Gamechanger… दुनिया देखेगी बीएसएल का ‘क्लीन इस्पात’ अवतार, भारतीय इस्पात उद्योग में मील का पत्थर

Bokaro : भारतीय इस्पात उद्योग के इतिहास में मंगलवार का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। सस्टेनेबल स्टील उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाते हुए सेल (SAIL) के बोकारो स्टील प्लांट (BSL) ने फोर्ब्स मार्शल प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक ऐतिहासिक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत अब बोकारो की ब्लास्ट फर्नेस संख्या-1 में हाइड्रोजन गैस इंजेक्शन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह कदम न केवल भारत बल्कि वैश्विक इस्पात उद्योग के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाला है।

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पारंपरिक ईंधन की जगह लेगा स्वच्छ हाइड्रोजन
इस महत्वपूर्ण समझौते के दौरान बीएसएल के निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि लोहा बनाने की प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम करने के लिए यह एक परिवर्तनकारी तकनीकी यात्रा है। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य पारंपरिक कार्बन आधारित ईंधनों (जैसे कोकेबल कोल) के स्थान पर आंशिक रूप से हाइड्रोजन का उपयोग करना है। हाइड्रोजन एक अत्यंत स्वच्छ और प्रभावी अपचायक के रूप में कार्य करता है, जिससे चिमनियों से निकलने वाला जहरीला धुआं काफी हद तक कम हो जाएगा।

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विश्वपटल पर भारत की सबसे बड़ी ‘ग्रीन’ पहल
बोकारो स्टील की इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता इसका अभूतपूर्व पैमाना है। प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस में प्रस्तावित हाइड्रोजन इंजेक्शन की मात्रा वैश्विक स्तर पर अब तक के सबसे बड़े प्रयासों में से एक है। यह इसे पूरी दुनिया के इस्पात उद्योग में अपनी तरह की पहली और सबसे बड़ी तकनीकी छलांग बनाती है। इस सफलता से सेल और बोकारो स्टील प्लांट को ‘ग्रीन स्टील’ नवाचार के वैश्विक मानचित्र पर सर्वोच्च स्थान प्राप्त होगा।

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अंतरराष्ट्रीय सहयोग से तैयार होगा भविष्य का इस्पात
परियोजना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सेल का अनुसंधान एवं विकास केंद्र (RDCIS) इसमें मुख्य परामर्शदाता की भूमिका निभा रहा है। वहीं, प्राइमेटल्स टेक्नोलॉजीज (यूके) द्वारा विशेष अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। प्लांट अधिकारियों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के सफल होने से न केवल कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, बल्कि यह भारी उद्योगों के लिए पर्यावरण के अनुकूल नए वैश्विक मानक भी स्थापित करेगा। अब बोकारो का इस्पात न केवल मजबूती, बल्कि अपनी शुद्धता और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी के लिए भी दुनिया भर में पहचाना जाएगा।

  • Varnan Live Report.

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