Varnan #Exclusive… सवालों के कटघरे में सीएमडी अमरेंदु प्रकाश का ‘Forced Resignation’

जब पीएम मोदी के ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ के मिशन को अपनों ने ही बनाया निशाना

विजय कुमार झा
नई दिल्ली/बोकारो :
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से हुंकार भरी थी- ‘‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा।’’ भ्रष्टाचार के खिलाफ इस महायज्ञ में स्टील अथॉरिटी आॅफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के अध्यक्ष सह- प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अमरेंदु प्रकाश एक ‘सच्चे सारथी’ बनकर उभरे थे। लेकिन, आज सेल के गलियारों में सन्नाटा है और हवाओं में एक ही सवाल तैर रहा है- क्या इस तंत्र में ईमानदारी की कीमत अब शहादत से चुकानी होगी? अपनी 31 साल की बेदाग सेवा और रिटायरमेंट से चार साल पहले ही अमरेंदु प्रकाश का इस्तीफा देना केवल एक पद का खाली होना नहीं है, बल्कि यह भ्रष्टाचार के उस ‘सिंडिकेट’ की जीत होगी, जिसने राष्ट्रसेवा के लिए अपना घर-संसार तक त्याग देने वाले एक कर्मयोगी को सिस्टम से बाहर कर दिया।

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जो कोई न कर सका, वो कर दिखाए अमरेंदु

आंकड़ों की जुबानी कहें तो अमरेंदु प्रकाश ने सेल को वहां पहुंचाया, जहां पहुंचने का सपना पिछली कई पीढ़ियों ने देखा था। उनके नेतृत्व में चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में सेल ने 1.11 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक नकद संग्रह किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 फीसदी अधिक है। यही नहीं, 18.24 मिलियन टन इस्पात की बिक्री का वह रिकॉर्ड कायम किया, जिसने सेल को दुनिया के स्टील मानचित्र पर मजबूती से खड़ा कर दिया। जब कप्तान अपनी टीम को जीत की दहलीज पर ले जा रहा हो, तब उसे जबरन ‘रिटायरमेंट’ की ओर धकेलना यह बताता है कि पर्दे के पीछे कोई बहुत बड़ा ‘खेल’ चल रहा है।

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₹1 लाख करोड़ के विस्तारीकरण का ‘कमीशन’ चक्रव्यूह

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस इस्तीफे के पीछे की असली वजह सेल की विस्तारीकरण योजनाएं हैं। प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के सपने को पंख देने के लिए सेल 1 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, जिसमें अकेले बोकारो संयंत्र में 20,000 करोड़ का निवेश होना है। चर्चा आम है कि इन अरबों के कामों में कई उच्च पदस्थ अधिकारियों को मोटे ‘चढ़ावे’ और ‘कमीशन’ की आस थी। लेकिन, अटल बिहारी वाजपेयी को अपना आदर्श मानने वाले और बीआईटी सिंदरी से निकले इस टेक्नोक्रेट ने सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय कुर्सी छोड़ना बेहतर समझा। उन्होंने न खाने की कसम ली थी और न ही किसी को खाने दिया और शायद यही उनकी सबसे बड़ी ‘खता’ बन गई। एक निष्पक्ष और सख्त टेक्नोक्रेट के रूप में अमरेंदु प्रकाश शायद इस व्यवस्था के लिए फिट नहीं बैठ रहे थे। क्या इसी ‘अड़ियल’ ईमानदारी की कीमत उन्हें चार साल पहले इस्तीफा देकर चुकानी पड़ी? यदि ऐसा है, तो यह न केवल सेल, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण अध्याय है। अमरेंदु प्रकाश 31 मार्च, 2026 को सेल के सीएमडी पद से विदा हो जाएंगे। नए सीएमडी पद पर नियुक्ति के लिए वैकेंसी निकल चुकी है, लेकिन नई नियुक्ति होने में कुछ महीने का समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में तत्काल सेल का प्रभार मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव संभाल सकते हैं, लेकिन अमरेंदु प्रकाश का रिक्त स्थान भरना नामुमकिन नजर आता है।

