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  • DC के महाअभियान को अफसरों ने दिखाया ठेंगा, SIR कैंप के पहले ही दिन कई जगह सन्नाटा, BLOs को बाहर निकाल बूथों पर जड़ा ताला

    DC के महाअभियान को अफसरों ने दिखाया ठेंगा, SIR कैंप के पहले ही दिन कई जगह सन्नाटा, BLOs को बाहर निकाल बूथों पर जड़ा ताला

    Ground Zero Report… जिस स्कूल में हैं कई बूथ वहां ताला मार फरार हुए हेडमास्टर, बारिश में बाहर भीगते रहे बीएलओ

    कई बूथों पर बीएलओ आए ही नहीं, निराश लौट गए मतदाता

    संवाददाता
    बोकारो।
    भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशानुसार वर्तमान में मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य भर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में बोकारो के जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा ने एक कड़ा प्रशासनिक आदेश जारी किया था कि जिले के सभी मतदान केंद्रों पर 13 जून (शनिवार) एवं 14 जून (रविवार) को दो दिवसीय विशेष कैंप का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रहित के इस अत्यंत महत्वपूर्ण अभियान के दौरान संबंधित सभी बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को दोपहर 12 बजे से शाम 04 बजे तक अपने-अपने निर्धारित मतदान केंद्रों पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का सख्त आदेश दिया गया था।

    साथ ही, जिले के तमाम अनमैप्ड मतदाताओं से पुरजोर अपील की गई थी कि वे आवश्यक पहचान संबंधी विधिक दस्तावेजों के साथ अपने निकटतम मतदान केंद्र पर समय से पहुंचकर इस विशेष मैपिंग प्रक्रिया में भाग लें और अपनी नागरिक जिम्मेदारी को निभाएं। लेकिन, जमीनी हकीकत पर शनिवार को पहले ही दिन जिला निर्वाचन पदाधिकारी के इन कड़े आदेशों की धज्जियां उड़ती दिखाई दीं, जहां जिले के कई वीआईपी मतदान केंद्रों पर निर्धारित समय पर ज्यादातर बीएलओ उपस्थित ही नहीं हुए, लिहाजा दूर-दराज से आए अनमैप्ड मतदाताओं को भारी निराशा के साथ अपने घरों को वापस लौट जाना पड़ा।

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    इस पूरी शिथिलता की जमीनी सच्चाई परखने के लिए जब इस संवाददाता ने बोकारो इस्पात नगर के सेक्टर-3 बी स्थित मध्य विद्यालय और सेक्टर-4 के विभिन्न संवेदनशील मतदान केंद्रों का दौरा किया, तो नजारा बेहद चौंकाने वाला था। इस दौरान बूथ संख्या 290 पर सन्नाटा पसरा मिला और वहां निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी कोई बीएलओ नहीं पहुंचा था। जब वहां तैनात रहे पुराने बीएलओ मोती लाल से इस संवाददाता ने दूरभाष पर सीधे बात की, तो उन्होंने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा ऐन वक्त पर यानी महज एक दिन पहले ही उन्हें इस महत्वपूर्ण कार्य से अचानक हटा दिया गया है और उनकी जगह आनन-फानन में संगीता नामक किसी एक नए बीएलओ को नामित किया गया है।


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    बोले संबंधित निर्वाचन कर्मी – संभवतः ट्रेनिंग में होंगे बीएलओ

    विधिक प्रक्रिया की इस भारी लापरवाही के संबंध में जब जिला निर्वाचन कार्यालय में पदस्थापित शिव कुमार नामक कर्मचारी से संपर्क साधा गया, तो उन्होंने बहुत ही गैर-जिम्मेदाराना ढंग से स्वीकार किया कि एक दिन पहले बीएलओ सूची को बदला गया है। सही ढंग से काम नहीं करने के कारण बूथ संख्या 286, 289 और 290 के बीएलओ को हटा दिया गया है। उनकी जगह नए टीचर को ट्रेनिंग देकर तैयार किया जा रहा है। संभवतः वे ट्रेनिंग में होंगे। रविवार को कैम्प के दूसरे दिन वे सभी जरूर उपस्थित रहेंगे। अब सवाल यह उठता है कि अगर शनिवार का दिन प्रशासनिक फेरबदल की भेंट चढ़ गया, तो उन मतदाताओं के समय और राष्ट्रीय अभियान को हुए नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा? ऐसे में रविवार को बूथों पर मतदाताओं की अचानक भारी भीड़ उमड़ने और अव्यवस्था बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।


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    सेक्टर-3 में बीएलओ को बाहर निकाल जड़ दिया ताला

    इसी बदइंतजामी के बीच शनिवार दोपहर एक ऐसा दुस्साहसिक और शर्मनाक घटनाक्रम सामने आया, जिसने शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के आपसी तालमेल की कलई खोलकर रख दी। दोपहर करीब डेढ़ बजे सेक्टर-3 बी स्थित मध्य विद्यालय (पूर्व का इग्नू स्टडी सेंटर) के वर्तमान शिक्षक व प्रधानाध्यापक (हेडमास्टर) ने अपनी कथित तानाशाही का परिचय देते हुए मतदान केंद्र संख्या 292 पर मुस्तैदी से तैनात एक महिला एवं एक पुरुष को विद्यालय परिसर से निकाल दिया और मेन गेट पर ताला जड़कर खुद निकल गए। हद तो तब हो गई, जब इसी बीच अचानक तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश होने लगी और बूथ संख्या 292 के दोनों कर्तव्यनिष्ठ बीएलओ गेट के बाहर भींगते रहे।

    इस गंभीर घटनाक्रम के संबंध में जब इस संवाददाता ने जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त अजय नाथ झा को दूरभाष के माध्यम से पूरी वस्तुस्थिति और साक्ष्यों की जानकारी दी, तो उन्होंने मामले को संज्ञान में लेते हुए तीखा रुख अख्तियार किया। उपायुक्त ने बेहद कड़े लहजे में कहा कि राष्ट्रहित के इस अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इस विधिक कार्य में बाधा पहुंचाने व बदइंतजामी करने वाले संबंधित सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों और स्कूल प्रबंधन से आज ही स्पष्टीकरण (शो-कॉज) पूछते हुए कठोर दंडात्मक व विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

    निर्वाचन कार्य में अनुपस्थिति पर डीसी नाराज, अब वाट्सएप पर डालनी होगी सेल्फी

    एसआईआर अभियान के तहत शनिवार को जिले के सभी मतदान केंद्रों पर आयोजित विशेष शिविरों में कुछ स्थानों पर बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) अनुपस्थित पाए गए। इस लापरवाही को जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा ने अत्यंत गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त ने स्पष्ट चेतावनी दी कि शासकीय निर्वाचन कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बीएलओ अनुपस्थिति पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उपायुक्त ने सभी एईआरओ सह बीडीओ को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के मतदान केंद्रों पर प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को दोपहर 12:00 बजे से अपराह्न 04:00 बजे तक बीएलओ की शत-प्रतिशत अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित कराएं और स्वयं क्षेत्र भ्रमण कर इसकी नियमित मॉनिटरिंग करें। इसके साथ ही, मनमानी रोकने और उपस्थिति की प्रभावी निगरानी के लिए सभी बीएलओ को मतदान केंद्र पर पहुंचते ही अपनी लाइव सेल्फी संबंधित एईआरओ के व्हाट्सएप ग्रुप में अनिवार्य रूप से साझा करने का आदेश दिया गया है। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि मतदान केंद्रों वाले सभी विद्यालय शिविर के दौरान खुले रहेंगे और लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर सीधी गाज गिरेगी।

    • Varnan Live Report.

