होंने कहा कि वन विभाग की जमीन किसी को लीज पर नहीं दी जा सकती. वन भूमि की प्रकृति को बदलना बिल्कुल ही गैर-कानूनी है. वैसे भी वेदांता-इलेक्ट्रोस्टील का कारखाना वन विभाग की जिस जमीन पर खड़ा किया गया है, उसके मालिकाना हक को लेकर न्यायालय में मामला लंबित है. फिर इसी बीच सरकार द्वारा उक्त जमीन की लीज बंदोबस्ती का आदेश दिया जाना गैर-कानूनी है.
समरथ के नहिं दोष गोसाईं… ईमानदार अधिकारी काटते रह गए कोर्ट-कचहरी के चक्कर और अतिक्रमित भूमि हो गई ‘वैध’, दोषी कौन?
ब्यूरोक्रेट्स, नेताओं और पत्रकारों को कृतज्ञ बना हड़पी जमीन, किसी को दी नौकरी; तो किसी की चल रहीं गाड़ियां
‘I Came, I Saw and I Conquered’ यानी मैं आया, मैंने देखा और मैंने कब्जा कर किया। जी हां, बोकारो में इलेक्ट्रोस्टील ने इस रोमन कहावत को शत-प्रतिशत चरितार्थ करने का काम किया है। पहले सैकड़ों एकड़ वनभूमि पर कब्जा जमाया और ऐसी चाल चली कि वही हड़पी गई जमीन आज तथाकथित ‘वैध’ हो गई। इस पूरे ‘खेल’ को कैसे अंजाम दिया गया, यह जानने के लिए पढ़ें मामले की तह तक को उजागर करती यह रिपोर्ट-
शशांक शेखर
बोकारो : गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस में वर्णित उक्तियां आज बोकारो में जमीन घोटाले के संदर्भ में बिल्कुल सत्य प्रतीत हो रही हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है कि ‘समरथ के नहिं दोष गोसाईं’। यह बात आज यहां वेदांता-इलेक्ट्रोस्टील के मामले में बिल्कुल ही सही और सटीक साबित हो रही है। मालूम हो कि वन विभाग ने अधिसूचित एवं सीमांकित वन भूमि के अतिक्रमण के खिलाफ इलेक्ट्रोस्टील पर 50 से अधिक केस दर्ज किए। लेकिन, इस ताकतवर कम्पनी की सेहत पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। उल्टे वन विभाग के कर्मियों के साथ मारपीट की गई, कम्पनी के कर्मचारियों तथा उसके पाले गये पिट्ठुओं ने उसके विभाग की सैकड़ों एकड़ जमीन हड़प ली और तत्कालीन ईमानदार अधिकारियों ने सरकार को त्राहिमाम संदेश भेजकर वन विभाग की भूमि को लुटने से बचाने की गुहार लगाई, परन्तु आज शासन-प्रशासन पर काबिज लोगों ने ही राज्य सरकार के वन विभाग के अधिकारियों के ईमानदार प्रयासों की मिट्टी पलीद कर दी है। सरकार की जिस जमीन को अवैध कब्जे से बचाने के लिए विभाग के अधिकारी कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते रह गए, ऊपर तक पत्राचार करते रह गए, मोंटी-मोंटी संचिकाएं तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेजी गईं, ताकि वन विभाग की अतिक्रमित जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जा सके, वेकिन वही जमीन आज ‘अवैध’ से ‘वैध’ होने जा रही है। ऐसा इस कम्पनी ने सिर्फ अपनी ‘ताकत’ पर कर दिखाया है। लिहाजा, जिन अफसरों व कर्मियों ने उन दिनों सीमा पर युद्ध-भूमि में लड़ने वाले सिपाहियों की तरह लड़ाई लड़ी, उन्हें आज शर्मिन्दगी महसूस करनी पड़ रही है। पता नहीं दोष किसका है, लेकिन जिस विभाग ने 15 वर्षों में 50 से अधिक केस किए, मुकदमे लड़े, ईमानदार अफसरों की फजीहत हुई, उन अधिकारियों को आज घुटने टेकने पड़े हैं। क्योकि, इलेक्ट्रोस्टील अपनी बाजी जीत गया और वन विभाग के अधिकारी अपनी लड़ाई हार गए। अब वेदांता ग्रुप की इलेक्ट्रोस्टील ने हड़पी गई 174.39 एकड़ भूमि को अवैध से वैध बनाने के लिए उसे वैधानिक जामा पहनाकर उसे अपने नाम बंदोबस्त कराने की तैयारी लगभग पूरी करवा ली है। गौरतलब है कि जमीन हड़पने के लिए वेदांता-इलेक्ट्रो स्टील कंपनी ने ब्यूरोक्रेट्स, बोकारो स्टील के सेवानिवृत्त अधिकारियों, नेताओं के साथ-साथ मजदूर यूनियन के नेताओं और कुछ पत्रकारों तक को कृतज्ञ किया। क्योंकि, इतने बड़े जमीन घोटाले में आईएएस, आईपीएस अफसरों, मजदूर नेताओं और कुछ पत्रकारों की भी मदद ली गई। खुद को बचाने तथा माहौल को सकारात्मक बनाने के लिए ऐसे लोगों और उनके रिश्तेदारों को नौकरी देकर या उनके वाहनों के परिचालन का ठेका देकर उन्हें कृतज्ञ किया है। (आरटीआई के तहत संवाददाता को प्राप्त कागजात के अनुसार)। जाहिर है, ऐसे में ये लोग जानते हुए भी चुप रहे। 12 साल पहले की बात है, विभाग के एक अधिकारी ने जब इलेक्ट्रोस्टील के एक शीर्ष अधिकारी (मालिक के करीबी रिश्तेदार) से पूछा और कहा कि – ‘आपने अवैध भूमि कब्जा कर रखी है, तो उस ईएसएल अफसर ने कहा कि आपने व्यापारी वर्ग की पहुंच नहीं देखी है। सभी सरकारों में व्यापारियों की ही चलती है, चाहे वह यूपीए की हो या एनडीए की। आने वाले दिनों में यह अवैध भूमि वैध होगी, इसकी मैं आपको गारंटी देता हूं।’ इसे सत्यापित किया राज्य की यूपीए और एनडीए, दोनों की सरकारों ने। जब वर्तमान मंत्रिमंडल शपथ ग्रहण की स्थिति में थी, उससे 10 दिन पहले केंद्रीय विभाग ने इसकी फाइल क्लियर कर दी। न केवल 174.39 एकड़ वही हड़पी गई जमीन, बल्कि इसके अलावा भी 15 एकड़ सहित कुल 183.4 एकड़ अवैध भूमि को कम्पनी के नाम बंदोबस्त करने की सहमति दे दी गई। आश्चर्य तो इस बात की है कि कम्पनी ने बिना जमीन का मूल्यांकन किये ही वर्तमान मूल्य की लगभग 80 प्रतिशत राशि राज्य सरकार के खजाने में जमा भी कर दी है, जो यह दर्शाता है कि जमीन को हड़पने की साजिश वर्षों से चल रही थी। अब सवाल यह उठता है कि यदि गलत का विरोध करने का नतीजा गलत ही होता है, तो भला कोई भी अधिकारी अब इसके खिलाफ कदम क्यों उठाएगा? जाहिर है, शायद कोई नहीं! इतिहास साक्षी है कि भारतीय स्वतंत्रता के बाद इतने बड़े पैमाने में वन विभाग की जमीन का घोटाला कभी नहीं हुआ है। यह काला अध्याय जुड़ा भी तो बोकारो से। झारखंड में दशकों से वन विभाग की जमीन पर रह रहे हजारों आदिवासी और गरीब परिवार चंद डिस्मिल जमीन के क्लीयरेंस के इंतजार में हैं, वहीं वेदांता इलेक्ट्रोस्टील ने कुछ ही दिनों में सारा ‘खेल’ कर लिया। उसने रोमन कहावत – ‘आई केम, आई सॉ एंड आई कॉन्कर’ (मैं आया, मैंने देखा और मैंने कब्जा कर लिया) को भी चरितार्थ किया है। सच्चाई क्या है, लोग जानते हैं। लेकिन, इस पूरे प्रकरण ने वन भूमि हड़पने की एक नई राह खोल दी है। यह बता दिया कि वन भूमि हड़पना हो, तो इलेक्ट्रोस्टील से सीखिए। जमीन संबंधी धांधली का ही नतीजा रहा है कि अपनी स्थापना के बाद से ही इलेक्ट्रोस्टील विवादों में घिरा रहा। कंपनी की स्थापना के बाद उसी के द्वारा पोषित लोगों ने जमीन को कई छद्म नामों से बेचा, जिनके पास मालिकाना हक भी नहीं था, वे भी सौदेबाजी में शामिल हुए। दु:खद यह है कि वन विभाग के अधिकारी उपायुक्त से लेकर रजिस्ट्रार तक को लिखते रहे कि ये सारी रजिस्ट्रियां फर्जी हो रही हैं, इन्हें रोकी जाय। लेकिन, सारे के सारे अधिकारी खामोश रहे। ग्रामीण-रैयतों के साथ भी खूब लड़ाई हुई। धनबाद के तत्कालीन मासस विधायक अरूप चटर्जी ने भी लंबा विरोध किया, परंतु इन सबका एक ही नतीजा निकला- ढाक के तीन पात। उस समय के एक डीएसपी ने इस संवाददाता को बताया कि किसी भी हालत में अवैध जमीन पर ईएसएल का ही कब्जा होना है, क्योंकि इनकी ‘ऊपर’ की सेटिंग जबदरस्त है। उन्होंने भी अपने बेटे को इस कम्पनी में अधिकारी बनवा लिया। स्पष्ट है, ऐसे में यह बात साबित होती है कि समरथ के नहिं दोष गोसाईं। यदि आपकी पहुंच राजनीतिक है, आप केन्द्र तथा राज्य सरकार में सक्रिय हैं, तो कोई भी जमीन हड़प सकते हैं, अगर पहुंच है तो किसी भी जमीन पर कब्जा कर उसे अपने नाम दर्ज करा सकते हैं।
ईएसएल की ओर से नहीं मिला जवाब इस सन्दर्भ में वेदांता-इलेक्ट्रोस्टील का पक्ष जानने के लिए उसके सक्षम अधिकारियों से कई बार फोन तथा ई-मेल पर सम्पर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनलोगों ने इसका कोई जवाब देना मुनासिब नहीं समझा। खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिल सका था।
जब मंत्री ने विभागीय अधिकारी को दी थी नसीहत
इस मामले में पूछने पर वन विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इलेक्ट्रोस्टील ने भागाबांध में बाजाब्ता फ्लड लाइट जलाकर रात के अंधेरे में लैण्डमूवर के सहारे सुरक्षित एवं अधिसूचित वनभूमि पर जंगलों को उजाड़ा और जमीन समतल की। इलेक्ट्रो स्टील द्वारा सैकड़ों एकड़ वन भूमि की प्रकृति को चीन से लाये गये भाड़े के कर्मचारियों ने रातों-रात बदलने का काम किया। कम्पनी का यह अभियान लगातार जारी रहा। लेकिन, किसी भी उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी ने भी वन विभाग के अधिकारियों की फरियाद नहीं सुनी। सब जान-बूझकर अनजान बने रहे। बाद में सरकार के तत्कालीन भूमि सुधार व राजस्व मंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों सहित अन्य शीर्ष पदाधिकारियों के साथ एक बैठक बुलायी, जिसमें मंत्री जी ने कर्मठ व ईमानदार अधिकारियों की पीठ थपथपाने की जगह उन्हें खरी-खोटी सुनाई और खुद को कम्पनी के पक्षकार के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने उस बैठक में संबंधित अधिकारियों को यह कहते हुए नसीहत भी दी कि ‘यदि आप लोगों का यही रवैया रहा तो झारखंड में कोई भी उद्यमी अपना उद्योग नहीं लगाना चाहेगा।’ अब सवाल उठता है कि आखिर इस नसीहत के पीछे क्या राज था? सवाल यह भी है कि वन विभाग के पास वन-भूमि के सारे साक्ष्य रहने के बावजूद सरकार ने इस कम्पनी का साथ क्यों दिया? यह जांच का एक गंभीर विषय है।
जमीन के मालिकाना हक का मामला आज भी लंबित
दरअसल, वन विभाग ने उक्त जमीन के मालिकाना हक को लेकर न्यायालय में टाइटल अपील सं0- 33/2007 दायर कर रखी है। वन विभाग की ओर से मुकदमे की पैरवी कर रहे अधिवक्ता मो. इकबाल ने इस संबंध में पूछने पर बताया कि इस मामले में फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से स्टे लगा हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित रहने के कारण बोकारो के जिला न्यायालय में इस मामले की सुनवाई स्थगित है। आगामी 18 अप्रैल, 2023 को जिला न्यायालय में इसकी तारीख मुकर्रर है, जबकि इसके पूर्व विगत 20 फरवरी को भी इस मामले में तारीख मुकर्रर थी। दूसरी ओर विधि विशेषज्ञों ने इस पूरे प्रकरण में आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा कि जब वन विभाग और इलेक्ट्रोस्टील के बीच जमीन के मालिकाना हक को लेकर जारी मुकदमा न्यायालय में लंबित है तो फिर इसी बीच उक्त जमीन इलेक्ट्रोस्टील को लीज पर बंदोबस्त करने की प्रक्रिया जारी रखने का क्या औचित्य है? जानकारों ने सवाल किया कि क्या इलेक्ट्रोस्टील ने यह मान लिया है कि उसके द्वारा हड़पी गई जमीन वन विभाग की ही है, जिसे वह झूठ का सहारा लेकर अपना बताता रहा है?
