DC अजय नाथ झा का Master Plan, 10 दिन के भीतर Ground-Study

Bokaro : अब गंभीर रूप से झुलसे मरीजों की जिंदगी और मौत के बीच के फासले को बोकारो प्रशासन एक विश्वस्तरीय सेतु से भरने जा रहा है। जिले के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाते हुए उपायुक्त (DC) अजय नाथ झा ने बोकारो में एक अत्याधुनिक और पूर्णतः समर्पित Burn Unit की स्थापना का बिगुल फूंक दिया है। मंगलवार को समाहरणालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में डीसी ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब जिले के मरीजों को इलाज के अभाव में महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।

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महानगरों जैसा इलाज अब बोकारो में, टीम करेगी टॉप अस्पतालों का ऑडिट

इस परियोजना को महज एक सरकारी वार्ड न मानकर एक ‘उत्कृष्टता केंद्र’ (Centre of Excellence) के रूप में विकसित करने के लिए डीसी ने एक विशेषज्ञ टीम का गठन किया है। इस टीम को अगले 10 दिनों के भीतर देश के उन शीर्ष अस्पतालों का ‘ऑन-ग्राउंड स्टडी’ करने का निर्देश दिया गया है, जहां बर्न यूनिट्स सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। टीम यह पता लगाएगी कि कैसे वहां का संचालन तंत्र (Management System) काम करता है और कौन से अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण मरीजों की रिकवरी दर को बढ़ाते हैं। डीसी का स्पष्ट विजन है—”बोकारो की यूनिट सिर्फ खुले नहीं, बल्कि देश की सर्वश्रेष्ठ यूनिट्स को टक्कर दे।”

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एक ही छत के नीचे: इमरजेंसी से प्लास्टिक सर्जरी तक का कवच

प्रस्तावित बर्न यूनिट को झुलसे मरीजों के लिए एक ‘कम्पलीट लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ के रूप में डिजाइन किया जा रहा है। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि इसमें निम्नलिखित उच्च-स्तरीय सुविधाएं अनिवार्य रूप से होंगी:

अत्याधुनिक बर्न इमरजेंसी: तत्काल रिस्पॉन्स के लिए 24×7 सक्रिय क्रिटिकल केयर यूनिट।

विशेषीकृत बर्न आईसीयू (BICU): संक्रमण (Infection) रोकने के लिए हेपा-फिल्टर और जीरो-बैक्टीरिया वातावरण वाली सुविधाएं।

प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग: झुलसने के कारण आई शारीरिक विकृतियों को ठीक करने के लिए अत्याधुनिक सर्जरी की व्यवस्था।

इनफेक्शन कंट्रोल यूनिट: झुलसे मरीजों के लिए संक्रमण सबसे बड़ा दुश्मन होता है, जिसके लिए विशेष निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा।

पुनर्वास और काउंसलिंग: शारीरिक घावों के साथ-साथ मरीजों को मानसिक आघात (Trauma) से उबारने के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र।

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जल्द निकलेगा टेंडर, सिविल सर्जन को निर्देश

उपायुक्त ने सिविल सर्जन डॉ. ए.बी. प्रसाद को निर्देश दिया कि वे एक ऐसा संचालन मॉडल और आरएफपी (RFP) तैयार करें जो तकनीकी रूप से सुदृढ़ और आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो। इसे जल्द ही आंतरिक निविदा समिति के समक्ष पेश किया जाएगा, जिसके बाद ग्लोबल टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। डीसी ने जोर दिया कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता का कड़ाई से पालन हो। बैठक में उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार, डॉ. संजय कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बहरहाल, प्रशासन की यह पहल बोकारो के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि वर्तमान में गंभीर बर्न केसेज को रांची या कोलकाता रेफर करना पड़ता है, जिससे Golden Hour (इलाज का सबसे महत्वपूर्ण समय) बर्बाद हो जाता है। अब बोकारो खुद इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हो रहा है।

  • Varnan Live Report.

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