  • DPS बोकारो के पूर्व छात्र नीलकंठ मिश्रा बने World Bank के कार्यकारी निदेशक, विश्व स्तर पर जमाएंगे अब भारत का सिक्का

    DPS बोकारो के पूर्व छात्र नीलकंठ मिश्रा बने World Bank के कार्यकारी निदेशक, विश्व स्तर पर जमाएंगे अब भारत का सिक्का

    कैबिनेट कमेटी ने दी मंजूरी, प्राचार्य सहित समस्त विद्यालय परिवार ने दी बधाई; मिथिला समाज में भी खुशी की लहर

    दीपक झा
    बोकारो:
    इस्पातनगरी बोकारो के नाम आज एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। बोकारो के गौरव, DPS Bokaro के पूर्व छात्र और देश के जाने-माने अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्रा को विश्व बैंक (वर्ल्ड बैंक) के वाशिंगटन डीसी स्थित मुख्यालय में भारत का अगला कार्यकारी निदेशक (ईडी) नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति (एसीसी) ने आधिकारिक तौर पर उनके नाम को मंजूरी दे दी है। श्री मिश्रा यहां उत्तर प्रदेश कैडर के 1981 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी परमेश्वरन अय्यर का स्थान लेंगे। जारी आदेश के अनुसार, उनका यह कार्यकाल कार्यभार संभालने की तिथि से अगले तीन वर्षों के लिए या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।

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    बता दें कि नीलकंठ मिश्रा अर्थशास्त्र की दुनिया में एक बेहद सम्मानित और जानी-मानी शख्सियत हैं। देश की आर्थिक नीतियों को दिशा देने में उनकी भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री रहे श्री मिश्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य के रूप में भी देश को अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा, भारत की डिजिटल पहचान क्रांति की रीढ़ माने जाने वाले भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के सलाहकार के रूप में भी उन्होंने अपनी तकनीकी और आर्थिक सूझबूझ का लोहा मनवाया है। अब विश्व बैंक के मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना उनकी इसी अद्वितीय मेधा का परिणाम है।

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    1993 बैच के छात्र रहे हैं नीलकंठ, आईआईटी में देशभर में था शीर्ष स्थान

    इस ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण को दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो के लिए एक अद्भुत उत्सव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि नीलकंठ मिश्रा इसी संस्थान के बैच 1993 के छात्र रहे हैं। उनकी इस वैश्विक सफलता से पूरे विद्यालय परिवार के साथ-साथ समस्त बोकारो और झारखंड राज्य में हर्ष का माहौल है। विदित हो कि बीएसएल अधिकारी रहे प्रकाश चन्द्र मिश्रा और श्रीमती किरण मिश्रा के होनहार पुत्र नीलकंठ मिश्रा आईआईटी की परीक्षा में भी 1993 में देशभर में शीर्ष स्थान पर थे। उन्होंने पूरे देश में चौथा स्थान प्राप्त किया था।

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    बोले प्राचार्य डॉ. गंगवार- गर्व है कि मैंने उन्हें पढ़ाया, अर्थजगत में बताया वैश्विक धरोहर

    इस स्वर्णिम उपलब्धि पर अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डीपीएस बोकारो के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने श्री मिश्रा को हार्दिक बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्राचार्य डॉ. गंगवार ने उन्हें अर्थजगत की एक वैश्विक धरोहर बताते हुए कहा कि नीलकंठ मिश्रा की यह सफलता देश के करोड़ों युवाओं और विशेष रूप से बोकारो के विद्यार्थियों के लिए एक महान प्रेरणा है। उन्हें इस बात का गर्व है कि उन्होंने उन्हें केमिस्ट्री पढ़ाई है। गणित, विज्ञान और अर्थशास्त्र विषयों में उनकी विशेष रुचि थी। न केवल पढ़ाई, बल्कि सह-शैक्षिक गतिविधियों में भी उनकी अच्छी सहभागिता होती थी। वे बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी रहे हैं। उनकी उपलब्धि न केवल डीपीएस बोकारो परिवार, बल्कि पूरे भारतवर्ष के लिए अत्यंत ही गर्व का विषय है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि विश्व बैंक में भारत के कार्यकारी निदेशक के रूप में नीलकंठ अपनी अद्वितीय आर्थिक समझ से न केवल भारत का मान बढ़ाएंगे, बल्कि विकासशील देशों के आर्थिक उत्थान के लिए भी नए रास्ते तैयार करेंगे। उनकी यह यात्रा हमारे स्कूल के हर बच्चे को यह सिखाती है कि बड़े सपने देखना और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर अनुशासित रहना ही सफलता का एकमात्र मूलमंत्र है।

    मिथिला सांस्कृतिक परिषद ने भी दी बधाई

    नीलकंठ मिश्रा को वर्ल्ड बैंक का कार्यकारी निदेशक बनाए जाने पर बोकारो के मिथिला समाज के लोगों में भी हर्ष और गर्व का माहौल है। मिथिला सांस्कृतिक परिषद के निदेशक मंडल संयोजक राजेन्द्र कुमार, सदस्य केसी झा, विजय कुमार झा सहित अध्यक्ष जेपी चौधरी, महासचिव नीरज चौधरी, सांस्कृतिक कार्यक्रम निदेशक अरुण पाठक, कोषाध्यक्ष मिहिर मोहन ठाकुर, मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के पूर्व अध्यक्ष हरि मोहन झा, वर्तमान सचिव दिलीप कुमार झा, मैथिली कला मंच काली पूजा ट्रस्ट के महामंत्री सुनील मोहन ठाकुर, वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ झा, तुला नंद मिश्र, अमन कुमार झा, वरिष्ठ रंगकर्मी बटोही कुंवर, श्रवण कुमार झा, शंभु झा आदि ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है और नीलकंठ व उनके परिवार को बधाई दी है।

    • Varnan Live Report.
  • DVC में ‘भूत’ को पेंशन! 1200 से अधिक मृत लोगों के खातों में भेजे करोड़ों; ₹300 करोड़ के महा-घोटाले पर MP दीपक प्रकाश का बड़ा एक्शन

    DVC में ‘भूत’ को पेंशन! 1200 से अधिक मृत लोगों के खातों में भेजे करोड़ों; ₹300 करोड़ के महा-घोटाले पर MP दीपक प्रकाश का बड़ा एक्शन

    चेयरमैन एस सुरेश कुमार और पूर्व सदस्य वित्त अरूप सरकार के कार्यकाल पर गंभीर उंगलियां

