Special Feature : शुचिता बनाये रखना मोदी की बड़ी चुनौती

0
301

Mod Prakash.

Senior Blogger and Analyst from Australia.

मोदी सरकार ने इस बार भी जनता के सामने ईमानदार सरकार होने का दावा किया है और इस बात को एक बड़े चुनावी मुद्दे के रूप में प्रस्तुत किया है। वास्तविकता क्या है यह तो कोई नहीं जानता है, पर ये सरकार ईमानदार नजर तो जरूर आती है। जनता को क्या इस बात से खुश होना चाहिए या ये भी सोचना चाहिए कि क्या यह सरकार वाकई में ईमानदार है और आगे भी ईमानदार रहेगी? यह तो सही है कि इन पांच सालों में सरकार और पार्टी के लोगों के खिलाफ कोई भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे हैं। मोदी सरकार ईमानदार दिखती तो जरूर है और यह जरूरी है कि सरकार ईमानदार हो भी और ईमानदार दिखे भी। कहीं ये पढ़ा था कि ईमानदार, परन्तु अप्रभावी शासक से ज्यादा अच्छा है कि शासक थोड़ा भ्रष्ट हो, पर प्रभावी हो। ईमानदार और प्रभावी शासक तो आदर्श है और अभी तक तो मोदी सरकार भी कुछ ऐसा लग रही थी, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह आने वाले दिनों में अपनी शुचिता ऐसे ही बरकरार रख सकेगी?


महाभारत के अंतकाल की एक कहानी याद आ रही है। त्रेतायुग का अंत हो चुका था और कलयुग का प्रारम्भ नहीं हो पाया था। कारण ये था कि राजा परीक्षित बड़े ही सत्यवान और प्रतापी थे, जिसकी वजह से उनके राज में असत्य, अनाचार, अधर्म की कोई जगह ही नहीं थी। कलयुग को आने के लिए कोई स्थान ही नहीं मिल रहा था। तो एक दिन कलयुग ने एक ब्राह्मण का वेष बनाया और राजा के पास पहुंच गया। राजा ने पूछा तो उसने सारी बात बता दी। भला इतने न्यायप्रिय राजा इस बात को कैसे अनदेखा कर सकते थे? राजा का यह भी कर्त्तव्य था कि वह यह सुनिश्चित करें कि प्रकृति का नियम निर्विघ्न चलता रहे। सो राजा परीक्षित ने कलयुग से कहा कि जब तक उनका शासन है, तब तक कलयुग किसी भी तीन प्रकार की जगह में रह सकता है – सोने में, मदिरा में या वो स्थान, जहां वेश्यावृति हो। कलयुग को कोई ऐसा स्थान नहीं मिला, जहां मदिरा सेवन हो रहा हो और न ही कोई ऐसा स्थान मिला, जहां वेश्यावृत्ति हो रही हो। ऐसा था राजा परीक्षित का राज्य, सत्यधर्म पर आधारित। सो कलयुग को कोई और उपाय नहीं मिला और उसने राजा के स्वर्ण मुकुट में अपना स्थान बना लिया। अगले दिन राजा शिकार को गए और राह भटक गए। प्यास से पीड़ित उन्होंने एक साधु को तप में लीन देखा और उनसे पानी मांगा। साधू तो ध्यान में लीन थे, सो कोई जवाब नहीं दिया। राजा को क्रोध हुआ और उन्होंने में पास पड़े एक मृत सांप को तलवार से उठाकर साधु के गले में लपेट दिया और आगे चले गए। कुछ देर बार साधू का पुत्र आया और उसने अपने पिता के गले में लपेटा सर्प देखा तो गुस्से में शाप दे दिया कि जिसने ऐसा कर्म किया है, उसे सर्प राज तक्षक सात दिनों के अंदर मृत्युलोक पहुंचा देगा। शाप सत्य हुआ और राजा परीक्षित की मृत्यु हुई और कलयुग का प्रारब्ध हो गया। स्वर्ण और स्वर्ण मुकुट धन और सत्ता शक्ति का परिचायक है और इन दोनों का संयम कलयुगी शक्तियों को बढ़ावा देती हैं और उनको पोषती हैं। मुकुट सत्ता द्वारा दी गयी जिम्मेदारी का प्रतीक है। कलयुग में आएं, तो हम देखते हैं कि स्वतंत्रता के तुरंत बाद नेहरूजी की सरकार भी सत्ता और धनलोलुप मंत्रियों और

