गवई बराज परियोजना : खतरे में Dream Project

0
553

दीपक कुमार झा –
बोकारो :
जिले की महत्वाकांक्षी व बहुप्रतीक्षित गवई बराज परियोजना के जरिये चंदनकियारी और आस-पास के इलाके में कृषि-क्रांति लाने को लेकर जहां क्षेत्र के विधायक व राज्य सरकार के मंत्री अमर कुमार बाउरी बेचैन और व्याकुल हैं, वहीं ढुलमुल कार्य-प्रणाली के सहारे कच्छप गति चल रहे काम ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट के सपने सवाल खड़े कर दिये हैं।

54 गांवों की 4636 हेक्टेयर जमीन को सिंचित करने वाली यह परियोजना विभागीय लापरवाही का शिकार हो अब तक लटकी पड़ी है। जाहिर है, इस साल भी 130 करोड़ रुपये की यह योजना पूरी नहीं होने वाली। हम ही नहीं, खुद इस कार्य को करने वाले ठेकेदार का भी अनुमान है कि वर्ष 2020 तक यह प्रोजेक्ट पूरा हो सकता है। आपको बता दें कि क्षेत्र के नेताओं के लिए महज नेताओं के वोट बैंक का जरिया बनी गवई बराज परियोजना रघुवर सरकार में अंतत: शुरू तो हुई, लेकिन लगभग तीन साल बाद भी यह योजना किसानों के लिए सिर्फ खयाली पुलाव ही बनी रह गयी। मालूम हो कि मुख्यमंत्री रघुवर दास ने खुद 18 दिसम्बर, 2016 को इस परियोजना का आॅनलाइन शिलान्यास किया था।
वर्ष 2016 के ही फरवरी माह में राज्य के तत्कालीन जल संसाधन, पेयजल तथा स्वच्छता मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने बोकारो जिले के चास प्रखण्ड अन्तर्गत केन्दुआडीह गांव के समीप गवई नदी पर निर्मित गवई बराज योजना के पुनरुद्वार कार्य को पूरा करने के लिए 13054.40 लाख रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी थी। पुनरुद्धार का काम पूरा हो जाने पर इस योजना से खरीफ में 4636 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई क्षमता पुनर्बहाल हो सकेगी। इस पुरानी योजना की बांयी व दांयी मुख्य नहर में सिल्ट जमा होने और विभिन्न संरचनाओं के क्षतिग्रस्त होने की वजह से सिंचाई क्षमता घटकर 120 हेक्टेयर पर आ गयी थी। लंबे समय से इस योजना के पुनरुद्धार की मांग की जा रही थी। इस कार्य के तहत सभी 12 गेटों को दुरुस्त, क्षतिग्रस्त एफलक्स बांध का निर्माण, बराज के डाउन स्ट्रीम में लिप प्रोटेक्शन, नहरों की तल सफाई, तटबंधों का सुदृढ़ीकरण, बांयी मुख्य नहर में 68 आउटलेट व दांयी मुख्य नहर में 21 आउटलेट का पुनर्निमाण करने आदि सहित कई कामों को पूरा किया जाना है। इसके पूरा हो जाने से चास एवं चन्दनकियारी प्रखण्ड अन्तर्गत सभी गांवों के करीब एक लाख बीस हजार ग्रामीणों को सिंचाई सुविधा का लाभ प्राप्त हो सकेगा। लेकिन, अफसोस यह कि आज भी यह योजना बस उम्मीद ही बनी है। गवई बराज से निकली नहर से इस साल भी चास व चंदनकियारी के किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलेगा। बता दें कि इस महत्वाकांक्षी योजना को जून 2018 में पूरा करना था, लेकिन अभी तक यह अधूरी है। ठेकेदार ने इस काम के लिए टाइम एक्सटेंशन करने के लिए विभाग में आवेदन दिया है, लेकिन अवधि विस्तार नहीं हुई। फिर भी काम जारी है। विभाग के जिला स्तर के अधिकारियों और ठेकेदार को उम्मीद है कि जून 2020 तक का समय मिलेगा। इस दौरान काम पूरा हो जाएगा। सूत्रों के अनुसार सरकार इस काम के अवधि विस्तार के साथ ही राशि भी बढ़ा सकती है, क्योंकि दो साल की अवधि-विस्तार के साथ ही मैटेरियल कॉस्ट भी बढ़ेगा। इस योजना के पूर्ण होने पर चास और चंदनकियारी के 54 गांवों की 4636 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी।

85 किलोमीटर है नहर की लंबाई
इस योजना के तहत गवई नदी पर बने डैम और नहर का जीर्णोद्धार होना है। करीब चार दशक पहले बने गवई बराज की तकनीकी खामियों के कारण पूरी नहर में कभी पानी नहीं बहा। 10-15 किमी तक पानी बहने के बाद नहर सूखी ही रहती थी। इस योजना की स्वीकृति के बाद किसानों को उम्मीद है कि उनके खेतों को पानी मिलेगा। गवई बराज से दो नहरें निकाली गई हैं। एक की लंबाई 44.4 किमी और दूसरी की 10.5 किमी है। इसके अलावा दोनों नहरों से कई गांवों में निकली छोटी-छोटी नहरें 30 किमी लंबी हैं। अभी तक करीब 50 प्रतिशत ही काम हुआ है। कई जगह नहर में रैयतों के विवाद के कारण काम अटका पड़ा है, वहीं डैम में भी काम अधूरा है। डैम के सभी 12 गेटों की मरम्मत होनी है।

