मौत की सुरंगें बनीं कारो स्पेशल फेज-2 प्रोजेक्ट की बंद पड़ी खदानें
संवाददाता
बोकारो थर्मल: क्या सीसीएल (CCL) के बोकारो-करगली प्रक्षेत्र में कानून का खौफ खत्म हो चुका है? क्या कोयला माफिया अब इतने बेखौफ हो गए हैं कि उन्हें खासमहल परियोजना पदाधिकारी (PO) के आवास की दूरी से भी कोई फर्क नहीं पड़ता? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि कारो स्पेशल फेज-2 प्रोजेक्ट की बंद पड़ी खदानें अब मौत के सुरंगों में तब्दील हो चुकी हैं। आधा दर्जन से ज्यादा अवैध खदानें धड़ल्ले से चल रही हैं और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से एक मुख्य माइंस पीओ आवास से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

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मौत की सुरंग में बाइक का सफर: खौफनाक है मंजर
यहाँ ‘मौत का खेल’ किस कदर हावी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कारोबारी अपनी बाइक लेकर खदान के गहरे और जानलेवा अंधेरों तक बेझिझक चले जाते हैं। बोरियों में कोयला लादकर बाहर निकलने का यह सिलसिला दिन-रात जारी है। जिस तरह से जमीन के अंदर चाल काटकर कोयला निकाला जा रहा है, वह किसी भी वक्त बड़ी दुर्घटना या चाल धंसने का कारण बन सकता है। स्थानीय लोगों की मानें तो यहाँ किसी भी समय दर्जनों लोग मलबे में दफन हो सकते हैं, लेकिन सुरक्षा के दावों की हवा निकल चुकी है।
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अधिकारियों के दावों की खुली पोल… सिर्फ कागजों पर हुई ‘डोजरिंग’
बीते 7 मार्च को सीआईएसएफ और पुलिस ने छापेमारी कर एक हजार बोरा कोयला जब्त किया था। उस वक्त सीसीएल के एरिया सुरक्षा पदाधिकारी डी. मांझी ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि इन माइंस को जेसीबी से भर दिया जाएगा। लेकिन हकीकत दावों से कोसों दूर है। सुरक्षा अधिकारियों ने माइंस को उसी खतरनाक स्थिति में खुला छोड़ दिया, जिसका फायदा उठाकर माफियाओं ने फिर से अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया है।
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प्रबंधन और खनन विभाग के बीच ‘लेटर-वार’, माफियाओं की मौज!
इस पूरे मामले में सरकारी महकमों की टालमटोल वाली नीति साफ दिख रही है। जिला खनन निरीक्षक सीताराम टुडू का कहना है कि जिम्मेदारी सीसीएल की है, जबकि सीसीएल प्रशासन कागजी औपचारिकताओं में उलझा है। विभाग और प्रबंधन के बीच जारी इस ‘लेटर-वार’ ने माफियाओं को खुली छूट दे दी है। जब तक इन सुरंगों को स्थाई रूप से डोजरिंग कर सील नहीं किया जाता, तब तक पुलिसिया छापेमारी महज एक रस्म बनकर रह जाएगी।
- Varnan Live Report.




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