सफलता के लिए समय प्रबंधन और दृढ़निश्चय के साथ कड़ी मेहनत जरूरी : शाश्वत

2008 बैच के मेधावी छात्र गोमती एसपी ने डीपीएस बोकारो के विद्यार्थियों को दिए अनोखे टिप्स

बोकारो : दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), बोकारो के पूर्व छात्र (2008 बैच) एवं वर्तमान में त्रिपुरा में गोमती जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) शाश्वत कुमार ने शनिवार को डीपीएस प्रांगण पहुंचकर अपनी पुरानी यादें विद्यार्थियों व शिक्षकों के साथ साझा कीं। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को परीक्षाओं के साथ-साथ जीवन के हर क्षेत्र में कामयाबी के गुर सिखाए। अपने अतिथि व्याख्यान में उन्होंने 12वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को करियर चुनने के तरीके, परीक्षा से पूर्व की सटीक तैयारी और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में कामयाबी के टिप्स बताए। उन्होंने बच्चों से कहा कि कड़ी मेहनत के साथ-साथ पढ़ाई के लिए समय-प्रबंधन सबसे जरूरी है। स्कूल-कोचिंग के बाद घर में अगर कम से कम तीन घंटे नहीं पढ़ेंगे, तो सफलता नहीं मिलेगी। स्कूल अनुभवों का संसार है, जहां से मिलीं सीखें जीवन के हर क्षेत्र में काम आती हैं। डीपीएस बोकारो से मिले अपने अनुभवों को अपने जीवन के लिए उन्होंने मील का पत्थर बताया। बच्चों से कहा- जिस क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं, वो डंके की चोट पर चुनें। अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़संकल्पित रहें। दबाव और परेशानियां आएंगी, परंतु उन्हें कैसे संभालना है, यह आप पर निर्भर करता है। अपने दोस्तों, रिश्तेदारों सहित सभी लोगों की सुनें जरूर, उनकी राय लें, पर करें वही जो आप अच्छे से कर सकते हैं। दूसरों की गलतियों से सीख भी लें। जीवन आपका है, जिम्मेदारी आपकी है, इसलिए निर्णय भी आपका ही होना चाहिए।

परीक्षा से 6 माह पहले सोशल मीडिया से बना लें दूरी

इस दौरान बच्चों के प्रश्नों का जवाब देते हुए उन्होंने इंजीनियरिंग, मेडिकल, यूपीएससी व अन्य परीक्षाओं में 10वीं, 12वीं और स्नातक के अंकों की अहमियत समझाई। कहा कि हर हाल में बच्चे 12वीं में अच्छे अंक लाने का पूरा प्रयास करें। परीक्षा से छह माह पहले सोशल मीडिया से दूरी बनाना बेहतर है। इसके लिए जीवन में आगे काफी समय है, लेकिन परीक्षा का दौर एक बार गुजर गया तो दोबारा नहीं आएगा। अगर बीच में रिलैक्स होना है, तो यूट्यूब वीडियो देखने की बजाय गाना सुनें। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए यूपीएससी परीक्षा में विषय-चयन, इंजीनियरिंग में कॉन्सेप्ट की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि आईपीएस या आईएएस अफसर बनने के लिए मानसिक मजबूती, लगन और जज्बा जरूरी है। कोई जरूरी नहीं कि पहली बार में ही सफलता मिलेगी, पर इससे हताश नहीं होना है। इसी प्रकार छोटी सफलता पर न अति उत्साहित हों और न ही विफलता पर हतोत्साहित।

2016 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं शाश्वत
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इंस्ट्रूमेंटेशन में इंजीनियरिंग कर चुके शाश्वत 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने वर्ष 1997 से 2008 तक डीपीएस बोकारो में पढ़ाई की थी। विद्यालय में आगमन पर प्राचार्य ए.एस. गंगवार ने उनका स्वागत किया और अपनी शुभेच्छाएं व्यक्त की।

– Varnan Live Report.

