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  • डीएवी स्वांग का रिजल्ट शत-प्रतिशत

    स्वांग : डीएवी स्कूल स्वांग के सीबीएसई 12वीं के विद्यार्थियों का परीक्षाफल शत-प्रतिशत रहा है। इस स्कूल में विज्ञान संकाय में 62 एवं वाणिज्य संकाय में 66 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिनमें से सभी परीक्षार्थियों ने सफलता हासिल की है। वाणिज्य संकाय में सलोनी चौहान ने 94.6 प्रतिशत, ज्योति आनन्द ने 93.8 प्रतिशत तथा श्वेता कुमारी ने 91.8 प्रतिशत अंक लाकर विद्यालय में पहला, दूसरा एवं तीसरा स्थान प्राप्त किया। इसी प्रकार विज्ञान संकाय में अदिति स्नेह ने 90.8 प्रतिशत, हिमांशु कुमार सिंह ने 87.4 प्रतिशत एवं अभिजीत कुमार रंजन ने 87.0 प्रतिशत अंक लाकर विद्यालय में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया है। इस शानदार सफलता पर सीसीएल कथारा प्रक्षेत्र के महाप्रबंधक प्रकाश चंदा, स्टाफ आॅफिसर पर्सनल ओपी सिंह, डीएवी झारखंड जोन एचकेएआरओ डा. पी हाजरा एवं विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य निर्मल बेहुरा ने सभी सफल सभी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

  • पेन्टीकॉस्टल में पुलकित जैन रहा टॉपर

    दी पेन्टीकॉस्टल एसम्बली स्कूल, सेक्टर-12 के छात्रों ने भी बेहतरीन परीक्षा परिणाम लाने का सिलसिला जारी रखा है। 12वीं की परीक्षा में कुल 203 विद्यार्थी (94 छात्रायें एवं 109 छात्र) नामांकित थे। विद्यालय का परिणाम शत-प्रतिशत रहा। 199 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी अंक अर्जित करने में सफल रहे। कुल आठ विद्यार्थी 95 प्रतिशत तथा कुल 46 विद्यार्थी 90 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित करने में सफल रहे। 96.4 प्रतिशत अंक लाकर कार्मस संकाय के छात्र पुलकित जैन ने पूरे विद्यालय में प्रथम स्थान अर्जित किया। क्रमश: दूसरे व तीसरे स्थान पर 95.4 प्रतिशत अंक के साथ सुप्रतिम घोष (कला) तथा 96.2 प्रतिशत अंक लाकर राज बगेरिया (प्योर सांइस) व निलेष कुमार (बायो सांइस) रहे। अपने विद्यालय के अच्छे परीक्षा परिणाम पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विद्यालय निदेशक डा.  डी.एन. प्रसाद ने छात्रों को बधाई देते उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है। प्राचार्या रीता प्रसाद ने अपने शिक्षकों तथा विद्यार्थियों की मेहनत पर गर्व व्यक्त किया।

  • बीएसएल स्कूलों का बेहतर प्रदर्शन

    इस वर्ष सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में बीएसएल संचालित स्कूलों ने गत वर्षों की तुलना में तथा इस वर्ष के औसत परीक्षाफल से बेहतर प्रदर्शन किया है। बीएसएल संचालित पांच बोकारो इस्पात सीनियर सेकेंडरी स्कूलों से इस वर्ष 12वीं की परीक्षा में कुल 724 विद्यार्थी शामिल हुए, जिनमें से 601 विद्यार्थी सफल घोषित किए गए, यानी राष्ट्रीय औसत के समकक्ष 83 प्रतिशत विद्यार्थी सफल रहे। विज्ञान में बीआईएसएसएस- 2सी की सिम्मी 93 प्रतिशत, कॉमर्स में बीआईएसएसएस- 8बी की काजल कुमारी 91.6 प्रतिशत तथा आर्ट्स में इसी विद्यालय की आशिका कुमारी 83 फीसदी अंकों के साथ टॉपर रहे। कुल 35 विद्यार्थियों को 80 प्रतिशत से अधिक अंक मिले।