    चहेतों को अवैध रेवड़ी की तरह बांटी गईं सीनियर मैनेजर की नौकरियां

    संजय मिश्रा
    बोकारो थर्मल/नई दिल्ली:
    देश के पहले बहुद्देशीय नदी घाटी संगठन दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के भीतर चल रहे वित्तीय कुप्रबंधन, गंभीर प्रशासनिक घोटालों, अवैध नियुक्तियों और नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। डीवीसी के पूर्व मुख्य अभियंता अशोक कुमार जैन द्वारा बुधवार को देश की राजधानी दिल्ली से उजागर किए गए इन संगीन आरोपों के बाद हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्यसभा सांसद और केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के वरिष्ठ सदस्य दीपक प्रकाश ने सीधे केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर इस पूरे महा-घोटाले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष केंद्रीय जांच कराने की मांग की है।

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    वेतन देने के पैसे नहीं बचे, डेलॉयट के चक्कर में डूबे करोड़ों
    पूर्व मुख्य अभियंता के शिकायती पत्र के अनुसार, अप्रैल 2026 में डीवीसी के पास अपने कर्मचारियों को मासिक वेतन देने तक के पैसे शेष नहीं बचे थे। इस भयंकर नकदी संकट से निपटने के लिए प्रबंधन ने नियमों के विरुद्ध जाकर कर्मचारियों के पेंशन फंड ट्रस्ट से पैसे निकालने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन बाद में भारी दबाव के बीच बैंकों से शॉर्ट टर्म लोन लेकर किसी तरह इस दायित्व को पूरा किया गया। इस बदहाली की मुख्य वजह डीवीसी में एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) के लिए ‘सैप’ सॉफ्टवेयर के अधूरे और दोषपूर्ण कार्यान्वयन को माना गया है, जिसके कारण कमर्शियल इंजीनियरिंग विभाग उपभोक्ताओं को समय पर बिजली बिल भेजने में विफल रहा। करोड़ों रुपये की लागत वाले इस कार्य की जिम्मेदारी डेलॉयट कंपनी को सौंपी गई थी, जिसने तय समय पर काम पूरा नहीं किया। शिकायत में यह भी संगीन आरोप है कि पूर्व सदस्य (वित्त) अरूप सरकार ने अपने पद का दुरुपयोग कर अपने ही बेटे को इसी डेलॉयट कंपनी में ₹60 लाख सालाना के भारी-भरकम पैकेज पर नौकरी दिलवाई।


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    बिना मंजूरी उड़ाए ₹300 करोड़, मृत लोगों के खाते में भेजी पेंशन!
    डीवीसी प्रबंधन पर डीवीसी अधिनियम 1948 का खुला उल्लंघन करते हुए और केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) की अनिवार्य मंजूरी के बिना ही एनुअल इंसेंटिव के रूप में ₹300 करोड़ से अधिक का अनुचित व अवैध खर्च करने का आरोप है। इसके अलावा, बिना लाइफ सर्टिफिकेट जमा किए ही 1207 ऐसे पेंशनभोगियों को नियमित भुगतान किया गया जो धरातल पर थे ही नहीं। आंतरिक जांच होने पर मृत पेंशनभोगियों के खातों से लगभग ₹35 करोड़ की राशि वापस तो ली गई है, लेकिन इसकी गहरी जांच अभी भी जारी है। इतना ही नहीं, चेयरमैन, तीन बोर्ड सदस्यों और सीवीओ के लिए सरकारी पैसे से खरीदी गईं 5 चमचमाती लग्जरी गाड़ियों को बेहद मामूली शुल्क देकर अधिकारियों द्वारा स्वयं खरीद (बाय बैक) करने का एक नियम विरुद्ध प्रस्ताव बोर्ड से पास कराया गया, जिसका पूरा ट्रांसफर खर्च भी डीवीसी द्वारा ही वहन किया जाना तय हुआ।

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    चहेतों के लिए बैकडोर एंट्री: 74 वर्षीय पूर्व मेयर को भी मिली मलाई
    नियुक्तियों के मामले में भी डीवीसी के भीतर जमकर भाई-भतीजावाद चला। बिना किसी स्वीकृत पद के वर्ष 2026 में उत्पल गोस्वामी को सीधे सीनियर मैनेजर (रिन्यूएबल एनर्जी) के पद पर अवैध रूप से नियुक्त कर दिया गया। इसी तरह चेयरमैन की करीबी मानी जाने वाली अनन्या दत्ता चौधरी को भी सीनियर मैनेजर (HR) के पद पर बैकडोर से एंट्री दी गई। इसके साथ ही, डीओपीटी और सीवीसी के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए डिप्टी जनरल मैनेजर और सीनियर मैनेजरों की धड़ाधड़ नियुक्तियां की गईं। संविदा के आधार पर की जा रही नियुक्तियों में दुर्गापुर के पूर्व मेयर, जिनकी आयु करीब 74 वर्ष है, उन्हें विज्ञापन में तय 65 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा का खुला उल्लंघन करते हुए एसोसिएट कंसलटेंट (सिविल-प्रशासन) के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त कर दिया गया। प्रबंधन द्वारा 26 अन्य सलाहकारों की भी इसी तरह संदिग्ध नियुक्तियां की गई हैं।

    31 मई को रिटायर हो रहे हैं चेयरमैन, साख बचाने के लिए उच्च स्तरीय जांच जरूरी
    विदित हो कि डीवीसी के वर्तमान अध्यक्ष एस सुरेश कुमार आगामी 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जबकि डीवीसी के सदस्य (वित्त) अरूप सरकार गत 24 अप्रैल को अपना कार्यकाल पूरा कर अपने मूल संगठन में वापस लौट चुके हैं। ऐसे में उनके जाने से ठीक पहले उजागर हुए इस महा-घोटाले ने केंद्र सरकार को भी चौकस कर दिया है। सांसद दीपक प्रकाश ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से पुरजोर मांग की है कि एक उच्च स्तरीय विशेष जांच आयोग का गठन कर इन सभी वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि देश के सार्वजनिक धन को लूटने वाले दोषियों का पता लगाकर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और आपराधिक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

    • Varnan Live Report.
  • बोकारो में चिकित्सा-क्रांति… सांस की नली में फंसी मौत को खींच लाएगा BGH का ‘Rigid Bronchoscope’

    बोकारो में चिकित्सा-क्रांति… सांस की नली में फंसी मौत को खींच लाएगा BGH का ‘Rigid Bronchoscope’

    संवाददाता
    बोकारो:
    आपातकालीन और जीवनरक्षक चिकित्सा के क्षेत्र में इस्पातनगरी के प्रतिष्ठित बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) ने एक और मील का पत्थर स्थापित कर लिया है। अस्पताल के कान, नाक एवं गला (ENT) विभाग के बेड़े में अब ‘रिजिड ब्रोंकोस्कोप’ नाम का एक विशेष अत्याधुनिक और संवेदनशील उपकरण शामिल हो चुका है। यह आधुनिक मशीन उन खौफनाक और आपातकालीन स्थितियों में मरीजों के लिए साक्षात वरदान साबित होगी, जब गले या सांस की नली में कोई बाहरी वस्तु अचानक फंस जाती है और चंद मिनटों में ही दम घुटने के कारण जान पर बन आती है। बीजीएच के डॉक्टरों द्वारा इस हाईटेक मशीन का सफल इस्तेमाल शुरू भी कर दिया गया है।