BJP के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश बोले- जिसने भी गलती की, उस पर हो कानूनी कार्रवाई
प्रेसवार्ता में बोलते भाजपा के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश।
इस मामले में पूछे जाने पर भारतीय जनता पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि ‘राजा हो या रंक, कानून सबके लिए एक है।’ पिछले दिनों बोकारो में एक संवाददाता सम्मेलन में इस संदर्भ जब उनसे पूछा गया, तो उन्होंने कहा- अगर किसी ने भी गलती की है, चाहे वह दीपक प्रकाश हो या कोई उद्योगपति, जिस किसी ने गलती की है और कानून का उल्लंघन किया है तो उस पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
DC बोले- जमीन का करा रहे मूल्यांकन
उपायुक्त कुलदीप चौधरी।
इस मामले में पूछे जाने पर जिले के उपायुक्त कुलदीप चौधरी ने कहा कि सरकारी निर्देश के आलोक में वेदांता इलेक्ट्रो स्टील की कुल जमीन का मूल्यांकन किया जा रहा है। यह फाइल अपर समाहर्ता को सुपुर्द कर दी गई है, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार है। इस संबंध में फिलहाल विभागीय स्तर पर काम चल रहा है। सूत्रों के अनुसार उपायुक्त, बोकारो के पत्रांक-3206/रा0, दिनांक-21.12.2022 के प्रसंग में राज्य सरकार के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के पत्रांक-5/स0भू0 बोकारो (ईएसएल)-80/16 237 (5)/रा0/, दिनांक- 20 जनवरी, 2023 के द्वारा विभागीय पत्रांक-4321/रा0, दिनांक-07.12.2022 तथा वर्ष 2018 में विभागीय संकल्प सं0- 48/रा0, दिनांक- 03.01.2017 के आलोक में उपायुक्त, बोकारो को इलेक्ट्रोस्टील लिमिटेड द्वारा अवैध रूप से धारित भूमि की लीज बंदोबस्ती हेतु अद्यतन बाजार दर पर उक्त जमीन का मूल्यांकन करवाने का निर्देश दिया गया है।
बोकारो। पैसों की खातिर वन्यप्राणियों और जीव-जंतुओं पर अत्याचार की एक और कहानी झारखण्ड के बोकारो में सामने आई। होली के एक दिन पहले गली-मुहल्लों में घूम-घूमकर कर सांपों का तमाशा दिखाने वाले दो सपेरों को गिरफ्तार किया गया। दरअसल, ये दोनों सपेरे जिस सांप को पिटारे में बंद कर उसका तमाशा दिखाते थे, उसकी कीमत जान आप हैरान हो जाएंगे। सैंड बौआ नामक प्रजाति के इस सांप की कीमत 25 करोड़ रुपए तक होती है और इसे नुक्कड़ों और मुहल्ले में दिखाकर सपेरे अपनी जेबें भर रहे थे। बोकारो के जिला वन पदाधिकारी (DFO) रजनीश कुमार के अनुसार गुप्त सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम ने दोनों सपेरों को दबोचा और अति दुर्लभ और बेहद महंगे सैंड बौआ सांप को सुरक्षित रांची के जैविक उद्यान में भिजवा दिया गया। इस सांप को संभालना भी मुश्किल होता है। डीएफओ ने बताया कि सपेरों द्वारा सांप कहां से लाया गया, इस काम में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, इस तमाम पहलुओं को लेकर मामले की जांच की जा रही है।
दबोचे गए सपेरे।
जानिए… क्यों करोड़ों में बिकते हैं ये सांप, क्या है खासियत – बता दें कि दो मुंह वाले इस सांप की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में 25 करोड़ रुपये तक बताई जाती है। जैसा कि इसके नाम ‘रेड सैंड बोआ’ से ही ज़ाहिर है कि यह रेगिस्तानी इलाकों में ज़्यादातर पाया जाता है। सैंड बोआ एक दुर्लभ प्रजाति का सांप है। इसका प्रयोग कई प्रकार की दवाईयां, पर्स, कास्मेटिक का समान, कैंसर के इलाज के लिए, नशीली चीज़े, मंहगे पर्फ्यूम और सेक्स पावर बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसके हर जगह पर असानी के उपलब्ध नहीं होने के कारण इसकी कीमत करोड़ों में है।
4 साल पहले भी एक होटल से धराये थे सांप समेत 2 तस्कर
गौरतलब है कि बोकारो में सैंड बौआ सांप के कारोबार का मामला 2019 के जून महीने में भी सामने आया था। नगर के सेक्टर-4 थाना क्षेत्र अंतर्गत सिटी सेन्टर स्थित होटल आनंदा के रूम नंबर- 306 से पुलिस ने के सैंड बोआ प्रजाति वाले एक सांप के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया था।
प्रौद्योगिकी में महिलाओं और अन्य हाशिए वाले लोगों को लाने से अधिक रचनात्मक समाधान होते हैं और नवाचारों के लिए अधिक क्षमता होती है। संयुक्त राष्ट्र महिला लिंग स्नैपशॉट 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल दुनिया से महिलाओं के बहिष्कार ने पिछले दशक में कम और मध्यम आय वाले देशों के सकल घरेलू उत्पाद से $ 1 ट्रिलियन को कम कर दिया है – एक नुकसान जो कार्रवाई के बिना 2025 तक $ 1.5 ट्रिलियन तक बढ़ जाएगा। इस प्रवृत्ति को उलटने के लिए ऑनलाइन हिंसा की समस्या से निपटने की आवश्यकता होगी। डिजिटल प्रौद्योगिकी 2030 एजेंडा के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपार अवसर प्रदान करती है।
