रांची/बोकारो: “क्या यही है पुलिस की कार्यशैली? एक पीड़ित परिवार के सदस्य को हिरासत में लेकर इस कदर क्यों पीटा गया?” ये तल्ख और तीखे सवाल झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के डीजीपी से पूछे हैं। मामला बोकारो की एक 18 वर्षीय लापता युवती (हेवियस कॉर्पस याचिका) से जुड़ा है, जिसमें पुलिस की संवेदनहीनता और बर्बरता को देखकर अदालत का पारा चढ़ गया।
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मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने पुलिसिया कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। प्रार्थी के अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की और शांतनु गुप्ता ने अदालत को बताया कि लापता युवती के चाचा को पिंडराजोड़ा थाना बुलाकर पुलिस ने बेरहमी से पीटा। पिटाई इतनी भयानक थी कि उनके सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं और वे वर्तमान में रांची के एक निजी क्लिनिक में जिंदगी और दर्द से जूझ रहे हैं।
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कोर्ट के सख्त निर्देश पर मंगलवार दोपहर 3:30 बजे वर्चुअल रूप से उपस्थित हुई डीजीपी को खंडपीठ की भारी नाराजगी का सामना करना पड़ा। अदालत ने दो टूक शब्दों में पूछा कि इस मामले में बोकारो एसपी के खिलाफ ‘अपराधिक अवमानना’ (Criminal Contempt) की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए? हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि भविष्य में प्रार्थी या उसके किसी भी रिश्तेदार को पुलिस द्वारा दोबारा प्रताड़ित किया गया, तो इसकी सीधी जवाबदेही और गाज बोकारो एसपी पर गिरेगी।
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अगली सुनवाई 9 अप्रैल को
हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर डीजीपी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को निर्धारित की गई है, जिसमें डीजीपी को पुनः उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है। अदालत के इस कड़े रुख ने पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। अब देखना यह है कि लापता युवती की बरामदगी के बजाय परिजनों पर डंडे बरसाने वाली पुलिस पर शासन क्या कार्रवाई करता है।
- Varnan Live Report.




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