एनसीसी गणतंत्र दिवस कैंप में दिखा शौर्य और संकल्प का संगम
ब्यूरो संवाददाता
नई दिल्ली : दिल्ली कैंट के ऐतिहासिक प्रांगण में आज अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और युवा शक्ति का एक ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिला, जिसने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। अवसर था थल सेना प्रमुख (सीओएएस) जनरल उपेंद्र द्विवेदी के नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) गणतंत्र दिवस कैंप (आरडीसी) 2026 के दौरे का। इस दौरान पूरा कैंप ‘भारत माता की जय’ के नारों और कैडेटों की कदमताल से गूंज उठा। उपराष्ट्रपति श्री सी पी राधाकृष्णन के विजन को उद्धृत करते हुए सेना प्रमुख ने कैडेटों को संबोधित करते हुए उन्हें “नए भारत का चेहरा” करार दिया। उन्होंने बेहद प्रभावशाली अंदाज में कहा कि ये युवा देश की सबसे शक्तिशाली आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो अपने अटूट अनुशासन, स्पष्ट उद्देश्य और दृढ़ संकल्प के बल पर राष्ट्रीय परिवर्तन लाने की पूरी क्षमता रखते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर: जब कैडेट्स ने रचा इतिहास
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल के वर्षों में एनसीसी कैडेटों द्वारा राष्ट्र निर्माण में दिए गए असाधारण योगदानों को रेखांकित करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने इसे भारत की सशक्तता का एक जीवंत प्रमाण बताया और जानकारी दी कि कैसे इस ऑपरेशन के दौरान 75,000 से अधिक जांबाज एनसीसी कैडेटों ने पूरे देश में सिविल डिफेंस, हॉस्पिटल मैनेजमेंट, राहत सामग्री वितरण और सामुदायिक सेवा के क्षेत्र में निस्वार्थ स्वयंसेवक की भूमिका निभाकर मानवता की सेवा की। आधुनिक भारत की जरूरतों को देखते हुए उन्होंने कैडेटों के प्रशिक्षण में शामिल की गई ड्रोन ट्रेनिंग जैसी क्रांतिकारी शुरुआत की जमकर सराहना की। सेना प्रमुख ने पुनीत सागर अभियान, एक भारत श्रेष्ठ भारत, ‘एक पेड़ मां के नाम’, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और स्वच्छ भारत अभियान जैसी राष्ट्रीय पहलों में कैडेटों की सक्रिय भागीदारी को देश के लिए प्रेरणादायक बताया।
आधुनिक ट्रेनिंग और तकनीक पर जोर
युवाओं के कौशल विकास पर जोर देते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि युवा आपदा मित्र योजना के तहत 28 राज्यों के 315 जिलों में 94,400 कैडेटों को आपदा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित किया जाना एक बड़ी उपलब्धि है। इतना ही नहीं, 35,000 से अधिक कैडेटों ने देश भर में सैन्य इकाइयों और सैनिक अस्पतालों के साथ अटैचमेंट ट्रेनिंग प्राप्त कर सेना की कार्यप्रणाली को करीब से समझा है।
सेना में भर्ती का सुनहरा द्वार है NCC
अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने गर्व के साथ साझा किया कि एनसीसी आज भी भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने का सबसे महत्वपूर्ण और विश्वसनीय मार्ग बना हुआ है, जिसका प्रमाण यह है कि इस साल 150 से अधिक कैडेटों ने सैन्य प्रशिक्षण अकादमियों में प्रवेश पाकर गौरव हासिल किया है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे सोच, प्रौद्योगिकी और चरित्र में पूरी तरह ‘आत्मनिर्भर’ बनें और आईआईटी में आर्मी सेल तथा इंडियन आर्मी इंटर्नशिप प्रोग्राम 2025-26 जैसी आधुनिक पहलों के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा और इनोवेशन का हिस्सा बनें।
विविधता का अद्भुत संगम: मिनी इंडिया की झलक
कार्यक्रम के दौरान सेना प्रमुख कैडेटों के अनुकरणीय आचरण और शानदार परेड देख मंत्रमुग्ध नजर आए। उन्होंने गार्ड ऑफ ऑनर के प्रदर्शन और द सिंधिया स्कूल, ग्वालियर के बैंड की मधुर धुनों की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कैडेटों द्वारा तैयार किए गए ‘फ्लैग एरिया’ का भ्रमण किया, जहाँ भारत की विविधता में एकता और विभिन्न राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को जीवंत किया गया था। एनसीसी ‘हॉल ऑफ फेम’ के दौरे के साथ-साथ उन्होंने कैडेटों द्वारा बनाए गए स्टैटिक और फंक्शनल शिप मॉडल और एयरोमॉडलिंग के माध्यम से उनकी रचनात्मकता और तकनीकी सूझबूझ को भी सराहा। अंत में, कैडेटों में नई ऊर्जा फूंकते हुए जनरल द्विवेदी ने उनसे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने, अनुशासन के साथ मार्च करने और पूर्ण समर्पण के साथ मां भारती की सेवा करने का आग्रह किया, ताकि एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का सपना साकार हो सके।
- Varnan Live Report




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