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    5 वर्ष से कम उम्र के मासूमों को सबसे ज्यादा खतरा, ब्लॉक हो जाता है एयर पैसेज
    चिकित्सीय आंकड़ों के अनुसार, आमतौर पर 5 साल से कम उम्र के छोटे बच्चों में यह जानलेवा समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है। बच्चे अक्सर खेल-खेल में छोटे सिक्के, प्लास्टिक के खिलौने, फल-सब्जियों के कड़े बीज या बटन मुंह में डाल लेते हैं, जो सरककर सीधे सांस की नली में फंस जाते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, यह स्थिति पल भर में फेफड़ों तक जाने वाले हवा के मुख्य रास्ते (एयर पैसेज) को पूरी तरह ब्लॉक कर देती है और ऑक्सीजन की कमी से सांसें टूटने लगती हैं। केवल बच्चे ही नहीं, बल्कि कई बार वयस्क और बुजुर्ग भी जल्दबाजी में खाना खाते समय ऐसे हादसों का शिकार हो जाते हैं।

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    बिना किसी चीर-फाड़ के दूरबीन तकनीक से सुरक्षित बाहर आएगी ‘आफत’
    अब ऐसी किसी भी आपात स्थिति में बोकारो और आसपास के जिलों के निवासियों को रांची या दूसरे राज्यों के बड़े अस्पतालों की ओर भागने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। ऐसी दुर्घटना होने पर मरीज को तुरंत बीजीएच के ईएनटी विभाग लाया जा सकता है। इस जटिल प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले मरीज को पूरी बेहोशी (जनरल एनेस्थीसिया) दी जाती है। इसके बाद अस्पताल के कुशल सर्जन ‘रिजिड ब्रोंकोस्कोप’ के जरिए आधुनिक दूरबीन विधि से सांस की नली के भीतर गहराई में उतरते हैं और वहां फंसी हुई वस्तु को बिना किसी चीरे या बड़े ऑपरेशन के, बेहद सुरक्षित तरीके से पकड़कर बाहर निकाल लेते हैं।

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    डॉक्टरों की अपील: घरेलू नुस्खों में समय न गंवाएं, बच्चों पर रखें कड़ी नजर
    बीजीएच में इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की हाईटेक सुविधा के शुरू होने से स्थानीय लोगों को समय रहते बेहद किफायती चिकित्सीय मदद मिल सकेगी। इस सफलता के बीच बीजीएच के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अभिभावकों से विशेष अपील की है कि वे छोटे बच्चों की गतिविधियों पर हमेशा कड़ी नजर रखें और उनके आसपास छोटे सिक्के या नुकीले खिलौने बिल्कुल न छोड़ें। इसके बावजूद यदि कभी ऐसी आपात स्थिति उत्पन्न हो भी जाती है, तो घबराने या घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद करने के बजाय सीधे मरीज को बीजीएच के ईएनटी विभाग लेकर आएं।

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  • मुफ्त पढ़ाई, सीधे नौकरी: BSL की ‘फ्री पाठशाला’ से चमकी विस्थापित युवाओं की किस्मत; अगले महीने लगेगा नौकरियों का मेला

    मुफ्त पढ़ाई, सीधे नौकरी: BSL की ‘फ्री पाठशाला’ से चमकी विस्थापित युवाओं की किस्मत; अगले महीने लगेगा नौकरियों का मेला

    बोकारो: झारखंड के औद्योगिक गौरव बोकारो स्टील प्लांट  (BSL) ने अपने विस्थापित परिवारों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के होनहार लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं की जिंदगी बदलने के लिए एक ऐतिहासिक अभियान शुरू किया है। बीएसएल के निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) विभाग द्वारा संचालित निशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग कार्यक्रम के तहत अब तक रिकॉर्ड 300 अभ्यर्थियों को सीधे तौर पर मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है। यह महत्वाकांक्षी कार्यक्रम युवाओं को बैंक, एसएससी, रेलवे तथा केंद्र व राज्य सरकार की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की सघन तैयारी कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का एक जीवंत प्रयास है।

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    बेटियों ने दिखाई ताकत, 12 को मिल चुका है सरकारी रोजगार

    इस निशुल्क शैक्षणिक महा-अभियान की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसमें नामांकित कुल 300 कर्मठ अभ्यर्थियों में 87 महिला अभ्यर्थी शामिल हैं, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि ग्रामीण और विस्थापित क्षेत्रों की बेटियां भी अब सफलता के नए आसमान छूने के लिए तैयार हैं। पारदर्शी तरीके से चुने गए इन युवाओं में से अब तक 12 अत्यंत गरीब अभ्यर्थी विभिन्न कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं को पास करके अपनी मनपसंद सरकारी नौकरियों में सफलता अर्जित कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त, वर्तमान में पढ़ रहे अन्य अभ्यर्थियों के लिए आगामी जून और जुलाई 2026 में एक विशेष ‘मेगा प्लेसमेंट ड्राइव’ का आयोजन किया जा रहा है, जिससे कॉर्पोरेट और बैंकिंग सेक्टर में इन युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

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    महेंद्रा एजुकेशनल के विशेषज्ञ दे रहे कड़ा प्रशिक्षण, मिल रही हैं हाइटेक सुविधाएं

    देश के प्रतिष्ठित संस्थान ‘महेंद्रा एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड’ को इस पूरे प्रशिक्षण का जिम्मा सौंपा गया है। छह महीने की तय समय सीमा के भीतर पूरा पाठ्यक्रम वैज्ञानिक तरीके से पूरा कराया जा रहा है और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए सप्ताह में छह दिन ऑफलाइन व ऑनलाइन दोनों माध्यमों से नियमित कक्षाएं संचालित की जाती हैं। इसके साथ ही, विद्यार्थियों को बिल्कुल निशुल्क आधुनिक अध्ययन सामग्री, चौबीसों घंटे हाई-स्पीड वाई-फाई की सुविधा से युक्त वातानुकूलित आधुनिक लाइब्रेरी, राष्ट्रीय स्तर के नियमित मॉक टेस्ट एवं व्यक्तिगत मेंटरशिप सपोर्ट जैसी सभी आवश्यक अंतरराष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि बोकारो के ये बच्चे देश के किसी भी बड़े शहर के छात्रों को कड़ी टक्कर दे सकें।

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  • प्रशासनिक घमंड और बेलगाम नौकरशाही… मजिस्ट्रेट की गाड़ी को धक्का लगाने की फोटो खींची, तो पत्रकार को पकड़ ले गए थाने

    प्रशासनिक घमंड और बेलगाम नौकरशाही… मजिस्ट्रेट की गाड़ी को धक्का लगाने की फोटो खींची, तो पत्रकार को पकड़ ले गए थाने

    संवाददाता
    बोकारो:
    लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रशासनिक घमंड और बेलगाम नौकरशाही का एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाला चेहरा बोकारो जिले में सामने आया है। यहां एक हिंदी दैनिक के पत्रकार युधिष्ठिर महतो को सिर्फ इसलिए पकड़कर थाने में बंद कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने बीच सड़क पर जिला प्रशासन की खराब गाड़ी को धक्का लगाते लोगों की तस्वीर खींचने का ‘गुनाह’ कर दिया था। सरकारी मशीनरी की इस गुंडागर्दी और तानाशाहीपूर्ण रवैये को लेकर पूरे राज्य के मीडिया जगत में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है।