  • चिन्मय विद्यालय का फिर शत-प्रतिशत परिणाम

    12वीं का परीक्षाफल अन्य वर्ष की भांति इस वर्ष भी काफी शानदार रहा है। इस बार भी विद्यालय का 100 प्रतिशत परिणाम रहा। कुल 166 बच्चों को 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त हुए हैं। विद्यालय की इस शानदार उपलब्धि पर विद्यालय सचिव महेश त्रिपाठी ने शिक्षक और छात्रों को हार्दिक बधाई देते हए कहा कि, प्रबंधन, शिक्षक, छात्र एवं अभिभावक के सम्मिलित प्रयास से ऐसा शानदार परीक्षाफल हुआ है और आगे भी आने वाले वर्षो में और भी बेहततर होने वाला है। इस विद्यालय के वाणिज्य संकाय में नेहा बुधिया (97.6), निशांत नयन (97.4) तथा रानी अग्रवाल (97.2) क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर रहे। इसी प्रकार विज्ञान संकाय में मनीष कुमार (97.2), महाश्वैता महेश्वरी (96.4) तथा अपर्णा सरकार व अदिति चैधरी (96.2) तथा कला संकाय में कृष्णा कुमार सिंह (95.8), गौतम कुमार गुंजन ( 95) व साहिल बागची (94.6)  क्रमश- पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर रहे। इस स्वर्णिम सफलता के लिए चिन्मय मिशन केन्द्र बोकारो की आचार्या स्वामिनी संयुक्तानंद सरस्वती, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष विश्वरुप मुखोपध्याय, प्राचार्य डा. अशोक सिंह तथा उप प्राचार्य अशोक कुमार झा ने सभी छात्र-छात्राओं एवं उनके अभिभावकों व शिक्षकों को बधाई दी है।

  • इंजीनियर बनना चाहते हैं जिला टॉपर

    12वीं परीक्षा में जिले स्तर पर टॉप स्थान पाने वाले चिन्मया विद्यालय के साइंस टॉपर मनीष कुमार इंजीनियर बनना चाहते हैं। भोजपुर कॉलोनी, चास निवासी दवा दुकानदार सतीश कुमार तथा ट्यूशन शिक्षिका माता सरिता प्रसाद का पुत्र मनीष शुरू से ही मेधावी रहा है। वहीं डीपीएस की छात्रा अनुष्का पॉल भी इंजीनियर बनना चाहती है। उसकी इच्छा सीएस इंजीनियरिंग करने की है। इसके साथ ही वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भी अपना कैरियर बनाना चाहती है। वह सेक्टर- 1सी निवासी आशीष कुमार पॉल की बेटी है। आशीष बोकारो स्टील प्लांट के फाइनेंस विभाग में उप महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं।

  • गुदड़ी का लाल निकले दोनों स्टेट टॉपर

    एक आटो ड्राइवर का बेटा तो दूसरी किसान की बेटी


    तनिश  और  निकिता 

    किसी ने सच ही कहा है, अगर मजबूत इच्छाशक्ति व कड़ी लगन हो तो गरीबी क्या, कोई भी बाधा सफलता के मार्ग में रोड़ा नहीं बन सकती। इसी बात को चरितार्थ कर दिखाया है कॉमर्स में स्टेट टॉपर बने तनीष बंसल ने। तनीष चास के यदुवंश नगर निवासी राम अवतार बंसल के सुपुत्र हैं और राम अवतार पेशे से एक आॅटो ड्राइवर हैं। उसके माता-पिता अपने बेटे की एक कामयाबी से काफी प्रसन्न हैं। तनीष ने भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाकर गरीबों की सेवा करना अपने जीवन का उद्देश्य बताया है। इसके पहले वह सीए की तैयारी भी करना चाहते हैं। तनिश की माता सविता बंसल एक गृहिणी हैं। वहीं कला संकाय में राज्यभर में अव्वल स्थान प्राप्त करने वाली निकिता सिन्हा भूगोल विषय कि व्याख्याता बनना चाहती है। उसकी इच्छा शिक्षा के क्षेत्र में एक मुकाम हासिल करने की है। निकिता मूलत: बिहार के झाझा की रहने वाली है और उसके पिता संजीव सिन्हा एक किसान है। जबकि माता बेबी सिन्हा गृहिणी हैं। निकिता ने यहां सेक्टर-4 स्थित सिटी सेंटर के एक हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी की