‘Bodhi Tree Dialogues 2022’ : राष्ट्रीय संवाद प्रतियोगिता में DPS बोकारो को मिला प्रथम स्थान

डॉ. अंबेडकर की जीवनी पर अंग्रेजी एकांकी के सफल मंचन के लिए मिला पुरस्कार

बोकारो : दिल्ली पब्लिक स्कूल बोकारो के विद्यार्थियों ने शिक्षा के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा राष्ट्रीय स्तर पर मनवाया है। दिल्ली पब्लिक स्कूल, गया (बिहार) की मेजबानी में आयोजित राष्ट्रस्तरीय संवाद प्रतियोगिता – ‘बोधी ट्री डायलॉग्स 2022’ में इस विद्यालय की टीम ने पहला स्थान प्राप्त किया है। टीम ने प्रतियोगिता की अंग्रेजी एकांकी (इंग्लिश ड्रामाटिक्स) स्पर्धा में पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता में 9 राज्यों से कुल 16 विद्यालयों की टीमों ने वर्चुअल मोड में भाग लिया था।
डीपीएस बोकारो के विद्यार्थियों ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जीवनी पर आधारित एकांकी प्रस्तुत कर अपने अभिनय कौशल से सबकी भरपूर सराहना बटोरी। टीम में शामिल 12वीं कक्षा के सार्थक श्रेष्ठ, अनुष्का सिंह, अनुराग कुमार और विक्रमादित्य राय ने शानदार अभिनय का परिचय दिया। उन्होंने डॉ. अंबेडकर द्वारा सामाजिक कुरीतियों को दूर करने की दिशा में उनके अतुलनीय योगदान और समाज में समरसता की स्थापना के साथ-साथ संविधान-निर्माण में उनकी भूमिका पर जीवंत प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर सनबीम स्कूल वरुणा (वाराणसी, उ.प्र.) की टीम रही, जबकि माउंट लिटेरा जी स्कूल, अमृतसर एवं बीके बिरला पब्लिक स्कूल, कल्याण (महाराष्ट्र) ने संयुक्त रूप से तीसरा स्थान प्राप्त किया।
गुरुवार को डीपीएस बोकारो में आयोजित एक विशेष असेंबली के दौरान प्राचार्य ए. एस. गंगवार ने विजेता टीम में शामिल अपने विद्यालय के विद्यार्थियो को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में कलात्मक प्रतिभा का विकास भी आवश्यक है और इस दिशा में भी डीपीएस बोकारो सतत प्रयासरत है।

– Varnan Live Report.

UCC (Uniform Curriculum for all Children) before UCC (Uniform Civil Code)

In the current environment, Uniformity in the curriculum for Children (UCC) education is much more needed than the Uniform Civil Code(UCC).

  1. Can we have 30 Lakh children remain in Medieval Education?
  2. Can we have 8000 crore of public exchequer spent annually on Madarsas?
  3. Can we allow lakhs of Maulanas teach Islamic Jihad to 30 lakh kids?
  4. Can we allow continuous jihad production machine to continue without a break?

The country to should answer the question of how the children should study before thinking about how adults should marry and inherit.

Hindutva movement should have some feminine touch

Mahua Moitra, the outspoken TMC MP, in her outburst in support of the Movie Kali has raised a lot of libertarian point of view which is being debated in the formal media and social media with sharp antagonism on both the sides; but, she has also raised a point of view which should be noted by the leadership in the RSS and BJP ranks.

She has said that RSS and BJP should not try to force north Indian view of Hinduism. is there such a view?