    …. और ऐसे आग आग-बबूला हो गईं मैडम

    घटना के संबंध में बताया जाता है कि बोकारो जिला प्रशासन की गाड़ी में सवार होकर दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) जया कुमारी पिंड्राजोरा की ओर जा रही थीं। इसी बीच रास्ते में उनकी सरकारी गाड़ी अचानक हांफने लगी और बंद हो गई। गाड़ी को चालू करने के लिए वहां मौजूद लोग उसे धक्का लगाने लगे। ऑन-ड्यूटी तैनात पत्रकार युधिष्ठिर महतो ने जब सिस्टम की पोल खोलती इस तस्वीर को अपने कैमरे में कैद किया, तो मजिस्ट्रेट जया कुमारी आपा खो बैठीं। पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि महिला मजिस्ट्रेट ने उनके साथ सरेआम भद्दी गाली-गलौज की, दुर्व्यवहार किया और उनका कॉलर पकड़कर जबरन पिंड्राजोड़ा थाने ले गईं, जहाँ उन्हें हवालात में बंद करवा दिया गया। पीड़ित पत्रकार ने इस बर्बरता के खिलाफ थाने में लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।

    विवादों की ‘क्वीन’ हैं मैडम, दागी थाने का लिया सहारा

    स्थानीय लोगों और प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो मजिस्ट्रेट जया कुमारी का व्यवहार हमेशा से तानाशाहीपूर्ण रहा है। व्यवस्था को जेब में रखने की उनकी आदत पुरानी है। पूर्व में जब उपायुक्त (डीसी) ने उन्हें एक मामले की जांच सौंपी थी, तो वह सुबह-सुबह आरोपी को बचाने ही जांच करने पहुंच गईं। इसके अलावा चास के आजाद नगर से भी उनके खिलाफ गंभीर मामले सामने आ चुके हैं, जिसकी लिखित शिकायत अभी बीते दिन ही उप विकास आयुक्त (डीडीसी) से की गई है। शर्मनाक बात यह भी है कि पत्रकार को प्रताड़ित करने के लिए जिस पिंड्राजोरा थाने का इस्तेमाल किया गया, उसका अपना इतिहास भी दागी रहा है। यह वही थाना है जिसके थानेदार से लेकर सिपाही तक, पूरे के पूरे स्टाफ को एक संगीन अपराधी से मोटी रकम लेकर उसे बचाने के चक्कर में महज एक महीने पहले ही सामूहिक रूप से लाइन हाजिर किया गया था।

    बोकारो प्रेस क्लब, जेजेए सहित कई संगठनों ने की निंदा, बताया लोकतंत्र का हनन

    इस घटना के बाद बोकारो के पत्रकारों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। बोकारो प्रेस क्लब और झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन सहित कई संगठनों ने इस घटना की घोर निंदा की है। पत्रकार संगठनों ने जिला प्रशासन को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए बंद किए गए पत्रकार को तत्काल ससम्मान रिहा करने और तानाशाह दंडाधिकारी जया कुमारी के खिलाफ सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुचलने की कोशिश बंद नहीं हुई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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  • SSCE 2026 : फिर सिरमौर बना DPS बोकारो, दो-दो State Toppers यहीं से निकले; बढ़ाया इस्पातनगरी का मान

    SSCE 2026 : फिर सिरमौर बना DPS बोकारो, दो-दो State Toppers यहीं से निकले; बढ़ाया इस्पातनगरी का मान

    Commerce में 99.4% के साथ प्रिया, तो Science में 99.2% अंक लाकर आदित्य झारखंड में अव्वल

    ऐतिहासिक प्रदर्शन पर विद्यालय परिवार में हर्ष का माहौल, प्राचार्य ने दी बधाई

    संवाददाता
    बोकारो।
    झारखंड की शैक्षणिक राजधानी मानी जानेवाली इस्पातनगरी बोकारो की गरिमा में एक बार फिर चार चांद लग गया। और, शहर की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को पुनः गौरवान्वित किया है दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो ने। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं बोर्ड की परीक्षा में इस विद्यालय ने न केवल जिले में, बल्कि राज्य स्तर पर अपने दमदार प्रदर्शन से दबदबा बनाने में कामयाबी पाई। सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसी स्कूल से दो-दो स्टेट टॉपर उभरकर सामने आए। विज्ञान (साइंस) संकाय में जहां आदित्य मिश्रा 99.2 प्रतिशत अंक के साथ पूरे झारखंड में टॉप आए, वहीं वाणिज्य (कॉमर्स) संकाय में प्रिया पालबाबू 99.4 फीसदी अंक अर्जित कर स्टेट टॉपर बनीं। विद्यालय के इस रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन की कड़ी में ह्यूमैनिटीज (कला संकाय) के पहले बैच ने भी संतोषप्रद परिणाम दिया। आर्ट्स में रैना रदान्या सर्वाधिक 96.2 प्रतिशत अंक के साथ स्कूल टॉपर रही तथा जिले के टॉप 10 में अपनी जगह पक्की की।

    परीक्षा में शामिल सभी 479 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण
    इस वर्ष उक्त तीनों संकायों की परीक्षा में डीपीएस बोकारो से कुल 479 विद्यार्थी शामिल हुए थे और सभी के सभी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण रहे। 121 विद्यार्थियों को 90 प्रतिशत व इससे अधिक अंक मिले, जिनमें 34 परीक्षार्थियों ने 95 फीसदी व इससे अधिक अंक अर्जित किए। 368 को 80 प्रतिशत व इससे ज्यादा अंक मिले। वहीं, 104 छात्र-छात्राओं ने विभिन्न विषयों में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त किए।

    साइंस के टॉप 10 विद्यार्थी
    घोषित परिणाम के अनुसार, विज्ञान संकाय के टॉप टेन में शामिल विद्यार्थियों में क्रमशः आदित्य मिश्रा (99.2 प्रतिशत), आयुष सुमन (99 प्रतिशत), अयेशा फलक सिद्दीकी (98.4 प्रतिशत), अमन राज अमन (97.8 प्रतिशत), इशिता दुबे (97.6 प्रतिशत), काव्या सिंह (97.2 प्रतिशत), ईधा सिंह (97 प्रतिशत), आदित्य राज (96.8 प्रतिशत), ईशान गौरव (96.6 प्रतिशत) तथा मयंक व सूर्यांश (दोनों को 96 प्रतिशत) शामिल रहे।

    कॉमर्स के टॉप 5
    इसी प्रकार वाणिज्य संकाय के सर्वश्रेष्ठ पांच विद्यार्थियों में क्रमशः प्रिया पालबाबू (99.4 प्रतिशत), श्रुति प्रिया (97 प्रतिशत), आर्यन अग्रवाल (96.2 प्रतिशत), भूमिका रत्नाकर (96 प्रतिशत) एवं वर्तिका जैन (95.2 प्रतिशत) के नाम शामिल हैं।

    आर्ट्स के टॉप 5
    कला संकाय के टॉप फाइव में रैना रदान्या (96.2 प्रतिशत), फैजा अथर (96 प्रतिशत), आस्था कुमारी, कुमुद भारती व रिया कुमारी (तीनों को 95.2 प्रतिशत), अक्षत कुमार (94.8 प्रतिशत) एवं आदित्य नारायण (94 प्रतिशत) ने अपनी जगह बनाई।

