शरीर, मन और आत्मा को एकसूत्र में पिरोता है योग : गंगवार

0
112

डीपीएस बोकारो में योग दिवस पर विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सीखे स्वस्थ जीवन के गुर

बोकारो: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आठवां आयोजन 21 जून (मंगलवार) को दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो में सोल्लास किया गया। इस अवसर पर विद्यालय में अध्ययनरत हजारों बच्चों के साथ-साथ समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी एक साथ योगाभ्यास किए। सभी ने फिटनेस के लिए जमकर पसीने बहाए और स्वस्थ रहने के लिए नियमित योगाभ्यास का संकल्प लिया। क्या छोटा, क्या बड़ा, हर उम्र के, हर कक्षा के छात्र-छात्राओं ने पूरे मनोयोग के साथ योग और आसन का अभ्यास किया। विद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग के निर्देशन में छात्र-छात्राओं को सूर्य नमस्कार, भुजंगासन, ताड़ासन, मंडूकासन, वज्रासन, पद्मासन सहित भ्रामरी, अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भत्स्रिका सहित विभिन्न प्रकार के आसनों और प्राणायाम का अभ्यास कराया गया।

छोटे-छोटे बच्चों का अभ्यास करना विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा। नन्हीं-नन्हीं उंगलियों से अपनी नासिका को दबाकर कोई अनुलोम-विलोम कर रहा था, तो कोई कपालभाती। विभिन्न तरह के आसन और कसरतों में उनके लचकते हाथ-पैर कार्यक्रम की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे थे। बच्चों को मुरली की मधुर तान की पार्श्व ध्वनि के बीच ध्यान लगाने का प्रशिक्षण दिया गया। इस क्रम में कक्षा- 6 से 9 के विद्यार्थियों ने योगासन की विभिन्न मुद्राओं पर आधारित प्रस्तुति दी। वहीं, सेक्टर-5 स्थित विद्यालय के प्राइमरी विंग में बच्चों ने प्लेकार्ड्स, बैनर, क्लेआर्ट के जरिए योग दिवस पर अपनी रचनात्मकता का कौशल भी दिखाया।

     इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य ए.एस. गंगवार ने कहा कि योग ऋषि-मुनियों द्वारा प्रदत्त अद्वितीय वरदान और शरीर, मन व आत्मा को एकसूत्र में जोड़ने का विधान है, विज्ञान है। समस्त विश्व को दी गई भारतीय संस्कृति की यह अनमोल धरोहर और स्वस्थ मानव जीवन के लिए एक सफल औषधि है। इस बार योग दिवस की थीम ‘मानवता के लिए योग’ और कोरोनाकाल में किस प्रकार योग ने लोगों की पीड़ा कम की, इस पर भी उन्होंने प्रकाश डाला। कहा कि योग शारीरिक और मानसिक अनुशासन में संतुलन के साथ-साथ तनाव से मुक्ति, चिंता प्रबंधन और आत्मविश्वास विकसित करने का सशक्त माध्यम भी है। इसलिए, बच्चे नियमित योगाभ्यास की आदत अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास है और स्वस्थ मन में ही अच्छे और स्वच्छ विचार आते हैं। यही सफलता, प्रसन्नता और प्रगति दिलाने में सहायक हैं।

-Varnan Live Report.

Previous articleडीपीएस बोकारो के न्यूजलेटर ‘क्रॉनिकल्स’ और गृह पत्रिका ‘जेनिथ’ का विमोचन
Next articleनिर्धन बच्चों को मुफ्त हुनरमंद और स्वावलंबी बनाएगा DPS बोकारो, ‘Skill Hub’ का शुभारंभ
मिथिला वर्णन (Mithila Varnan) : स्वच्छ पत्रकारिता, स्वस्थ पत्रकारिता'! DAVP मान्यता-प्राप्त झारखंड-बिहार का अतिलोकप्रिय हिन्दी साप्ताहिक अब न्यूज-पोर्टल के अवतार में भी नियमित अपडेट रहने के लिये जुड़े रहें हमारे साथ- facebook.com/mithilavarnan twitter.com/mithila_varnan ---------------------------------------------------- 'स्वच्छ पत्रकारिता, स्वस्थ पत्रकारिता', यही है हमारा लक्ष्य। इसी उद्देश्य को लेकर वर्ष 1985 में मिथिलांचल के गर्भ-गृह जगतजननी माँ जानकी की जन्मभूमि सीतामढ़ी की कोख से निकला था आपका यह लोकप्रिय हिन्दी साप्ताहिक 'मिथिला वर्णन'। उन दिनों अखण्ड बिहार में इस अख़बार ने साप्ताहिक के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनायी। कालान्तर में बिहार का विभाजन हुआ। रत्नगर्भा धरती झारखण्ड को अलग पहचान मिली। पर 'मिथिला वर्णन' न सिर्फ मिथिला और बिहार का, बल्कि झारखण्ड का भी प्रतिनिधित्व करता रहा। समय बदला, परिस्थितियां बदलीं। अन्तर सिर्फ यह हुआ कि हमारा मुख्यालय बदल गया। लेकिन एशिया महादेश में सबसे बड़े इस्पात कारखाने को अपनी गोद में समेटे झारखण्ड की धरती बोकारो इस्पात नगर से प्रकाशित यह साप्ताहिक शहर और गाँव के लोगों की आवाज बनकर आज भी 'स्वच्छ और स्वस्थ पत्रकारिता' के क्षेत्र में निरन्तर गतिशील है। संचार क्रांति के इस युग में आज यह अख़बार 'फेसबुक', 'ट्वीटर' और उसके बाद 'वेबसाइट' पर भी उपलब्ध है। हमें उम्मीद है कि अपने सुधी पाठकों और शुभेच्छुओं के सहयोग से यह अखबार आगे और भी प्रगतिशील होता रहेगा। एकबार हम अपने सहयोगियों के प्रति पुनः आभार प्रकट करते हैं, जिन्होंने हमें इस मुकाम तक पहुँचाने में अपना विशेष योगदान दिया है।

Leave a Reply