– डॉ. निरुपमा कुमारी, रामरूद्र +2 उच्च विद्यालय चास, बोकारो ईमेल- jhanirupama81@gmail.com
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत साल 1908 में हुई थी, जब न्यूयॉर्क में घंटों काम के लिए बेहतर वेतन तथा समानता के अधिकार को प्राप्त करने के लिए हजारों महिलाएँ सड़क पर उतरी थीं। महिला दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का प्रस्ताव क्लारा जेटकिन का था, उन्होंने साल 1910 में यह प्रस्ताव रखा था। पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस साल 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड में मनाया गया था।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को औपचारिक मान्यता वर्ष 1996 में प्रदान की गई थी। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसे ‘अतीत का जश्न, भविष्य की योजना’ थीम के साथ शुरू किया गया था। इस वर्ष इसका थीम है “डिजिटल: लैंगिक समानता के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी”। यह विषय महिलाओं की स्थिति (सीएसडब्ल्यू -67) पर आयोग के आगामी 67 वें सत्र के लिए प्राथमिकता विषय के साथ जुड़ा हुआ है, “लैंगिक समानता और सभी महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण को प्राप्त करने के लिए डिजिटल युग में नवाचार और तकनीकी परिवर्तन, और शिक्षा”। इसके तहत परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकी और डिजिटल शिक्षा की आवश्यकता को उजागर किया जाएगाl आईडब्ल्यूडी 2023 बढ़ती आर्थिक और सामाजिक असमानताओं पर डिजिटल लिंग अंतर के प्रभाव का पता लगाएगा। यह कार्यक्रम डिजिटल स्थानों में महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों की रक्षा करने और ऑनलाइन और आईसीटी-सुविधाजनक लिंग-आधारित हिंसा को संबोधित करने के महत्व पर भी प्रकाश डालेगा।
माना जाता है कि प्रौद्योगिकी में महिलाओं और अन्य हाशिए वाले लोगों को लाने से अधिक रचनात्मक समाधान होते हैं और नवाचारों के लिए अधिक क्षमता होती है। संयुक्त राष्ट्र महिला लिंग स्नैपशॉट 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल दुनिया से महिलाओं के बहिष्कार ने पिछले दशक में कम और मध्यम आय वाले देशों के सकल घरेलू उत्पाद से $ 1 ट्रिलियन को कम कर दिया है – एक नुकसान जो कार्रवाई के बिना 2025 तक $ 1.5 ट्रिलियन तक बढ़ जाएगा। इस प्रवृत्ति को उलटने के लिए ऑनलाइन हिंसा की समस्या से निपटने की आवश्यकता होगी। डिजिटल प्रौद्योगिकी 2030 एजेंडा के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपार अवसर प्रदान करती है। डिजिटल कौशल और प्रौद्योगिकियों तक पहुंच के संदर्भ में बढ़ती असमानताएँ तेजी से स्पष्ट हो रही हैं, इस डिजिटल लिंग विभाजन के परिणामस्वरूप महिलाएँ पीछे छूट रही हैं। एक सतत भविष्य के लिए समावेशी और रचनात्मक प्रौद्योगिकी और डिजिटल शिक्षा की आवश्यकता महत्वपूर्ण है। इस दिशा में भारत सरकार के प्रयासों की सराहना भी की गई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 77वें सत्र में दुनिया भर के सभी क्षेत्रों के विचारक व नेता, न्यूयॉर्क में एकत्रित हुएl इस अवसर पर, भारत में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UN RCO) रिलायंस फाउण्डेशन, ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउण्डेशन और संयुक्त राष्ट्र ने मिलकर, ‘महिला, तकनीक और एसडीजी: परिवर्तन के रास्ते को दोबारा आकार देना’ शीर्षक पर चर्चा आयोजित की. इस उच्च स्तरीय चर्चा में शामिल सभी विचारकों ने माना कि भारत में डिजिटल प्रौद्योगिकियों के ज़रिये समुदायों में बदलाव लाने वाली महिलाएँ, एसडीजी की प्रगति में तेज़ी लाने का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं। ‘महिला प्रौद्योगिकी और एसडीजी’ पर चर्चा के दौरान, भारत के संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेण्ट कोऑर्डिनेटर शॉम्बी शार्प ने कहा कि “महिलाएँ दीर्घकालिक विकास और अल्पकालिक संकट प्रतिक्रिया, दोनों में सबसे आगे हैं”. ग्रामीण क्षेत्रों में आश्चर्यजनक रूप से बढ़ती मांग के साथ भारत में अगले चार वर्षों में स्मार्टफोन के एक अरब उपयोगकर्ता होने की उम्मीद है. इस समय भारत में 54% महिलाओं के पास मोबाइल फ़ोन हैं, जबकि चार साल पहले ये आँकड़ा 45.9% था. स्वतंत्र रूप से बैंक खातों का संचालन करने वाली महिलाओं की संख्या, इस समय 53% से बढ़कर लगभग 80% हो गई, जिसमें 22.5% से अधिक भारतीय महिलाएँ, वित्तीय लेनदेन के लिये मोबाइल फ़ोन का उपयोग करती हैं. न्यूजीलैण्ड की पूर्व प्रधानमंत्री और यूएनडीपी की पूर्व प्रशासक, हैलेन क्लार्क ने मानव विकास एजेण्डे को अपनाने के लिये, भारत की सराहना की. उन्होंने सम्पर्क साधनों तक महिलाओं की समान पहुँच सुनिश्चित करने पर बल दिया ताकि वे स्वास्थ्य जानकारी हासिल करने, व शिक्षा, सरकारी सेवाओं, वित्तीय सेवाओं आदि के लिये इसका उपयोग करते हुए समाज में पूर्ण भागेदारी निभा सकें.