    बोले प्राचार्य डॉ. गंगवार- रंग लाई विद्यालय परिवार और विद्यार्थियों की मेहनत

    अपने विद्यालय के छात्र-छात्राओं की इस उत्कृष्ट सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने विद्यार्थियों को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान विद्यार्थियों के अभिभावक भी बड़ी तादाद में मौजूद थे। डॉ. गंगवार ने विद्यार्थियों की उपलब्धियों का श्रेय विद्यालय परिवार द्वारा टीम वर्क के रूप में की गई मेहनत, विद्यार्थियों की लगन व उनके परिश्रम के साथ-साथ अभिभावकों की जागरुकता एवं सहयोग को दिया है।

    Toppers Talk

    मानवता की सेवा को डॉक्टर बनना चाहता है आदित्य, कोरोनाकाल बना जीवन का टर्निंग प्वाइंट

    99.2 फीसदी अंक लाकर डीपीएस बोकारो के साइंस टॉपर आदित्य मिश्रा की दिली ख्वाहिश आगे चलकर एक सफल चिकित्सक बन मानवता-सेवा करने की है। सेल की रिफैक्ट्री यूनिट (एसआरयू) में मुख्य महाप्रबंधक (वित्त) प्रजेश चन्द्र मिश्रा एवं गृहिणी सस्मिता मिश्रा का होनहार पुत्र आदित्य शुरू से ही मेधावी छात्र रहा है। विषयवार अंग्रेजी में उसे 100, केमिस्ट्री में 100, बायोलॉजी में 96, फिजिक्स में 99, फिजिकल एजुकेशन में 97 और पेंटिंग में 100 अंक मिले हैं। वर्क एक्सपीरियंस, हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन और जनरल स्टडीज, तीनों में उसने ए1 ग्रेड हासिल किया। कुल मिलाकर 500 में से उसे 496 अंक मिले। एक सवाल के जवाब में आदित्य ने कहा कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए वह रोजाना लगभग छह घंटे पढ़ाई किया करता था। अपनी कामयाबी का श्रेय उसने अपने माता-पिता व परिजनों के साथ-साथ विद्यालय के शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है। आदित्य को 10वीं में कुल 96.8 प्रतिशत अंक मिले थे। डीपीएस बोकारो में उसने शुरू से ही पढ़ाई की है और हमेशा ही अपनी मेधाविता का परिचय दिया है। वह एनएसईजेएस- 2022 में पूरे राज्य से अकेले सफल रहा था। इसके अलावा, विभिन्न ओलंपियाडों में शानदार प्रदर्शन के लिए बेस्ट ओलंपियाड विनर का पुरस्कार, साइंस ओलंपियाड फाउंडेशन द्वारा शैक्षणिक उत्कृष्टता छात्रवृत्ति, साइंस ओलंपियाड में ओलंपियाड रैंक 1, एसओएफ नेशनल साइंस ओलंपियाड में जोनल रैंक 1, क्रिप्टिक क्रॉसवर्ड में देश में दूसरा स्थान आदि उसकी कामयाबियों की फेहरिस्त में शामिल हैं। हाल ही में उसने आईएपीटी की जीव-विज्ञान परीक्षा एनएसईबी में भी सफलता पाई थी। आदित्य को फुटबॉल और कबड्डी खेलना भी पसंद है। एक प्रश्न के जवाब में आदित्य ने बताया कि कोरोना काल उसके जीवन की पढ़ाई में टर्निंग प्वाइंट रहा, जहां से उसने अपनी पढ़ाई को एक नई दिशा दी। ऑनलाइन क्लास में उसकी पढ़ाई शिथिल हो गई थी, जिससे परिणाम प्रभावित होने लगे, जिससे उसने सीख लेते हुए कठिन परिश्रम शुरू किया और पढ़ाई में निरंतरता लाई। इसी का नतीजा रहा कि उसने आज साइंस टॉपर होने का गौरव पाया।

    No Social Media… अच्छे रिजल्ट के लिए प्रिया ने फोन से अनइंस्टॉल कर दिए थे सारे सोशल मीडिया एप्स, सीए बनने की तमन्ना

    कॉमर्स संकाय में 99.4 प्रतिशत अंक के साथ डीपीएस बोकारो में सर्वश्रेष्ठ परिणाम हासिल करने वाली छात्रा प्रिया पालबाबू ने बताया कि उसने एग्जाम के समय पूरी तन्मयता के साथ रोजाना लगभग चार घंटे पढ़ाई की। खास बात यह रही कि उसने परीक्षा में अच्छे रिजल्ट के लिए उस दरम्यान अपने फोन से तमाम सोशल मीडिया एप्स को अनइंस्टॉल कर दिए थे, ताकि पढ़ाई की एकाग्रता बनी रही। विषयवार प्रिया ने अकाउंटेंसी में 100, बिजनेस स्टडीज में 100, इकोनॉमिक्स में 99, पेंटिंग में 100, इंग्लिश कोर में 98 और अप्लाइड मैथमेटिक्स में 97 अंक प्राप्त किए। वर्क एक्सपीरियंस, हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन और जनरल स्टडीज, तीनों में उसने ए1 ग्रेड हासिल किया। प्रिया ने 500 में से 497 अंक हासिल किए। अपनी इस सफलता का श्रेय उसने विद्यालय के शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन और माता-पिता के सहयोग को दिया है। ओडिशा में व्यवसायी अजीत कुमार पालबाबू और गृहिणी लीला पालबाबू की सुपुत्री प्रिया की दिली ख्वाहिश आगे चलकर एक सफल चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) बनने की है। उसे फाइनेंस में रुचि रही है। 10वीं में उसे 96.8 प्रतिशत अंक मिले थे। वह अपने पिता को ही अपना आदर्श मानती है। पढ़ाई के अलावा पेंटिंग का भी उसे काफी शौक है और कराटे में राष्ट्रीय स्तर की वह खिलाड़ी भी रह चुकी है।

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  • झारखंड का शिक्षा-जगत आहत… बोले शिक्षाविद- Soft Target बनाए जा रहे निजी स्कूल, गहराया आक्रोश

    झारखंड का शिक्षा-जगत आहत… बोले शिक्षाविद- Soft Target बनाए जा रहे निजी स्कूल, गहराया आक्रोश

    सोशल मीडिया से लेकर स्कूल परिसरों तक नाराज़गी, शिक्षाविदों ने जताई चिन्ता  

    – D. K. Vats
    Bokaro :
    बोकारो सहित पूरे Jharkhand का शिक्षा जगत इन दिनों आहत दिख रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से लेकर स्कूल कैंपस तक चर्चाओं का बाजार गर्म है। वजह है स्कूलों के खिलाफ विरोध पर विरोध और कथित साजिशें। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों के खिलाफ आंदोलनों का जो दौर शुरू होता है, उसे जनहित से अधिक निहित स्वार्थ और राजनीतिक जमीन तैयार करने की मंशा के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में शहर के एक प्रतिष्ठित निजी विद्यालय की कैंटीन पर हुई विवादास्पद छापेमारी ने आग में घी डालने का काम किया है। राज्य के एजुकेशनल हब के रूप में विख्यात बोकारो की शैक्षणिक साख पर इस हमले के बाद शिक्षाविद गोलबंद होते दिख रहे हैं। उन्होंने इसे लेकर न केवल चिंता जताई, बल्कि इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए आक्रोश भी व्यक्त किया है। कहा कि जान बूझकर प्राइवेट स्कूलों को सॉफ्ट टारगेट बनाया जा रहा है।