I do not know the answer to this question, but when I look back at the RSS iconography of of Hindutva, it only reflects Ram, Shiva, Krishna, Kartikeya etc. The Gods are prominent and Goddesses are absent in their articulation, narratives, discourses and explorations. Ram Mandir at Ayodhya has been fought for, but Sita temple at Sitamarhi has been ignored, Krishna Janmabhoomi is in all public discourse but, Radha temple in Dwarka is not spoken about, Shiva is all over, but Parvati is not highlighted enough. In my view, this is one big constituency that RSS and BJP are missing out and that is Women and specially the Eastern parts of India where the popular form of God icon is feminine. Tarapeeth, Kamakhya, Rajrappa are three of the nine shakti peeths of eastern India which has shaped the religious and spiritual world view in this part of the country. They have promoted the shakt tradition and several sub-traditions which includes tantrik and aughar traditions also. These traditions venerate the feminine form of shakti and the praying rituals are very different from the other Vaishnava rituals. BJP and RSS should include them in their narratives of Hindutva to get more inclusive in the eastern part of the country. This is an idea for RSS and BJP to expand and consolidate their social outreach. This will re-inforce the Hindutva ideology and also expand the narrative without Diluting it.

Let us talk about Mahua Moitra’s response in support of the movie Kali. No one can deny that what Mahua said was factually right; but,

given that the movie Kali is created to demean Indian polytheistic tradition, her statement when looked at in the context of her support to the movie makes it derogatory.

सत्यम ब्रूयात प्रियं ब्रूयात न ब्रूयात सत्यम अप्रियम 

we have been taught to speak the truth but avoid speaking rude truth (mind you, I do not say Harsh Truth , but I say Rude Truth)

शिष्य को निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देनेवाले प्रकाशपुंज हैं गुरु : श्रीमाली

हरिद्वार के स्वामी नारायण आश्रम में ‘सौभाग्य-कीर्ति गुरु पूर्णिमा महोत्सव’ शुरू

हरिद्वार : देवनगरी हरिद्वार के भूपतवाला स्थित स्वामी नारायण आश्रम में निखिल मंत्र विज्ञान एवं सिद्धाश्रम साधक परिवार की ओर से दो-दिवसीय सौभाग्य-कीर्ति गुरु पूर्णिमा महोत्सव का शुभारंभ मंगलवार को गणपति पूजन एवं गुरु पूजन के साथ हुआ। परमहंस स्वामी निखिलेश्वरनन्द (डॉ नारायण दत्त श्रीमाली) एवं माता भगवती की दिव्य छत्रछाया में आयोजित इस महोत्सव के पवन अवसर पर प्रथम दिवस गुरुदेव श्री नन्दकिशोर श्रीमाली ने देश-विदेश से हजारों की संख्या में आये श्रद्धालुओं व शिष्यों के बीच अपने प्रवचन की अमृतवर्षा करते हुए गुरु-शिष्य परम्परा पर विस्तृत प्रकाश डाला। 

उन्होंने कहा कि गुरु का कार्य केवल ब्रह्मा, विष्णु और महेश का नहीं, बल्कि शिष्य को निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा देना भी है। शास्त्रों में कहा गया है कि गुरु कभी ब्रह्मा का, कभी विष्णु का तो कभी शिव का रूप धारण करते हैं और यही ब्रह्म अपनी ज्योति गुरु के रूप में अभिव्यक्त करते हैं। इसलिए सीधा-सीधा कहा गया कि गुरु एक प्रकाश-पुंज हैं और गुरु का कार्य है शिष्य की उसकी शक्ति से मिलवाना। जिस दिन शिष्य का अपनी शक्ति से मिलन हो जाता है, उस दिन शिष्य पूर्णता की ओर कदम बढ़ा लेता है। शिष्य के हृदय में आशा और प्रेम की गंगा होनी चाहिए। बिना प्रेम के मन में भाव आ नहीं सकते। जितना अधिक आप अपने भाव को सकारात्मक करोगे, उतना ही अधिक आप अपने अभावों को भी दूर करोगे। जिसका भाव सकारात्मक  नहीं हुआ, उसके जीवन में अभाव आया। इसलिए गुरु आपके भावों को जागृत करने की क्रिया करते हैं। 

