भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष मयंक का अचानक जागा “नीतीश-प्रेम”, जानिए क्यों

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BJP से इन वजहों से हुआ मोहभंग, 18 को थामेंगे JDU का दामन

बोकारो ः बोकारो जिला भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष मयंक सिंह अब भाजपा छोड़कर जनता दल यूनाइटेड में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि आगामी 18 अक्टूबर को वे रांची में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष खीरू महतो, प्रदेश प्रभारी प्रवीण सिंह एवं प्रदेश सह-प्रभारी भरत सिंह की उपस्थिति में जदयू में शामिल होने जा रहे हैं।

मयंक सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष, भाजयुमो, बोकारो।

झारखंड गया गर्त में और बिहार को मिली अच्छी छवि, इसलिए यहां भी मिले मौका

भाजपा से मोह-भंग होने का कारण पूछने पर मयंक ने कहा कि वर्ष 2000 में झारखंड अस्तित्व में आया और वर्ष 2005 में नीतीश कुमार जी बिहार की सरकार के मुखिया के तौर पर सामने आये। आज दोनों राज्यों को देखा जाय तो झारखंड आज तक गर्त में ही चला जा रहा है और नीतीश कुमार ने बिहार की एक अच्छी छवि बना दी है। जहां लोग जाना नहीं चाह रहे थे, आज वहां रहने के लिए लोग लालायित हैं, ऐसा बिहार बना दिया है। इसलिए झारखंड में भी नीतीश कुमार को एक मौका मिलना चाहिए। झारखंड को भी नीतीश कुमार ही सजा-संवार सकते हैं। झारखंड में हमने सभी पार्टियों को देख लिया।

‘आजकल दरबारी ही कहला रहे भाजपाई’

मयंक ने यह भी कहा कि बोकारो में भाजपा की स्थिति आज वही है, जो किसी खास नेता के यहां दरबार लगाये तो वही असली भाजपाई कहलायेगा। लेकिन, मैं उन लोगों में से नहीं हूं, जो किसी के यहां दरबार लगाये। पार्टी के जिला अध्यक्ष भरत यादव को भी उन्होंने कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि वे भी जिले में एक खास नेता के इशारे पर ही संगठन को चला रहे हैं। ऐसे में मेरे जैसे लोगों के लिए भाजपा में रहना कठिन है। श्री सिंह ने कहा कि इनके पहले जगरनाथ राम, विनोद महतो भी भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे, लेकिन उन्होंने संगठन को मजबूत करने का काम किया। उन लोगों ने जो काम कर दिया और मेरे भाजयुमो के जिलाध्यक्ष रहते हुए जो संगठन के जो काम हुए, वह जिले के लोगों ने भी देखा है। जबकि, आज भाजपा यहां कुछ खास लोगों की जेब का संगठन बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि बोकारो में भाजपा में एक नई परिपाटी बना दी गई है और जिला अध्यक्ष जी भी किसी खास नेता के ही इशारे पर चलते हैं।

कहा- भाजपा से नहीं, पार्टी को पॉकेट संगठन बनानेवालों से है ऐतराज, इसलिए अब बीजेपी में रहना कठिन

उन्होंने कहा कि उनका विरोध भाजपा संगठन से नहीं है, बल्कि पार्टी को पॉकेट संगठन बनाकर चलने वाले नेताओं से है। इन परिस्थिति में भाजपा में काम करना मेरे लिए कठिन है। इन परिस्थितियों में हमने यही निर्णय किया है कि जदयू के सर्वमान्य नेता नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में काम करें, ताकि जिस तरह आज बिहार का विकास हुआ है और पूरे देश में बिहार की जो छवि बनी है, वही छवि और वही स्थिति झारखंड की भी बने।

– Varnan Live Report.

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