  • शैक्षणिक फलक पर फिर चमके बोकारो के सितारे


    निकिता, तनीष, मनीष व अनुष्का ने बढ़ाया बोकारो का मान

    बोकारो : बोकारो को पूरे झारखंड में शैक्षणिक राजधानी के रूप में ख्याति प्राप्त है। इस गौरव में चार चांद लगाने का काम एक बार फिर यहां के मेधावी विद्यार्थियों ने किया है। इस बार बोकारो को दोहरा स्टेट टॉपर होने का खिताब यहां की होनहार छात्रा निकिता और छात्र तनीष ने उपहार में दिया है। सीबीएसई 12वीं बोर्ड की परीक्षा के कला संकाय में डीएवी पब्लिक स्कूल, सेक्टर- चार की छात्रा निकिता सिन्हा और वाणिज्य संकाय में होली क्रॉस स्कूल, बालीडीह के विद्यार्थी मनीष बंसल ने संयुक्त रूप से पूरे प्रदेश में अव्वल स्थान प्राप्त किया। दोनों को 98.2% अंक प्राप्त हुए। जबकि इसी प्राप्तांक के साथ हजारीबाग प्रदेश में अव्वल रहा। बोकारो में कामर्स में दूसरे स्थान पर 97.6 प्रतिशत लाकर चिन्मय विद्यालय की छात्रा नेहा बुधिया रही। जबकि तीसरा स्थान 97.4 प्रतिशत प्राप्तांक लाने वाले डीपीएस के स्तुति कुमार को मिला। वहीं, विज्ञान संकाय में चिन्मय विद्यालय के मनीष कुमार और डीपीएस की अनुष्का पाल ने 97.2 प्रतिशत अंक लाकर संयुक्त रूप से जिला टापर बनने का गौरव हासिल किया। हालांकि, जीजीपीएस के छात्र अनिकेत राज के 97.4 प्रतिशत अंक लाकर प्रथम होने का दावा भी किया जा रहा है, परंतु भाषा विषयक प्राप्तांक को छांटकर यह प्रतिशत दिखाये जाने को कुछ लोग गलत दावेदारी बता रहे हैं। इसके बाद का स्थान 97 प्रतिशत अंक लाने वाले आदर्श विद्या मंदिर, चास के छात्र सत्यम कुमार को मिला। उम्दा परीक्षाफल जारी होने के बाद सभी विद्यालयों में जश्न का माहौल देखा गया।

  • मैथिली-मिथिलावाद के धोखेबाज कौन?

    मैथिली-मिथिलावाद के धोखेबाज कौन?

    • विजय देव झा

    मिथिला-मैथिली और मिथिलावाद के नाम पर काक-ध्वनि करने वाले तो बहुतों हैं, उनके लिये एक नहीं, बतौर विश्वासघात के कई नमूने हैं। उन चमनजीझा लोगों के लिये पेश हैं कुछ नमूने

    स्वतंत्रता के बाद संपन्न हुए पहले आम चुनाव में सरकार तिरहुत के अंतिम शासक कामेश्वर सिंह दरभंगा से चुनाव लड़ रहे थे। उनका चुनाव चिन्ह था साइकिल छाप। कामेश्वर सिंह न केवल संविधान सभा के सदस्य थे। उनका व्यक्तित्व दबदबा ऐसा था कि मिथिला-विरोधी मिथिला का अहित करने से पहले दस बार सोचते थे। चुनाव में उन्होंने ढेर सारी साइकिलों का वितरण करवाया था, ताकि मतदाता और उनके एलेक्शन एजेंट बूथ तक सही समय पर जा सकें। उनके खिलाफ चुनाव प्रचार करने के लिए खुद पं. जवाहरलाल नेहरू आये थे और दरभंगा में कह गए थे कि इस सामंती जमींदार को दरभंगा सीट से हराना उनकी नाक का सवाल है। मैथिलों को कहां उस समय एहसास रहा कि कामेश्वर सिंह को उनके अपने हैं उनको हराकर वह मिथिला का कितना नुकसान कर रहे हैं।

    मिथिला और मिथिलावाद से धोखा किसने किया था। नेहरूजी को कहां याद रहा की जिस कांग्रेस पार्टी का केवाला उन्होंने जबरिया अपने नाम कर लिया, उस कांग्रेस पार्टी की स्थापना से लेकर आने वाले वर्षों में इस परिवार का क्या योगदान रहा था?

