DVC बोकारो थर्मल प्लांट के एक युग का हुआ विस्फोटक अंत

कुमार संजय
बोकारो थर्मल: एक युग का अंत हो गया! जिस डीवीसी (DVC) के बोकारो थर्मल पावर प्लांट ने 31 सालों तक झारखंड और देश के एक बड़े हिस्से को रोशन किया, वो अब सिर्फ इतिहास का हिस्सा बनकर रह गया है. शुक्रवार को इस प्लांट की 180 मीटर ऊंची विशालकाय चिमनी को ध्वस्त कर दिया गया, जिसके साथ ही यह 630 मेगावाट का पावर प्लांट पूरी तरह से धरती में समा गया. यह दृश्य इतना नाटकीय था कि देखने वालों की सांसें थम गईं.

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कैसे गिराई गई 180 मीटर की चिमनी?
बोकारो थर्मल के इस बी पावर प्लांट को स्क्रैप घोषित करने के बाद इसके डिस्मेंटलिंग का काम अंतिम चरण में था. हैदराबाद की कंपनी राधा स्मेल्टर्स, जिसे करीब 300 करोड़ रुपये का ठेका मिला था, प्लांट के ज्यादातर हिस्सों को काट चुकी थी, लेकिन चुनौती थी 180 मीटर ऊंची चिमनी को गिराने की. शुक्रवार को इस काम को अंजाम दिया गया. कंपनी के एक्सपर्ट्स की निगरानी में, चिमनी के निचले हिस्से को बड़ी ड्रिल मशीन से काटा जाने लगा, जबकि ऊपरी हिस्से पर केमिकल लगाया गया था.

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पलक झपकते ही भरभराकर गिरी चिमनी!
सुबह करीब 10 बजे, जब चिमनी को काटने का काम चल रहा था, अचानक उसका ऊपरी आधा हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा. यह नजारा इतना भयानक था कि ऑपरेटर और वहां मौजूद कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए भागे. मौके पर मौजूद लोगों ने इस ऐतिहासिक पल को अपने मोबाइल में कैद किया. दोपहर बाद, बची हुई आधी चिमनी को फिर से काटने का काम शुरू हुआ और शाम 5 बजे यह पूरी तरह से ध्वस्त हो गई.

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31 साल का सफर, आखिर क्यों हुआ बंद?
इस प्लांट की शुरुआत मार्च 1986 में हुई थी, जब इसका एक नंबर यूनिट चालू हुआ. इसके बाद नवंबर 1990 में दो नंबर और अगस्त 1993 में तीन नंबर यूनिट भी शुरू हो गया. इन तीनों यूनिटों ने 31 साल तक लगातार बिजली का उत्पादन किया. लेकिन, पर्यावरण मानकों पर खरा न उतरने और अत्यधिक कोयले की खपत के कारण केंद्र सरकार ने इसे बंद करने का निर्देश दिया. डीवीसी की बोर्ड बैठक में लिए गए फैसले के बाद, 30 जुलाई 2017 को यूनिट 1 और 2 को और 1 अप्रैल 2021 को यूनिट 3 को रिटायर कर दिया गया था.

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इतिहास बन चुका है यह पावर प्लांट
दो साल से ज्यादा समय तक बंद रहने के बाद, इसे स्क्रैप घोषित कर दिया गया और अब इसकी चिमनी भी गिरा दी गई है. जल्द ही प्लांट की बाकी एक और तीन नंबर चिमनियों को भी ध्वस्त किया जाएगा, जिसके बाद यह प्लांट सिर्फ तस्वीरों और लोगों की यादों में ही जिंदा रहेगा.

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