चेयरमैन एस सुरेश कुमार और पूर्व सदस्य वित्त अरूप सरकार के कार्यकाल पर गंभीर उंगलियां

चहेतों को अवैध रेवड़ी की तरह बांटी गईं सीनियर मैनेजर की नौकरियां

संजय मिश्रा
बोकारो थर्मल/नई दिल्ली:
देश के पहले बहुद्देशीय नदी घाटी संगठन दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के भीतर चल रहे वित्तीय कुप्रबंधन, गंभीर प्रशासनिक घोटालों, अवैध नियुक्तियों और नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। डीवीसी के पूर्व मुख्य अभियंता अशोक कुमार जैन द्वारा बुधवार को देश की राजधानी दिल्ली से उजागर किए गए इन संगीन आरोपों के बाद हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्यसभा सांसद और केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के वरिष्ठ सदस्य दीपक प्रकाश ने सीधे केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर इस पूरे महा-घोटाले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष केंद्रीय जांच कराने की मांग की है।

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वेतन देने के पैसे नहीं बचे, डेलॉयट के चक्कर में डूबे करोड़ों
पूर्व मुख्य अभियंता के शिकायती पत्र के अनुसार, अप्रैल 2026 में डीवीसी के पास अपने कर्मचारियों को मासिक वेतन देने तक के पैसे शेष नहीं बचे थे। इस भयंकर नकदी संकट से निपटने के लिए प्रबंधन ने नियमों के विरुद्ध जाकर कर्मचारियों के पेंशन फंड ट्रस्ट से पैसे निकालने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन बाद में भारी दबाव के बीच बैंकों से शॉर्ट टर्म लोन लेकर किसी तरह इस दायित्व को पूरा किया गया। इस बदहाली की मुख्य वजह डीवीसी में एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) के लिए ‘सैप’ सॉफ्टवेयर के अधूरे और दोषपूर्ण कार्यान्वयन को माना गया है, जिसके कारण कमर्शियल इंजीनियरिंग विभाग उपभोक्ताओं को समय पर बिजली बिल भेजने में विफल रहा। करोड़ों रुपये की लागत वाले इस कार्य की जिम्मेदारी डेलॉयट कंपनी को सौंपी गई थी, जिसने तय समय पर काम पूरा नहीं किया। शिकायत में यह भी संगीन आरोप है कि पूर्व सदस्य (वित्त) अरूप सरकार ने अपने पद का दुरुपयोग कर अपने ही बेटे को इसी डेलॉयट कंपनी में ₹60 लाख सालाना के भारी-भरकम पैकेज पर नौकरी दिलवाई।


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बिना मंजूरी उड़ाए ₹300 करोड़, मृत लोगों के खाते में भेजी पेंशन!
डीवीसी प्रबंधन पर डीवीसी अधिनियम 1948 का खुला उल्लंघन करते हुए और केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) की अनिवार्य मंजूरी के बिना ही एनुअल इंसेंटिव के रूप में ₹300 करोड़ से अधिक का अनुचित व अवैध खर्च करने का आरोप है। इसके अलावा, बिना लाइफ सर्टिफिकेट जमा किए ही 1207 ऐसे पेंशनभोगियों को नियमित भुगतान किया गया जो धरातल पर थे ही नहीं। आंतरिक जांच होने पर मृत पेंशनभोगियों के खातों से लगभग ₹35 करोड़ की राशि वापस तो ली गई है, लेकिन इसकी गहरी जांच अभी भी जारी है। इतना ही नहीं, चेयरमैन, तीन बोर्ड सदस्यों और सीवीओ के लिए सरकारी पैसे से खरीदी गईं 5 चमचमाती लग्जरी गाड़ियों को बेहद मामूली शुल्क देकर अधिकारियों द्वारा स्वयं खरीद (बाय बैक) करने का एक नियम विरुद्ध प्रस्ताव बोर्ड से पास कराया गया, जिसका पूरा ट्रांसफर खर्च भी डीवीसी द्वारा ही वहन किया जाना तय हुआ।

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चहेतों के लिए बैकडोर एंट्री: 74 वर्षीय पूर्व मेयर को भी मिली मलाई
नियुक्तियों के मामले में भी डीवीसी के भीतर जमकर भाई-भतीजावाद चला। बिना किसी स्वीकृत पद के वर्ष 2026 में उत्पल गोस्वामी को सीधे सीनियर मैनेजर (रिन्यूएबल एनर्जी) के पद पर अवैध रूप से नियुक्त कर दिया गया। इसी तरह चेयरमैन की करीबी मानी जाने वाली अनन्या दत्ता चौधरी को भी सीनियर मैनेजर (HR) के पद पर बैकडोर से एंट्री दी गई। इसके साथ ही, डीओपीटी और सीवीसी के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए डिप्टी जनरल मैनेजर और सीनियर मैनेजरों की धड़ाधड़ नियुक्तियां की गईं। संविदा के आधार पर की जा रही नियुक्तियों में दुर्गापुर के पूर्व मेयर, जिनकी आयु करीब 74 वर्ष है, उन्हें विज्ञापन में तय 65 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा का खुला उल्लंघन करते हुए एसोसिएट कंसलटेंट (सिविल-प्रशासन) के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त कर दिया गया। प्रबंधन द्वारा 26 अन्य सलाहकारों की भी इसी तरह संदिग्ध नियुक्तियां की गई हैं।

31 मई को रिटायर हो रहे हैं चेयरमैन, साख बचाने के लिए उच्च स्तरीय जांच जरूरी
विदित हो कि डीवीसी के वर्तमान अध्यक्ष एस सुरेश कुमार आगामी 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जबकि डीवीसी के सदस्य (वित्त) अरूप सरकार गत 24 अप्रैल को अपना कार्यकाल पूरा कर अपने मूल संगठन में वापस लौट चुके हैं। ऐसे में उनके जाने से ठीक पहले उजागर हुए इस महा-घोटाले ने केंद्र सरकार को भी चौकस कर दिया है। सांसद दीपक प्रकाश ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से पुरजोर मांग की है कि एक उच्च स्तरीय विशेष जांच आयोग का गठन कर इन सभी वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि देश के सार्वजनिक धन को लूटने वाले दोषियों का पता लगाकर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और आपराधिक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

  • Varnan Live Report.

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