अधिकारियों की बेईमानी से नहीं बच पायी। उसके बाद तो सत्तर सालों तक सरकारों ने मुकुट और स्वर्ण (स्वर्ण मुकुट = सत्ता और धन) का उपयोग एक-दूसरे का हित साधने के लिए किया। सो मोदी सरकार ने मुकुट (सत्ता = जिम्मेदारी) तो धारण किया है, पर सवाल यह है कि अगले पांच साल भी क्या मुकुट पर स्वर्ण नहीं चढ़ेगा? मोदीजी आप तो संत हैं और राजर्षि राजा जनक की तरह आप कीचड़ में कमल की तरह हैं, पर क्या आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि भारत के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में कोई कमल अगले पांच सालों में मुरझायेगा नहीं और कोई मुकुट स्वर्ण मुकुट बन जाने की कोशिश नहीं करेगा?

मोदी जी, मैं आपकी सरकार द्वारा किये कुछ निर्णयों पर आपका ध्यान दिलाना चाहता हूं और आपको आगाह करना चाहता हूं कि ये निर्णय बहुत सारे मुकुटधारियों में स्वर्ण जटित मुकुट की लालसा पैदा कर देंगे। सबसे पहले मैं आपका ध्यान वित्त विधेयक 2018 की ओर दिलाना चाहता हूं, जिसमें आपकी सरकार ने विदेशी कंपनियों को राजनैतिक पार्टियों को फण्ड करने की छूट दे दी और इतना ही नहीं, उसको किसी भी आॅडिट या पूछताछ से अलग रखा। सोचिये कि विदेशी शैल कंपनियों को आपने क्या हथियार दे दिए हैं? दूसरा आपने भारत में इलेक्टोरल फण्ड को वैध कर दिया है और उसके डोनर को अज्ञात रखा है। मुझे ये अंदेशा हो रहा कि ये दोनों पालिसी आपको अगले पांच सालों में कहीं परेशानी न दें।
यह सोचिये कि एक NRI है और उसने कहीं विदेश में, सिंगापुर, आॅस्ट्रेलिया, अमेरिका या और कहीं, जैसे मॉरिशस में एक कंपनी खोली और 49% किसी विदेशी कंपनी या विदेशी व्यक्ति को दे दिया। यह कंपनी उस व्यक्ति के लिए ही खोली गयी, क्योंकि वो है एक आर्म्स डीलर। इस एनआरआई ने भारत में एक ब्रांच खोला और किसी राजनैतिक पार्टी को दान दिया। इस दान का कोई आॅडिट नहीं होगा तो फिर हमारे आर्म्स डीलर ने जाकर डील किया और किक बैक का पैसा इलेक्टोरल बांड में दे दिया। सभी कुछ गुमनाम और सभी कुछ कानूनी। इन पैसों का कोई आॅडिट नहीं और इलेक्टोरल बांड का कोई नाम नहीं। अब हो सकता है कि कुछ लोग शुरू में इसका इस्तेमाल करें पर कुछ ही दिनों में सब लोग इस विधा में माहिर हो जाएंगे। मोदीजी, आप देखेंगे कि कुछ ही दिनों में आपके हर मुकुट पर सोने की परत चढ़ जायेगी और जैसे कोयले के व्यापार में कालिख लग ही जाती है, वैसे ही आप भी इस स्वर्ण मुकुट के प्रभाव से अछूते नहीं रहेंगे। कोई न कोई आपके गले में सर्प फांस डाल ही जाएगा।

  • For Varnan Live.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.