2012 में आयी बाढ़ में टूट गया था गवई बराज
चास प्रखंड के केंदाडीह गांव के पास गवई नदी पर यह बराज है। वर्ष 2012 में आयी बाढ में डैम टूट गया था। इसकी वजह से नहर में पानी नहीं जा रहा था। हालांकि डैम ठीक-ठाक रहने के दौरान भी 10 कि.मी. से ज्यादा पानी नहीं बहता था, लेकिन डैम टूटने से आसपास के किसानों के खेतों में भी पानी नहीं जा रहा था। कई साल तक किसानों द्वारा लगातार मांग किए जाने पर सरकार ने स्थानीय विधायक व मंत्री अमर बाउरी की पहल पर 2016 में इस योजना के जीर्णोद्धार को मंजूरी दी थी। इससे योजना के तहत बराज के सभी 12 गेटों का पुनरुद्धार होगा। क्षतिग्रस्त बांध का निर्माण होगा और करीब 85 किमी नहर को दोबारा बनाया जा रहा है।

कई गांवों के किसान डैम पर हैं निर्भर
गवाई बराज और नहर किनारे बसे चास प्रखंड के आमाडीह, ओबरा, पिंड्राजोरा, केलियाडाबर, टुपरा, अलगडीह, विश्वनाथडीह, तुरीडीह, पुंडरू, सीमाबाद सहित कई गांवों के किसान नहर के पानी पर निर्भर हैं। यह नहर चंदनकियारी प्रखंड के चंद्रा, चमड़ाबाद, सुतरीबेड़ा, चंदनकियारी, गलगलटांड़, रांगामटिया होते हुए सिमुलिया तक गई है। इस नहर के बन जाने से हजारों एकड़ में फैले खेतों की सिंचाई में सुविधा होगी। डैम टूटने के बाद डैम और नहर में पानी नहीं है। डैम और नहर के निर्माण की स्थिति देख क्षेत्र के किसान चिंतित हैं कि इस साल भी वे खेती के लिए वर्षा पर ही निर्भर रहेंगे।

बनने से पहले ही हुई दुर्दशा
विडम्बना यह है कि निर्माण-कार्य विगत जून महीने से ही लगातार बन्द पड़ा हुआ है और फिर इसकी सुध किसी ने नहीं ली। चंदनकियारी के विधायक और राज्य सरकार के मंत्री अमर बाउरी जहां इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बता रहे, वहीं बोकारो के विधायक बिरंची नारायण इसे अपने प्रयासों का परिणाम बता रहे है। आज जब गवई बराज बनने से पूर्व ही जहां-तहां से टूटने लगा है तो आगे क्या हालात होंगे, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

सुपरवाइजर को कुछ नहीं मालूम
आश्चर्य की बात तो यह है कि इस काम से जुड़े सुपरवाइजर को इस योजना की लागत, इसकी निमार्णावधि, इसके लाभ आदि मूलभूत बातों तक की कोई भी जानकारी नहीं है। मीडियाकर्मियों से बातचीत में सुपरवाइजर ने इस बारे में कुछ भी बता पाने में अपनी लाचारी और असमर्थता जाहिर की। इतना जरूर बताया कि इसका निर्माण जमशेदपुर की कोई कंपनी कर रही है।

किसानों को कोई फायदा नहीं
कृषक चंद्रमुनि महतो और नीलकमल ने एक बातचीत में कहा कि गवई बराज योजना से आज क्षेत्र के किसानों को कोई भी लाभ नहीं मिला पा रहा है। कम बारिश के कारण फसलों को काफी नुकसान हुआ है और ऊपर से यह योजना आज तक बस हाथी का दांत ही साबित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले पानी आता भी था, लेकिन जब से बराज के निर्माण का कार्य शुरू हुआ, एक बूंद पानी भी उन्हें नहीं मिल सका। ऐसे में भला वे लोग अपनी फसलों को पानी कहां से दें, यह चिंता का विषय है।

‘अब और विलंब नहीं’
संबंधित अभियंता का कहना है कि काम में अब और विलम्ब नहीं होने दिया जाएगा। बरसात के कारण जुलाई महीने से काम बंद है। विलम्ब के कारण 130 करोड़ की यह योजना अब 148 करोड़ रुपये की हो चुकी है। जून 2020 तक अब काम के पूरा होने की उम्मीद है। विलंब का कारण मुख्यमंत्री द्वारा देर से उद्घाटन और बांध वाली भूमि पर बिजली विभाग द्वारा पोल गाड़ दिया जाना उन्होंने बताया।

  • Varnan Live.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.