Editorial- मोदी का ‘मिशन झारखंड’

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झारखंड की धरती एकबार पुन: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश को नयी योजनाओं की सौगात दिये जाने का गवाह बनी है। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को राजधानी रांची की धरती से देश के करोड़ों किसानों को पेंशन देने की प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना, करोड़ों दुकानदारों और स्वरोजगार करने वालों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना तथा 462 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय निर्माण योजना का शुभारंभ किया। साथ ही झारखंड के नवविर्मित विधानसभा भवन और साहेबगंज में नवनिर्मित मल्टी मॉडल बंदरगाह के टर्मिनल का उद्घाटन तथा नये झारखंड सचिवालय भवन का शिलान्यास भी किया। इससे पहले पिछले वर्ष सितम्बर माह में मोदी ने आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत भी झारखंड की धरती से ही की थी। देश के लोगों को उपर्युक्त नयी सौगात देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सरकार द्वारा किये गये कार्यों और उसकी उपलब्धियों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला और यह भी बताया कि झारखंड की धरती देश के गरीबों के लिए नयी परियोजनाओं का लॉंचिंग पैड है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को अपना मित्र बताते हुए राज्य सरकार के विकास कार्यों पर संतुष्टि जतायी और राज्य के नेतृत्व की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि नये भारत और नये झारखंड के निर्माण के लिए सबों को मिलकर काम करना है। साथ ही प्रदेशवासियों से आगे पांच साल में झारखंड में फिर विकास का डबल इंजन लगाने की अपील की। उल्लेखनीय है कि दो-तीन माह बाद झारखंड में विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में रांची की धरती से देश के लिए नयी योजनाओं की शुरुआत के साथ ही उनका उक्त कथन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मिशन झारखंड’ की एक कड़ी के रूप में देखा जा सकता है। दरअसल, साहेबगंज में गंगा बंदरगाह का सपना बहुत पुराना था। लेकिन, इसमें काफी समय लग गया। साहेबगंज में नवनिर्मित मल्टी मॉडल टर्मिनल प्रोजेक्ट झारखंड को देश ही नहीं, विदेश से भी जोड़ेगा और झारखंड में जल व्यापार मार्ग के एक नये युग की शुरुआत होगी। यह बंदरगाह वाराणसी और कोलकाता के बीच होगा और इसका सीधा सम्पर्क हल्दिया, फरक्का, इलाहाबाद और पटना से होगा। इसलिए यह व्यापार के एक बड़े केन्द्र के रूप में स्थापित हो सकता है। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने ही अप्रैल, 2017 में साहेबगंज मल्टी मॉडल टर्मिनल की आधारशिला रखी थी, जिसका निर्माण लगभग दो साल की रिकॉर्ड अवधि में 290 करोड़ रुपये की लागत से हुआ है। अब यह बिहार और झारखंड के उद्योगों के लिए वैश्विक बाजार का मार्ग खोलेगा और जल मार्ग के जरिये भारत-नेपाल कार्गो कनेक्टिविटी सुलभ करायेगा। साहेबगंज अब नदी-समुद्र मार्ग से बांग्लादेश होते हुए पूर्वोत्तर के राज्यों से भी जुड़ जायेगा। साहेबगंज में गंगा पर एक बड़े पुल का निर्माण भी हो रहा है। इस पुल के बन जाने से संतालपरगना से बिहार के विभिन्न जिलों की दूरी घट जाएगी और जिस सफर में अभी आठ घंटे लगते हैं, वह महज एक घंटे में तय की जा सकेगी। इस प्रकार ये नयी परियोजनाएं झारखंड के लिए निश्चय ही लाभकारी साबित होंगी।

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