रिलायन्स फाउण्डेशन और ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउण्डेशन का – ‘आकांक्षाएँ, पहुँच व साधन: तकनीक द्वारा महिलाओं के जीवन में बदलाव’ नामक एक प्रकाशन भी इस आयोजन में जारी किया गया. यह संग्रह, उन महिला नेताओं की कहानियाँ बयान करता है, जो तकनीकी परिवर्तन और सामाजिक आर्थिक समावेश के एजेण्ट के रूप में उभरी हैं और अपने समुदायों को बेहतर भविष्य के लिये मार्ग प्रशस्त करने हेतु, आईसीटी का उपयोग कर डिजिटल सम्बल के रूप में विकसित हुई हैं. महिलाओं को डिजीटली साक्षर और जागरूक बनाने के लिए भारत सरकार, झारखंड सरकार और स्वयंसेवी संस्थानों ने भी अनेक प्रयास किए हैं :- राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने डिजिटल शक्ति अभियान का चौथा चरण शुरू किया है। NCW ने इसे साइबरपीस फाउंडेशन और मेटा के सहयोग से लॉन्च किया। डिजिटल शक्ति: परिचय: देश भर में डिजिटल क्षेत्र में महिलाओं में जागरूकता स्तर को बढ़ाने में मदद करने के लिये जून 2018 में डिजिटल शक्ति की शुरुआत हुई थी। यह महिलाओं को उनके लाभ के लिये रिपोर्टिंग और निवारण तंत्र, डेटा गोपनीयता और प्रौद्योगिकी के उपयोग में मदद कर रहा है। इस कार्यक्रम का तीसरा चरण मार्च 2021 में लेह में शुरू किया गया था। डिजिटल शक्ति 4.0: डिजिटल शक्ति 4.0 महिलाओं को डिजिटल रूप से कुशल और किसी भी प्रकार के अवैध/अनुचित ऑनलाइन गतिविधि के खिलाफ डटकर खड़े होने के लिये जागरूक बनाने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य महिलाओं के लिये सुरक्षित साइबर स्पेस सुनिश्चित करना है।
उपलब्धियाँ: डिजिटल शक्ति परियोजना के माध्यम से पूरे भारत में 3 लाख से अधिक महिलाओं को साइबर सुरक्षा संबंधी सुझावों और उपायों, रिपोर्टिंग एवं निवारण तंत्र, डेटा गोपनीयता तथा उनके लाभों के लिये प्रौद्योगिकी के उपयोग के बारे में जागरूक किया गया है। इसके अतिरिक्त कौशल विकास योजना के माध्यम से भी महिलाओं में डिजिटल साक्षरता विकसित करने के प्रयास जारी है।
झारखंड सरकार के प्रयास:- महिलाओं की सुरक्षा को लेकर झारखंड पुलिस ने एक और नई पहल ‘मेक माई सिटी सेफ’ शुरू की। किसी भी क्षेत्र में महिलाओं के साथ कुछ गलत हो रहा है या कोई इलाका उनके लिए असुरक्षित है तो सिर्फ झारखंड पुलिस की वेबसाइट पर लॉग इन कर कुछ जानकारी देनी है। पुलिस उस पर त्वरित कार्रवाई करेगी। जानकारी देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा। जानकारी देने के लिए झारखंड पुलिस के वेबसाइट jhpolice.gov.in पर लॉग इन करना है। इसके बाद Initiatives में जाकर Make My City Safe पर क्लिक करते ही एक विंडो खुलेगा, जिसमें कुछ जानकारियाँ देनी है। रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा जारी वित्तीय साक्षरता और डिजिटल लेनदेन अभियान ‘ई-बात’ के अंतर्गत टाउन हॉल घाटशिला, पूर्वी सिंहभूम में एक जिला स्तरीय अभियान आयोजित किया। इस कार्यक्रम में डिजिटल वित्त और वित्तीय साक्षरता के बारे में महिला समूहों को जागरूकता सहित प्रशिक्षण दिया। राँची विश्वविद्यालय के साइबर सिक्योरिटी कोर्स का शुभारम्भ तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस ने किया l स्कूलों में आईटी की शिक्षा व्यावसायिक पाठ्यक्रम के रूप में शामिल है ताकि आने वाली पीढ़ी चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें. साइबर सेफ्टी और सेक्युरिटी के लिए शिक्षण संस्थाओं में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इस तरह, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के सशक्त होने का जश्न मनाता है और जो वंचित हैं उन्हें उनके अधिकारों के बारे में जागरूक भी करता है. महिलाओं को मिलने वाले संवैधानिक और सामाजिक अधिकार ही उनके शोषण से लड़ने के लिए हथियार साबित हो सकते हैं इसीलिए हमारी सबसे पहली पहली होनी चाहिए कि हम अपने परिवार और आसपास की महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक करें। उनके अन्दर वो अंतर्दृष्टि उत्पन्न कर सकें कि वो अपने खिलाफ होने वाले भेदभाव को पहचान सकें. उन दिशाओं की ओर उन्हें उन्मुख कर सके कि वो अपना सर्वोत्तम प्राप्त कर सके और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान दे सकें. हमें एकजुट होकर महिलाओं के उत्थान के लिए सुनियोजित प्रयास करने होंगे ताकि आने वाले समय में महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वावलंबन को बढ़ावा देने के लिए किसी विशेष दिन की जरूरत ना पड़े।
(लेखिका राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार सम्मानित प्रसिद्ध शिक्षिका हैं।)
