इन्फिनिटी ग्रुप ने किया ऐतिहासिक कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक स्थल पर पर्यावरण संरक्षण का शंखनाद; मंत्री और ग्रैमी विजेता कलाकारों ने दिया साथ

विशेष संवाददाता
मथुरा।
आस्था और पर्यावरण संरक्षण का एक अभूतपूर्व संगम आज वृंदावन धाम में देखने को मिला, जिसने ब्रज क्षेत्र में आध्यात्मिक व पारिस्थितिक पुनरुद्धार के एक नए युग का सूत्रपात किया है। यह पहल ब्रज की हज़ारों वर्ष पुरानी ‘वन’ परंपरा को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। अपने निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) की पहल के तहत इन्फिनिटी ग्रुप की कृष्णा भूमि आर्केड ने उत्तर प्रदेश के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और ब्रज तीर्थ विकास परिषद (बीटीवीपी) के सहयोग से श्री बिहार पंचमी पंचवटी महोत्सव 2025 के अवसर पर एक विशाल रोपण अभियान का प्रारंभ किया है। इस अभियान के तहत, ऐतिहासिक कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक स्थल पर 140 एकड़ के अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में 108 पंचवटी क्लस्टर (कुल 540 पवित्र वृक्ष) का रोपण शुरू किया गया। यह रोपण क्षेत्र परिक्रमा मार्ग और यमुना तट के बीच स्थित है—जो वृंदावन का सबसे आध्यात्मिक रूप से सघन और पर्यावरणीय रूप से कमजोर कॉरिडोर है।

वृंदावन की पारिस्थितिक आत्मा की रक्षा की प्रतिज्ञा
इन्फिनिटी ग्रुप की यह पहल ‘सेवा परमोधर्मः’ की मूल भावना पर आधारित है। कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रविंद्र चमरिया ने इसे केवल सीएसआर प्रयास मानने से इनकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया, “ब्रज केवल आध्यात्मिक महत्व का क्षेत्र नहीं, यह हजारों वर्षों की सांस्कृतिक स्मृति समेटे एक पारिस्थितिक धरोहर है। पंचवटी रोपण केवल सीएसआर प्रयास नहीं, यह इस धाम की पारिस्थितिक आत्मा की रक्षा की प्रतिज्ञा है। हम मानते हैं कि विकास हमेशा भूमि, विरासत और दिव्यता का सम्मान करते हुए होना चाहिए। यह 140 एकड़ हरित पुनर्स्थापन, शास्त्रों में वर्णित वृंदावन को पुनर्जीवित करने का हमारा प्रयास है।” इस कार्यक्रम में रोपे गए 108 पंचवटी (पीपल, बरगद, गुलर, देसी आम और पाकड़—ये पांच पवित्र पौधे) के समूहों को 108 प्रतिष्ठित महंतों और संतों की दिव्य उपस्थिति में रोपा गया, जिसके साथ ही समुदाय ने तुलसी पौधारोपण में भी भाग लिया।

6 करोड़ तीर्थयात्रियों को शीतल छाया देने की मुहिम
वृंदावन जिस तेज़ी से वैश्विक आध्यात्मिक गंतव्य बन रहा है, उसे देखते हुए पर्यावरण की सुरक्षा और तीर्थयात्री प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। कृष्णा भूमि आर्केड के सीएमओ रवि शंकर ने भविष्य की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आने वाले पांच वर्षों में तीर्थयात्रियों की संख्या 2.45 करोड़ से बढ़कर लगभग 6 करोड़ होने की संभावना है। 30,000 करोड़ रुपए से अधिक के विकास और जेवर एयरपोर्ट से वैश्विक कनेक्टिविटी मिलने के साथ, वृंदावन तेज़ी से विश्व के प्रमुख आध्यात्मिक नगरों में उभर रहा है। ऐसी स्थिति में पर्यावरण की रक्षा, समुदाय का सहयोग, तीर्थयात्रियों के अनुभव का संवर्धन और वृंदावन की पावनता का संरक्षण, सतत हरित बफर क्षेत्रों के बिना संभव नहीं। उन्होंने आगे कहा कि कृष्णा भूमि आर्केड, भारत का पहला धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रोडक्ट मॉल, उनके ‘सेवा’ के मूल दर्शन का विस्तार है, जहाँ स्थानीय व्यवसायों को वैश्विक मंच मिलेगा और तीर्थयात्री मानकीकृत खरीदारी अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

