चंदनकियारी में अमर बाउरी व उमाकांत रजक के बीच सीधा मुकाबला

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Amar Bauri and Umakanat Rajak

संजय भारद्वाज
चंदनकियारी :
भाजपा-आजसू पार्टी का गठबंधन टूटने और इन दोनों दलों द्वारा अपने उम्मीदवारों की घोषणा किये जाने के साथ ही यह तय हो गया है कि चंदनकियारी विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी एवं राज्य सरकार के मंत्री अमर कुमार बाउरी और आजसू पार्टी के प्रत्याशी व पूर्व मंत्री उमाकांत रजक के बीच सीधा मुकाबला होगा। हालांकि, कांग्रेस-झामुमो-राजद के महागठबंधन और झाविमो ने अभी तक यहां अपने पत्ते नहीं खोले हैं। अगर इन दलों ने भी यहां से अपने उम्मीदवार उतार दिये तो स्थिति में छोड़ा-बहुत बदलाव भी आ सकता है।

रजक और बाउरी के बीच होगी वर्चस्व की लड़ाई
चंदनकियारी में भाजपा और आजसू के बीच गठबंधन टूटने की एक खास वजह यह भी है कि पिछले विधानसभा चुनाव परिणाम के साथ ही अमर और उमाकांत के बीच वैमनस्यता कायम रही। कारण यह है इस क्षेत्र में दोनों ही एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे हैं। वर्ष 2009 के चुनाव में उमाकांत रजक ने अमर बाउरी से महज लगभग तीन हजार मतों से जीत हासिल की थी। जबकि वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में झाविमो प्रत्याशी के रूप में अमर बाउरी ने आजसू के उमाकांत रजक को लगभग 31 हजार मतों के अन्तर से पराजित किया। चुनाव जीतने के बाद अमर बाउरी भाजपा में चले गये और उन्हें राज्य सरकार में मंत्री बनाया गया। इसके बाद से ही उमाकांत रजक अमर बाउरी के खिलाफ मुखर रहे। आरोप तो यहां तक है कि गठबंधन में रहते हुए भी विगत लोकसभा के चुनाव में श्री रजक ने धनबाद से भाजपा के सांसद उम्मीदवार पशुपति नाथ सिंह का साथ न देकर कांग्रेस उम्मीदवार की मदद की। लिहाजा भाजपा के साथ उनकी आंतरिक दूरी बनी रही। अब विधानसभा चुनाव में भाजपा और आजसू अलग-अलग मैदान में है। ऐसी स्थिति में दोनों ही उम्मीदवारों के बीच वर्चस्व की लड़ाई होना भी स्वाभाविक है। 

एक-दूसरे को पछाड़ने की बनने लगी रणनीति
गठबंधन टूटने की घोषणा के साथ ही क्षेत्र में एक-दूसरे को इस चुनावी दंगल में पछाड़ने की रणनीति भी बनने लगी है। भाजपा उम्मीदवार अमर बाउरी जहां पिछले पांच साल के दौरान मंत्री के रूप में क्षेत्र में किये गये विकास कार्यों और सरकार की उपलब्धियों के बारे में लोगों बता रहे हैं तो दूसरी ओर उमाकांत रजक हाल के दिनों तक सरकार में साझेदारी रहने के बावजूद उन्हें आईना दिखाते हुए उनके कार्यकाल की उपलब्धियों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। 

विकास की गति को आगे बढ़ाना है : बाउरी
भाजपा की ओर से प्रत्याशी बनाये जाने की घोषणा के बाद प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मंत्री अमर बाउरी ने कहा कि पार्टी ने मुझ पर विश्वास करते हुए मुझे चंदनकियारी की जनता को सुपुर्द किया है। 2014 से जो विकास की गाड़ी चली, उसकी गति को अब आगे बढ़ाने की जिम्मेवारी क्षेत्र की जनता को है। चंदनकियारी को समृद्ध, खुशहाल और एक ‘मॉडल चंदनकियारी’ बनाना है। उन्होंने कहा कि भाजपा ही एकमात्र ऐसी राष्ट्रीय पार्टी है, जो विकास की राजनीति करती है। आने वाले चुनाव में जनता को कमल पर मोहर लगाकर भाजपा को विजयी बनाना है। उन्होंने कहा कि आज चंदनक्यारी में सड़कों का जाल बिछ गया है, घर-घर बिजली पहुंची, कौशल विकास केन्द्र, नहर निर्माण का कार्य, भैरवनाथ महोत्सव के जरिये चंदनकियारी को राष्ट्रीय मानचित्र पर लाना, शिक्षा का विकास, सरकारी योजनाओं को गांव-गांव पहुंचाना आदि जो भी विकास के काम हैं, वे सब भाजपा के कार्यकाल में हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस बार भाजपा अकेले ही 65 से अधिक सीटों पर विजय प्राप्त कर झारखंड की जनता को फिर से एक स्थाई सरकार देगी।

प्रतियोगिता में आउट होगी भाजपा : रजक
उधर, आजसू पार्टी के उम्मीदवार उमाकांत रजक ने कहा इस राजनीतिक प्रतियोगिता में भाजपा का आउट होना निश्चित है। उन्होंने कहा पिछले 5 सालों में भाजपा ने कोई भी ऐसा विकास कार्य नहीं किया, जिसे सराहा जा सके। भाजपा की हर बात, हर ऐलान, हर वादा खोखला निकला। चंदनकियारी में बड़े-बड़े ढोल बजे। जैसे फूड पार्क आ रहा है, सीमेंट प्लांट बन रहा है, पावर प्लांट बन रहा है, रेलवे की फैक्ट्री लगेगी और न जाने क्या-क्या। असलियत में सब मुंगेरीलाल के सपने बनकर रह गये। जनता सब जानती है। इस बार के चुनाव में जनता को आजसू पर ही भरोसा है।

मैदान में 30 वर्षों के बाद उतरी भाजपा
1990 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा लगभग 30 वर्षों के बाद चंदनकियारी में चुनाव मैदान में उतरी है। 1990 में गौर हरिजन भाजपा से पहली बार चुनाव लड़कर जीते थे। इसके बाद वे 1995 के चुनाव में समरेश सिंह के सम्पूर्ण क्रांति दल से बैलगाड़ी चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़े और जीते। वहीं भाजपा के उम्मीदवार दपु दास का नामांकन ही रद्द हो गया था। इसके बाद वर्ष 2000 व 2005 के चुनाव में गठबंधन के तहत जद (यू) से क्रमश: गौर चन्द्र बाउरी व हारू रजवार चुनाव लड़कर हारे। वहीं 2009 एवं 2014 के चुनाव में गठबंधन के तहत आजसू के उमाकांत प्रत्याशी बनकर उतरे थे, जिसमे 2009 में आजसू के उमाकांत जीते एवं 2014 में गठबंधन के उम्मीदवार उमाकांत को जेवीएम के अमर बाउरी ने हराया। अब 30 वर्षों बाद भाजपा ने टिकट देकर पार्टी प्रत्याशी के तौर पर अमर बाउरी को उतारा है।

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