#Corona Research मामले में बोकारो से मिल सकती है बड़ी उपलब्धि, जानिए कैसे…

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(Symbolic image, source- google images)

Expert View : बोकारो स्टील सिटी कॉलेज के Biotech Lab में मौजूद हैं उन्नत संसाधन

डॉ. केके मिश्रा
भूतपूर्व विभागाध्यक्ष एवं को-आॅर्डिनिटर
बायोटेक्नोलॉजी विभाग (बोकारो स्टील सिटी कॉलेज)।

बोकारो : प्राणघातक महामारी का कारक बने कोरोनावायरस के खात्मे को लेकर दुनियां भर में शोध पर शोध किए जा रहे हैं। कैसे इसके इलाज की कारगर वैक्सीन बने, इस पर विश्वभर के वैज्ञानिक लगातार काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में अगर झारखंड सरकार ध्यान देती है इस प्रदेश की इस्पातनगरी और अब कोरोना शून्य हो चुके बोकारो में इस पर काम किया जा सकता है। न केवल शोध, बल्कि एक बड़ी उपलब्धि भी हासिल की जा सकती है। बोकारो स्टील सिटी कॉलेज में स्थापित बायोटेक्नोलॉजी विभाग इस कार्य में पूर्ण रूप से सक्षम है। कोरोनावायरस किट की मंजूरी मिलने के बाद उसे पूर्ण प्रयोगशाला के रूप में व्यवहार में लाया जा सकता है। यहां पर पीसीआर (पॉलीमर आई चेन रिएक्शन) उपकरण, लैमिनार फ्लो उपकरण तथा एयर टाइट लैबोरेट्री सरीखे वैसे उपकरण हैं, जिन्हें एलिवेट किया जा सकता है। बायोटेक्नोलॉजी तथा बायोकेमिस्ट्री मेडिकल साइंस की रीढ़ है। किसी भी प्रकार की मेडिसिन का खोज तथा वैक्सीन बनाने का काम बायोटेक का ही है। यदि झारखंड सरकार इस ओर ध्यान देती है तो बोकारो के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि हो सकती है।

वायरस न सजीव, न निर्जीव

सामान्यतया वायरस बिना कोशिका के होते हैं। वायरस न्यूक्लियोप्रोटीन का बना होता है। इसमें न्यूक्लियस साइटोप्लाज्मा सेलमेंब्रेन नहीं होते हैं। इसके पार्टिकल में एक ही प्रकार के जेनेटिक मैटेरियल पाए जाते हैं। या तो डीएनए पाए जाते हैं या आरएनए पाए जाते हैं। मनुष्य में या अन्य प्राणी में डीएनए तथा आरएनए दोनों पाए जाते हैं (कुछ अपवाद को छोड़कर), लेकिन वायरस में सिर्फ एक ही प्रकार के न्यूक्लिक एसिड पाए जाते हैं। वायरस अपना मेटाबॉलिज्म बिना किसी होस्ट के पूरा नहीं कर सकता, क्योंकि वायरस ए सेल्यूलर (अकोशिकीय) है। उसमें न्यूक्लिक एसिड सिर्फ एक ही प्रकार के होते हैं, इसलिए यह अपना जीवन चक्र (मल्टीप्लिकेशन) होस्ट की मशीनरी के ऊपर निर्भर करता है। इसलिए यह न जीवित है और न ही निर्जीव। दोनों के बीच इंटरमीडिएट के अंतर्गत ये आते हैं। यही वजह है कि इलेक्ट्रॉन माइक्रोग्राफ से ही इसके रवादा (क्रिस्टल) को पहचाना जाता है। इसमें दो मुख्य भाग होते हैं, न्यूक्लिक एसिड तथा प्रोटीन। इसमें मुख्य रूप से न्यूक्लिक एसिड के चारों ओर प्रोटीन का एक घेरा होता है, जिसे कैप्सिड कहते हैं। वायरस आॅब्लिगेट एक्सट्रेसेल्यूलर पार्टिकल्स है। इसमें मेटाबोलिक एंजाइम्स नहीं पाए जाते हैं, इसलिए बिना होस्ट के यह प्रोटीन नहीं बना पाता है।

गरम पेय है काफी कारगर, खत्म करते हैं कैप्सिड लेयर

जहां तक कोविड-19 के बारे में विभिन्न वैज्ञानिकों का मत है कि जैसे ही कैप्सिड लेयर खत्म होगा, वैसे ही वायरस अपने आप खत्म हो जाएगा। इसमें गरम पेय हमारे लिए काफी लाभप्रद और कारगर साबित हो सकता है। इसके लिए गर्म पानी, गर्म कॉफी और गर्म चाय लेनी आवश्यक है, जिससे रेस्पिरेट्री सिस्टम को बाधा नहीं पहुंच सके।

Varnan Live EXCLUSIVE.

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