    राज दरभंगा दो दैनिक समाचार पत्रों- आर्यावर्त व इंडियन नेशन का प्रकाशन किया करता था। इन दोनों अखबारों में मिथिला के मुद्दों को दमदार ढंग से रखा जाता था। इसे बंद करवाने का श्रेय किसे जाता है? सरकार तिरहुत उर्फ राज दरभंगा को


    मिथिला में नेतृत्व की लगभग शून्यता ही रही, जिसे कभी-कभी कुछ खुश लोगों ने खत्म करने की असफल चेष्टा की। बाबू जानकीनंदन सिंह उस समय कांग्रेस के सशक्त नेता थे। 1953 में कांग्रेस का अधिवेशन बंगाल के कल्याणी में होना निश्चित किया गया। बाबू जानकीनन्दन सिंह उस अधिवेशन में अलग मिथिलाराज की मांग उठाना चाहते थे। वह अपने समर्थकों के साथ कल्याणी कूच कर गए, लेकिन उन्हें उनके समर्थकों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने एक नयी पार्टी मिथिला कांग्रेस की स्थापना की। उनकी आवाज को दबा दिया गया। जानकीनन्दन सिंह के खिलाफ जासूसी करने वाले कौन लोग थे? धोखा किसने किया था? डा. लक्ष्मण झा मिथिलावाद की सशक्त आवाज थे। उनको पागल घोषित करने का दूषित अभियान चलाया गया। ऐसा करने वाले कौन लोग थे? धोखा किसने दिया? समाप्त करने का ऐसा हनक था कि कामेश्वर सिंह की मृत्यु के बाद तीन चौथाई सम्पति महज कामेश्वर सिंह की डेथ ड्यूटी चुकाने में समाप्त हो गयी।

    हमलोग बस अनुमान लगा सकते हैं कि अगर ललित नारायण मिश्र जीवित होते थे तो आज के मिथिला का क्या स्वरुप होता। उन्हें शक था कि उनकी ह्त्या कर दी जाएगी। उनकी हत्या कर दी गयी। कुछ आनंदमार्गियों को हत्या के आरोप में आरोपित कर मुकदमा चलाया गया। यह मुकदमा दशकों तक एकता कपूर के सीरियल की तरह चलता रहा। उस समय ललित बाबू की विधवा ने उनके अंतिम संस्कार पर व्यथित होकर कुछ कहा था। ललित बाबू को धोखा किसने दिया? यही हाल कुमार गंगानंद सिंह का किया गया। उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया तो गया लेकिन उन्हें कोई प्रशासनिक अधिकार नहीं था।  पंडित स्व. हरिनाथ मिश्र मिथिला के एक सशक्त कांग्रेसी नेता थे। 1967 में कांग्रेस संगठन की ओर से चुनाव लड़ रहे थे और उनके विरोध में कांग्रेस ने अधिवक्ता भूपनारायण झा को उम्मीदवार बनाया। हरिनाथ मिश्र को हराने के लिए इंदिरा गांधी खुद बेनीपुर चल कर आयीं थीं। तब सुप्रसिद्ध मैथिली कवि काशीकान्त मिश्र ‘मधुप’ ने एक कविता लिखी थी ‘दुर-दुर छिया-छिया-छिया, हरि के हरबै ले एली नेहरूजी के धिया’। राजीव गांधी ने हरिनाथ मिश्र को कैसे दुत्कारा था यह शायद कम लोगों को पता होगा। मुख्यमंत्री विनोदानंद झा को ऐसे ही चलता कर दिया गया। धोखाधड़ी के कितने उदाहरण दूं?