पंजाब में पुन: दहशतगर्दी का दौर शुरू हो चुका है। खालिस्तान के नाम पर एकबार फिर से आतंक की आहट सुनाई देने लगी है। अब वहां देशद्रोही हरकतों में शामिल कुछ लोग ‘हिन्दुस्तान मुदार्बाद’ और ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे हैं और भारत माता के खिलाफ उनके आपत्तिजनक बोल भी सामने आ रहे हैं। लेकिन, पंजाब की वर्तमान सरकार खालिस्तानी अलगाववादियों की इन करतूतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर रही है। दरअसल, भारत के टुकड़े कर खालिस्तान आंदोलन का बिगुल फूंका है अमृतपाल सिंह ने, जो कुछ ही माह पहले दुबई से भारत लौटा है। अमृतपाल सिंह ‘वारिस पंजाब दे’ गुट का मुखिया और खालिस्तान का कट्टर समर्थक बताया जाता है। हाल ही में अमृतपाल सिंह ने पंजाब में लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा दी। वह अपने हजारों समर्थकों के साथ अमृतसर के अजनाला थाने में घुस गया। उसके समर्थकों के हाथों में धारदार तलवारें, राइफलें और मुंह पर भारत विरोधी नारे थे। कानून व्यवस्था को धत्ता बताते हुए अमृतपाल के समर्थकों ने पुलिस वालों को मारपीट कर उन्हें लहूलुहान कर दिया। अजनाला में पुलिस थाने पर हमला किया गया और बैरिकेड तोड़ डाले गए। यह सब उसने अपने साथी लवप्रीत उर्फ तूफान सिंह को छुड़ाने के लिए किया, जिसे पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। दरअसल, लवप्रीत तूफान के खिलाफ अपहरण और मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ था। लेकिन, अमृतपाल सिंह की ताकत के आगे कानून-व्यवस्था ने घुटने टेक दिये और पुलिस लवप्रीत तूफान को छोड़ने पर विवश हुई। लेकिन, बड़ी बात यह है कि इस पूरे प्रकरण के पीछे खालिस्तान का समर्थन और भारत विरोध के स्वर सुनाई दिये। यह न सिर्फ पंजाब, बल्कि पूरे देश के लिए खतरे की घंटी है। दरअसल, खालिस्तान के नाम पर पंजाब की धरती पहले भी कई बार लहूलुहान हो चुकी है। यही वजह है कि पंजाब के पूर्व डीजीपी एस एस विर्क ने इस तरह के खुले प्रदर्शन को लोकतंत्र और किसी भी राज्य की कानून व्यवस्था के लिए खतरा बताया। उनका मानना है कि पंजाब ने आतंकवाद के काले दिन देखे हैं, इसलिए प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। पूर्व डीजीपी ने यह भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि पंजाब में काले दिनों को दोबारा वापस नहीं लौटने दिया जाय। दरअसल, अमृतपाल सिंह खालिस्तान का कट्टर समर्थक है और वह लंबे समय से इस आंदोलन से जुडा रहा है। उसने गृह मंत्री अमित शाह को भी धमकी दी थी। अमृतपाल सिंह के रवैये को देखते हुए इस बात की आशंका जताई जा रही है पंजाब में कहीं 1980 के दशक वाली स्थिति न बन जाय। क्योंकि, 1980 के दशक में भिंडरावाले की कहानी देश आज तक भूल नहीं पाया है। जबकि, अमृतपाल सिंह को भिंडरावाले-2 ही माना जा रहा है। मालूम हो कि खालिस्तान की मांग के तार पाकिस्तान से लेकर कनाडा तक जुडे हैं। इसलिए यह भारत के लिए एक गंभीर मसला है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार पर भरोसा न कर केन्द्र सरकार इन सपोलों का फन कुचलने के लिए खुद तैयार रहे।
‘वसुधैव कुटुम्बकम’ यानी समस्त धरा, एक परिवार की थीम पर जिस प्रकार भारत के विभिन्न हिस्सों में जी-20 की अलग-अलग बैठकों का सफल दौर जारी है, वह अपने देश की गरिमा में लगातार चार चांद लगा रहा है। जाहिर तौर पर इससे पूरी दुनिया में भारत का दबदबा बढ़ता जा रहा है और हिन्दुस्तान विश्व मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरकर सामने रहा है।
विशेष संवाददाता रांची : अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के प्रमुख मंच ग्रुप ऑफ ट्वेंटी (जी-20) की अध्यक्षता भारत की वैश्विक ताकत में उत्प्रेरक की भूमिका निभा रही है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ यानी समस्त धरा, एक परिवार की थीम पर जिस प्रकार भारत के विभिन्न हिस्सों में जी-20 की अलग-अलग बैठकों का सफल दौर जारी है, वह अपने देश की गरिमा में लगातार चार चांद लगा रहा है। जाहिर तौर पर इससे पूरी दुनिया में भारत का दबदबा बढ़ता जा रहा है और हिन्दुस्तान विश्व मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरकर सामने रहा है। दुनिया भर के प्रतिनिधि बैठकों में शामिल होकर जहां निर्धारित विषयों पर चर्चा कर रहे हैं, वहीं भारतीय संस्कृति के विभिन्न आयामों से भी रू-ब-रू हो रहे हैं। इसी कड़ी में झारखंड की राजधानी रांची ने भी सतत ऊर्जा से संबंधित जी-20 की बैठक की मेजबानी की और सभी विदेशी प्रतिनिधि संतुष्ट होकर लौटे। भारत की जी20 अध्यक्षता के तहत सतत ऊर्जा के लिए सामग्री पर अनुसंधान और नवाचार पहल सभा (आरआईआईजी) का दोदिवसीय सम्मेलन रांची में हुआ। झारखंड की धरती पर आगमन के साथ रांची एयरपोर्ट पर कोरिया, सिंगापुर, जर्मनी, सऊदी