रोपण का ‘बहुआयामी’ लक्ष्य: एक आत्मनिर्भर पारिस्थितिक तंत्र
यह 140 एकड़ का रोपण केवल हरित आवरण बढ़ाना नहीं है, बल्कि इन्फिनिटी ग्रुप ब्रज क्षेत्र के लिए एक आत्मनिर्भर पारिस्थितिक अर्थव्यवस्था विकसित कर रहा है। इसके अंतर्गत फलदार वृक्षों का रोपण किया जा रहा है, जिनकी उपज श्री कृष्ण गौशाला का सहयोग करेगी। पुष्पीय पौधारोपण किया जा रहा है, जिनके फूल प्रतिदिन वृंदावन के आश्रमों और मंदिरों में अर्पित होंगे। इसके अलावा, यमुना तट की प्राकृतिक संरचना को मजबूत करने, ताप-नियंत्रण क्षेत्रों को विकसित करने, मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारने, जैव विविधता को पुनर्स्थापित करने और प्रदूषण अवशोषण बढ़ाने हेतु देशज प्रजातियों का बड़े पैमाने पर रोपण किया जा रहा है। इन सभी प्रयासों का लक्ष्य वृंदावन धाम के लिए एक स्थायी पारिस्थितिक अर्थव्यवस्था स्थापित करना है।

मंत्री और ग्रैमी विजेताओं की रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने किया। उन्होंने ज़ोर दिया, “जन्माष्टमी और होली जैसे प्रमुख उत्सवों में एक ही दिन में इस कॉरिडोर से 5 लाख तक तीर्थयात्री गुजरते हैं। ऐसे में पर्यावरणीय स्वास्थ्य और सुरक्षित आवागमन के लिए मजबूत हरित क्षेत्रों की अत्यंत आवश्यकता है। यमुना तटवर्ती क्षेत्र में बार-बार बाढ़ और लगातार गतिविधियों के कारण पर्यावरणीय दबाव बढ़ा है, और यह पुनर्स्थापन इसी महत्वपूर्ण आवश्यकता को पूरा करता है।”

कार्यक्रम में विश्व प्रसिद्ध कला जगत की हस्तियां भी उपस्थित रहीं, जिनमें पद्म भूषण एवं ग्रैमी पुरस्कार विजेता पंडित विश्व मोहन भट्ट (मोहन वीणा के जनक), तनत्री सम्राट पंडित सलील भट्ट (सतविक वीणा के जनक) और तीन बार के ग्रैमी नामांकित प्रसिद्ध वादक पंडित अजय प्रसन्ना शामिल थे।

गौरतलब है कि पिछले दो वर्षों से कृष्णा भूमि उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और नगर निगम के साथ त्रिपक्षीय समझौते के तहत कुंभ-पूर्व वैष्णव बैठक भूमि का पुनरुद्धार कर रही है, जो पिछली मानसून की बाढ़ और जलभराव में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी। पंचवटी महोत्सव 2025 इस बहुवर्षीय बहाली को गति देता है।

इस पहल ने वृंदावन के प्राचीन ‘वन’ स्वरूप को पुनर्जीवित करने और तेज़ी से बढ़ती तीर्थयात्री अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं का समर्थन करने का संकल्प लिया है, जो इसे ब्रज क्षेत्र के इतिहास के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण आध्यात्मिक व पारिस्थितिक प्रयासों में से एक बनाता है।

  • Varnan Live Report.

Leave a Reply

Trending