नहीं रहे बोकारो में रक्तदान के क्रांतिदूत, मानवता के पुजारी के रूप में थी अलग पहचान; चौतरफा शोक की लहर
- दीपक झा –
बोकारो। बोकारो आज स्तब्ध है, निःशब्द है, मौन है, मर्माहत है। डॉ. यू. मोहंती। यह नाम बोकारो और आसपास के इलाकों के हजारों ऐसे लोगों की रग-रग में बसा है, जिनकी उन रगों में डॉ. मोहंती की मदद से जीवनदायिनी रक्त की बूंदें दौड़ रही हैं। यह नाम केवल तीन शब्द नहीं, बल्कि वास्तव में मानवता, जनसेवा और परोपकार की मिसाल थे। डॉक्टर को अगर धरती का भगवान माना जाता है, तो डॉ. मोहंती इसकी जीती-जागती मिसाल थे। रक्तदान को महादान कहा जाता है और बोकारो में भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी के ब्लड बैंक की स्थापना से लेकर उसके संचालन तक के अलावा पूरे जिले में रक्तदान के क्रांतिदूत के रूप में उनकी पहचान थी, है और सदैव यह पहचान अमर रहेगी।
अत्यंत ही मृदु स्वभाव के धनी, दिव्य ललाट और हल्की पतली मूंछों के नीचे अधरों पर मीठी मुस्कान। क्या छोटा, क्या बड़ा, सब के साथ सम्मानपूर्वक और स्नेह के साथ बातें करना उन्हें सबसे अलग और सबसे खास बनाता था। हजारों जरूरतमंद लोगों के लिए जीवदाता के रूप में सुप्रसिद्ध इन शख्सियत ने हमेशा-हमेशा के लिए इस दुनिया से विदा ले लिया। ऐसी विदाई, जिसकी कल्पना किसी ने भी नहीं की थी। स्वयं डॉ. मोहंती ने भी नहीं। नहीं पहले की तरह इस बार भी वह अपने हार्ट के के रुटीन चेकअप के लिए अपनी पत्नी के साथ बेंगलुरु जा रहे थे। रांची हवाई अड्डे से जैसे ही फ्लाइट ने टेकऑफ किया, उनकी परेशानी बढ़ गई। फ्लाइट को तत्काल रोक लिया गया और आपात रूप से उसे रोककर उन्हें वहीं के पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। उन्होंने वहीं अपनी अंतिम सांसें ले ली थी। उनके करीबियों की मानें तो मंगलवार को भुवनेश्वर स्थित उनके पैतृक स्थान पर उनकी अंत्येष्टि संपन्न हुई और वे पंचतत्व में विलीन हो गए। वे पहले से हृदयरोग से ग्रसित थे और उनकी सर्जरी भी हो चुकी थी।

ब्लड बैंक की स्थापना में अहम योगदान, जगाई रक्तदान की नई चेतना
बोकारो हवाई अड्डे के समीप ब्लड बैंक का शुभारंभ तत्कालीन उपाध्यक्ष स्व. एसएसपी वर्मा एवं सचिव डॉ. मोहंती के प्रयासों का ही परिणाम था। बोकारो जनरल अस्पताल से ब्लड बैंक प्रभारी के रूप में रिटायरमेंट के बाद डॉ. मोहंती ने रक्त-सेवा का सिलसिला थमने नहीं दिया। उस मुहिम में उनके सहयोगी रहे रक्तवीर संजय शर्मा ने बताया कि डॉ. मोहंती स्वयं के साथ-साथ उस समय बीजीएच से रिटायर हुए कई तकनीशियनों को भी लेकर आए। उन्हें भी जोड़ा और दशकों तक पूरी टीम ने रक्तदान की दिशा में क्रांति का जो अलख जगाया, वह बोकारो के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया। डॉ. मोहंती के भागीरथ प्रयासों का ही यह परिणाम था कि शहर में रक्तदान के प्रति जागरूकता की एक लहर जगी और विभिन्न संगठनों की ओर से उनके चिकित्सीय निर्देशन में ताबड़तोड़ सैकड़ों रक्तदान शिविर लगाए जाते रहे, जिससे अब तक हजारों लोगों को नई जिंदगी मिल चुकी है। यही कारण है कि पूरा शहर उनका परिवार था और आज वे सभी परिवार वाले शोकाकुल हैं और मौन हैं। उनके निधन पर शहरवासियों की आंखें अश्रुपूरित हैं। हो भी क्यों न, आखिर डॉ. मोहंती थे ही जो ऐसे!
दवा से अधिक अपने मृदु स्वभाव से किया मरीजों का इलाज
डॉ. मोहंती मानवता के पुजारी सही मायने में थे। शहर के लक्ष्मी मार्केट स्थित एक दवा दुकान के साथ-साथ सेक्टर-4 में अपने आवास एवं अन्य जगहों पर भी वह चिकित्सीय सेवा भी लोगों को दिया करते थे। जब भी कोई जरूरतमंद या निर्धन व्यक्ति उनके पास पहुंचता, बिना किसी स्वार्थ के वह तत्काल उसका इलाज शुरू कर दिया करते थे। यहां तक की वह खुद से ही उसे दवा भी दे दिया करते थे। उनका स्वभाव और व्यवहार ही ऐसा था कि मरीज की आधी तबीयत उनसे मिलने के बाद ही ठीक हो जाया करती थी। ब्लडमैन हरबंस सिंह सलूजा ने कहा कि डॉ. मोहंती के योगदान का बोकारो सदा ऋणी रहेगा। लहू का कर्ज चुकता करना नामुमकिन है।