    कोसी नदी की विभीषिका मिथिला को बर्बाद करती रही। आजादी से पूर्व ब्रिटिश सरकार ने कोसी पर बांध बनाने के लिए फंड निर्धारित किया।

    देश आजाद हुआ और कोसी बांध का फंड पंजाब ट्रांसफर हो गया। इसका बहुत विरोध हुआ था। नेहरूजी तब कहा कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं, इसलिए लोग श्रमदान से बांध बना लें

    भारत सेवक समाज की स्थापना हुई और लोगों ने श्रमदान कर बांध बना भी लिया। जब पंडित नेहरू इसका उद्घाटन करने आये थे तब नाराज लोगों ने उन्हें सड़ा आम भिजवाया था।

    1934 के भूकंप ने मिथिला को दो भागों में विभाजित कर दिया। सड़क, रेल और पुल संपर्क ध्वस्त हो गए तो उन सत्तर सालों में क्यों केंद्र सरकार ने मिथिला के भौगौलिक एकीकरण के लिए कदम नहीं उठाया?मिथिला का एकीकरण सन 2003 अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार के दौरान हुआ जब कोसी पर पुल निर्माण हुआ, ध्वस्त रेल लाइन के निर्माण की संस्तुति दी गयी। मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान उन्हीं के कार्यकाल में मिला, लेकिन जब चुनाव हुए तो भाजपा मिथिला में बुरी तरह पराजित हुई। धोखा किसने दिया?

    कभी मिथिला चीनी, कागज उत्पादन और पुस्तक प्रकाशन जैसे उद्योग का केंद्र हुआ करता था। आचार्य रामलोचन शरण का पुस्तक भण्डार और हिमालय औषधि केंद्र पूरे भारत में विख्यात था। इन दो संस्थानों को बर्बाद करने का श्रेय लदारी गांव के निवासी और समाजवादी नेता कुलानन्द वैदिकजी को जाता है। वामपंथी नेता सूरज नारायण सिंह चीनी मिल को खा गए तो अशोक पेपर मिल को कामरेड उमाधर सिंह खा गए। बरौनी खाद कारखाना, पूर्णिया और फारबिसगंज के जुट मिल को बर्बाद करने का श्रेय बामपंथ को जाता है। धोखा किसने दिया था? 1980 में कांग्रेसी सरकार थी। जगन्नाथ मिश्र मुख्यमंत्री हुआ करते थे, लेकिन सरकार ने मैथिली के दावे को दरकिनार करते हुए उर्दू को द्वितीय राजभाषा बना दिया। तब किसी कांग्रेसी वामपंथी ने विरोध नहीं किया था। विरोध किया था तो आरएसएस और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् ने। धोखा किसने दिया था?

    इसी प्रकार लालू प्रसाद सामाजिक न्याय के घोड़े पर सवार होकर आये। मैथिली उनके द्वेष का पहला शिकार बनी। मैथिली को बीपीएससी और स्कूली शिक्षा से निकाल दिया गया। उस समय कौन से लोग मौन बैठे हुए थे? इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई ताराकांत झा ने लड़ी थी, लेकिन दुर्भाग्य की मिथिला के कांग्रेस नेताओं की तरह मिथिला के भाजपाइयों की जुबान नहीं थी। अब्दुल बारी सिद्द्की दरभंगा से चुनाव लड़ रहे हैं वह लालू प्रसाद के इस तानाशाही फैसले के साथ खड़े थे और आज उन्होंने मैथिली में एक चुनावी पर्चा क्या जारी कर दिया कि चमनजी मारे खुशी के लोटपोट हो रहे हैं। यह वही अली अशरफ फातमी हैं जिन्होंने मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के फैसले का प्रतिकार किया था। उस समय मिथिला के वामपंथी नेता अंदर ही अंदर इस पूरे अभियान का भट्टा बिठाने के लिए बिसात बिछा रहे थे। पूरे मिथिला को इंडियन मुजाहिदीन का रिक्रूटमेंट ग्राउंड बना दिया और हम बेखबर रहे कि कैसे हमारे बच्चों को जिहाद की आग में झोंका जा रहा है। धोखा किसने दिया था?

