बच्चों का स्वर्णिम भविष्य बनाने में शिक्षकों की भूमिका अहम : होरो

0
460
कार्यक्रम प्रस्तुत करतीं बच्चियां।
संवाददाता
जरीडीह (बोकारो)  : बालीडीह स्थित होली क्रॉस बाल निकेतन स्कूल में गुरुवार को 38वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर नर्सरी, एलकेजी व यूकेजी के छोटे-छोटे बच्चे ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि बालीडीह के फादर विजय होरो ने किया। रंगारंग प्रस्तुतियों में बच्चों ने कव्वाली, जुबि-डुबि, पंजाबी, हरियाणवी गीतों पर नृत्य पेश किए। बच्चों के द्वारा प्रभु यीशु के जन्म पर आधारित नाटक भी प्रस्तुत किया। इस दौरान अतिथि फादर विजय होरो ने कहा कि बच्चे स्कूल की शोभा बढ़ाते हैं। वे अपने समाज, राज्य एवं देश का भविष्य होते हैं। माता-पिता को बच्चों का पहला शिक्षक माना जाता है, जो बच्चों को स्कूल जाना सिखाते है। बच्चों के स्वर्णिम भविष्य को कैसे सुधारा एवं संवारा जाए, उसमें शिक्षकों की अहम भूमिका होती है। शिक्षक और शिष्य का रिश्ता पवित्र होता है। स्कूल की प्राचार्य सिस्टर केविन ने कहा कि बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ ऐसे कार्यक्रमों में भाग जरूर लेना चाहिए। इससे उनका मनोबल बढ़ता है। मंच संचालन शिक्षिका गीता व एलिन ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मिस गुलाब, लिली, फांस्ता, कांता, रुथ, सुमन, सुजाता, एलिन, नूतन, कंचन, सावित्री, सीमा, एनी पीटर, गीता, शांति, बज्जू, स्वीटी का सराहनीय योगदान रहा।
– Varnan Live Report.
Previous articleशीतलहर बरपा रहा कहर, बोकारो में सर्द हवाओं ने बढ़ाई कनकनी
Next articleबच्चों में पोषण की गड़बड़ी विकारों का कारण : डा. मनीष
मिथिला वर्णन (Mithila Varnan) : स्वच्छ पत्रकारिता, स्वस्थ पत्रकारिता'! DAVP मान्यता-प्राप्त झारखंड-बिहार का अतिलोकप्रिय हिन्दी साप्ताहिक अब न्यूज-पोर्टल के अवतार में भी नियमित अपडेट रहने के लिये जुड़े रहें हमारे साथ- facebook.com/mithilavarnan twitter.com/mithila_varnan ---------------------------------------------------- 'स्वच्छ पत्रकारिता, स्वस्थ पत्रकारिता', यही है हमारा लक्ष्य। इसी उद्देश्य को लेकर वर्ष 1985 में मिथिलांचल के गर्भ-गृह जगतजननी माँ जानकी की जन्मभूमि सीतामढ़ी की कोख से निकला था आपका यह लोकप्रिय हिन्दी साप्ताहिक 'मिथिला वर्णन'। उन दिनों अखण्ड बिहार में इस अख़बार ने साप्ताहिक के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनायी। कालान्तर में बिहार का विभाजन हुआ। रत्नगर्भा धरती झारखण्ड को अलग पहचान मिली। पर 'मिथिला वर्णन' न सिर्फ मिथिला और बिहार का, बल्कि झारखण्ड का भी प्रतिनिधित्व करता रहा। समय बदला, परिस्थितियां बदलीं। अन्तर सिर्फ यह हुआ कि हमारा मुख्यालय बदल गया। लेकिन एशिया महादेश में सबसे बड़े इस्पात कारखाने को अपनी गोद में समेटे झारखण्ड की धरती बोकारो इस्पात नगर से प्रकाशित यह साप्ताहिक शहर और गाँव के लोगों की आवाज बनकर आज भी 'स्वच्छ और स्वस्थ पत्रकारिता' के क्षेत्र में निरन्तर गतिशील है। संचार क्रांति के इस युग में आज यह अख़बार 'फेसबुक', 'ट्वीटर' और उसके बाद 'वेबसाइट' पर भी उपलब्ध है। हमें उम्मीद है कि अपने सुधी पाठकों और शुभेच्छुओं के सहयोग से यह अखबार आगे और भी प्रगतिशील होता रहेगा। एकबार हम अपने सहयोगियों के प्रति पुनः आभार प्रकट करते हैं, जिन्होंने हमें इस मुकाम तक पहुँचाने में अपना विशेष योगदान दिया है।

Leave a Reply