उनके मधुर व्यवहार और सकारात्मक विचारों ने दवा से कहीं अधिक काम किया। दूसरों की जिंदगी में मुस्कान बिखेरने वाला वह खिलखिलाता चेहरा आज हमेशा के लिए शांत हो गया। उनके निधन पर बोकारो मर्माहत है। हर तबके के लोगों, हर सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं, सरकारी व गैरसरकारी संगठन से लेकर आमलोगों तक में उनके निधन पर गहरी शोक की लहर दौड़ गई है। जगह-जगह शोक और श्रद्धांजलि सभाओं का दौर शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों के साथ शोक ही शोक देखा जा रहा है।
उत्कल सेवा समिति के जरिए ओडिशी समुदाय को एक मंच पर जोड़ा
इतना ही नहीं, डॉ. मोहंती ने उत्कल सेवा समिति के सचिव के रूप में बोकारो के सेक्टर- 4 में श्री जगन्नाथ मंदिर की स्थापना से लेकर विगत लगभग ढाई दशक से यहां जगन्नाथ रथयात्रा के आयोजन में अपनी केंद्रीय भूमिका निभाई। उत्कल समाज को बोकारो में एक मंच पर जोड़कर, झारखंड की माटी में ओडिशी संस्कृति के संरक्षण व संवर्द्धन में डॉ. मोहंती के प्रयास सदैव स्मरणीय रहेंगे। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपने कृतित्व, अपने योगदानों और अपनी अनमोल पहचान की बदौलत वे सदैव बोकारो की रगों में लहू की तरह याद बनकर दौड़ते रहेंगे। उन्हें हमारी कोटि-कोटि श्रद्धांजलि!
डीसी ने जताया शोक, कहा- अविश्वसनीय घटना

डॉ. यू. मोहंती के निधन पर हर कोई शोकाकुल है। बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए इस घटना को अविश्वसीय बताया। उन्होेंने एक्स पर लिखा – डॉ. मोहंती आपसे 17 अगस्त को भगवान जगन्नाथ के मंदिर में मिला था। बोकारो के विकास के लिए आपने बहुत सी बातें साझा की थीं। आपका असमय जाना पूरे बोकारो को खल रहा है। बोकारोवासियों की ओर से श्रद्धा सुमन!! आपकी आत्मा भगवान जगन्नाथ के आश्रय में हमेशा सुखपूर्वक रहे, यही कामना है।
ब्लड बैंक परिवार ने दी श्रद्धांजलि, कहा- कभी नहीं भरेगी यह रिक्तता

भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के बोकारो स्थित ब्लड बैंक परिसर में एक शोकसभा आयोजित कर संस्था के पूर्व अध्यक्ष सह ब्लड बैंक के संस्थापक डॉ. यू. मोहंती को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना की। उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन को दूसरों के लिए निस्वार्थ भाव से समर्पित कर दिया था। सदैव दूसरों की सेवा में लगे रहते थे। बोकारो में कई लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया करते थे और न जाने कितने लोगों को रक्तदान करवाकर जीवनदान दिया। उनके इस रिक्त स्थान की भरपाई नहीं हो सकती है। मौके पर भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी की स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष देवेन्द्र नाथ चौबे, आपदा प्रबंधन के अध्यक्ष ज्योति प्रकाश द्विवेदी, कोषाध्यक्ष सुरेश कुमार बुधिया, ए. सिंह, ब्लड बैंक के रंजन कुमार, राज कुमार महथा, मुजीबा खानम, प्रकाश मिश्रा, संजय कुमार, सिस्टर सेलिन, मनोज कुमार चौबे, ब्रह्मदेव सिंह, युधिष्ठिर कुमार, प्रियंका कुमारी आदि मौजूद रहे।
- Varnan Live Report.





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