उन्होंने कहा कि जीवन में वस्तुओं के स्थान पर अपने भावों को संभाल कर रखना है। बिना प्रेम के भाव आ ही नहीं सकते। उन्होंने दूसरों से प्रेम करने से पहले खुद से प्रेम करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रेम ही सबसे बड़ी शक्ति है। जब प्रेम होगा तो लक्ष्य के प्रति एकाग्रता आएगी। कर्म तो करना ही है, लेकिन उसे अपने भाव के साथ करो। उन्होंने मन की धारा को देवत्व की ओर मोड़ने की प्रेरणा दी।

महोत्सव के पहले दिन गुरुदेव ने शिष्यों को गुरु-दीक्षा के साथ ही हनुमान और पूर्व जन्मकृत दोष निवारण की शक्तिपात दीक्षाएं भी प्रदान की। कार्यक्रम का संचालन राम चैतन्य शास्त्री एवं मनोज भारद्वाज ने किया। साथ ही महेन्द्र सिंह मानकर के भजन गायन पर सभी साधक झूमते-थिरकते रहे।

– Varnan Live Report.

Economic Boycott will break Muslim community – Is Hindu ready to welcome them

Over last few months, the increasing tension between Hindus and Muslims over multiple issues seem to have lead to an economic war between the two communities with both the slides calling for an economic boycott of the other sides. There have been several call outs for such boycott by Ajmer Dargah and other Islamic Mullah community. On the other hand, there are several reports suggesting that Hindus have stopped going to the Dargah which constituted about 80% drop in the sales.

Difficult to even guess what could be key drivers for Muslim groups to get in to a competitive scenario against Hindus in terms of economic strength. Hindus are more in numbers and have multiple times more economic prowess. The only reason I can think of is their desire to create strong Muslim polarization against the current dispensation. This has been their standard strategy which has, of late, been failing them. This strategy worked very well till 2010 where they were able to use any pretext like Ayodhya, Godhra, Haj Subsidy etc to create that polarization in support of their political agenda. Times have changed, and every time there is Muslim polarization, the reverse polarization is even stronger.

There are few factors which I think is leading to such reactions

Muslim community is static and ossified in time while Hindu Society is constantly evolving and modernizing

Unsuspecting Ummah, Commanding Mullah, network of Masjid, Asraf and elite Marxist and power licking Media have been the five pillars of Muslim world ever since India got independence. Nehru was the harbinger of this five pillared eco-system and this eco system has been so much oiled and lubricated that any amount of friction and stress to it did not do this any harm. The challenge is that this also lead to the large section of Pasmanda Muslim (who are 80% of the Muslim population) remain in medieval ages with no avenues for social and economic emancipation.

Hindu society, however got on to modernizing itself with continuously increasing levels of education and breaking different social stigmas like caste system, illiteracy, child marriage, dowry etc. Hindu society has been characterized by modernity, literacy, education and scholarship, entrepreneurship and independence. In the process they have also learnt to assert themselves as a group. This process also has lead to Hindus realizing the severity of historical wrongs that have been done at the cost of Muslim Minority.

The above scenario is only going to increase the conflict because the Muslim group is such an organized eco-system that they are not going to let their power so easily. Hindus are not going to let this go any more because this is just the start of resurgence. The current resurgence is an outcome of only small segment of Hindu population that is standing up. Hindu society resurgence is impacted by a big section of Hindu population still living in socialist euphoria. As the time passes, more and more Hindus will come out of that euphoria and more and more Hindus of new generation will realize the historical wrongs and they will be more and more assertive.

Economic Boycott is going to destroy Muslim community

This is the start of end of Muslim Ummah. Pasmanda Muslims will be the hardest hit in this economic boycott because they are the ones at the lowest end of the economic pyramid. Asraf Muslims are the ones creating the agenda, while the Pasmanda Muslims are the ones who will be the hardest hit. Times have changed and Pasmanda Muslims are increasingly loosing the love for ummah and Islam. It is going to increase the distrust with the Mullah and dependence on Masjid. The Elite Media is anyway loosing their grip with the social media proliferation.

