न्याय के बजाय दुर्भावना की दुर्गंध!

शिक्षा की साख कलंकित करने की कोशिश?

बोकारो : शिक्षा की राजधानी कहे जाने वाले बोकारो की साख को गुरुवार को प्रशासन ने कलंकित करने की ऐसी कोशश की कोशिश की, जिसने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आने लगे और शासन की कार्रवाई से न्याय के बजाय दुर्भावना की दुर्गंध आने लगे तो लोगों का आहत और आक्रोशित होना स्वाभाविक है। DPS Bokaro बोकारो जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की कैन्टीन को बिना किसी ठोस कारण या पूर्व सूचना के आनन-फानन में सील कर देना न केवल प्रशासनिक तानाशाही का प्रमाण है, बल्कि यह उन हजारों बच्चों और अभिभावकों की भावनाओं पर भी सीधा प्रहार है, जो इस विद्यालय को अपनी पहचान मानते हैं।


हैरानी की बात तो यह है कि इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने वाले फूड सेफ्टी ऑफिसर गुलाब लकड़ा और उनके सहायक ने पारदर्शिता को पूरी तरह धत्ता बता दिया। जब कैन्टीन संचालक ने सील करने का आधार और लिखित आदेश दिखाने का न्यायसंगत आग्रह किया, तो नियम-कायदे बताने के बजाय उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई। आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि प्रशासन को गुप्त तरीके से इस तरह का दमनकारी कदम उठाना पड़ा? क्या यह वही विभाग नहीं है, जिसने मात्र कुछ महीने पहले इसी कैन्टीन की स्वच्छता और गुणवत्ता की जमकर प्रशंसा की थी?

याद रहे कि 14 नवंबर 2025 को जब झारखंड के महामहिम राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार का आगमन डीपीएस बोकारो में हुआ था, तब उनके भोजन और जलपान की पूरी जिम्मेदारी इसी कैन्टीन ने संभाली थी। उस समय सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने वाला संस्थान अचानक कुछ ही महीनों में इतना असुरक्षित कैसे हो गया कि उसे सुधार का एक मौका दिए बिना सीधे तालाबंदी का सामना करना पड़ा? अगर कहीं कोई कमी थी भी तो नियमानुसार चेतावनी दी जा सकती थी या सैंपल लिए जा सकते थे, लेकिन सीधे सीलिंग की कार्रवाई चीख-चीख कर कह रही है कि इसके पीछे उद्देश्य सुधार नहीं, बल्कि विद्यालय की प्रतिष्ठा को धूमिल करना था।

प्रशासन के इस संदेहास्पद कृत्य ने न केवल नन्हे बच्चों के कोमल मन को झकझोर कर रख दिया, बल्कि उनके पेट पर भी हमला किया है। जिस कैंटीन में बच्चे रोज अपनी भूख-प्यास मिटाते थे, आज लगातार दूसरे दिन भी सैकड़ों मासूम भूखे वापस चले गए। दूसरी तरफ, शहर के प्रबुद्ध वर्ग के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर किसके इशारे पर इस शिक्षा के मंदिर के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया गया है? विद्यालय प्रबंधन ने इस पूरी प्रक्रिया को दुर्भावना से प्रेरित करार दिया है और अब जनता की अदालत में यह सवाल खड़ा है कि क्या जिले के आला अधिकारी एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान की साख को कलुषित करने के प्रयास को अपनी स्वीकृति दे पाएंगे?

  • Varnan Live Report.

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