अरब, इंग्लैंड, फ्रÞांस, तुर्की, यूएई, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया से पधारे डेलिगेट्स के साथ, इंटरनेशनल सोलर एलायंस से सबा कलाम के प्रो. पद्मश्री डॉ. अशोक झुनझुनवाला, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके सारस्वत सहित विभिन्न वैज्ञानिक संस्थाओं के शीर्ष पदाधिकारियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। सम्मेलन में 16 जी20 सदस्यों, आमंत्रित अतिथि देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के 21 विदेशी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। लगभग 40 भारतीय विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन का समन्वय वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), नई दिल्ली द्वारा किया गया। डॉ. श्रीवरी चंद्रशेखर, सचिव, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), आरआईआईजी अध्यक्ष ने जी20 प्रतिनिधियों और विशेष आमंत्रितों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत सहित कई जी20 देशों के पास विशाल खनिज और सामग्री संपदा है, जिसका हमारी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निरंतर उपयोग करने की आवश्यकता है। अन्य जी20 देशों जैसे इंडोनेशिया और ब्राजील के जी20 प्रतिनिधियों ने भी अपनी प्रारंभिक टिप्पणियों में सम्मेलन के महत्व को दोहराया। प्रतिनिधियों और आमंत्रितों का स्वागत करते हुए, डीएसआईआर के सचिव और सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. कलईसेल्वी ने कहा कि भारत की अध्यक्षता के तहत जी20 की थीम ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ या ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ एक तरह से आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। पूरी दुनिया को एक साथ आने और स्थायी ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए ताकि शुद्ध शून्य उत्सर्जन के साथ हमारा एक वैश्विक भविष्य हो सके। उन्होंने जी20 देशों से टिकाऊ ऊर्जा भंडारण, वितरण और प्रबंधन के क्षेत्रों में अनुसंधान और तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए हाथ मिलाने का आह्वान किया। तीन सत्रों के तहत ‘सतत ऊर्जा के लिए सामग्री’ के विभिन्न पहलुओं – ऊर्जा सामग्री और उपकरणों से संबंधित 21वीं सदी की चुनौतियां, सौर ऊर्जा उपयोग एवं फोटोवोल्टिक प्रौद्योगिकी और हरित के लिए सामग्री और प्रक्रियाएं ऊर्जा पर चर्चा की गई। प्रतिनिधियों ने चर्चा की और पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता के लिए कार्बन उत्सर्जन नेट-शून्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सामूहिक रूप से ऊर्जा सामग्री चुनौतियों को हल करने पर संयुक्त रूप से काम करने पर सहमति व्यक्त की। रांची में ‘सतत ऊर्जा के लिए सामग्री’ विषय पर इस सम्मेलन के बाद, तीन और आरआईआईजी कार्यक्रम डिब्रूगढ़ (असम), धर्मशाला (एचपी) और दीव में ‘सर्कुलर-जैव-अर्थव्यवस्था’, ‘ऊर्जा संक्रमण के लिए पर्यावरण-नवाचार’ विषयों पर आयोजित किए जाएंगे तथा ‘सस्टेनेबल ब्लू इकोनॉमी हासिल करने की दिशा में वैज्ञानिक चुनौतियां और अवसर’ क्रमश: पर चर्चा होगी।
सीबीसी-पीआईबी के सनबोर्ड पर उकेरी भावनाएं- मेजबानी को बताया अविस्मरणीय जी-20 रांची में आए विदेशी अतिथियों ने अपनी भावनाएं केन्द्रीय संचार ब्यूरो/प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरो के सन-बोर्ड पर उकेरी। रक्षा मंत्री, भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. जी. सतीश रेड्डी, रांची एसएसपी किशोर कौशल एवं भारतीय विदेश सेवा से रांची की पहली क्षेत्रीय पासपोर्ट पदाधिकारी मनिता आदि ने भी हस्ताक्षर किए। जी-20 साइंस व तकनीक रांची बैठक में आए हुए डेलिगेट्स के लिखित यादों को सहेज कर रखने के लिए केंद्रीय संचार ब्यूरो (सीबीसी), रांची ने अपर महानिदेशक पीआईबी अखिल कुमार मिश्रा के निर्देशन में विशेष तौर से तैयार किए गए सन-बोर्ड स्टैंड पर अतिथियों के द्वारा उनके भावनाओं को संग्रहित किया गया। ब्राजील से आए डेलीगेट् डॉ. फिलेपी सिल्वा ने लिखा – भारत बहुत धन्यवाद, झारखंड के अतिथि-सत्कार से मैं गदगद हूं। सऊदी अरबिया से जी-20 रांची बैठक में शामिल होने आयीं वैज्ञानिक डॉ. ईमान ने लिखा – भारत आपको ढेर सारा प्यार : धन्यवाद इंडिया। वहीं, सिंगापुर से आये प्रतिनिधि एलिजा ने अपनी भावना सन-बोर्ड पर दशार्ने से पहले अपने मोबाइल द्वारा भारत में अभिनंदन के लिए प्रचलित शब्द तलाश कर लिखा : नमस्ते ! थैंक्यू इंडिया।