    लिस्ट उठाकर देख लीजिए, ‘निशाना’ बनाए जाने वाले स्कूलों से ही मिलेंगे टॉपर्स”
    शिक्षाविद निजी स्कूलों के खिलाफ कथित साजिशों की एक स्वर में कड़ी निंदा कर रहे हैं। नगर के सेक्टर-5 स्थित एक बड़े स्कूल के प्राचार्य ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि टॉपर्स की लिस्ट उठाकर देख लीजिए, वहां आपको केवल इन्हीं ‘बहु-चर्चित’ और ‘निशाना बनाए जाने वाले’ निजी स्कूलों के मेधावी छात्र मिलेंगे, जिन्होंने बिना किसी बाहरी सहायता के बोकारो को शिक्षा का केंद्र बनाया। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोगों के मन में इन संस्थानों के प्रति एक नकारात्मक धारणा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। धनबाद के एक नामचीन विद्यालय की प्राचार्या ने भी इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि झारखंड में जो हो रहा है वह समझ से परे है। समझ नहीं आता कि आखिर कौन और क्यों निजी स्कूलों को टारगेट कर रहा है? यह बहुत ही निंदनीय है। वहीं एक अन्य शिक्षाविद ने इसे प्रशासन का ‘पुअर शो’ बताते हुए कहा कि ऐसी हरकतें प्रशासनिक अधिकारियों की अपरिपक्वता को दर्शाती हैं। उन्हें अपने कार्यों में तार्किक और पारदर्शी होना चाहिए।

    नया नहीं है ब्यूरोक्रेटिक और पॉलिटिकल दबाव
    शिक्षाविद कहते हैं कि किताबों और ड्रेस के नाम पर उठने वाले विवादों की आड़ में कुछ तथाकथित प्रतिनिधि स्कूलों को डराने-धमकाने का काम करते रहे हैं। स्कूलों में एडमिशन के इस दौर में ब्यूरोक्रेटिक और पॉलिटिकल दबाव डालना कोई नई बात नहीं है, लेकिन किसी गुप्त ऑपरेशन के बहाने दमन की सीमाएं लांघना कहीं से भी उचित नहीं है। यह एक खतरनाक परिपाटी की शुरुआत है। विद्यालयों से जुड़े लोगों ने कहा कि आज यदि इस अन्याय पर चुप्पी साधी गई, तो कल शहर का हर शैक्षणिक संस्थान किसी न किसी रसूखदार की साजिश का शिकार होगा। बोकारो की शैक्षणिक गरिमा को तार-तार होने से बचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर संवेदनशीलता और पारदर्शिता की नितांत आवश्यकता है।

    जब महामहिम का ‘मेजबान’ अचानक बन गया ‘निशाना’
    गौरतलब है कि हाल ही में जिस स्कूल की कैंटीन को पहले आनन-फानन में सील किया गया और 33 घंटे के भीतर ही खोल दिया गया, वह कुछ माह पहले ही फूड सेफ्टी क्लीयरेंस पा चुका था। चर्चा इस बात की है कि जिस कैंटीन ने मात्र कुछ समय पूर्व 14 नवंबर 2025 को राज्य के महामहिम राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के आगमन पर उनके भोजन की जिम्मेदारी संभाली थी, वह अचानक कुछ ही महीनों में कथित तौर पर इतनी असुरक्षित कैसे घोषित कर दी गई? यही नहीं, स्वास्थ्य विभाग के जिस शीर्ष अधिकारी के कथित निर्देश पर यह कार्रवाई की गई, उनके बच्चे भी उसी कैंटीन में खाया करते थे और आज तक संयोगवश कभी कुछ गलत नहीं हुआ। बहरहाल, यह विरोधाभास क्या कहता है, इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।

    राष्ट्र-निर्माण के आधारस्तंभ हैं विद्यालय, खुंदक निकालने का जरिया नहीं : विकास कुमार

    इस पूरे प्रकरण पर झारखंड-बिहार के प्रसिद्ध करियर काउंसेलर एवं वरिष्ठ शिक्षाविद विकास कुमार ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा –

    बोकारो को बोकारो बनाए रखने में BSL (बोकारो इस्पात संयंत्र) के बाद अगर किसी का सबसे बड़ा योगदान है, तो वह यहां के स्कूल हैं। ऐसे में स्कूलों पर अकारण दबाव बनाना न केवल इस शहर की पहचान को मिटाना है, बल्कि बोकारो की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को अपूरणीय क्षति पहुंचाना है। निजी विद्यालय सियासी जमीन तैयार करने, निजी स्वार्थों की पूर्ति, विरोधों का केंद्र बनने या रंजिश निकालने का जरिया नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्र-निर्माण के प्रमुख आधारस्तंभ हैं। हाल के दिनों में जिस प्रकार बोकारो सहित पूरे झारखंड में निजी विद्यालयों को सॉफ्ट टारगेट बनाया जा रहा है, वह वास्तव में गहरी चिंता का विषय है। यह स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि एक खास तरह का सिंडिकेट मिलकर सुनियोजित तरीके से इन संस्थानों को निशाना बना रहा है, जो हमारी शैक्षणिक समृद्धि के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

    Social Media की निरंकुशता बनी प्रोपेगेंडा का नया हथियार

    शिक्षा जगत को आहत करने वाली इन साजिशों के बीच सोशल मीडिया की बेलगाम निरंकुशता आग में पेट्रोल डालने का काम कर रही है। अब सोशल मीडिया चैनलों और व्यक्तिगत पेजों के माध्यम से भ्रामक सूचनाओं का अंबार खड़ा किया जा रहा है। ऐसे तत्व जिनकी रसूखदारी काम न आई या जिनके व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति विद्यालयों से नहीं हो सकी, वे अब इन डिजिटल मंचों का उपयोग अपनी खुंदक निकालने के लिए कर रहे हैं। बिना किसी तथ्य की जांच किए, भड़काऊ कैप्शन और सनसनीखेज दावों के साथ चलाए जा रहे ये प्रोपेगंडा न केवल संस्थानों की छवि बिगाड़ रहे हैं, बल्कि समाज में भी वैमनस्य घोल रहे हैं। यह डिजिटल तानाशाही शैक्षणिक संस्थानों के प्रति जनता का भरोसा तोड़ने का एक कुत्सित प्रयास है, जो अंततः शहर की गरिमा को ही चोट पहुंचा रहा है।

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  • बिना नोटिस DPS बोकारो की कैन्टीन का सील होना प्रशासनिक तानाशाही या अपरिपक्वता?

    बिना नोटिस DPS बोकारो की कैन्टीन का सील होना प्रशासनिक तानाशाही या अपरिपक्वता?

    न्याय के बजाय दुर्भावना की दुर्गंध!

    शिक्षा की साख कलंकित करने की कोशिश?