Is Hindu society ready to welcome Pasmanda Muslims

Big question is to Hindu society – is it ready to welcome those whose fore-fathers had to accept Islam for whatever reasons they may have. Is this society ready to create a respectable space for them in the society? I leave this question un-answered

  1. https://tfipost.com/2022/07/the-message-for-hindus-from-ajmer-dargah-is-loud-and-clear/
  2. https://www.news18.com/news/india/eid-celebrations-at-ajmer-dargah-hit-after-provocative-slogans-by-khadims-sellers-complain-of-loss-of-crores-5526079.html
  3. https://www.newsbharati.com/Encyc/2022/7/9/Ajmer-Dargah-Khadim-calls-for-economic-boycott-of-Hindus.html
  4. https://www.thejaipurdialogues.com/indic-corner/islam/caste-division-in-islam/

दृढ़ निश्चय के साथ बनाएं लक्ष्य, कामयाबी कदम चूमेगी : एसपी

भारत के विख्यात गणितज्ञ आनंद के ‘सुपर-30’ के मेंटर एसपी चंदन झा ने डीपीएस बोकारो में विद्यार्थियों को दिए सफलता के टिप्स, कहा-

बोकारो :  ‘अगर आपने दृढ़ निश्चय के साथ एक लक्ष्य निर्धारित किया है और उसके प्रति सच्ची लगन व परिश्रम के साथ सतत प्रयास करते हैं तो एक न एक दिन कामयाबी आपके कदम जरूर चूमेगी। आपका लक्ष्य मजबूत और केंद्रित होना चाहिए।’ उक्त बातें बोकारो के पुलिस अधीक्षक चंदन कुमार झा ने डीपीएस बोकारो में गुरुवार को 12वीं के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही। ज्ञातव्य है कि श्री झा भारत के विख्यात गणितज्ञ आनंद के ‘सुपर-30’  में मेंटर भी रह चुके हैं, जिन्होंने 2003 से 2007 तक वहां विद्यार्थियों को पढ़ाया है।


   विद्यालय के कालीदास कला भवन में अतिथि व्याख्यान के तहत आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उन्होंने बच्चों से कहा कि वे जितनी मेहनत करेंगे, उनकी क्षमता उतनी ही अधिक बढ़ेगी। अपनी कमजोरी पर काम करना होगा और सर्वश्रेष्ठ का लक्ष्य बनाकर चलना होगा। सफलता और असफलता के बाद की स्थितियों का भी संतुलन जरूरी है। उन्होंने सफलता में सामाजिक जीवन और पेशेवर जीवन में बैलेंस जरूरी बताया।
    एसपी ने विद्यार्थियों को 12वीं की परीक्षा के साथ-साथ संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), इंजीनियरिंग एवं अन्य परीक्षाओं में भी सफलता के टिप्स दिए। विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उनकी जिज्ञासाएं शांत कीं। उन्होंने विज्ञान और कला संकायों में मूल अंतर बताते हुए कहा कि साइंस में विषयों का बेसिक अगर आप समझ गए हैं, तो कोई परेशानी नहीं होगी। उन्होंने इंजीनियरिंग और यूपीएससी परीक्षा में अपनी सफलता के अनुभव विद्यार्थियों से साझा करते हुए इसके पैटर्न बताए। कहा कि यूपीएससी में कम्युनिकेशन स्किल काफी मायने रखता है, इसलिए अभी से ही इसे मजबूत बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिविल सर्विसेज की परीक्षा में यह जरूरी नहीं कि पहले प्रयास में ही कामयाबी मिल जाए। अगर आपका लक्ष्य मजबूत होगा, तो सफलता निश्चित मिलेगी। नाकामी से हताश नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार वह ‘गंगाजल’ फिल्म देखकर प्रेरित हुए और गणित शिक्षक बनने की बजाय उनका लक्ष्य आईपीएस अधिकारी बनने के लिए केंद्रित हो गया।

