निखिल पारदेश्वर महादेव मंदिर की जल्द बदलेगी सूरत

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सिद्धाश्रम साधक परिवार की बैठक में लिए गए कई निर्णय

बोकारो। नगर के सेक्टर- 12डी में आरवीएस इंटर कॉलेज के समीप स्थित निखिल पारदेश्वर महादेव मंदिर में मंदिर की संस्थापक संस्था सिद्धाश्रम साधक परिवार (निखिल मंत्र विज्ञान) की बैठक गुरुवार को हुई। संस्था के अध्यक्ष पीएन पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक के दौरान मंदिर के विकास, पुनरुद्धार और इसके निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा करने का खाका तैयार किया गया। उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने आपसी सहयोग से मंदिर परिसर में चहारदीवारी, जगमोहन और गर्भगृह के गुंबद निर्माण को जल्द से जल्द पूरा करने पर विचार-विमर्श किया। इसके अलावा मंदिर के पीछे साधना सभागार का निर्माण भी तेजी के साथ पूरा करने पर मंथन किया गया।

पारद शिवलिंग की पूजा से पूरी होती है हर मनोकामना : पांडेय

बैठक में अध्यक्ष पीएन पांडेय ने कहा कि बोकारो में पारदेश्वर महादेव शिवलिंग का मंदिर होना अपने-आप में किसी धरोहर से कम नहीं। पारद शिवलिंग का दर्शन अत्यंत दुर्लभ, चमत्कारी और सकारात्मक फलदायक माना जाता है। उन्होंने कहा कि इनके दर्शन मात्र से ही एक अलौकिक शांति मिलती है। जो भी सच्चे मन से यहां प्रार्थना करता है, प्रभु निखिल और महादेव उनकी मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं। बैठक का संचालन कर रहे संस्था के महासचिव विजय कुमार झा ने सभी सदस्यों से इस कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने की अपील की। बैठक में मुख्य रूप से आरवीएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पीएन सिंह सहित सिद्धाश्रम साधक परिवार के सदस्यों में डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह, जेलर सिंह, भोला सिंह, सुभाष कुमार, धर्मेंद्र कुमार, सुजीत सिंह, रमेश चंद्रा आदि उपस्थित रहे।

7 साल पहले समरेश सिंह की मदद से हुई थी स्थापना

बोकारो स्टील सिटी के सेक्टर-12 डी स्थित रणविजय कॉलेज से सटे विगत सात वर्ष पूर्व ‘निखिल पारदेश्वर महादेव’ मन्दिर की स्थापना झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री समरेश सिंह के सहयोग से की गई थी। इसमें भारतीय ज्योतिष, मंत्र-तंत्र एवं वैदिक संस्कृति की पुनर्स्थापना में अपना अमूल्य योगदान देने वाले तथा सैकड़ों ग्रंथों के लेखक डॉ नारायण दत्त श्रीमाली जी के द्वारा प्रदत्त 51 किलोग्राम के पारद शिवलिंग विराजमान हैं। पारद शिवलिंग की महत्ता अपने-आप में विशिष्टतम मानी जाती है और इन्हें मनोकामना लिंग भी माना जाता है। बोकारो-रामगढ़ राष्ट्रीय उच्च पथ एवं गरगा नदी के किनारे स्थापित इस मन्दिर को और अधिक भव्यता प्रदान करने हेतु अभी बहुत सारे कार्य अधूरे हैं।

– Varnan Live Report.

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