बोकारो ः कुश्ती में अपने दांव-पेंच और सूझबूझ से विदेशी पहलवानों के छक्के छुड़ाकर डब्ल्यूडब्ल्यूई में भारत का दबदबा बढ़ाने वाले दी ग्रेट खली शुक्रवार को बोकारो पहुंचे। एक निजी टीएमटी कंपनी के कार्यक्रम में दुर्गापुर जाने के क्रम में वह कुछ समय के लिए विश्राम करने को बोकारो के सेक्टर- 1 स्थित होटल हंस रीजेन्सी में रुके थे। दिलीप सिंह राणा उर्फ खली ने इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह झारखंड के युवाओं का कुश्ती (रेसलिंग) के क्षेत्र में मार्गदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के युवा रेसलरों का हौसला बढ़ाने के लिए शीघ्र ही वह धनबाद आएंगे। विश्राम के लिए कुछ समय के लिए होटल हंस रीजेंसी में ठहरे थे। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के युवाओं को रेसलिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए वह जल्द ही धनबाद आकर युवाओं का मार्गदर्शन करेंगे।
बोकारो में मीडिया से बात करते दी ग्रेट खली।
रेसलिंग में दी अंडरटेकर जैसे पहलवानों को भी चित्त कर देने वाले डब्ल्यूडब्ल्यूई सुपरस्टार खली के बोकारो आने पर उन्हें देखने, उनकी तस्वीरें खींचने और उनके साथ फोटो खिंचाने वालों की भीड़ लग गई। होटल हंस रीजेंसी के आसपास एक कौतूहल और रोमांच का नजारा बना रहा। बता दें कि हिमाचल निवासी खली अपने दम पर मेहनत मजदूरी कर शानदार कद-काठी के चलते डब्ल्यूडब्ल्यूई में पहुंचने वाले पहले भारतीय नागरिक हैं। इस दरम्यान बोकारो जिले के कुछ रेसलर भी उनसे मिलकर यहां के रेसलरों की समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। उन्होंने कहा कि रेसलिंग के क्षेत्र में यहां के युवाओं को आगे आना होगा, इसके लिए उन्हें मेहनत करने की जरूरत है।
बोकारो ः सेल के सेवानिवृत्त कर्मी भयानक साजिश का शिकार बनाये जा रहे हैं। सेल की स्कीम के तहत जिन सेवानिवृत्त कर्मियों ने अपना इलाज करवाया है, एम डी इन्डिया नामक बीमा कम्पनी द्वारा उनकी बीमारी के इलाज की बीमा राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इसके कारण सेवानिवृत्त कर्मियों को भयानक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी बात को लेकर शुक्रवार को सेल के सेवानिवृत्त कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने बोकारो के सेक्टर-1 स्थित एम डी इन्डिया टीपीए प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय के समक्ष धरना देते हुए जोरदार प्रदर्शन किया और अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से संबद्ध राष्ट्रवादी इस्पात मजदूर संघ के महामंत्री रणधीर सिंह ने कहा कि एम डी इन्डिया के माध्यम से जिनकी बीमारियों का इलाज हुआ है, उन्हें अब रोना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सेलकर्मियों का स्वास्थ बीमा, न्यू इंडिया इंश्योरेंस के टीपीए – एम डी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अंतर्गत कवर है। एम डी इंडिया ने अपने लगभग सभी बीमा धारकों को कैशलेस इलाज के लिए कंपनी का कार्ड जारी किया है और दूसरी तरफ अपने उन्हीं कार्ड धारकों का इलाज कर रहे अस्पताल के इलाज का खर्च, बिना किसी उचित कारण के रोक रखा है। टीपीए द्वारा इलाज खर्च का भुगतान अभी तक नहीं किए जाने पर सभी कार्डधारी मरीज (सेलकर्मी) आक्रोशित हैं। ऐसे बहुत सारे वृद्ध और लाचार लोग इसका कारण जानने टीपीए के कार्यालय जा पहुंचे। सभी बुजुर्गों को आक्रोशित रूप में देखते ही और अपनी कंपनी का दोष समझते हुए कंपनी के स्थानीय पदाधिकारी भाग खड़े हुए। वहां मौजूद कनीय कर्मचारियों को बुजुर्गों की शिकायत से रूबरू होना पड़ा। जनहित के मुद्दों पर कंपनी की पलायनवादी नीति के विषय पर कंपनी के पुणे स्थित प्रधान कार्यालय में सीईओ समीर भोंसले सहित अन्य पदाधिकारियों के साथ कई बार वार्ता हुई। उन्होंने सेल कर्मियों के सभी वादों का भुगतान करने एवं भविष्य में किसी तरह की शिकायत न आने का आश्वासन दिया था, परंतु अस्पताल को सेलकर्मियों के इलाज का खर्च भुगतान नहीं किए जाने से बेचारे बुजुर्ग व अन्य लोग लाचार हो चुके हैं।
बिना जांच के ही होता है बड़े अस्पतालों का भुगतान
दूसरी तरफ कंपनी द्वारा समुचित इलाज की भावना से दूर चापलूस, मिली-जुली साजिश करने वाले बड़े अस्पताल का अनुचित बिल बिना किसी जांच के भुगतान कर दिया जाता है। उक्त जानकारी देते हुए राष्ट्रवादी इस्पात मजदूर संघ के महामंत्री रणधीर सिंह ने कहा कि निश्चित तौर पर एमडी इंडिया के प्रधान कार्यालय एवं अन्य संबद्ध की साजिश के साथ ऐसा किए जाने की संभावना बलवती प्रतीत होती है। यदि भविष्य में अविलंब इस विषय पर सकारात्मक पहल करते हुए एम डी इंडिया द्वारा समुचित कदम नहीं उठाया गया तो हम सेलकर्मी कंपनी के खिलाफ किसी स्तर तक आंदोलनात्मक रवैया अख्तियार करने पर बाध्य होंगे और इस क्रम में होने वाली किसी भी तरह की क्षति-पूर्ति के लिए एमडी इंडिया टीपीए प्राइवेट लिमिटेड (कंपनी) पूरी तरह जिम्मेवार होगी।