    नीतीश कुमार भी उसी राह पर हैं। कांग्रेस अपने कर्मों का फल भोग रही है। कारावास में लालू प्रसाद और यदुकुल में घमासान लालू प्रसाद के प्रारब्ध की शुरूवात है। नीतीश कुमार को दैवीय संकेत मिल रहे हैं। भाजपा ने मिथिला के लिए कभी कुछ अच्छा किया था यही उसकी एकमात्र संचित निधि है। तय भाजपा को करना है की वह अपने लिए कौन सा प्रारब्ध चुनेगी

    (लेखक वरिष्ठ पत्रकार व समीक्षक हैं)।

  • शुचिता बनाये रखना मोदी की बड़ी चुनौती


    – मोद प्रकाश

    मोदी सरकार ने इस बार भी जनता के सामने ईमानदार सरकार होने का दावा किया है और इस बात को एक बड़े चुनावी मुद्दे के रूप में प्रस्तुत किया है। वास्तविकता क्या है यह तो कोई नहीं जानता है, पर ये सरकार ईमानदार नजर तो जरूर आती है। जनता को क्या इस बात से खुश होना चाहिए या ये भी सोचना चाहिए कि क्या यह सरकार वाकई में ईमानदार है और आगे भी ईमानदार रहेगी?

    यह तो सही है कि इन पांच सालों में सरकार और पार्टी के लोगों के खिलाफ कोई भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे हैं। मोदी सरकार ईमानदार दिखती तो जरूर है और यह जरूरी है कि सरकार ईमानदार हो भी और ईमानदार दिखे भी। कहीं ये पढ़ा था कि ईमानदार, परन्तु अप्रभावी शासक से ज्यादा अच्छा है कि शासक थोड़ा भ्रष्ट हो, पर प्रभावी हो। ईमानदार और प्रभावी शासक तो आदर्श है और अभी तक तो मोदी सरकार भी कुछ ऐसा लग रही थी, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह आने वाले दिनों में अपनी शुचिता ऐसी ही बरकरार रख सकेगी? महाभारत के अंतकाल की एक कहानी याद आ रही है। त्रेतायुग का अंत हो चुका था और कलयुग का प्रारम्भ नहीं हो पाया था। कारण ये था कि राजा परीक्षित बड़े ही सत्यवान और प्रतापी थे, जिसकी वजह से उनके राज में असत्य, अनाचार, अधर्म की कोई जगह ही नहीं थी। कलयुग को आने के लिए कोई स्थान ही नहीं मिल रहा था। तो एक दिन कलयुग ने एक ब्राह्मण का भेष बनाया और राजा के पास पहुंच गया। राजा ने पूछा तो उसने सारी बात बता दी। भला इतने न्यायप्रिय राजा इस बात को कैसे अनदेखा कर सकते थे? राजा का यह भी कर्त्तव्य था कि वह यह सुनिश्चित करे कि प्रकृति का नियम निर्विघ्न चलता रहे। सो राजा परीक्षित ने कलयुग से कहा कि जब तक उनका शासन है तब तक कलयुग किसी भी तीन प्रकार के जगह में रह सकता है – सोने में, मदिरा में या वो स्थान जहां वेश्यावृति हो। कलयुग को कोई ऐसा स्थान नही मिला जहां मदिरा सेवन हो रहा हो और न ही कोई ऐसा स्थान मिला जहां वेश्यावृत्ति हो रही हो। ऐसा था राजा परीक्षित का राज्य, सत्यधर्म पर आधारित। सो कलयुग को कोई और उपाय नहीं मिला और उस ने राजा के स्वर्ण मुकुट में अपना स्थान बना लिया। अगले दिन राजा शिकार को गए और राह भटक गए। प्यास से पीड़ित उन्होंने एक साधु को तप में लीन देखा और उन से पानी मांगा। साधु को ध्यान में लीन थे सो कोई जवाब नहीं दिया। राजा को क्रोध हुआ और उन्होंने में पास पड़े एक मृत सांप को तलवार से उठा कर साधु के गले में लपेट दिया और आगे चले गए। कुछ देर बार साधू का पुत्र आया और उसने अपने पिता के गले में लपेटा सर्प देखा तो गुस्से में श्राप पढ़ दिया कि जिसने ऐसा कर्म किया है उसे सर्प राज तक्षक सात दिनों के अंदर मृत्युलोक पहुंचा देगा। श्राप सत्य हुआ और राजा परीक्षित की मृत्यु हुई और कलयुग का प्रारब्ध हो गया। स्वर्ण और स्वर्ण मुकुट धन और सत्ता शक्ति का परिचायक है और इन दोनों का संयम कलयुगी  शक्तियों को बढ़ावा देती है और उनको पोषती हैं। मुकुट सत्ता द्वारा दिए गए जिम्मेदारी का प्रतीक है। कलयुग में आएं तो हम देखते हैं की स्वतंत्रता के तुरंत बाद नेहरूजी की सरकार भी सत्ता और धनलोलुप मंत्रियों और अधिकारियों के बेमानी से नहीं बच पायी। उसके बाद तो सत्तर सालों तक सरकारों ने मुकुट और स्वर्ण (स्वर्ण मुकुट = सत्ता और धन) का उपयोग एक-दूसरे का हित साधने के लिए किया। सो मोदी सरकार ने मुकुट (सत्ता = जिम्मेदारी) तो धारण किया है, पर सवाल यह है कि अगले पांच साल भी क्या मुकुट पर स्वर्ण नहीं चढ़ेगा?