भावनाओं में बहकर नहीं लें कोई फैसला, माता-पिता के अनुभवों का करें आदर
एसपी ने विद्यार्थियों को अपने जीवन के अनुभव बताते हुए उन्हें प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज वह जो कुछ भी हैं, अपने पिता की प्रेरणा से ही हैं। हमें अभिभावकों के अनुभवों से लाभ लेना चाहिए। उनकी सलाह का आदर अवश्य करें। आप में जोश है, लेकिन अभी परिपक्वता नहीं है। आप मोबाइल युग के हैं और आपका दायरा फिलहाल काफी सीमित है, इसलिए भावनाओं में बहकर कोई भी निर्णय न लें। अपनी रुचि और सलाह के आधार पर ही अच्छी तरह रिसर्च करने के बाद करियर चुनें। इस दौरान विद्यार्थियों ने एसपी को स्मृति चिन्ह भेंट किया। इसके पूर्व विद्यालय में श्री झा के आगमन पर प्राचार्य ए.एस. गंगवार ने उनका स्वागत किया और विद्यार्थियों को अपना मार्गदर्शन देने के लिए उनके प्रति आभार जताया।

– Varnan Live Report.

निर्धन बच्चों को मुफ्त हुनरमंद और स्वावलंबी बनाएगा DPS बोकारो, ‘Skill Hub’ का शुभारंभ

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बोकारो। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ सामुदायिक विकास की दिशा में दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो ने एक और अहम कदम बढ़ाया है। विद्यालय ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 3.0 के तहत ‘स्किल हब’ (कौशल केंद्र) की शुरुआत की है। इसमें वयस्क प्रशिक्षुओं एवं स्कूल से दूर बच्चे हुनरमंद और स्वावलंबी बनाए जाएंगे। इसका शुभारंभ सोमवार को जिले के उपायुक्त कुलदीप चौधरी ने बतौर मुख्य अतिथि किया। सम्मानित अतिथि के रूप में जिला शिक्षा पदाधिकारी नीलम आइलिन टोप्पो मौजूद रहीं।
इस अवसर पर उपायुक्त श्री चौधरी ने डीपीएस बोकारो में स्किल हब के शुभारंभ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अपनी शुभकामनाएं दीं तथा निःशुल्क प्रशिक्षण को सराहा। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद बच्चों का चयन कर उन्हें तीन महीने या 50 घंटे की ट्रेनिंग दी जाएगी। सरकारी स्कूलों में भी ऐसे कार्यक्रम चल रहे हैं। अन्य निजी शिक्षण संस्थानों के साथ भी मिलकर आगे की रणनीति बना रहे हैं। ऐसे कार्यक्रमों का कॉमन डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर), डीएमएफटी फंड व अन्य संसाधनों के सहयोग से इस तरह के कार्यक्रम अलग-अलग स्थानों पर भी चलाकर हुनरमंद बच्चों को रोजगार से जोड़ने की योजना बना रहा है।

वहीं,  जिला शिक्षा पदाधिकारी श्रीमती टोप्पो ने कहा कि डीपीएस एजुकेशनल हब के साथ-साथ अब स्किल हब भी बन गया है। उन्होंने हुनर सीखकर युवाओं की आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की दिशा में कौशल विकास को अहम बताया। अपने स्वागत संबोधन में विद्यालय के प्राचार्य ए. एस.गंगवार ने डीपीएस बोकारो की इस पहल, शैक्षणिक गतिविधियों व उपलब्धियों के साथ-साथ सामुदायिक विकास के प्रयासों आदि पर प्रकाश डाला। कहा कि स्कूल अपने खर्च पर आर्थिक रूप से कमजोर 36 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देकर दक्ष व स्वावलंबी बनाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बच्चों को शिक्षित के साथ-साथ दक्ष बनाए जाने पर भी जोर दिया गया है। इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त श्री चौधरी, डीईओ श्रीमती टोप्पो, विद्यालय के प्राचार्य श्री गंगवार एवं अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद स्कूल की छात्राओं ने स्वागत गान और समाज में बेटियों की उपेक्षा एवं कौशल विकास से उनके स्वावलंबन पर आधारित नृत्य प्रस्तुत कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान उपायुक्त ने ‘स्किल हब’ के सभी प्रशिक्षुओं के बीच कसीदाकारी किट का वितरण भी किया। कार्यक्रम में राधाकृष्ण सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स से संबद्ध विद्यालयों के दर्जनों प्राचार्य भी उपस्थित रहे।

कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों और ड्रॉपआउट को मिलेगा प्रशिक्षण
नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप डीपीएस बोकारो अपने स्किल हब के तहत प्रशिक्षण देगा। इसमें कक्षा-  6 से 12वीं तक के आबादी वर्ग और स्कूल छोड़ने वालों को लक्षित कर व्यावसायिक प्रशिक्षण के जरिए उनका कौशल विकास किया जाएगा। इसमें कसीदाकारी कला चिकनकारी की खास तौर से ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए कुशल, प्रशिक्षित और अनुभवी रिसोर्स पर्सन रखे गए हैं। बालिका अभ्यर्थियों के लिए विशेष प्रावधान है, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी होने के लिए प्रशिक्षित किया जा सके।

1 से 3 महीने होगी पाठ्यक्रम की अवधि
प्राचार्य श्री गंगवार ने बताया कि विद्यालय में सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक, दोनों भौतिक रूप से संचालित किए जाएंगे। पाठ्यक्रम की अवधि 1 से 3 महीने के बीच न्यूनतम 50 घंटे या उससे अधिक के लिए होगी। अतिथि व्याख्यान, क्षेत्र भ्रमण और आवश्यकतानुसार पाठ्यक्रम के एक हिस्से के रूप में इंटर्नशिप का प्रावधान भी रखा गया है। शॉर्ट टर्म कोर्स के पूरा होने के बाद सीबीएसई मूल्यांकन की रूपरेखा के अनुसार प्रशिक्षुओं के लिए सैद्धांतिक और व्यावहारिक मूल्यांकन होगा। पाठ्यक्रम के सफल समापन के बाद सीबीएसई द्वारा प्रशिक्षुओं को स्किल इंडिया के ‘लोगो’ से युक्त प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। स्किल हब की पहल प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) 3.0 के तहत कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) द्वारा शिक्षा मंत्रालय के परामर्श से की गई है।

– Varnan Live Report.

शरीर, मन और आत्मा को एकसूत्र में पिरोता है योग : गंगवार

डीपीएस बोकारो में योग दिवस पर विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सीखे स्वस्थ जीवन के गुर

बोकारो: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आठवां आयोजन 21 जून (मंगलवार) को दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो में सोल्लास किया गया। इस अवसर पर विद्यालय में अध्ययनरत हजारों बच्चों के साथ-साथ समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी एक साथ योगाभ्यास किए। सभी ने फिटनेस के लिए जमकर पसीने बहाए और स्वस्थ रहने के लिए नियमित योगाभ्यास का संकल्प लिया। क्या छोटा, क्या बड़ा, हर उम्र के, हर कक्षा के छात्र-छात्राओं ने पूरे मनोयोग के साथ योग और आसन का अभ्यास किया। विद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग के निर्देशन में छात्र-छात्राओं को सूर्य नमस्कार, भुजंगासन, ताड़ासन, मंडूकासन, वज्रासन, पद्मासन सहित भ्रामरी, अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भत्स्रिका सहित विभिन्न प्रकार के आसनों और प्राणायाम का अभ्यास कराया गया।

छोटे-छोटे बच्चों का अभ्यास करना विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा। नन्हीं-नन्हीं उंगलियों से अपनी नासिका को दबाकर कोई अनुलोम-विलोम कर रहा था, तो कोई कपालभाती। विभिन्न तरह के आसन और कसरतों में उनके लचकते हाथ-पैर कार्यक्रम की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे थे। बच्चों को मुरली की मधुर तान की पार्श्व ध्वनि के बीच ध्यान लगाने का प्रशिक्षण दिया गया। इस क्रम में कक्षा- 6 से 9 के विद्यार्थियों ने योगासन की विभिन्न मुद्राओं पर आधारित प्रस्तुति दी। वहीं, सेक्टर-5 स्थित विद्यालय के प्राइमरी विंग में बच्चों ने प्लेकार्ड्स, बैनर, क्लेआर्ट के जरिए योग दिवस पर अपनी रचनात्मकता का कौशल भी दिखाया।

     इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य ए.एस. गंगवार ने कहा कि योग ऋषि-मुनियों द्वारा प्रदत्त अद्वितीय वरदान और शरीर, मन व आत्मा को एकसूत्र में जोड़ने का विधान है, विज्ञान है। समस्त विश्व को दी गई भारतीय संस्कृति की यह अनमोल धरोहर और स्वस्थ मानव जीवन के लिए एक सफल औषधि है। इस बार योग दिवस की थीम ‘मानवता के लिए योग’ और कोरोनाकाल में किस प्रकार योग ने लोगों की पीड़ा कम की, इस पर भी उन्होंने प्रकाश डाला। कहा कि योग शारीरिक और मानसिक अनुशासन में संतुलन के साथ-साथ तनाव से मुक्ति, चिंता प्रबंधन और आत्मविश्वास विकसित करने का सशक्त माध्यम भी है। इसलिए, बच्चे नियमित योगाभ्यास की आदत अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास है और स्वस्थ मन में ही अच्छे और स्वच्छ विचार आते हैं। यही सफलता, प्रसन्नता और प्रगति दिलाने में सहायक हैं।

-Varnan Live Report.

डीपीएस बोकारो के न्यूजलेटर ‘क्रॉनिकल्स’ और गृह पत्रिका ‘जेनिथ’ का विमोचन

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बोकारो। दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो के इन-हाउस न्यूजलेटर ‘डीपीएस बोकारो क्रॉनिकल्स’ और गृह पत्रिका ‘जेनिथ’ का विमोचन मंगलवार को स्कूल असेंबली के दौरान किया गया। विद्यालय के प्राचार्य ए.एस. गंगवार व अन्य वरिष्ठ शिक्षकों ने संयुक्त रूप से इसका विमोचन किया। ‘जेनिथ’ में विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों के साथ-साथ के छात्र-छात्राओं की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उपलब्धियों, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य एवं बच्चों के सर्वांगीण विकास को लेकर किए जा रहे प्रयासों का सुंदर चित्रण किया गया है।


वहीं, स्कूल के जमुना हाउस के बच्चों द्वारा प्रकाशित इन-हाउस न्यूजलेटर ‘डीपीएस बोकारो क्रॉनिकल्स’ के प्रथमांक में कोरोनाकाल के दो साल बाद विद्यालय के दोबारा संचालन, विद्यालय की ओर से पृथ्वी व मिट्टी-संरक्षण, स्वास्थ्य दिवस, अंतरसदन आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं की खबरों के अलावा उनके द्वारा रचित कविता, कहानी, पहेलियां आदि को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है। इन दोनों पत्रिकाओं का ई-वर्जन स्कूल की वेबसाइट पर मुहैया कराया गया है।

एसेम्बली को संबोधित करते प्राचार्य एएस गंगवार।
एसेम्बली में प्रार्थना करते बच्चे।

इस अवसर पर प्राचार्य ने कहा कि छात्र-छात्राओं में पढ़ाई के साथ-साथ साहित्यिक व कलात्मक गुणों और रचनात्मकता का विकास भी जरूरी है। इस दिशा में डीपीएस बोकारो लगातार कटिबद्ध और प्रयासरत है। उन्होंने न्यूजलेटर को बच्चों की प्रतिभा उकेरने और प्रदर्शित करने का एक सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी चुनौतियों से घबराएं नहीं। अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहें और उसे पाने की दिशा में सतत प्रत्यत्नशील रहें।

– Varnan Live Report.