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सादगी की मिसाल, राष्ट्र को समर्पित कर दिया जीवन

अमरेंदु प्रकाश कोई साधारण अधिकारी नहीं थे। उन्होंने राष्ट्र सेवा को इतना सर्वोपरि रखा कि अपना घर तक नहीं बसाया। एक युवा इंजीनियर के रूप में बोकारो से अपना करियर शुरू करने वाले श्री प्रकाश ने शॉप फ्लोर की बारीकियों से लेकर बोर्ड रूम की रणनीतियों तक अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। 1991 में एक ट्रेनी के रूप में सेल में कदम रखने वाले इस शख्स ने बोकारो को न केवल सजाया, बल्कि वहां पहली बार चेकर्ड प्लेट्स का उत्पादन शुरू कराकर झारखंड को औद्योगिक गौरव दिलाया। अमरेंदु प्रकाश का सेल के साथ रिश्ता केवल एक पद का नहीं, बल्कि जज्बात और मिट्टी का रहा है। वर्ष 2020 में जब उन्होंने बोकारो के निदेशक प्रभारी (डीआई) की कमान संभाली, तो वह कोरोना का भीषण दौर था। उन्होंने न केवल उत्पादन के रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) को आधुनिक बनाकर हजारों लोगों की जान बचाई। झारखंड के बोकारो प्लांट में पहली बार चेकर्ड प्लेट्स का सफल उत्पादन शुरू करना उनकी तकनीकी दूरदर्शिता का सबसे ताजा प्रमाण है। शहरी सौंदर्यीकरण में भी उनकी भूमिका अद्वितीय रही है। उन्होंने बोकारो को देश के सर्वोच्च पांच शहरों में शुमार कराने की योजना पर काम शुरू किया, जिसे मौजूदा निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन यकीनन गति देने में लगे हैं, परंतु उनके साथ ऐसी कथित ‘जबरदस्ती’ इस्पात जगत के गलियारे में चर्चा और अचरज का विषय बनी है। श्री प्रकाश के कार्यकाल में कंपनी ने फरवरी महीने में ही 1,000 करोड़ रुपये का कर्ज कम किया और इन्वेंट्री में भारी कटौती की। इसी वित्तीय अनुशासन का नतीजा था कि कंपनी के शेयर 155 रुपये के पार पहुंच गए। लेकिन अफसोस, जो अधिकारी कंपनी के शेयर बढ़ा रहा था, वह उन लोगों की आंखों की किरकिरी बन गया, जिनकी नजर कंपनी की तिजोरी पर थी।

31 को निकलेगी ‘नैतिकता की अर्थी’

अमरेंदु प्रकाश का जाना एक डरावना संकेत है। यह बताता है कि यदि आप ईमानदार हैं, यदि आप रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा दे रहे हैं, और यदि आप प्रधानमंत्री के भ्रष्टाचार विरोधी मिशन के सच्चे सिपाही हैं, तो आप इस ‘सिस्टम’ के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। यह इस्तीफा केवल अमरेंदु प्रकाश की हार नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं के सपनों की हार है, जो ईमानदारी के दम पर सर्वोच्च पदों पर बैठने की चाहत रखते हैं। क्या 1.11 लाख करोड़ का नकद संग्रह करने वाले को इसलिए विदा किया गया, ताकि 1 लाख करोड़ के विस्तारीकरण में ‘कमीशन की बंदरबांट’ आसानी से हो सके? कुल मिलाकर, झारखंड की माटी और सेल के कारखानों में पसीना बहाने वाले मजदूर आज पूछ रहे हैं – अमरेंदु तो बेदाग निकले, पर उन्हें दागदार बनाने वाली ताकतों का हिसाब कौन करेगा? 31 मार्च को जब वह औपचारिक रूप से विदा होंगे, तो वह अपने साथ केवल अपनी फाइलें नहीं ले जाएंगे, बल्कि अपने साथ उस नैतिकता की अर्थी भी ले जाएंगे, जिसे उन्होंने 31 सालों तक सींचकर बड़ा किया था।

  • Varnan Live Report.

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