संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा ने लिया टूटे तटबंधों जायजा

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सीतामढ़ी : संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा सीतामढ़ी की टीम ने बागमती की बाढ़ से परसा में टूटे तथा पूर्व से चार जगहों मे टूटे तटबंधों व नेपाल से भारतीय सीमा तक पहुंचे बागमती के वाये तटबंध की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने जान-माल की तबाही का मुआयना इलाके में दौरे के क्रम में किया। टीम में मोर्चा के संयोजक डा. आनन्द किशोर, मोर्चा उपाध्यक्ष तथा मेजरगंज प्रखण्ड मुखिया संघ के अध्यक्ष चन्देश्वर नारायण सिंह मोर्चा नेता संजीव कुमार चौधरी, मेजरगंज प्रखण्ड जदयू के अध्यक्ष राघवेन्द्र कुमार, स्थानीय अशरफ अंसारी, रामबाबू प्रसाद, साबिर रहबर शामिल थे। टीम ने पाया परसा तथा बरियारपुर (हरपुर) के बीच करीब 300 मीटर में तटबंध टूटा हुआ है और दस एकड़ में जल-जमाव तथा पांच एकड़ खेत मे बालू भरा हुआ है। इसी तरह मेजरगंज प्रखण्ड के श्री नगर (बसबीट्टा) में दो जगह तथा मरपा सिरपाल मे एक जगह तीनों मिलाकर यहां भी करीब तीन सौ मीटर में तटबंध 1993 से ही टूटा हुआ है और उन सभी खुले तटबंध से जब जब बाढ आती है तो मेजरगंज, सुप्पी, रीगा, बथनाहा, सीतामढी शहर, बेलसण्ड, डुमरा तथा रून्नीसैदपुर प्रखण्डों के बडे इलाको में मानव जीवन, पशुधन, फसलों तथा सरकारी गैर-सरकारी संपत्ति की भारी बर्बादी होती है। मोर्चा की टीम ने नेपाल से भारतीय सीमा तक आये बागमती के वाये तटबंध का भी मुआयना किया, जो करीब 15 फुट उंची है तथा ग्रेवेल से सड़कें बनी हुई है। वह नेपाल के सेढवा तथा छनकी गाव के समीप तक है। नेपाल से आने वाली बाढ़ का पानी इसी जगह से रूसुलपुर, छनकी तथा दक्षिण परसा गांव तक होकर भारतीय क्षेत्र में तीव्र वेग से बढ़ता तथा तहस-नहस मचाता है।
स्थानीय ग्रामीणों ने टीम को बताया कि नेपाल से आने वाले तटबंध को भारतीय क्षेत्र के जमला गांव के समीप चार किलोमीटर में जोड़ दिया जाए तो भारतीय क्षेत्र की तबाही दूर हो जायगी तथा तटबंध के बाहर के रूसुलपुर, छनकी, रघुनाथपुर, सिजुआ, विशंभरपुर, ननकार तथा अन्य छोटे गावों के विस्थापन की समस्या का भी समाधान हो जायगा तथा सभी गांव सुरक्षित हो जाएंगे। पुराने तटबंध को बांधने की भी जरूरत नहीं होगी। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि नेपाल में बने 15 फुट उंची तटबंध की ही तरह भारतीय तटबंध की उचाई कम कर देने से बाढ़ के समय उपजाऊ मिट्टी वाला पानी किसानों के खेत को मिलेगा तथा जानमाल का खतरा घटेगा। मोर्चा अपने स्थापना दिवस पर एक अप्रैल को किसान महापंचायत से निर्णय लेकर इन सवालों पर समाहर्ता से वार्ता करने का निर्णय लिया। मोर्चा सीएम से भी इस संबंंध में वार्ता के लिये समय मांगेगा।

  • Varnan Live.

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