CM ने पूजा-अर्चना कर मांगा राज्य की खुशहाली का आशीर्वाद, कहा- प्रकृति के पुजारी हैं संताली

0
424

– कोरोना के कारण पहली बार लुगुबुरू घण्टाबाड़ी में सादगी से हुआ अंतरराष्ट्रीय धर्म महासम्मेलन

– विशाल अग्रवाल की रिपोर्ट

गोमिया (बोकारो)। गोमिया प्रखंड के ललपनिया स्थित लुगूबुरु घांटाबाडी धोरोमगाढ में आयोजित संतालियों के 20वें अंतर्राष्ट्रीय महाधर्म सम्मेलन के दूसरे दिन कार्तिक पूर्णिमा को राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आयोजन स्थल पर पहुंचे, जहां झामुमों कार्यकर्ताओं व आयोजन समिति ने हेलीपैड से भगवान बिरसा मुंडा प्रतिमा तक उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और तत्पश्चात उनका काफिला लुगूबुरु घांटाबाडी धोरोमगाढ स्थित पूजा स्थल पहुंचे। वहां उन्होंने परंपरागत तरीके से अपने आराध्य के समक्ष मत्था टेका और राज्य की सुरक्षा, समृद्धि व खुशहाली की कामना की।इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंडवासियों को कार्तिक पूर्णिमा की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लुगूबुरु घण्टा बाड़ी धोरोमगाढ़ आस्था का केन्द्र होने के साथ ही संताल आदिवासियों का एक पवित्र धर्मस्थल है। संताल समाज प्राकृति पर विश्वास करते हैं और वे प्रकृति के पुजारी हैं। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी संतालियों द्वारा यह पर्व मनाया जा रहा है, लेकिन कोरोना महामारी के चलते बाहर से लोग नहीं आ सके।   यह कार्यक्रम भव्य रूप से नहीं मनाया जा सका। आज गुरु पूर्णिमा भी है। गुरुनानक जी का 551वां जन्म दिवस मनाया जा रहा है। महामारी संक्रामण का जंग सभी लोग लड़ रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि लुगू बुरू घन्टाबाड़ी धोरोमगढ़ में आयोजित संतालियों के महाधर्म सम्मेलन में झारखंड के अलावा देश-विदेश के विभिन्न राज्यों से लाखों की संख्या में यहां पहुंचकर श्रद्धालुगण घन्टाबाड़ी मंदिर, लुगुपर्वत गुफा स्थित मन्दिर में विरजमान लुगुबाबा बोंगाओडांग व घंटाबाड़ी धोरोमगढ़ दरबार चटटानी स्थित मन्दिर में आदिवासी संस्कृति की परम्परा से पूजा-अर्चना करते हैं और लुगुबाबा व लुगू आयो के आगे माथा टेक अपने घर-परिवार की सुख-शान्ति एवं उन्नति की कामना करते हैं। श्रद्धालु करीब आठ किलोमीटर तक पैदल चढ़कर लुगुपर्वत गुफा स्थल पहुंचते है, जहां कतार में लग देवी देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं। मुख्यमंत्री को लुगू बुरुघन्टा बॉडी धरम गढ़ समिति के अध्यक्ष बबुली सोरेन, सचिव लोबिन मुर्मू के नेतृत्व में एक मांग पत्र सौंपा गया तथा संथाली रीति रिवाज के अनुसार उनका स्वागत किया गया। कोविड काल को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री सोरेन ने कार्यक्रम स्थल पर कोई मंच साझा नहीं किया और थोड़ी देर गेस्ट हाउस में विश्राम कर रांची के लिए रवाना हो गए। 

नहीं हो सका राजकीय महोत्सव

ज्ञात हो कि कोरोना के कारण उक्त कार्यक्रम के राजकीय महोत्सव के रूप में नहीं मनाने के व्यापक प्रचार-प्रसार के कारण यहां श्रद्धालुओं की उपस्थिति बहुत ही कम संख्या में रही। जबकि, प्रत्येक वर्ष यहां होने वाले संतालियों के इस अंतर्राष्ट्रीय महाधर्म सम्मेलन में आयोजन से पूर्व ही क्षेत्र संताली और गैर संतालीभाषी पर्यटकों सहित श्रद्धालुओं से सराबोर हो जाता था, जो इस बार कोविड की भेट चढ गया। हालांकि इसके बावजूद बंगाल, उड़ीसा, तेलंगाना से दर्जनों श्रद्धालुओं का जत्था ललपनिया पहुंचा, जिसमें शामिल श्रद्धालु छरछरिया झरना में स्नान कर सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार अपने आराध्य की परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना कर नीचे उतरे और वापस गंतव्य के लिए रवाना हो गये। 

