RSS कार्यकर्ताओं ने पूजन के साथ लिया प्रकृति-रक्षा का संकल्प

0
276

बोकारो ः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), बोकारो महानगर की ओर से प्रकृति वंदन कार्यक्रम के तहत प्रकृति पूजा की गई। संघ के झारखंड प्रांत प्रचारक दिलीप ने अपने मार्गदर्शन में कहा कि हमारा विश्वास है कि सभी मनुष्य, सभी जीव यहां तक की पेड़ पौधे भी हमारे लिए पूजनीय हैं। मगर प्रकृति के दोहन से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ गया है, पेड़ पौधे की पूजा-अर्चना कर उसकी रक्षा करने का संकल्प लें। उन्होंने बताया कि पर्यावरण तभी सुरक्षित रहेगा, जब जल संरक्षण, प्लास्टिक-थर्मोकोल मुक्त एवं पेड़ पौधे युक्त धरती को बनाये रखने का संकल्प हम सभी लेंगे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ झारखंड प्रांत कार्यवाह संजय कुमार, सह क्षेत्र प्रचारक राम कुमार, क्षेत्र शारीरिक प्रमुख मनोज, प्रांत बौद्धिक प्रमुख ज्वाला तिवारी, प्रांत मार्ग प्रमुख अरविंद त्रिपाठी, प्रांत शारीरिक प्रमुख मोहन, धनबाद विभाग प्रचारक राजीव कान्त, देवघर विभाग प्रचारक गोपाल शर्मा, हजारीबाग विभाग प्रचारक कुणाल कुमार, साहेबगंज विभाग प्रचारक बीगेन्द्र, पलामू विभाग प्रचारक सत्य प्रकाश, रांची विभाग प्रचारक व्यापक, सह प्रचारक मंटू, गुमला विभाग प्रचारक अजय, जमशेदपुर विभाग प्रचारक आशुतोष, बोकारो महानगर प्रचारक शम्मी कुमार के साथ नरेन्द्र कुमार, पंकज कुमार, राजकुमार सिंह, रंजीत वरणवाल, धीरेन्द गोप, संजय कुमार, रतन, हरिओम एवं महानगर कार्यकारिणी के अलावे अनेकों स्वयंसेवक कार्यकर्ता उपस्थित थे

Previous articleदुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई…. मुकेश की याद की संगीत संध्या
Next articleआम इंसान के रूप में भगवान कृष्ण ने अधर्म का समूल नाश कर कैसे की शुद्ध धर्म की स्थापना, पढ़ें यह विशेष आलेख
मिथिला वर्णन (Mithila Varnan) : स्वच्छ पत्रकारिता, स्वस्थ पत्रकारिता'! DAVP मान्यता-प्राप्त झारखंड-बिहार का अतिलोकप्रिय हिन्दी साप्ताहिक अब न्यूज-पोर्टल के अवतार में भी नियमित अपडेट रहने के लिये जुड़े रहें हमारे साथ- facebook.com/mithilavarnan twitter.com/mithila_varnan ---------------------------------------------------- 'स्वच्छ पत्रकारिता, स्वस्थ पत्रकारिता', यही है हमारा लक्ष्य। इसी उद्देश्य को लेकर वर्ष 1985 में मिथिलांचल के गर्भ-गृह जगतजननी माँ जानकी की जन्मभूमि सीतामढ़ी की कोख से निकला था आपका यह लोकप्रिय हिन्दी साप्ताहिक 'मिथिला वर्णन'। उन दिनों अखण्ड बिहार में इस अख़बार ने साप्ताहिक के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनायी। कालान्तर में बिहार का विभाजन हुआ। रत्नगर्भा धरती झारखण्ड को अलग पहचान मिली। पर 'मिथिला वर्णन' न सिर्फ मिथिला और बिहार का, बल्कि झारखण्ड का भी प्रतिनिधित्व करता रहा। समय बदला, परिस्थितियां बदलीं। अन्तर सिर्फ यह हुआ कि हमारा मुख्यालय बदल गया। लेकिन एशिया महादेश में सबसे बड़े इस्पात कारखाने को अपनी गोद में समेटे झारखण्ड की धरती बोकारो इस्पात नगर से प्रकाशित यह साप्ताहिक शहर और गाँव के लोगों की आवाज बनकर आज भी 'स्वच्छ और स्वस्थ पत्रकारिता' के क्षेत्र में निरन्तर गतिशील है। संचार क्रांति के इस युग में आज यह अख़बार 'फेसबुक', 'ट्वीटर' और उसके बाद 'वेबसाइट' पर भी उपलब्ध है। हमें उम्मीद है कि अपने सुधी पाठकों और शुभेच्छुओं के सहयोग से यह अखबार आगे और भी प्रगतिशील होता रहेगा। एकबार हम अपने सहयोगियों के प्रति पुनः आभार प्रकट करते हैं, जिन्होंने हमें इस मुकाम तक पहुँचाने में अपना विशेष योगदान दिया है।

Leave a Reply