    बोकारो : शिक्षा की राजधानी कहे जाने वाले बोकारो की साख को गुरुवार को प्रशासन ने कलंकित करने की ऐसी कोशश की कोशिश की, जिसने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आने लगे और शासन की कार्रवाई से न्याय के बजाय दुर्भावना की दुर्गंध आने लगे तो लोगों का आहत और आक्रोशित होना स्वाभाविक है। DPS Bokaro बोकारो जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की कैन्टीन को बिना किसी ठोस कारण या पूर्व सूचना के आनन-फानन में सील कर देना न केवल प्रशासनिक तानाशाही का प्रमाण है, बल्कि यह उन हजारों बच्चों और अभिभावकों की भावनाओं पर भी सीधा प्रहार है, जो इस विद्यालय को अपनी पहचान मानते हैं।


    हैरानी की बात तो यह है कि इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने वाले फूड सेफ्टी ऑफिसर गुलाब लकड़ा और उनके सहायक ने पारदर्शिता को पूरी तरह धत्ता बता दिया। जब कैन्टीन संचालक ने सील करने का आधार और लिखित आदेश दिखाने का न्यायसंगत आग्रह किया, तो नियम-कायदे बताने के बजाय उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई। आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि प्रशासन को गुप्त तरीके से इस तरह का दमनकारी कदम उठाना पड़ा? क्या यह वही विभाग नहीं है, जिसने मात्र कुछ महीने पहले इसी कैन्टीन की स्वच्छता और गुणवत्ता की जमकर प्रशंसा की थी?

    याद रहे कि 14 नवंबर 2025 को जब झारखंड के महामहिम राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार का आगमन डीपीएस बोकारो में हुआ था, तब उनके भोजन और जलपान की पूरी जिम्मेदारी इसी कैन्टीन ने संभाली थी। उस समय सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने वाला संस्थान अचानक कुछ ही महीनों में इतना असुरक्षित कैसे हो गया कि उसे सुधार का एक मौका दिए बिना सीधे तालाबंदी का सामना करना पड़ा? अगर कहीं कोई कमी थी भी तो नियमानुसार चेतावनी दी जा सकती थी या सैंपल लिए जा सकते थे, लेकिन सीधे सीलिंग की कार्रवाई चीख-चीख कर कह रही है कि इसके पीछे उद्देश्य सुधार नहीं, बल्कि विद्यालय की प्रतिष्ठा को धूमिल करना था।

    प्रशासन के इस संदेहास्पद कृत्य ने न केवल नन्हे बच्चों के कोमल मन को झकझोर कर रख दिया, बल्कि उनके पेट पर भी हमला किया है। जिस कैंटीन में बच्चे रोज अपनी भूख-प्यास मिटाते थे, आज लगातार दूसरे दिन भी सैकड़ों मासूम भूखे वापस चले गए। दूसरी तरफ, शहर के प्रबुद्ध वर्ग के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर किसके इशारे पर इस शिक्षा के मंदिर के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया गया है? विद्यालय प्रबंधन ने इस पूरी प्रक्रिया को दुर्भावना से प्रेरित करार दिया है और अब जनता की अदालत में यह सवाल खड़ा है कि क्या जिले के आला अधिकारी एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान की साख को कलुषित करने के प्रयास को अपनी स्वीकृति दे पाएंगे?

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  • स्वास्थ्य-जगत में ‘संजीवनी’ की दस्तक, Bokaro में जल्द शुरू होगी अत्याधुनिक ‘Burn Unit’

    स्वास्थ्य-जगत में ‘संजीवनी’ की दस्तक, Bokaro में जल्द शुरू होगी अत्याधुनिक ‘Burn Unit’

    DC अजय नाथ झा का Master Plan, 10 दिन के भीतर Ground-Study

    Bokaro : अब गंभीर रूप से झुलसे मरीजों की जिंदगी और मौत के बीच के फासले को बोकारो प्रशासन एक विश्वस्तरीय सेतु से भरने जा रहा है। जिले के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाते हुए उपायुक्त (DC) अजय नाथ झा ने बोकारो में एक अत्याधुनिक और पूर्णतः समर्पित Burn Unit की स्थापना का बिगुल फूंक दिया है। मंगलवार को समाहरणालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में डीसी ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब जिले के मरीजों को इलाज के अभाव में महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।

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    महानगरों जैसा इलाज अब बोकारो में, टीम करेगी टॉप अस्पतालों का ऑडिट

    इस परियोजना को महज एक सरकारी वार्ड न मानकर एक ‘उत्कृष्टता केंद्र’ (Centre of Excellence) के रूप में विकसित करने के लिए डीसी ने एक विशेषज्ञ टीम का गठन किया है। इस टीम को अगले 10 दिनों के भीतर देश के उन शीर्ष अस्पतालों का ‘ऑन-ग्राउंड स्टडी’ करने का निर्देश दिया गया है, जहां बर्न यूनिट्स सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। टीम यह पता लगाएगी कि कैसे वहां का संचालन तंत्र (Management System) काम करता है और कौन से अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण मरीजों की रिकवरी दर को बढ़ाते हैं। डीसी का स्पष्ट विजन है—”बोकारो की यूनिट सिर्फ खुले नहीं, बल्कि देश की सर्वश्रेष्ठ यूनिट्स को टक्कर दे।”

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    एक ही छत के नीचे: इमरजेंसी से प्लास्टिक सर्जरी तक का कवच

    प्रस्तावित बर्न यूनिट को झुलसे मरीजों के लिए एक ‘कम्पलीट लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ के रूप में डिजाइन किया जा रहा है। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि इसमें निम्नलिखित उच्च-स्तरीय सुविधाएं अनिवार्य रूप से होंगी:

    अत्याधुनिक बर्न इमरजेंसी: तत्काल रिस्पॉन्स के लिए 24×7 सक्रिय क्रिटिकल केयर यूनिट।

    विशेषीकृत बर्न आईसीयू (BICU): संक्रमण (Infection) रोकने के लिए हेपा-फिल्टर और जीरो-बैक्टीरिया वातावरण वाली सुविधाएं।

    प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग: झुलसने के कारण आई शारीरिक विकृतियों को ठीक करने के लिए अत्याधुनिक सर्जरी की व्यवस्था।

    इनफेक्शन कंट्रोल यूनिट: झुलसे मरीजों के लिए संक्रमण सबसे बड़ा दुश्मन होता है, जिसके लिए विशेष निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा।

    पुनर्वास और काउंसलिंग: शारीरिक घावों के साथ-साथ मरीजों को मानसिक आघात (Trauma) से उबारने के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र।

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    जल्द निकलेगा टेंडर, सिविल सर्जन को निर्देश

    उपायुक्त ने सिविल सर्जन डॉ. ए.बी. प्रसाद को निर्देश दिया कि वे एक ऐसा संचालन मॉडल और आरएफपी (RFP) तैयार करें जो तकनीकी रूप से सुदृढ़ और आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो। इसे जल्द ही आंतरिक निविदा समिति के समक्ष पेश किया जाएगा, जिसके बाद ग्लोबल टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। डीसी ने जोर दिया कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता का कड़ाई से पालन हो। बैठक में उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार, डॉ. संजय कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बहरहाल, प्रशासन की यह पहल बोकारो के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि वर्तमान में गंभीर बर्न केसेज को रांची या कोलकाता रेफर करना पड़ता है, जिससे Golden Hour (इलाज का सबसे महत्वपूर्ण समय) बर्बाद हो जाता है। अब बोकारो खुद इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हो रहा है।

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