    मोदीजी आप तो संत हैं और राजर्षि राजा जनक की तरह आप कीचड़ में कमल की तरह हैं पर क्या आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि भारत के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में कोई कमल अगले पांच सालों में मुरझायेगा नहीं और कोई मुकुट स्वर्ण मुकुट बन जाने की कोशिश नहीं करेगा?

     मोदी जी मैं आपके सरकार द्वारा किये कुछ निर्णयों पर आपका ध्यान दिलाना चाहता हूं और आपको आगाह करना चाहता हूं कि ये निर्णय बहुत सारे मुकुटधारियों में स्वर्ण जटित मुकुट की लालसा पैदा कर देंगे। सबसे पहले मैं आपका ध्यान वित्त विधेयक 2018 की ओर दिलाना चाहता हूं, जिसमें आपकी सरकार ने विदेशी कंपनियों को राजनैतिक पार्टियों को फण्ड करने की छूट दे दी और इतना ही नहीं उसको किसी भी आॅडिट या पूछताछ से अलग रखा। सोचिये कि विदेशी शैल कंपनियों को आपने क्या हथियार दे दिए हैं।  दूसरा आपने भारत में इलेक्टोरल फण्ड को वैध कर दिया है और उस के डोनर को अज्ञात रखा है। मुझे ये अंदेशा हो रहा कि ये दोनों पालिसी आपको अगले पांच सालों में कहीं परेशानी न दें।

    यह सोचिये कि एक एनआरआई है और उसने कहीं विदेश में, सिंगापुर, आॅस्ट्रेलिया, अमेरिका या और कहीं जैसे मॉरिशस में एक कंपनी खोली और 49% किसी विदेशी कंपनी या विदेशी व्यक्ति को दे दिया। यह कंपनी उस व्यक्ति के लिए ही खोली गयी, क्योंकि वो है एक आर्म्स डीलर। इस एनआरआई ने भारत में एक ब्रांच खोला और किसी राजनैतिक पार्टी को दान दिया। इस दान का कोई आॅडिट नहीं होगा तो फिर हमारे आर्म्स डीलर ने जाकर डील किया और किक बैक का पैसा इलेक्टोरल बांड में दे दिया। सभी कुछ गुमनाम और सभी कुछ कानूनी। इन पैसों का कोई आॅडिट नहीं और इलेक्टोरल बांड का कोई नाम नहीं।  अब हो सकता है कि कुछ लोग शुरू में इसका इस्तेमाल करें पर कुछ ही दिनों में सब लोग इस विधा में माहिर हो जाएंगे। मोदीजी आप देखेंगे कि कुछ ही दिनों में आपके हर मुकुट पर सोने की परत चढ़ जायेगी और जैसे कोयले के व्यापार में कालिख लग ही जाती है वैसे ही आप भी इस स्वर्ण मुकुट के प्रभाव से अछूते नहीं रहेंगे। कोई न कोई आपके गले में सर्प फांस डाल ही जाएगा।

    (लेखक अप्रवासी भारतीय हैं तथा ये उनके निजी विचार हैं।)