श्रद्धालुओं की हुई कोरोना जांच

कार्यक्रम स्थल पर सक्रिय मेडिकल टीम द्वारा आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की कोविड जांच भी की जा रही थी, वहीं साज-सज्जा सहित एम्बुलेंस, फायरब्रिगेड वाहन मौके पर मौजूद रहे। मौके पर डीआईजी प्रभात कुमार, डीसी राजेश कुमार सिंह, एसपी चंदन कुमार झा, एसडीपीओ सतीश चन्द्र झा, गोमिया बीडीओ कपिल कुमार, सीओ ओमप्रकाश मंडल, इंस्पेक्टर सुजीत कुमार सहित विभिन्न थाना प्रभारियों ने विधि-व्यवस्था संभाल रखी थी। कार्यक्रम में बेरमो विधायक जयमंगल सिंह, पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद, बबीता देवी, टीटीपीएस एमडी अरविन्द कुमार सिन्हा भी मौजूद थे। कार्यक्रम के आयोजन में समिति के अध्यक्ष बाबुली सोरेन, उपाध्यक्ष बहाराम हांसदा, सचिव जयराम हांसदा, सहायक सचिव दशरथ मांझी, कोषाध्यक्ष सतीश चंद्र मुर्मू, रामचंद्र हांसदा, सुरेश मांझी, बुधन सोरेन, अंजन हेम्ब्रम, महेश मुर्मू, बालचंद बास्के, मंझला मुर्मू, सुरेश कुमार टुडू, आलोक हेम्ब्रम आदि की मुख्य भूमिका रही।

– Varnan Live Report.

Previous articleजाको राखे साईयां… ओवरब्रिज से 100 फुट नीचे बाइक समेत गिरा, फिर भी यूं बच गई जान
Next articleशहर के बीचोबीच अब मिल सकेगा लक्जरी आशियाना, विमला लग्जरिया अपार्टमेंट का हुआ भूमि पूजन
मिथिला वर्णन (Mithila Varnan) : स्वच्छ पत्रकारिता, स्वस्थ पत्रकारिता'! DAVP मान्यता-प्राप्त झारखंड-बिहार का अतिलोकप्रिय हिन्दी साप्ताहिक अब न्यूज-पोर्टल के अवतार में भी नियमित अपडेट रहने के लिये जुड़े रहें हमारे साथ- facebook.com/mithilavarnan twitter.com/mithila_varnan ---------------------------------------------------- 'स्वच्छ पत्रकारिता, स्वस्थ पत्रकारिता', यही है हमारा लक्ष्य। इसी उद्देश्य को लेकर वर्ष 1985 में मिथिलांचल के गर्भ-गृह जगतजननी माँ जानकी की जन्मभूमि सीतामढ़ी की कोख से निकला था आपका यह लोकप्रिय हिन्दी साप्ताहिक 'मिथिला वर्णन'। उन दिनों अखण्ड बिहार में इस अख़बार ने साप्ताहिक के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनायी। कालान्तर में बिहार का विभाजन हुआ। रत्नगर्भा धरती झारखण्ड को अलग पहचान मिली। पर 'मिथिला वर्णन' न सिर्फ मिथिला और बिहार का, बल्कि झारखण्ड का भी प्रतिनिधित्व करता रहा। समय बदला, परिस्थितियां बदलीं। अन्तर सिर्फ यह हुआ कि हमारा मुख्यालय बदल गया। लेकिन एशिया महादेश में सबसे बड़े इस्पात कारखाने को अपनी गोद में समेटे झारखण्ड की धरती बोकारो इस्पात नगर से प्रकाशित यह साप्ताहिक शहर और गाँव के लोगों की आवाज बनकर आज भी 'स्वच्छ और स्वस्थ पत्रकारिता' के क्षेत्र में निरन्तर गतिशील है। संचार क्रांति के इस युग में आज यह अख़बार 'फेसबुक', 'ट्वीटर' और उसके बाद 'वेबसाइट' पर भी उपलब्ध है। हमें उम्मीद है कि अपने सुधी पाठकों और शुभेच्छुओं के सहयोग से यह अखबार आगे और भी प्रगतिशील होता रहेगा। एकबार हम अपने सहयोगियों के प्रति पुनः आभार प्रकट करते हैं, जिन्होंने हमें इस मुकाम तक पहुँचाने में अपना विशेष योगदान दिया है।

Leave a Reply