आर.बी. आई ने रेपो रेट घटाया- किसे हुआ फ़ायदा, किसे हुआ नुकसान ?

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भारतीय रिजर्व बैंक के मौनीटरी पौलिसी समिति के 04 -अक्टूबर को घोषित नयी मुद्रा नीति मे रेपो (repo) दर मे 0.25 फ़ीसदी की कमी लाने का ऐलान किया है। केन्द्रीय बैंक ने 2019 में लगातार पाँचवी बार इस नीतिगत ब्याज-दर मे कमी की है | इस घोषणा के बाद अब रेपोदर 5.15 फ़ीसदी रह गयी है। वहीं रिवर्स रेपो दर 4.90 फ़ीसदी हो गयी है । इस वर्ष फरवरी 2019 से रिजर्व बैंक रेपो रेट मे 1.35 फ़ीसदी कटौती कर चुका है | अगस्त 2019 में मॉनिटरी पॉलिसीसमिति ने 0.35 प्रतिशत की कटौती की थी |

रेपोरेट वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक कमर्शियल बैंको को ऋण देता है, जबकि रिवर्स रेपो रेट वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक अन्य बैंको से ऋण लेता है । ये लेनदारी और देनदारी रिजर्व बैंक एवं अन्य कमर्शियल बैंक अपनी आवश्यकतानुसार किया करते हैं ।
रिसेर्वे बैंक की इस घोषणा के बाद लोन और ज्यादा सस्ते हो जाएँगे । नए ग्राहकों को अब और सस्ती दरों पर लोन मिल सकेगा| मौजूदा ग्राहक जिनहोने फ़्लोटिंग दर पर लोन लिया हुआ है उनको इसका लाभ अगले ब्याज-दर रीसेट साइकल के बाद ही मिल पाएगा।

रेपो रेट के कम होने से बैंक मे जमा राशि पर ग्राहकों को मिलने वाले ब्याज दर भी कम हो जाता है । इसका सीधा असर वरिष्ठ नागरिकों( senior citizens) और उन सभी लोगों पर ज्यादा पड़ेगा जो अपने जीवनयापन के लिए फ़िक्स्ड -डिपॉज़िट (fixed-deposit) पर निर्भर हैं। हालांकि मौजूदा मंहगाई-दर मे गिरावट उनके घाव पर मरहम का काम कर सकती है |

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