  • सभा के बहाने निशाने साध गये सिद्धू : चुनाव प्रचार कम, मोदी-विरोध ज्यादा

    बोकारो : पूर्व क्रिकेटर, कांग्रेस नेता व पंजाब सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू पिछले दिनों यहां अपने चुनावी दौरे के क्रम में बोकारो पहुंचे। यहां के सेक्टर-4 स्थित मजदूर मैदान में आयोजित एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने केवल और केवल नरेंद्र मोदी पर निशाने साधे। अपने खास अंदाज में शेरो-शायरी के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कटाक्ष किए और हर बात पर ’ठोको ताली!’ कहकर जमकर तालियां ठोकवायीं। धनबाद संसदीय क्षेत्र से यूपीए प्रत्याशी कीर्ति झा आजाद के पक्ष में आयोजित चुनावी सभा में वोट की अपील और चुनावी प्रचार से ज्यादा उनकी मोदी से खीझ ज्यादा नजर आयी।  एक तरफ राहुल गांधी ‘चौकीदार चोर है’ के नारे को लेकर दिल्ली में माफी मांग रहे थे, वहीं दूसरी तरफ सिद्धू यही नारे लगवाते रहे।

    लगभग आधे घंटे के अपने भाषण में सैकड़ों बार उन्होंने ‘चौकीदार चोर है’ के नारे लगवाए।

    सिद्धू ने नरेंद्र मोदी, अडाणी, अंबानी से लेकर कांग्रेस की तथाकथित महिमा के बखान तक ही अपने पूरे भाषण को सीमित रखा और पूरे संबोधन के दौरान मोदी को ‘तुम-ताम’ वाले शब्दों से ही संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी आम आदमी का संरक्षक हरगिज नहीं है। सिद्धू ने कहा, ‘पेट खाली है, योगा करा रहे हो, जेब खाली है, खाते खुलवा रहे हो, खाने को खाना नहीं, शौचालय बनवा रहे हो, ठोको ताली! सब कंपनियां विदेशी हैं और तुम ‘मेक इन इंडिया’ की बातें कर रहे हो।’ उन्होंने कहा कि दो करोड़ नौकरी की बात नरेंद्र मोदी ने की थी, लेकिन अंबानी को 65 हजार करोड़ पर का ठेका दे दिया। झारखंड को भी ठगने का आरोप सिद्धू ने मोदी पर लगाया। उन्होंने कहा कि सरकारी कंपनी एनटीपीसी टेंडर पर तीन रुपये की दर से बिजली बेचती थी। झारखंड में प्लांट लगवाकर बांग्लादेश में अडाणी के हाथों पांच रुपये, 80 पैसे की दर से मोदी ने बिजली की बिक्री चालू करवा दी।

    सुई से लेकर यान तक कांग्रेस की देन’

    सिद्धू ने देश के विकास में कांग्रेस की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होने का दावा किया और इस बहाने भी नरेंद्र मोदी पर निशाने साधे। उन्होंने कहा कि मोदी सोचते हैं कि वर्ष 2014 के पहले हिंदुस्तान था ही नहीं एक रेलवे स्टेशन था और बस एक चाय की दुकान थी। ऐसा लगता है जैसे मोदी ने खोदकर हिंदुस्तान निकाला हो। उन्होंने कहा- ‘जब तुम पालने में थे तो चाचा नेहरू ने अंतरिक्ष में यान भेज दिया। जब तुम्हारा जन्म भी नहीं हुआ था, उस समय बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान रच दिया। सुई से लेकर यान तक चाचा नेहरू की देन है। तुम स्कूल में थे तो चाचा नेहरू ने बोकारो स्टील प्लांट लगवा दिया। जब तुम आरएसएस में डंडा चलाना सीख रहे थे, उस समय हिंदुस्तान ने तीन-तीन जंग देखे।’ ‘बहनों-भाइयों…’ वाले मोदी के संबोधन पर भी सिद्धू ने खूब तंज कसे और अपने नाटकीय अंदाज में उन्होंने कहा कि मोदी ने ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ की बात की थी, लेकिन उन्होंने जमकर खाया और अडाणी को जमकर खिलाया भी। उक्त सभा में कांग्रेस के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष डा. अजय कुमार, प्रत्याशी कीर्ति आजाद सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी उपस्थित थे।